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गर्मियों में आंखों की देखभाल कैसे करें (How to Care for Your Eyes During Summer)

आंखें, जिनसे हम सारा जहान देखते हैं, भगवान के द्वारा दिया हुआ सबसे अनमोल तोहफा हैं। हमारी आंखें बहुत ही नाजुक हैं, इसलिए उनकी देखभाल करना बहुत जरूरी है।

गर्मियों में आंखों की देखभाल के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। बढ़ती गर्मी में बाहर निकलने, पसीने आदि के कारण आंखों में लालिमा आदि की समस्या बढ़ जाती है। समय रहते अगर ध्यान ना दिया जाए, तो यह आंखों के लिए बहुत ही नुकसानदायक हो सकती है।

गर्मियों में आंखों में लालिमा या संक्रमण से बचने के तरीके

गर्मियों में आंखों में लालिमा या संक्रमण से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

1. आंखों में लालिमा क्यों होती है?

डॉक्टरों के अनुसार, आंख में लालिमा बढ़ने का कारण बढ़ता तापमान भी हो सकता है। इसके कारण आंखों में संक्रमण हो सकता है और आंखें लाल हो जाती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि आंखों के अंदर का सफेद हिस्सा लाल पड़ने लगता है। यह सब आंखों की नसों में सूजन के कारण होता है।

2. गर्मी में आंखों की लालिमा बढ़ने के कारण

– आंखों पर सीधे सूर्य की रोशनी पड़ना

सूर्य की सीधी रोशनी भी आंखों में लालिमा के बढ़ने का कारण हो सकती है। इसलिए जब भी धूप में बाहर निकलें, सनग्लास आदि लगा कर निकलें।

– अधिक पसीना आने के कारण

अधिक पसीना भी आंखों की लालिमा का कारण हो सकता है।

– धूल-मिट्टी के कारण

धूल-मिट्टी के कण आंख में जाने पर आंख को मसलना नहीं चाहिए। धूल-मिट्टी के कण आंख में जाने पर आंख में लालिमा बढ़ सकती है।

– एलर्जी रिएक्शन

– बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन

– कंजक्टिवाइटिस

गर्मी में आंखों को लालिमा और संक्रमण से बचाने के घरेलू तरीके

1. बर्फ की सिकाई

बर्फ की सिकाई आंख में लालिमा और जलन को कम करने में मदद करती है।

2. आंखों को ठंडे पानी से धोएं

कई बार पसीना आंखों में जाकर लालिमा का कारण बन जाता है। इससे बचने के लिए आंखों को दिन में तीन से चार बार ठंडे पानी से धोएं।

3. अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें

गर्मी के मौसम में जरूरी है कि आप खुद को हाइड्रेट रखें। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, क्योंकि पानी शारीरिक संक्रमण को दूर करने में मदद करता है।

4. आंखों में गुलाबजल डालें

गुलाबजल आंखों की लालिमा में राहत का काम करता है। अगर आपकी आंखों में कोई धूल का कण चला जाए, तब भी आप गुलाबजल का उपयोग कर सकते हैं।

5. अच्छा खानपान रखें

गर्मी के मौसम में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह हमारी आंखों के लिए भी जरूरी है। ज्यादा तली हुई चीजें ना खाएं। ज्यादा से ज्यादा फल, हरी सब्जियां और जूस पिएं ताकि आपकी आंखें स्वस्थ रहें।

इन तरीकों को अपनाकर आप गर्मी के मौसम में आंखों में होने वाली लालिमा को रोक सकते हैं या अगर आपकी आंखों में यह परेशानी है तो आप ऊपर लिखी बातों का ध्यान रख सकते हैं और अपनी आंखों को हमेशा स्वस्थ रख सकते हैं।

Amazing benefits of eating cucumber: Know the right time to eat cucumber, more than 100 diseases will be cured from the body.

ककड़ी खाने के अद्भुत फ़ायदे : जानिए ककड़ी खाने का सही समय, शरीर से दूर होगी 100 से अधिक बीमारियाँ

How To Eat cucumber(ककड़ी कैसे खाए):
ककड़ी खीरे की तरह दिखने वाला एक फूड है। इसे खाने से बहुत सी बीमारियों के ख़त्म किया जा सकता है। यह हमारे शरीर को सेहतमंद बनाती है। लेकिन अधिकतर लोग इसको खाने का सही तरीका व सही समय नहीं जानते हैं।

ककड़ी और खीरा में अंतर-
खीरा एक हेल्दी फूड है लेकिन ककड़ी को इससे कम फायदेमंद समझने की गलती कभी ना करें। हिंदी की तरह अंग्रेजी में खीरा और ककड़ी दोनों के लिए अलग-अलग शब्द नहीं हैं। दोनों को अंग्रेज़ी भाषा में cucumber कहा जाता है। हालांकि ककड़ी में खीरे के मुकाबले पानी की मात्रा कम होती है, लेकिन विटामिन और मिनरल बहुत सारे होते हैं। आइए आज जानते है ककड़ी खाने का सही समय और सही तरीका क्या हैं।

ककड़ी को खाने का सही तरीका-
खीरे की तरह ककड़ी को सलाद बनाकर खाना चाहिए। इसकी स्मूदी भी खाने में बहुत अच्छी होती है। एक्सपर्ट्स की माने तो ककड़ी खाने का सही टाइम भोजन से पहले का होना चाहिए। बिना समय में लगने वाली भूख को कंट्रोल करने के लिए हम इसे खा सकते हैं।

ककड़ी का सेवन करने से शरीर से भागेंगी 100 से ज्यादा बीमारी
ककड़ी में कैलोरी की कमी और पानी की मात्रा ज्यादा होती है। एक शोध के मुताबिक ऐसे फूड खाने से मोटापा कम होता है। इसे बीमारियों का राजा कहा जाता है जो कि 100 से ज्यादा रोगों को जन्म दे सकता है।

जानिए गर्मी में ककड़ी खाने के अद्भुत फायदे-

गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। हर कोई चाहता है कि वह खुद को इस मौसम में गर्मी की मार से बचा कर रखे। यह मौसम ऐसा है इसमें खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। गर्मी से बचने के लिए जरुरी है, ज्यादा से ज्यादा पानी और विटामिन से भरपूर चीजों का सेवन करें। गर्मी के मौसम में बहुत से फल और सब्जियां ऐसी हैं जो इस मौसम के लिए व हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं और हमें डिहाइड्रेशन से बचाती हैं। इन्हीं में से एक है, ककड़ी।जो पानी से भरपूर होने के साथ साथ विटामिंस, पोटेशियम और फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत है।

कब्ज की समस्या में असरदार –
ककड़ी के नियमित सेवन से कब्ज गैस और अपच जैसे पेट की समस्या से राहत मिलती है। इसमें मौजूद पानी व फाइबर पेट के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद साबित होते हैं।

हड्डियों को मजबूत बनाती है –
ककड़ी में विटामिन के पाया जाता है। जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मददगार है।

स्किन और बालों के लिए लाभकारी –
ककड़ी गर्मी में बहुत फायदेमंद है। यह केवल हमारी पाचन क्रिया को ही नहीं बल्कि हमारी त्वचा और बालों की ग्रोथ के लिए भी फायदेमंद है। ककड़ी का जूस त्वचा पर दाग धब्बे दूर कर इसे चमकदार बनाने में सहायक है।

किडनी के लिए फायदेमंद –
ककड़ी के पानी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पोटेशियम के साथ मिलकर यूरिक अम्ल और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल कर किडनी को स्वस्थ रखता है।
इस प्रकार ककड़ी किडनी को स्वस्थ रखने में मददगार है।

ब्लड प्रेशर नियंत्रण में असरदार —
ककड़ी में पाया जाने वाला पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने सहायक है।

वजन घटाने में मददगार –
हर इंसान चाहता है कि उसका वजन कंट्रोल में रहे। इसमें ककड़ी बहुत लाभकारी है। ककड़ी में बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है और इसमें पाया जाने वाला फाइबर काफी समय तक भूख नहीं लगने देता। इस प्रकार ककड़ी खाने से हम बार बार खाने की समस्या से बचे रहते हैं।

इसके अलावा हम इसे स्नेक्स की तरह भी खा सकते हैं।
इस प्रकार ककड़ी इस गर्मी के मौसम का में पानी और विटामिन का सबसे अच्छा स्त्रोत है। जो हमें बहुत सी बीमारियों से बचाने में सहायक है।

When and why we celebrate World Earth Day 2024

पृथ्वी जिस पर हम रहते ही नहीं बल्कि हमारे जीवन का आधार कहें, तो गलत नहीं होगा।
रहने के लिए आवास, पीने के लिए पानी, जीने के लिए अनुकूल वातावरण, खाने के लिए अन्न आदि सब कुछ हमें इस धरा से ही प्राप्त होता है। फिर हमारा भी फर्ज बनता है की हम अपनी पृथ्वी को साफ और स्वच्छ बनाए रखने में अपना योगदान दें।

World Earth Day मनाने का कारण –

आज हमारा पर्यावरण बहुत प्रदूषित हो रहा है। जो कि एक चिंता का विषय है। इसलिए पृथ्वी पर शांति बनाए रखने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए हर साल 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक किया जा सके और पृथ्वी के वातावरण को शुद्ध रखा जा सके।

World Earth Day history –
हर साल 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है।
ऐसा क्या कारण है, कि विश्व पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है?
कहा जाता है कि सन् 1960 में, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही थी। विश्वविद्यालयों में छात्र प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के बहुत दोहन के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। पहली बार “22 अप्रैल 1970” को, 20 मिलियन से अधिक लोगों ने 150 देशों में अमेरिका में पहला पृथ्वी दिवस मनाया।

विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का विचार सबसे पहले सन् 1969 में यूनेस्को सम्मेलन में जॉन मैककोनेल द्वारा सोचा गया था।
इस दिन को मनाने की अवधारणा थी
“पृथ्वी का सम्मान करना” और “पृथ्वी पर शांति बनाए रखना”।

1990 में हेन्स द्वारा वैश्विक पृथ्वी दिवस का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में 140 देशों के 20 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया था। वर्तमान समय में, पृथ्वी दिवस नेटवर्क (ईडीएन) 190 देशों में 20,000 साझेदारों और संगठनों में फैला हुआ है।
22 अप्रैल की तारीख विश्व पृथ्वी दिवस के लिए आंशिक तौर पर इसलिए चुनी गई, क्योंकि यह कॉलेजों की स्प्रिंग ब्रेक और अंतिम परीक्षाओं के बीच पड़ती थी। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की ओर आकर्षित करना था ।

World Earth Day 2024 थीम –
विश्व पृथ्वी दिवस 2024 की थीम है –

इस साल विश्व पृथ्वी दिवस मनाए जाने की थीम है “Planet vs. Plastics ” अर्थात ” ग्रह बनाम प्लास्टिक”। इस थीम का उद्देश्य है पृथ्वी पर बढ़ रहे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना। प्लास्टिक का one Time इस्तेमाल करें या इसे रिसाइकिल में इस्तेमाल करें। प्लास्टिक का केवल पृथ्वी को ही नुकसान नहीं है बल्कि कचरे में फैंकी गई प्लास्टिक पशुओं आदि जानवरों के लिए मौत का कारण बनती है। इसलिए जरूरी है हम मिलकर इस पृथ्वी दिवस पर प्लास्टिक प्रदूषण को जड़ से खत्म करने का प्रण करें और अपनी धरा को साफ और स्वच्छ बनाए।

पृथ्वी को साफ , स्वच्छ और प्रदूषण रहित बनाएं रखने के लिए अपना योगदान निम्न तरह से करें —

⁃ ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं।

⁃ प्लास्टिक की जगह कपड़े और कागज के बैग इस्तेमाल करें।

⁃ जगह जगह पर कूड़ा कचरा ना फलाएं।

⁃ प्लास्टिक का इस्तेमाल वन टाइम या रिसाइकिल से करें, आदि।

जब पृथ्वी हमारे जीवन की सभी जरूरतों को पूरा करने में लगी हुई है, तो हमारा भी फर्ज है कि हम इसकी संभाल करें।

First Solar Eclipse : 8 अप्रैल को लगने जा रहा है इस साल का पहला सूर्य ग्रहण

First Solar Eclipse of 2024:
8 अप्रैल को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण (First Solar Eclipse of 2024) लगने वाला है। यह ग्रहण विश्व के अलग-अलग स्थानों पर दिखाई देगा। खास तौर पर मैक्सिको, अमेरिका और कनाडा में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा।

क्या होता है सूर्य ग्रहण ?

चाँद के धरती और सूर्य के बीच आने के कारण लगता है सूर्य ग्रहण। चाँद सूर्य को पूर्ण या आंशिक रूप से ढक लेता है और सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती।
इस वर्ष का सूर्यग्रहण (Solar eclipse of 2024) दुनिया के तीन देशों में ही दिखाई देगा। इस पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य की पूरी डिस्क को ढक लेगा और दिन में अंधेरा छा जाएगा।

कहाँ और कब देखा जा सकेगा First Solar Eclipse of 2024 :
आपकी जानकारी के लिए बता दें की 8 अप्रैल को लगने वाले साल के पहले सूर्यग्रहण (First Solar Eclipse) को मैक्सिको, अमेरिका और कनाडा में देखा जा सकेगा। अलग-अलग देशों के अनुसार इसकी अवधि अलग-अलग रहेगी। माना जा रहा है कि अमेरिका के टेक्सास में इसका सबसे ज्यादा असर रहेगा। टेक्सास के कुछ इलाकों में 4 मिनट 25 सेकंड तक पूर्ण सूर्यग्रहण रहेगा और अंधेरा छा जाएगा।
मैक्सिको में इसका असर 40 मिनट 43 सेकंड तक होगा। अमेरिका में यह ग्रहण 67 मिनट 58 सेकंड तक के लिए होगा और कनाडा में 34 मिनट 4 सेकंड ही इस सूर्यग्रहण को देखा जा सकेगा। बता दें कि ग्रहण के समय भारत में रात होने के कारण (रात्रि 10:08 – 1:25 बजे), इसे भारत में (in India) देखना मुमकिन नहीं होगा।

When was the First Solar Eclipse?
वैसे तो सूर्य, चंद्र, अंतरिक्ष या इनसे संबंधित खगोलीय घटनाओं की शुरुआत के बारे में जानकारी या साक्ष्य जुटा पाना संभव नहीं है। फिर भी इतिहासकारों का मानना है कि पहला सूर्यग्रहण 22 अक्तूबर, 2134 ई.पू. को प्राचीन चीन में लगा था। हालांकि इसे रिकॉर्ड नहीं किया जा सका सका था।
3 मई 1375 या 5 मार्च 1223, ई०पू० प्रमाणिक सूर्यग्रहण के सूर्यग्रहण को सबसे पहला सूर्यग्रहण (First Solar Eclipse) माना जाता है। यह ग्रहण कांस्य युग के उगारिट शहर में 3247 साल पहले दिखाई दिया था, जो कि वर्तमान सीरिया में है।

When was the solar eclipse first discovered?
अनेक्सागोरस (Anaxagoras) नामक एक ग्रीस विद्वान ने सबसे पहले सूर्य और चंद्र ग्रहण के लिए सटीक वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की। ई०पू० के समय में ग्रहणों से संबंधित सही थ्योरी उनकी ही थी। वर्तमान में कई चीनी और ग्रीक दार्शनिकों ने ग्रहण को विस्तार से जानने के प्रयत्न किए। परंतु जोहानस केपलर ने 1605 में पूर्ण सूर्यग्रहण की प्रमाणिक व्याख्या पेश की।

Noble Gas first observed during solar eclipse?
हीलियम (Helium) एक ऐसी गैस है, जिसे 18 अगस्त, 1868 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सबसे पहले पाया गया। (noble gas first observed during solar eclipse) लार्कयर ने हीलियम को सूर्य के करोमोस्फीयर में पाया। गौरतलब है कि उससे पहले तक यह गैस धरती पर भी नहीं पाई गई|

How A Solar Eclipse first proved Einstein right?
सूर्य ग्रहण विज्ञानिकों को शोध, रिसर्च व खोज के नये अवसर प्रदान करते हैं। इसी कड़ी में 29 मई 1919 का सूर्य ग्रहण विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा महत्त्वपूर्ण साबित हुआ। 1919 के सूर्य ग्रहण ने महान वैज्ञानिक आइंस्टीन की सामान्य सापेक्षता (General Relativity) की थ्योरी को सही साबित कर दिया था।
1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने रिलेटिविटी से संबंधित एक सिद्धांत प्रस्तुत किया। जिसके अनुसार तारों से निकलने वाला प्रकाश सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण मुड़ जाता है। यानि की अब दिखाई देने वाले तारों का स्थान उनका वास्तविक स्थान नहीं है। उनकी यह थ्योरी 1919 के सूर्य ग्रहण ने सच साबित कर दी(solar eclipse proved Einstein right).

भारत में सूर्यग्रहण (in India) :
भारत में (in India) सूर्य और चंद्रग्रहण की सर्वप्रथम व्याख्या आर्यभट्‌ट ने की। माना जाता है कि भारत में सूर्यग्रहण को धार्मिक महत्वों के साथ जोड़ा जाता है। इस साल 8 अप्रैल का सूर्यग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा। भारत में (in India) अगला सूर्यग्रहण 2031 में देखा जा सकेगा।

Chandigarh Tourist Places: अगर आपका वीकेंड में घूमने का है प्लान, तो 2 दिनों में चंडीगढ़ की इन जगहों को कर सकते हैं आप कवर

Best Places to Visit in Chandigarh: यदि आप घूमने का सोच रहे हैं, तो चंडीगढ़ शहर में ऐसी कई जगह हैं जहां पर आप अपने वीकेंड को बहुत ही अच्छे तरीके से enjoy कर सकते हैं। आइए आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताते हैं, जहां आप बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं और आपका ज्यादा समय भी बर्बाद नहीं होगा। चंडीगढ़ के ये स्थान बेहद शांत और खूबसूरत हैं।

Top and Famous  Chandigarh tourist places: जब भी हम घूमने की बात करते है, तो एक्साइटमेंट तो बहुत ज्यादा हो जाती है, बहुत से लोगों को घूमना बहुत पसंद होता है। लेकिन जैसे ही ट्रैवलिंग (Travelling) के बारे में सोचते है, तो लगता है कि एक से दो दिन तो सफर में ही बीत जाएंगे। घूमने का तो समय ही नहीं मिलेगा। तो घबराइए मत, यदि आप घूमना भी चाहते हैं और अपनी ट्रैवलिंग का समय भी बचाना चाहते हैं, तो ऐसी बहुत से place हैं, जो आपके शहर में मौजूद हैं। जहां जाने के लिए आपके पास समय ही समय है।

घूमते-घूमते हुए गुजारें अपना वीकेंड- यदि आप लोग चंडीगढ़ घूमने का प्लान कर रहे हैं, तो यहां ऐसी कई जगहें हैं, जहां पर आप अपना वीकेंड बहुत ही अच्छी तरह से enjoy कर सकते हैं। आप किसी दूसरे शहर से आए हैं तो भी आप यहां शानदार वीकेंड गुजार सकते हैं और अगर आप चंडीगढ़ (Weekend Plan in Chandigarh) के बाहर भी आस-पास जाना चाहते हैं, तो भाई क्या ही कहने। चंडीगढ़ से कुछ ही दूरी पर कुछ हिल स्टेशन भी है, जहां जाने में आपको ज्यादा समय नहीं लगेगा।

चंडीगढ़- शांत और खूबसूरत- आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने वाले हैं, जहां आप बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां जाने पर आपका समय ज्यादा बर्बाद नहीं होगा। चंडीगढ़ की ये जगहें बेहद शांत, रोमांचक और खूबसूरत हैं। यानी की आप आराम से अपनी छुट्टियां एन्जॉय कर सकते हैं। इतना पढ़ने के बाद मन में चंड़ीगढ़ जाने के बारे में एक बार तो सोच ही लिया होगा आपने।

चंडीगढ़ में क्या है खास – आइये पहले चंडीगढ़ के बारे में कुछ जान लेते हैं। जी हां यदि आप कहीं घूमने जाने का प्लान कर रहें हैं तो जाहिर सी बात है कि आपको उस जगह के बारे में पता होना चाहिए। बहुत नहीं पर थोड़ा बहुत इतिहास जानना तो बनता है न दोस्त।
सबसे पहले आपको जानकारी के लिए बता दें कि चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब की राजधानी है। हालांकि, देश आज़ाद होने से पहले पंजाब की राजधानी लौहार हुआ करती थी, लेकिन देश की आज़ादी के बाद नई राजधानी की जरूरत पड़ी और 1947 में चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी घोषित किया गया। चंडीगढ़ का नाम यहां पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक मंदिर मां चंडी मंदिर के नाम से मिला है। ये दिल्ली से 245 किलोमीटर दूर स्थित है। देश-दुनिया के पर्यटक यहां आते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं रॉज गार्डन से और रॉक गार्डन से जो यहां सबसे ज्यादा फेमस है। जहां घूमने वालों की संख्या भी सबसे ज्यादा होती है।

रोज गार्डन (Rose Garden)- चंडीगढ़ में स्थित रोज गार्डन(Rose Garden) को एशिया(Asia) के सबसे बड़े रोज गार्डन में से एक माना जाता है। रोज गार्डन चंडीगढ़ (Chandigarh) में रॉक गार्डन के बाद सबसे ज्यादा घूमा जाने वाला गार्डन है। रोज गार्डन का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के नाम पर रखा गया है। इस खूबसूरत उद्यान की स्थापना 1967 में की गई थी। यह पार्क 10 एकड़ में फैला हुआ है और यहां गुलाब की कई प्रजातियां है। इन्हें बेहद खूबसूरत तरीके से प्रदर्शित किया गया है। यहां 1600 से अधिक तरह के फूल पाए जाते हैं। आपको बता दें कि इस रॉज गार्डन में वार्षिक गार्डन फेस्टिवल भी मनाया जाता है। ये फरवरी और मार्च के दौरान एक प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम(cultural program) होता है।

आख़िर क्या है खास रोज़ गार्डन में:- यहां तरह-तरह के गुलाब के फूल मिलेंगे। यहां 32,500 किस्म के पेड़ व औषधीय पौधे मौजूद हैं। यहां लोगों के लिए जॉगिंग ट्रैक भी उपलब्ध है और लोगों को आकर्षित करने के लिए पानी का फव्वारा भी है।

रॉक गार्डन (Rock Garden)- रॉक गार्डन चंडीगढ़ शहर की जानी-मानी घूमने की जगह है। यह चंडीगढ़ की सबसे ज्यादा घूमने वाली जगहों में से एक है। यहां सबसे ज्यादा पर्यटकों का आना-जाना है। यह गार्डन मूर्तिकला, वास्तुकला और पौराणिक कथाओं का मिश्रण है। रॉक गार्डन चंडीगढ़ में स्थित 35 एकड़ की भूमि में बनाया गया एक बड़ा गार्डन है। इसकी खास बात यह है कि यह घरेलू कचरे और कई औद्योगिक वस्तुओं से बनाया गया है। इस उद्यान में चूड़ियां, चीनी मिट्टी के बर्तन, टाइलें, बोतलें और बिजली के कचरे जैसी वस्तुओं का उपयोग करके मूर्तियां बनाई गई हैं।

इतिहास- History
रॉक गार्डन के पीछे की कहानी यह है कि इसके संस्थापक नेक चंद ने 1957 में अपने खाली समय में गुप्त रूप से इस गार्डन को बनाना शुरू किया था। इस गार्डन का layout एक खोए हुए साम्राज्य की कल्पना पर आधारित है। इसमें 14 कमरे बने हुए हैं। लगभग हर त्योहार के समय रॉक गार्डन त्योहार जैसा माहौल बना देता है।

आखिर क्या खास है रॉक गॉर्डन में?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मनुष्यों और जानवरों की आकृतियां बनाने के लिए टूटे हुए कांच के टुकड़े, शौचालय के उपकरण और टूटी टाइलों का उपयोग किया गया है। रॉक गार्डन में जाने के बाद आपको ऐसा लगेगा, जैसे आप किसी गांव में आ गए हों। इसमें सुंदर झोपड़ियां बनाई गई है। यह गार्डन रोमन वास्तुकला से प्रेरित होकर बनाया गया है। यहां बच्चों के लिए झूले भी लगे हुए हैं। यहां झरने और एक्वैरियम भी बने हुए हैं, जहां हम चारों ओर घूमती हुई मछलियां भी देख सकते हैं। यहां पर एक तरह का ओपन एयर थिएटर है, जिसकी सीढ़ियों पर बैठकर आप हंसता हुआ दर्पण प्रदर्शन, एंटीक वस्तुओं की दुकान, ऊंट और रेलगाड़ी की सवारी और फूड कोड का आनंद ले सकते हैं।

पता और एंट्री फीस:
ये उद्यान चंडीगढ़ के उत्तर मार्ग, सेक्टर-1 में स्थित है। यहां पर एंट्री फीस भी है। बड़ों के लिए 30 रुपए और बच्चों के लिए- 10 रुपए ticket है।

सुखना लेक (Sukhna Lake): Sukhna Lake भी चंडीगढ़ में आकर्षण का केंद्र है। आपको बता दें सुखना लेक 3 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली हुई है, सुखना लेक में सर्दियों के महीनों में कई विदेशी प्रवासी पक्षी, साइबेरियन, बत्तख और क्रेन का आवागमन होता है। सुखना लेक (Sukhna lake) को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय आर्द्रभूमि घोषित किया गया है। मानसून के समय यहां अधिकतर लोग यहाँ पर घूमने आते हैं। यहां पर ज़्यादातर लोग अपने परिवार को लेकर आते हैं। सुखना लेक एशिया में नौकायन व नौकायन आयोजनों के लिए प्रचलित है।

क्या खास है सुखना लेक में: Boating: यहां पर लोग सैलानी बोटिंग भी करते हैं। यहां पर आपको 2 सीटर, 4 सीटर, शिकारा बोट, सोलर क्रूज मिल जाती हैं, जिसमें बोटिंग करके आप इस लेक का आनंद उठा सकते हैं और अपने वीकेंड को यादगार बना सकते हैं।
Park: इस लेक पर पार्क भी बनाया गया है। जिसमें बच्चे ट्रेन की सवारी कर सकते हैं। यहां पर बुल राइड भी की जाती है, जो बेहद मजेदार होती है यक़ीनन यह आपको बहुत पसंद आएगी।
Food court: यहां पर खाने-पीने के लिए सिटको कैफेटेरिया, शेफ लेक व्यू और कई फूड कोर्ट बने हुए हैं।
सुखना लेक की सुंदरता को बढ़ाने के लिए यहाँ पर विभिन्न मूर्तियां भी बनाई गई हैं। यहां आपको जॉगिंग ट्रैक भी मिलेगा, जहां पर आप सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य का आनंद उठा सकते हैं।

कहां है स्थित सुखना लेक- Address
सुखना लेक(Sukhna lake) चंडीगढ़ शहर के सेक्टर-1 में स्थित है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां पर जाने के लिए कोई एंट्री फीस नहीं है।

सेक्टर-17 मार्किट – Sector -17 Market
आप चंडीगढ़ घूमने आ ही गए हैं, तो मन कर रहा होगा कि थोड़ी शॉपिंग भी की जाए। चंडीगढ़ का सबसे फेमस मार्केट यहां पर सेक्टर-17 में है। शहर के बीचों-बीच होने के कारण इसे सिटी सेंटर भी कहा जाता है। यह इलाका 240 एकड़ में बना हुआ है। यहां पर आपको कई बड़े ब्रांड की दुकाने, इंटरनेशनल फूड भी मिलता है। खाने-पीने की सभी दुकानें सेक्टर-17 के बाज़ार में मिल जाती हैं।

क्या है खास यहाँ पर?
यहां एक मूवी थिएटर है। यहाँ पर स्थानीय दुकानें और अंतर्राष्ट्रीय ब्रेंड स्टोर है। शाम के म्यूजिकल फाउंटेन शो होता है, जो कि 7 बजे, 8 बजे और 09:00 बजे आयोजित किया जाता है। इन म्यूजिकल फाउंटेन शो में लोग इतने घुल जाते हैं कि वे खुद नाचने गाने लगते हैं।

चंडीगढ़ में स्थित म्यूजियम : Museum in Chandigarh

चंडीगढ़ के म्यूजियम बड़ी तेजी से पर्यटकों के लिए आकर्षणों का एक अहम हिस्सा बन रहे हैं। चंडीगढ़ में प्रतिष्ठित सरकारी संग्रहालय, आर्ट गैलरी, चंडीगढ़ के तीन वास्तुकला संग्रहालय, प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय, रॉक गार्डन में राग गुड़िया संग्रहालय और उच्च न्यायालय संग्रहालय लोगों के लिए इतिहास के बारे में जानने के लिए बेहद खास बनता जा रहा है। ये संग्रहालय चंडीगढ़ में घूमने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

इंटरनेशनल डॉल्स म्यूजियम- इंटरनेशनल डॉल्स म्यूजियम की स्थापना वर्ष 1985 में बाल भवन परिसर में की गई थी। इसमें 25 देशों (25 countries) की विरासत गुड़ियों का संग्रह दिखाया गया है। जिसमें ऐतिहासिक, भौगोलिक कलात्मक, सामाजिक-सांस्कृतिक, फैशन डिजाइन और पोशाक विशेषताओं के साथ विदेशी और स्वदेशी गुड़िया शामिल हैं। इसमें बच्चों के लिए गुड़ियों के रंगीन आदमकद कटआउट भी हैं।
इस खबर से जुड़ी सभी जानकारी चंडीगढ़ की अधिकारिक वेबसाइट (official website) से ली गई है।

लाल मिर्च पाउडर में भरा होता है ईंट का चूरा, चिरने लगेंगी आपकी आंतें, FSSAI ने बताया घर में इस तरीके से करे नकली मिर्च की जांच-

आज के आधुनिक समय में मसालों में मिलावट करना आम बात हो गई है और मिलावटी चीजें खाने से इंसान की सेहत पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। आप सभी के घरों में इस्तेमाल होने वाले लाल मिर्च पाउडर में भी ईंट के चुरे की मिलावट हो सकती है। जानिए घर पर रहते हुए इसकी पहचान कैसे करे।
 हम सभी के घरों में लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों में से एक है। खाना में सब्जी को स्वाद और गहरा रंग देने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। पुराने समय में साबुत लाल मिर्च को धूप में सुखाकर और पीसकर उसका पाउडर बनाया जाता था और फिर इसके इस्तेमाल में लिया जाता था। लेकिन अब लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) के पैकेट मिलने लगे हैं।
लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) में भरा होता है ईंट का चूरा, जो दे रहा बिमारियों को बुलावा, FSSAI ने बताया हम घर में रहते कर सकते है लाल मिर्च की जांच-

आज के समय में खाने-पीने की लगभग सभी चीजों में मिलावट होने लगी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आप जो लाल मिर्च पाउडर अपनी रसोई में इस्तेमाल कर रहे हैं, आख़िर वह कितना सुरक्षित है? क्या आपके लाल मिर्च पाउडर में कोई मिलावट तो नहीं है?
आजकल लोग अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए व पिसे हुए मसालों की मात्रा बढ़ाने और उन्हें गहरा रंग देने के लिए उनमें मिलावट कर रहे है। अधिकतर व्यापारी मसालों का वजन बढ़ाने के लिए उन में लकड़ी का बुरादा, ईंट का चूरा और कृत्रिम रंगों का उपयोग कर रहे है। यह मसाले इंसान के पेट में जाकर कई खतरनाक बीमारियों को बुलावा देकर उन्हें मरीज बना सकते हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने एक आसान तरीक़ा बताया है जिसके द्वारा आप कुछ ही सेकंड में असली-नकली लाल मिर्च पाउडर की जांच कर सकते हैं।
लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) में मिलावट क्यों की जाती है?
आज के समय में खाने में मिलावट करना आम बात हो गई है। लोग पैसे कमाने में इतने लीन हो गए हैं कि न जाने वो कितने लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे है। ऐसे ही आज हम बात कर रहे है लाल मिर्च पाउडर की। आमतौर पर पिसे हुए मसालों की मात्रा बढ़ाने और उनका रंग निखारने के लिए उनमें मिलावट की जाती है। मिर्च पाउडर में आमतौर पर ईंट पाउडर, नमक पाउडर या टैल्क पाउडर की मिलावट की जाती हैं।
असली-नकली लाल मिर्च पाउडर की ऐसे करें जांच-
घर पर लाल मिर्च पाउडर में मिलावट की जांच ऐसे करें
  • एक गिलास सादे पानी ( normal water) में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाए।
  • पानी में घुले हुए पाउडर को थोड़ी मात्रा में लेकर अपने हाथ में रगड़ें।
  • यदि इसको रगड़ने के बाद कोई खुरदरापन महसूस होता है, तो इसमें लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) में ईंट का पाउडर या रेत की मिलावट है।
  • यदि अवशेष साबुन जैसा और चिकना लगता है, तो इसमें सोप स्टोन की मिलावट है।
आर्टिफिशियल कलर की ऐसे करें जांच-
  • इसे चमकीला रंग देने के लिए लाल मिर्च पाउडर में आर्टिफिशियल कलर मिक्स किए जाते हैं।
  • एक गिलास पानी में थोड़ा सा मिर्च पाउडर छिड़कें।
  • अगर इसमें आपको एक रंगीन लकीर नजर आती है, तो लाल मिर्च पाउडर मिलावटी हो सकता है।
  • लाल मिर्च पाउडर में कई बार पानी में घुलनशील तारकोल रंग मिलाया जाता है।
स्टार्च का पता लगाने के लिए ऐसे करें जांच-
  • लाल मिर्च पाउडर की मात्रा बढ़ाने के लिए अक्सर इसमें स्टार्च भी मिलाया जाता है।
  • स्टार्च की जांच के लिए पिसे हुए मसाले में टिंचर आयोडीन या आयोडीन घोल की कुछ बूंदें मिलाए।
  • यदि यह नीले रंग में बदलता है, तो यह लाल मिर्च पाउडर में स्टार्च की वजह से हो सकता है।
सेहत के लिए खतरनाक है ईंट का पाउडर
ईंट पाउडर आमतौर पर ईंट के चूरे से बनता है, जो दिखने में लाल रंग का होता है। इस पाउडर का रंग और बनावट लाल मिर्च के पाउडर के समान होती है। इसलिए इसका उपयोग अक्सर मिलावटी पदार्थ के रूप में किया जाता है। यह सेहत के लिए बहुत खतरनाक होता है। इसके नियमित सेवन से शरीर पर गंभीर परिणाम होते हैं। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है।

वजन कम करने में रामबाण है मीठी तुलसी (Stevia)-

आज के समय में बढ़ता वजन और मोटापा हर दूसरे से तीसरे इंसान के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। हर इंसान चाहता है कि वह स्वस्थ रहे। लेकिन बढ़ते वजन/मोटापे के कारण शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
वजन बढ़ने से इंसान को बहुत सी बीमारियां आकर घेरती है।

वजन बढ़ना तो आसान है लेकिन इसे कम करना बहुत ही मुश्किल है। लेकिन एक तरीका है जिससे इंसान अपना वजन कम कर सकता है।
“मीठी तुलसी” जिसे Stevia भी कहते हैं। इसका सेवन करने से बढ़ता वजन ही कम नहीं होता बल्कि और भी बहुत सी बीमारियों में राहत मिलती है।

आखिर क्या है मीठी तुलसी (Stevia)-

‘Stevia’ यानी मीठी तुलसी, सूरजमुखी परिवार (एस्टरेसिया) के झाड़ी और जड़ी बूटी के लगभग 240 प्रजातियों में पाया जाने वाला एक जीन्स है। यह पश्चिमी उत्तर अमेरिका से लेकर दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। यह तालाबों अथवा नालों के किनारों पर प्राकृतिक रूप से उगता है।

यह जीरो कैलोरी वाला पौधा सैकड़ों वर्षों से नेचुरल शूगर के ऑप्शन और स्वाद बढ़ाने वाले घटक के रूप में उपयोग किया जाता है। जो लोग बढ़ते वजन या मोटापे के कारण मीठे का सेवन नहीं कर सकते, वो इस मीठी तुसली के सेवन से अपना मीठे का शोंख पूरा कर सकते हैं।

Stevia/मीठी तुसली के अन्य फायदे –

मीठी तुलसी यानी Stevia में केवल बढ़ते वजन को कम करने का ही गुण नहीं पाया जाता बल्कि यह और भी अन्य समस्याओं में राहत प्रदान करती है ।
मीठी तुलसी में शुगर नहीं होता अर्थात इसमें कैलोरी की मात्रा जीरो होती है।
इसलिए यह वजन कम करने में रामबाण का काम करती है। मीठी तुलसी वजन कम करने के अलावा और भी अन्य बीमारियों में फायदेमंद है।

बढ़ते शुगर लेवल को करती है कंट्रोल –

मीठी तुलसी में औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें मौजूद नॉन ग्लाइसेमिक स्वीटनर बढ़ते शुगर को नियंत्रित करने में मददगार है।

इसका सेवन करने से ब्लड शुगर और इन्सुलिन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए अगर आप शुगर के मरीज हैं और मीठा खाने के चाहवान हैं, तो आप मीठी तुलसी का सेवन कर सकते है।

मीठी तुलसी बढ़ते रक्तचाप को नियंत्रित में सहायक-

ब्लड प्रेशर आज आम समस्या बनी हुई है। मीठी तुलसी के इस्तेमाल से बढ़ते रक्तचाप को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
मीठी तुलसी के रस में विद्यमान ग्लाइकोसाइड रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने की ताकत रखते हैं। जो सोडियम उत्पादन और उत्तर उत्सर्जन को भी बढ़ा देते हैं।

एक अध्ययन के अनुसार मीठी तुलसी (Stevia) के पौधे में विद्यमान कार्डियोटोनिक क्रियाएं बढ़ते रक्तचाप को कम करते हुए दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में सहायक है।
इस तरह से आप मीठी तुलसी के सेवन से अपने बढ़ते वजन और मोटापे को कम करने के साथ अन्य समस्याओं से भी निजात पा सकते हैं।

निष्कर्ष-

जहां मीठी तुलसी बहुत सी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मददगार है, वहीं इसका ज्यादा मात्रा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। यह किडनी, प्रजनन हृदय प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए मीठी तुलसी/Stevia का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह अनुसार ही करें।

Winter Destinations- सर्दियों में घूमने की कर रहे हैं प्लानिंग, तो यह जगह है सबसे अच्छी

घूमना-फिरना हर इन्सान को अच्छा लगता है। सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। उत्तर भारत में अब मौसम बहुत रफ्तार से बदल रहा है।

सर्दी का मौसम हर इंसान को बहुत पसंद आता है। क्योंकि इस मौसम में घूमने-फिरने और खाने-पीने का एक अपना अलग ही मजा होता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें, भारत में बहुत सी ऐसी जगह हैं, जहां सर्दियों में घूमने का अलग ही मजा है। कईं जगहों पर इस मौसम में बर्फबारी शुरू हो जाती है।

सर्दियों में छुट्टियों में अगर आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार इन जगहों पर जरूर जाएं। ये जगह सुकून और शांति से भरपूर हैं, जहां आप एक बार जाकर हर बार जाना पसंद करेंगे।

भारत में घूमने की सबसे अच्छी जगह-

  1. केरल
  2. गोवा
  3. राजस्थान
  4. हिमाचल के सबसे लोकप्रिय स्थल
    शिमला, मनाली और धर्मशाला।

 

1.केरल-

केरल दक्षिण भारत में बसा वो राज्य है जो बीच और बाँधों के लिए मशहूर है। इसे “ईश्वर का अपना घर” के नाम से भी जाना जाता है। यहां विभिन्न प्रकार की चाय और कॉफी की चुस्कियाँ लेते-लेते आपका मन नहीं भरेगा।
बारिश के बाद केरल की हरियाली का अपना ही अलग रंग होता है। यहां खड़े मसालों की सौंधी खुशबू आपको रसोई के नटखट और चटपटे स्वाद का स्मरण करवाएगा। केरल के दर्शनीय स्थल आपके इन सभी एहसासों को जीवंत कर देंगा।

केरल में प्रकृति से प्यार करने वालों के लिए सुंदर पहाड़ी स्टेशन, महासागर प्रेमियों के लिए सुनहरे सुंदर तट, पशु प्रेमियों के लिए विदेशी वन्यजीवन, शरीर और दिमाग को शांत करने के लिए आयुर्वेदिक मालिश और योग सब का अपना-अपना अलग महत्व है।

केरल में घूमने के लिए यादगार स्थल –

नाव की सवारी करने वालों के लिए अलापुला, थेककाड़ी और वेम्बानाद बहुत ही शानदार स्थल है।
वन्यजीव प्रेमियों के लिए साइलेंट वैली नेशनल पार्क, पेरियार टाइगर रिजर्व और कुमारकाम पक्षी अभ्यारण्य बहुत अच्छी जगह है। पक्षी प्रेमियों के लिए कन्नूर और कोझिकोड जिलों में स्थित वायनाड स्थल। धार्मिक स्थल में श्री पद्मनाभास्वामी मंदिर ज़ो की भगवान विष्णु की कलाकारी का प्रसिद्ध मंदिर है।

2. गोवा –

शीतकालीन मौसम में घूमने के लिए गोवा बहुत ही सुंदर और प्राकृतिक नज़ारों से भरा रमणीक स्थल है।
वैसे तो यहां किसी भी मौसम में जा सकते हैं। लेकिन सर्दी के मौसम में गोवा में घूमने का अलग ही नजारा है।
नए साल का जश्न मनाने के लिए गोवा सबसे बढ़िया स्थान है।
गोवा को भारत की पार्टी राजधानी भी कहा जाता है। यहां के रोमांचित सुनहरे समुद्र तट रोमांचक जल खेल, पारिवारिक व्यंजन, पुर्तगाली संस्कृति और जीवंत त्यौहार इस स्थान गोवा को भारत का सबसे बढ़िया सर्दियों में घूमने का अवकाश स्थल बनाते हैं।

यहां के समुद्री तट, आकर्षक चर्च, मंदिर, पुराने किले, लहराते पेड़, कार्निवल मांडवी नदी के तट पर क्रुज की सवारी आदि पर्यटकों के लिए सबसे आकर्षण का केंद्र है।
आपको बता दें कि दिसंबर में घूमने की सबसे अच्छी जगह गोवा है। अतः अगर आप भी अब की बार कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इस बार गोवा जरूर जाएं।

3. राजस्थान –

राजस्थान भारत के पश्चिम में स्थित है। राजस्थान ना केवल अपनी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां के प्राचीन महल, किले, परंपरा, वेश भूषा, राजशाही इतिहास सब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।

हालांकि राजस्थान में ज्यादा ठंड नहीं होती, लेकिन सर्दी के मौसम में यहां घूमने का नजारा बेहद खूबसूरत होता है।
यहां के प्राचीन किले, “गढ़” के नाम से बहुत प्रसिद्ध है।
राजस्थान के महाराजाओं की संस्कृति और परंपरा को उनके चमकदार किलों व राजसी कलाकारियों में साफ-साफ देखा जा सकता है।

राजस्थान में घूमने के प्रसिद्ध स्थल व स्थान-
जोधपुर, रणथंबोर, जैसलमेर, उदयपुर, बीकानेर और माउंट आबू आदि राजस्थान में घूमने के बहुत ही सुंदर स्थान हैं।

पुष्कर और अजमेर तीर्थ अद्भुत तीर्थ स्थान है।
इन स्थानों पर आकर आप खुद को भगवान के शरण में आया महसूस कर सकते हैं। यहाँ आप अपने को बहुत ही शान्त महसूस करेंगे।
बीकानेर और बूंदी राजस्थान की विरासत और राजशाही से भरे शहर हैं।
शाही महल और गजनेर पैलेस बीकानेर का प्रसिद्ध यात्रा स्थल है।
जोधपुर वास्तुकार प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
जैसलमेर मिठाई सीहोर और ऊंट की सवारी के लिए प्रसिद्ध स्थल है।

इस प्रकार राजस्थान की विभिन्न जगहों की कला और लोक नृत्य काफी मनोहर है। यह इंसान के दिलो दिमाग में एक जादू सा कर देते हैं। सर्दियों के मौसम में राजस्थान में घूमने का एक अपना ही आनंद है।

4. हिमाचल के सबसे लोकप्रिय स्थल शिमला, मनाली और धर्मशाला –
सर्दियों में अगर आप हिमाचल में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आप शिमला, मनाली या धर्मशाला जरूर जाएं।
सर्दियों में सैलानियों के लिए हिमाचल की राजधानी “शिमला” बर्फबारी का आनंद लेने के लिए बहुत ही परफेक्ट और सुंदर स्थान है।

शिमला घुमावदार पहाड़ियों और बर्फ से ढके जंगलों से घिरा हुआ बहुत ही सुंदर पर्यटक स्थल है। शिमला साइक्लिंग करने के लिए बहुत अच्छा स्थान है।

मनाली- मनाली हिमाचल में बर्फबारी से घिरा बहुत रमणीक स्थल है। यहां आकर हर कोई अपने आपको स्वर्ग से घिरा पाता है। यहां के पेड़ और देवदार के पेड़ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
मनाली को रंग-बिरंगे फूलों की घाटी कहा जाता है। बर्फ के कारण सर्दियों में यहां हरियाली दूर-दूर तक नजर नहीं आती।

एडवेंचर के शौकीन के लिए मनाली-ट्रैकिंग, स्कीइंग, पैरा ग्लाइडिंग आदि के लिए बहुत अच्छा स्थल है।
मनाली स्कीइंग अभियान, नदी बीस, पर्वतारोहण, अन्य साहसिक खेल और हिमालय के शानदार दृश्य के लिए बहुत प्रसिद्ध है।

धर्मशाला- अगर आप इस बार सर्दियों में किसी शांत स्थल पर घूमने का सोच रहे हैं तो धर्मशाला घूमने के लिए पहाड़ों से घिरा बहुत ही रमणीक और शांत स्थल है।
धर्मशाला को दलाई लामा के “गृहनगर” के नाम से भी जाना जाता है।
बर्फ से ढके हुए पहाड़ों, शांतिपूर्ण मठ, शांत झीलों और चुनौती पूर्ण ट्रैकिंग ट्रेल्स से घिरा धर्मशाला ऐसा स्थल है, जहां अभी तक व्यवसायीकरण अनछुआ है।
यह बहुत ही शांत स्थल है।

अगर आप भी इस बार सर्दियों में कहीं घूमने का सोच रहे हैं तो आप इन रमणीक स्थलों पर जरूर जाएं और प्रकृति का भरपूर आनंद लें।

आइए जानें कि आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए कैसे पोष्टिक फूड्स खाएं

आज हम देखते हैं कि बिगड़ रहे वातावरण का असर हमारी आंखों पर भी पड़ रहा है। जिससे ज्यादातर लोगों को चश्मा लग जाता है। यहां तक छोटे बच्चे भी इसमें शामिल हैं, आज दुनिया भर में निकट दृष्टि दोष एक महामारी बनता जा रहा है।

यूरोप और अमेरिका में 30-40% लोगों को चश्मे की जरूरत पड़ती है और कुछ एशियाई देशों में यह आंकड़ा 90% तक पहुंच गया है। क्योंकि हमारा लाइफस्टाइल ठीक नहीं है। ज्यादा कंम्पयूटर पर काम करने से, टीवी या मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा करने से आंखों में चुभन होने लगती है जिससे हमारी आंखों में असर पड़ता है और खाने में तले हुए खाद्य-पदार्थों का सेवन करने या पोष्टिक आहार ना लेने के कारण भी आंखों की रोशनी कम हो जाती है।

अगर हम अपने खान पान की ग़लत आदतों को सुधार कर अपने रोजाना आहार में विटामिन A,C,E और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल कर लें तो आंखों की रोशनी बढ़ाई जा सकती है।

आइए जानते हैं कि आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए क्या खाएं-

गाजर-
गाजर में पोटाशियम, विटामिन C, E और विटामिन B1 भरपूर मात्रा में होते हैं। जिसे खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। गाजर को हम सलाद, सब्जी के रूप में या जूस बनाकर भी पी सकते हैं। इसका एक गिलास जूस रोजाना पीने से आंखों को लाभ होता है।

आंवला-
आंवले को खाली पेट जूस के रूप में या इसका मुरब्बा खाने से बहुत लाभ होता है। क्योंकि यह आंखों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां-
हरी पत्तेदार सब्जियों का स्वाद भले ही ख़ाने में अच्छा ना लगता हो, परंतु इनमें मौजूद लुटिन और जियोकसथीन कैमीकल आंखों के लिए बहुत अच्छे होते हैं। इनमें धनिया, पालक, शकरकंदी बहुत उपयोगी हैं।

फल-
फलों में विटामिन C, E, A और अन्य पौशक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते है। खट्टे फलों में संतरा, मौसमी में विटामिन सी होता है और विटामिन सी एक एंटी ऑक्सीडेंट है। जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके इलावा केला, पपीता और आम जैसे पीले फलों में कैराटिन और लाइकोपिन होता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाता है। जिससे आंखों का चश्मा भी उतर सकता है।

जामुन-
जामुन के सेवन से बहुत सी बिमारियों को ठीक किया जा सकता है। इससे कई औषधियां भी तैयार होती हैं, इसे खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

बादाम-
बादाम हमारी सेहत के लिए वरदान है। इससे दिमाग तेज होता है और मैमोरी पावर बढ़ती है। इसमें विटामिन ई होता है, जिससे आंखों का चश्मा उतर सकता है।

नट्स-
कई लोगों की आंखों में सूखेपन की बिमारी होती है। उनकी आंखों में आंसुओ की कमी के कारण धुंधलापन या सुखापन जैसी समस्या आती है। अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा बढ़ाने से यह समस्या खत्म हो जाती है। नट्स खासकर अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है। इसके इलावा मूंगफली, ब्राजील नट्स, काजू जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से भी आंखों की रोशनी तेज होती है। यह आंखों के रेटिना को सही रखते है और इन्हें खाने से मोतियाबिंद की समस्या नहीं होती।

काली मिर्च-
बहुत से लोगों का मानना है कि काली मिर्च को देसी घी के साथ सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। क्योंकि इसमें विटामिन ए और ई भरपूर मात्रा में होते हैं।

इलायची और सौंफ-
इलायची और सौंफ को पीस कर इनका पाउडर बनाकर अगर ठंडे दुध में मिलाकर पीया जाए तो इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है।

इन सब के अलावा पानी को हमारी सेहत के लिए वरदान माना गया है। पानी पीने से सूखी आंखों के लक्षण कम हो जाते हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।

आंखों की रोशनी कम होने का कारण कई बार जैनेटिक भी होता है। इसलिए अपने खान पान पर ध्यान दें और अपनी रोजाना दिनचर्या में ऐसे आहार शामिल करें, जिनमें पोष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में हो। जिससे आंखों को पोषण मिल सके और आंखों की रोशनी बढ़ाई जा सके।

जीवन और मृत्यु देना इंसान नहीं भगवान के हाथ मे है। लेकिन भगवान ने इंसान को डॉक्टर बनाकर उसे जीवन देने का हक दिया है, इस जीवनदानी को डॉक्टर कहते है। आज विज्ञान की मदद से डॉक्टर यहां तक पहुंच गए है कि वह जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे व्यक्तियों के लिए जीवनदाता है। जब हम अपनी सारी उम्मीदें छोड़ देते है, तब हमारे जीवन में स्वास्थ्य लाने के लिए और हमारा साथ देने के लिए केवल डॉक्टर के पास ही जादुई शक्ति होती है।

जब हम रोते हैं, तब हमें कंधों की जरूरत होती है।
जब हम दर्द में होते हैं, तब हमें दुआओं की जरूरत होती है।लेकिन जब हम त्रासदी में होते है, तब हमें डॉक्टर की जरूरत होती है।।

कब और कैसे हुई राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस को मनाने की शुरुआत-

केंद्र सरकार द्वारा भारत में 1991 में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई थी। हमारे देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ विधानचंद्र राय को सम्मान देने के लिए उनके जन्म दिवस पर यह दिन मनाया जाता है।

भारत में कब मनाया जा रहा है डॉक्टर्स डे-

इस वर्ष 1 जुलाई 2021को 31वां राष्ट्रीय डाॅक्टर्स डे मनाया जा रहा है। कोरोना काल में अपनी व परिवार की परवाह न करते हुए डाॅक्टर्स ने जो सेवाएं निभाई है। इसके लिए सभी डाॅक्टर एवं चिकित्सकों को सम्मान देने व उनका हौसला बढ़ाने के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए उनका धन्यवाद किया जाएगा।

राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस मनाने का उद्देश्य-

भारत में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों द्वारा दी जा रही अमूल्य सेवाओं व योगदान को सम्मान देना। भारत सरकार द्वारा 1991 में पहले नेशनल डॉक्टर डे मनाने की घोषणा की थी। इस दिन हमें भी चिकित्सकों के प्रति आभार प्रकट करने के साथ-साथ उन्हें धन्यवाद भी करना चाहिए।
यह दिन उन डाॅक्टरों के लिए सबक का दिन है जो लाचार मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं व बेईमानी करते है।

राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस का महत्व

प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। हमारी जिंदगी में एक डॉक्टर का क्या महत्व व भूमिका है ?? इस का एहसास दिलवाने व डॉक्टरों को सम्मानित करने के लिए ये दिवस मनाया जाता है। जैसे कि हम जान ही सकते हैं कि कैसे कोरोना महामारी के चलते जब सभी लोग अपने घरों में सुरक्षित थे। तो कैसे डॉक्टर अपने परिवार, बच्चों और माता-पिता को छोड़कर दूसरों की सहायता करने के लिए आगे आए।

एक डॉक्टर ही वो भूमिका निभाता है, जो रोते हुए आए अस्पताल के लोगों को हंसाते हुए घर भेजता है।

हमारे विश्वास की डोर है- डॉक्टर

डॉक्टर होना सिर्फ एक काम ही नहीं बल्कि चुनौतीपूर्ण वचनबद्धता है। डॉक्टर ही एक ऐसा व्यक्ति है, जिस पर लोग भगवान की तरह विश्वास करते है। जो हमारे लिए आशा की एक किरण है। जीवन और मौत की लड़ाई लड़ रहे अनगिणत लोगों के जीवन की डोर उनके हाथ में होती है। सभी डॉक्टर जब अपने चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत करते हैं, तो अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाने की कसम खाते है। उनके मन में नैतिकता और जरूरतमंद लोगों की मदद का जज्बा होता है। डॉक्टर की एक छोटी सी भूल से रोगी की जान जा सकती है।

डॉक्टर्स का न कोई दर्द, न कोई आराम, उनकी तो बस जिंदगी है…देश के नाम।

जो व्यक्ति अपने जीवन को समाज के कार्य के लिए लगा देता है और अपना सुख, दुख किसी की जिंदगी को बचाने के लिए लगा देता है। उसके लिए भी एक दिन होना चाहिए और वही एक खास दिन है डॉक्टर्स डे।

डॉक्टर को दुनिया में विभिन्न नामों से जाना जाता है। जैसे हिंदी में चिकित्सक व वैध कई नामों से जाना जाता है। प्राचीन काल से भारत में वैध परंपरा रही है। जिनमें धनवन्तरि, सुश्रुत, जीवक व चरक आदि रहे हैं।

एक अच्छे डॉक्टर की पहचान

एक अच्छा डॉक्टर सबसे पहले एक अच्छा इंसान भी होता है। जो आपकी पीड़ा को महसूस ही नहीं करता, बल्कि वास्तव में उसके लिए चिंतित होता है। वह अपने पेशेंट्स की आर्थिक व पारिवारिक परेशानियों को समझता है। एक अच्छा डॉक्टर बिना किसी स्वार्थ के लंबे लंबे पर्चे लिखने की बजाए अपने पेशेंट्स को अच्छी सलाह देता है।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस को कैसे मनाएं

  • 1 जुलाई को ज्यादातर लोग चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएं देने के लिए फोन करके, मैसेज करके या फिर फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया द्वारा उनका धन्यवाद करते हैं।
  • अपने फैमिली डाॅक्टर के घर जाकर उन्हें गिफ्ट देकर उनका धन्यवाद करते हैं।
  • स्कूलों एवं कालेजों में इस दिन कई प्रोग्राम आयोजित करके डॉक्टरों के महत्व के बारे में लोगों को बताया जाता हैं और धन्यवाद करने के लिए बच्चों द्वारा चित्रकला व ड्राइंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।
  • हम अस्पताल या नर्सिंग होम में जाकर डॉक्टर्स को धन्यवाद करने के लिए उन्हें गिफ्ट भी दे सकते हैं।

कोरोना महामारी में डाॅक्टर्स की अहम भूमिका

इस कोरोना महामारी के दौरान जब कोई जरूरत पड़ी, तो बिना घबराएं लोगों का इलाज करने के लिए डाॅक्टर्स ने ही अपनी अहम भूमिका निभाई। कोरोना संक्रमण के समय हम देख ही रहे है कि कैसे डाॅक्टर्स अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की देखभाल कर रहे है।

निष्कर्ष-

अब आप सभी जान ही गए होंगे डॉक्टर का हमारे जीवन लिए क्या योगदान है। इसी लिए तो भगवान के बाद डॉक्टर को इंसान के रूप में भगवान के समान दर्जा दिया जाता है। एक डॉक्टर ही है, जो व्यक्ति को नया जीवनदान दे सकता है। सभी डॉक्टर्स का फर्ज बनता है कि वह अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए पैसा कमाने को पेशा ना बनाकर मानवीय सेवा को अपना पेशा बनाएं। तभी हमारा डॉक्टर्स डे मनाना सही साबित होगा। लेकिन वर्तमान में डॉक्टर संघर्ष करता हुआ नजर आ रहा है इसके पीछे कई कारण है।