

आज हर इंसान स्वस्थ जीवन की कामना करता है। लेकिन स्वस्थ जीवन जीने के लिए जिस पर्यावरण में निवास करता है उसकी रक्षा करना अपना फर्ज नहीं समझता।
पर्यावरण जिसमें हम निवास करते हैं, उसका संरक्षण मतलब अपनी जिंदगी की रक्षा करना। हमारा अच्छा स्वास्थ्य स्वच्छ पर्यावरण पर ही निर्भर करता है।
दिन प्रति दिन पर्यावरण संकट से संबंधित घटनाएं सामने आती हैं। कारण – प्रकृति की सार-संभाल न होना और इसके साथ छेड़छाड़ करना।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अगर आज मानव जीवन खतरे में है तो उसका मूल कारण पर्यावरण की उपेक्षा है।
इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) समूचे विश्व में मनाया जाता है।
हर साल विश्व पर्यावरण दिवस एक विषय पर आधारित होता है।
2025 में विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य विषय “प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त करें” है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे की वैश्विक समस्या को उजागर करना और इसके समाधान के लिए सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करना है।
यह अभियान संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में चलाया जा रहा है।
प्लास्टिक कचरा न केवल समुद्रों और भूमि को प्रदूषित करता है, बल्कि यह हमारे खाद्य और जल आपूर्ति में भी प्रवेश कर चुका है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
लोगों को प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, पुन: उपयोग करने और पुनर्चक्रण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
2022 में शुरू हुई एक वैश्विक संधि के तहत देशों ने एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते पर काम करना शुरू किया है।
दक्षिण कोरिया इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की वैश्विक मेज़बानी कर रहा है और प्लास्टिक कचरे को कम करने में अग्रणी है।
पर्यावरणविद् वीरल देसाई ने 5 जून से 7-दिवसीय वृक्षारोपण अभियान शुरू किया है।
उत्तर प्रदेश के 22,000 स्कूलों को प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ अभियान से जोड़ा गया है।
पूर्व तट रेलवे ने “प्लास्टिक मुक्त स्टेशन” अभियान शुरू किया है।
भारत के कई शहरों की वायु गुणवत्ता दुनिया में सबसे खराब मानी जाती है।
मुख्य कारण: वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य, पराली जलाना।
गंगा, यमुना जैसी नदियाँ अत्यधिक प्रदूषित हैं।
घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट बिना उपचार के नदियों में प्रवाहित किया जाता है।
शहरीकरण और कृषि विस्तार के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है।
तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा, और सूखा-बाढ़ जैसी घटनाएं बढ़ी हैं।
कई शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था अपर्याप्त है।
प्लास्टिक कचरा और ई-कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है।
विश्व पर्यावरण दिवस 2025 हमें यह याद दिलाता है कि प्लास्टिक प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है, जिसका समाधान हमारे सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
यह केवल हमारा कर्तव्य नहीं, बल्कि खुद के लिए स्वच्छ वातावरण तैयार करने की ज़िम्मेदारी है, ताकि हम और हमारी भावी पीढ़ियां स्वस्थ जीवन जी सकें।
आइए, हम सभी मिलकर एक स्वच्छ और सतत भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।
हर खुशी के अवसर को पेड़ लगाकर मनाएं।
खुद को पर्यावरण का मित्र बनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।