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गर्मियों में आंखों की देखभाल कैसे करें (How to Care for Your Eyes During Summer)

आंखें, जिनसे हम सारा जहान देखते हैं, भगवान के द्वारा दिया हुआ सबसे अनमोल तोहफा हैं। हमारी आंखें बहुत ही नाजुक हैं, इसलिए उनकी देखभाल करना बहुत जरूरी है।

गर्मियों में आंखों की देखभाल के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। बढ़ती गर्मी में बाहर निकलने, पसीने आदि के कारण आंखों में लालिमा आदि की समस्या बढ़ जाती है। समय रहते अगर ध्यान ना दिया जाए, तो यह आंखों के लिए बहुत ही नुकसानदायक हो सकती है।

गर्मियों में आंखों में लालिमा या संक्रमण से बचने के तरीके

गर्मियों में आंखों में लालिमा या संक्रमण से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

1. आंखों में लालिमा क्यों होती है?

डॉक्टरों के अनुसार, आंख में लालिमा बढ़ने का कारण बढ़ता तापमान भी हो सकता है। इसके कारण आंखों में संक्रमण हो सकता है और आंखें लाल हो जाती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि आंखों के अंदर का सफेद हिस्सा लाल पड़ने लगता है। यह सब आंखों की नसों में सूजन के कारण होता है।

2. गर्मी में आंखों की लालिमा बढ़ने के कारण

– आंखों पर सीधे सूर्य की रोशनी पड़ना

सूर्य की सीधी रोशनी भी आंखों में लालिमा के बढ़ने का कारण हो सकती है। इसलिए जब भी धूप में बाहर निकलें, सनग्लास आदि लगा कर निकलें।

– अधिक पसीना आने के कारण

अधिक पसीना भी आंखों की लालिमा का कारण हो सकता है।

– धूल-मिट्टी के कारण

धूल-मिट्टी के कण आंख में जाने पर आंख को मसलना नहीं चाहिए। धूल-मिट्टी के कण आंख में जाने पर आंख में लालिमा बढ़ सकती है।

– एलर्जी रिएक्शन

– बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन

– कंजक्टिवाइटिस

गर्मी में आंखों को लालिमा और संक्रमण से बचाने के घरेलू तरीके

1. बर्फ की सिकाई

बर्फ की सिकाई आंख में लालिमा और जलन को कम करने में मदद करती है।

2. आंखों को ठंडे पानी से धोएं

कई बार पसीना आंखों में जाकर लालिमा का कारण बन जाता है। इससे बचने के लिए आंखों को दिन में तीन से चार बार ठंडे पानी से धोएं।

3. अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें

गर्मी के मौसम में जरूरी है कि आप खुद को हाइड्रेट रखें। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, क्योंकि पानी शारीरिक संक्रमण को दूर करने में मदद करता है।

4. आंखों में गुलाबजल डालें

गुलाबजल आंखों की लालिमा में राहत का काम करता है। अगर आपकी आंखों में कोई धूल का कण चला जाए, तब भी आप गुलाबजल का उपयोग कर सकते हैं।

5. अच्छा खानपान रखें

गर्मी के मौसम में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह हमारी आंखों के लिए भी जरूरी है। ज्यादा तली हुई चीजें ना खाएं। ज्यादा से ज्यादा फल, हरी सब्जियां और जूस पिएं ताकि आपकी आंखें स्वस्थ रहें।

इन तरीकों को अपनाकर आप गर्मी के मौसम में आंखों में होने वाली लालिमा को रोक सकते हैं या अगर आपकी आंखों में यह परेशानी है तो आप ऊपर लिखी बातों का ध्यान रख सकते हैं और अपनी आंखों को हमेशा स्वस्थ रख सकते हैं।

Amazing benefits of eating cucumber: Know the right time to eat cucumber, more than 100 diseases will be cured from the body.

ककड़ी खाने के अद्भुत फ़ायदे : जानिए ककड़ी खाने का सही समय, शरीर से दूर होगी 100 से अधिक बीमारियाँ

How To Eat cucumber(ककड़ी कैसे खाए):
ककड़ी खीरे की तरह दिखने वाला एक फूड है। इसे खाने से बहुत सी बीमारियों के ख़त्म किया जा सकता है। यह हमारे शरीर को सेहतमंद बनाती है। लेकिन अधिकतर लोग इसको खाने का सही तरीका व सही समय नहीं जानते हैं।

ककड़ी और खीरा में अंतर-
खीरा एक हेल्दी फूड है लेकिन ककड़ी को इससे कम फायदेमंद समझने की गलती कभी ना करें। हिंदी की तरह अंग्रेजी में खीरा और ककड़ी दोनों के लिए अलग-अलग शब्द नहीं हैं। दोनों को अंग्रेज़ी भाषा में cucumber कहा जाता है। हालांकि ककड़ी में खीरे के मुकाबले पानी की मात्रा कम होती है, लेकिन विटामिन और मिनरल बहुत सारे होते हैं। आइए आज जानते है ककड़ी खाने का सही समय और सही तरीका क्या हैं।

ककड़ी को खाने का सही तरीका-
खीरे की तरह ककड़ी को सलाद बनाकर खाना चाहिए। इसकी स्मूदी भी खाने में बहुत अच्छी होती है। एक्सपर्ट्स की माने तो ककड़ी खाने का सही टाइम भोजन से पहले का होना चाहिए। बिना समय में लगने वाली भूख को कंट्रोल करने के लिए हम इसे खा सकते हैं।

ककड़ी का सेवन करने से शरीर से भागेंगी 100 से ज्यादा बीमारी
ककड़ी में कैलोरी की कमी और पानी की मात्रा ज्यादा होती है। एक शोध के मुताबिक ऐसे फूड खाने से मोटापा कम होता है। इसे बीमारियों का राजा कहा जाता है जो कि 100 से ज्यादा रोगों को जन्म दे सकता है।

जानिए गर्मी में ककड़ी खाने के अद्भुत फायदे-

गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। हर कोई चाहता है कि वह खुद को इस मौसम में गर्मी की मार से बचा कर रखे। यह मौसम ऐसा है इसमें खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। गर्मी से बचने के लिए जरुरी है, ज्यादा से ज्यादा पानी और विटामिन से भरपूर चीजों का सेवन करें। गर्मी के मौसम में बहुत से फल और सब्जियां ऐसी हैं जो इस मौसम के लिए व हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं और हमें डिहाइड्रेशन से बचाती हैं। इन्हीं में से एक है, ककड़ी।जो पानी से भरपूर होने के साथ साथ विटामिंस, पोटेशियम और फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत है।

कब्ज की समस्या में असरदार –
ककड़ी के नियमित सेवन से कब्ज गैस और अपच जैसे पेट की समस्या से राहत मिलती है। इसमें मौजूद पानी व फाइबर पेट के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद साबित होते हैं।

हड्डियों को मजबूत बनाती है –
ककड़ी में विटामिन के पाया जाता है। जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मददगार है।

स्किन और बालों के लिए लाभकारी –
ककड़ी गर्मी में बहुत फायदेमंद है। यह केवल हमारी पाचन क्रिया को ही नहीं बल्कि हमारी त्वचा और बालों की ग्रोथ के लिए भी फायदेमंद है। ककड़ी का जूस त्वचा पर दाग धब्बे दूर कर इसे चमकदार बनाने में सहायक है।

किडनी के लिए फायदेमंद –
ककड़ी के पानी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पोटेशियम के साथ मिलकर यूरिक अम्ल और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल कर किडनी को स्वस्थ रखता है।
इस प्रकार ककड़ी किडनी को स्वस्थ रखने में मददगार है।

ब्लड प्रेशर नियंत्रण में असरदार —
ककड़ी में पाया जाने वाला पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने सहायक है।

वजन घटाने में मददगार –
हर इंसान चाहता है कि उसका वजन कंट्रोल में रहे। इसमें ककड़ी बहुत लाभकारी है। ककड़ी में बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है और इसमें पाया जाने वाला फाइबर काफी समय तक भूख नहीं लगने देता। इस प्रकार ककड़ी खाने से हम बार बार खाने की समस्या से बचे रहते हैं।

इसके अलावा हम इसे स्नेक्स की तरह भी खा सकते हैं।
इस प्रकार ककड़ी इस गर्मी के मौसम का में पानी और विटामिन का सबसे अच्छा स्त्रोत है। जो हमें बहुत सी बीमारियों से बचाने में सहायक है।

Yaad -E – Murshid Free Polio Camp

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आने वाली 18 तारीख़ को हरियाणा की एक संस्था में निःशुल्क विकलांगता निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। आपको बता दें यह शिविर हर साल लगाया जाता है और सैंकड़ों लोग इस शिविर का हिस्सा बनते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें यह शिविर हरियाणा के डेरा सच्चा सौदा सिरसा में लगाया जा रहा है। आपको बता दें कि यह शिविर डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज की पावन स्मृति में हर साल लगाया जाता है। जो पूर्ण रूप से निःशुल्क लगाया जाता है। इस कैंप में सभी तरह की मेडिकल सुविधा फ्री में दी जाती है।

याद-ए-मुर्शीद विकलांगता निवारण शिवर —
मानवता को सर्पित है डेरा सच्चा सौदा का निःशुल्क याद-ए-मुर्शीद विकलांगता निवारण शिवर। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Dera Sacha Sauda में यह कैंप Baba Ram Rahim ji की पावन प्रेरणा से हर साल “18 अप्रैल” को “पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज” की पावन स्मृति में लगाया जाता है। इस कैंप में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ अपनी सेवाएं फ्री में देते हैं। Dera Sacha Sauda में इस तरह के कैंप निरंतर रूप से लगते रहते हैं।

Yaad E Murshid Free Polio & Disability Correction Camp के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी –

इस कैंप के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी जा रही है –

दिनांक — 18 अप्रैल 2024
समय -सुबह 9:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक

स्थान — शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल , सिरसा (हरियाणा) 125055

फोन नं — 01666- 260222, 97288- 60222

Baba Ram Rahim के मार्गदर्शन में DSS में disability camp की तरह और भी अन्य मासिक कैंप लगाए जाते हैं।

रक्तदान शिविर, फ्री मेडिकल कैंप, याद -ए – मुर्शीद फ्री Eye camp आदि Dera Sacha Sauda में लगने वाले कैंप मानवता को समर्पित हैं। अगर आपके आस-पास कोई भी शारीरिक रूप से विकंलाग है और आर्थिक रूप से अपना इलाज करवाने में असमर्थ है, तो आप उन्हें इस शिविर की जानकारी दें, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस कैंप का हिस्सा बन सके।

Eid-ul-Fitar 2024: Significance and Celebrations:

मुस्लिमों के लिए ईद का त्योहार बहुत ही खास होता है। इसे दुनियाभर में मुसलमान अपने अपने तरीके से नमाज अदा करके मानते हैं। वर्ष 2024 की पहली ईद इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार माह ए रमजान पूरा होने के बाद शावल की पहली तारीख को मनाया जाता है। इसे ईद उल फितर, ईद अल फितर, रमजान ईद या मीठी ईद आदि नामों से भी जाना जाता है।

Eid -ul -Fitar Meaning – ईद-उल-फितर का अर्थ है: ‘व्रत तोड़ने का त्योहार’। यह रमजान के अंत का प्रतिक है। ईद-उल-फितर की तारीख “चंद्रमा के चक्र” से तय होती है। इस दिन मुसलमान न केवल उपवास की समाप्ति का जश्न मनाते हैं, बल्कि पूरे रमज़ान के दौरान उन्हें दी गई मदद और शक्ति के लिए अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं।
Eid -ul -Fitar Celebration – ईद-उल-फितर से पहले के दिनों में, इतालवी मुसलमान इस अवसर को मनाने के लिए विभिन्न तैयारियों में जुटे होते हैं। घरों को साफ किया जाता है और सजाया जाता है । नए कपड़े खरीदे जाते हैं या सिलवाए जाते हैं और विशेष भोजन की योजना बनाई जाती है। यह उत्साह का समय है क्योंकि परिवार प्रार्थनाओं, दावतों और उत्सवों के लिए इकट्ठा होने की तैयारी करते हैं। भारत देश में आज के दिन ईद के त्योहार को बड़ी ही धूमधाम से व बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। ईद का यह पवित्र पर्व सौहार्द व भाईचारे का प्रतीक होता है। आज के दिन मुस्लिम समाज के लोग नमाज पढ़कर पूरे विश्व में शांति और अमन की दुआ करते हैं। नमाज़ पढ़ने के बाद सभी एक दूसरे के घर जाकर मुंह मीठा करते हैं और एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं।
Eid -ul -Fitar Celebration Day and Date – ईद उल फितर किस महीने में और कब मनाई जाती है इसका फैसला चांद के दीदार से किया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर हिज़री के 10वें महीने शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है । अबकी बार भारत में ईद उल फितर 11 अप्रैल को मनाई जा रही है क्योंकि इसी दिन चांद दिखाई देगा। ईद के त्योहार के दिन घर पर मीठे पकवान बनाए जाते हैं। सभी के घरों में सेवियाँ बनाई जाती हैं। नए-नए कपड़े पहनकर, इत्र लगाकर, एक दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देना, यह सब करना, इस त्यौहार की खुशियां हैं। लेकिन सिर्फ ये काम करने से ईद पूरी नहीं होती । लोग समूहों में जाकर नमाज अदा करते हैं और एक दूसरे को गले लगकर ईद मुबारक बोलते हैं और समाज में अमन शांति के लिए अल्लाह से दुआ करते हैं।

Chaitra Navratri 2024

Chaitra Navratri इस वर्ष 9 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है। 9 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आदिशक्ति मां दुर्गा की उपासना का उत्सव शुरू हो रहा है। नवरात्रि 9 April से प्रारंभ होकर 17 April तक चलेगी। जिसमें माता के 9 स्वरूपों की आराधना की जाएगी।
पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कुष्मांडा, पांचवी स्कंदमाता, छठी कात्यायनी, सातवीं कालरात्रि, आठवी महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री यह मां दुर्गा के 9 स्वरूप हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में चार बार नवरात्रि आती है। इसमें चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि प्रत्यक्ष होती हैं। दो गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ नवरात्रि होती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि से हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत का आरंभ होता है। जिसे भक्त उल्लास पूर्वक मॉं दुर्गा की पूजा अर्चना करके मानते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 14 मार्च से 13 अप्रैल तक खरमास है। यह महीना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महीना होता है। इसी माह में मॉं दुर्गा की पूजा का विशेष त्यौहार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है। इससे यह पर्व और भी अधिक विशेष हो गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होना सभी के लिए बेहद शुभ है। मां दुर्गा की आराधना करके नवरात्रि में आसानी से माता का आशीर्वाद पाया जा सकता है। यह भी मान्यता है कि नवरात्रि में मॉं जगदंबा धरती पर ही विराजमान होती है और भक्तों का कल्याण करती हैं।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥

चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना मुहूर्त-
चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना मंगलवार 9 अप्रैल 2024 को होगी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 8 अप्रैल 2024 को रात 11:50 बजे प्रारंभ होगी और प्रतिपदा तिथि समाप्त 9 अप्रैल 2024 को रात 8:30 बजे होगी।

कलश स्थापना मुहूर्त – सुबह 6:05 बजे से 10:16 बजे तक रहेगा।
कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:57 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा।

नवरात्रि पूजा के नियम-

वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि पूजा ( Navratri Pooja) में नियमों का पालन बहुत ही जरूरी है।

⁃ नवरात्रि पूजा में घर के ईशान कोण (उत्तर पूर्व) में कलश और माता की फोटो स्थापित करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यह स्थान देवताओं का है इसीलिए इस दिशा में कलश स्थापना से सकारात्मकता बढ़ती है।

⁃ नवरात्रि पूजा के दौरान आप घर के मैन गेट पर लक्ष्मी माता के चरण चिन्ह लगाए जो की बेहद शुभ माने जाते है।

⁃ घर में नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने के लिए ????️ ओम का निशान घर के मुख्य द्वार पर बनाए।

⁃ नौकरी और व्यवसाय में तरक्की के लिए ऑफिस के मैन गेट पर लाल, पीले फूल डालकर एक बर्तन में जल भर कर रखें।

⁃ नवरात्रि में नौ दिनों की अखंड ज्योति जलाई जाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अखंड ज्योति को दक्षिण पूर्व की दिशा में रखना शुभ होता है, इससे घर के लोगों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

आदिशक्ति मॉं दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का यह उत्सव भक्तों का कल्याण करता है और मनवांछित फल प्रदान करता है।

First Solar Eclipse : 8 अप्रैल को लगने जा रहा है इस साल का पहला सूर्य ग्रहण

First Solar Eclipse of 2024:
8 अप्रैल को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण (First Solar Eclipse of 2024) लगने वाला है। यह ग्रहण विश्व के अलग-अलग स्थानों पर दिखाई देगा। खास तौर पर मैक्सिको, अमेरिका और कनाडा में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा।

क्या होता है सूर्य ग्रहण ?

चाँद के धरती और सूर्य के बीच आने के कारण लगता है सूर्य ग्रहण। चाँद सूर्य को पूर्ण या आंशिक रूप से ढक लेता है और सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती।
इस वर्ष का सूर्यग्रहण (Solar eclipse of 2024) दुनिया के तीन देशों में ही दिखाई देगा। इस पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य की पूरी डिस्क को ढक लेगा और दिन में अंधेरा छा जाएगा।

कहाँ और कब देखा जा सकेगा First Solar Eclipse of 2024 :
आपकी जानकारी के लिए बता दें की 8 अप्रैल को लगने वाले साल के पहले सूर्यग्रहण (First Solar Eclipse) को मैक्सिको, अमेरिका और कनाडा में देखा जा सकेगा। अलग-अलग देशों के अनुसार इसकी अवधि अलग-अलग रहेगी। माना जा रहा है कि अमेरिका के टेक्सास में इसका सबसे ज्यादा असर रहेगा। टेक्सास के कुछ इलाकों में 4 मिनट 25 सेकंड तक पूर्ण सूर्यग्रहण रहेगा और अंधेरा छा जाएगा।
मैक्सिको में इसका असर 40 मिनट 43 सेकंड तक होगा। अमेरिका में यह ग्रहण 67 मिनट 58 सेकंड तक के लिए होगा और कनाडा में 34 मिनट 4 सेकंड ही इस सूर्यग्रहण को देखा जा सकेगा। बता दें कि ग्रहण के समय भारत में रात होने के कारण (रात्रि 10:08 – 1:25 बजे), इसे भारत में (in India) देखना मुमकिन नहीं होगा।

When was the First Solar Eclipse?
वैसे तो सूर्य, चंद्र, अंतरिक्ष या इनसे संबंधित खगोलीय घटनाओं की शुरुआत के बारे में जानकारी या साक्ष्य जुटा पाना संभव नहीं है। फिर भी इतिहासकारों का मानना है कि पहला सूर्यग्रहण 22 अक्तूबर, 2134 ई.पू. को प्राचीन चीन में लगा था। हालांकि इसे रिकॉर्ड नहीं किया जा सका सका था।
3 मई 1375 या 5 मार्च 1223, ई०पू० प्रमाणिक सूर्यग्रहण के सूर्यग्रहण को सबसे पहला सूर्यग्रहण (First Solar Eclipse) माना जाता है। यह ग्रहण कांस्य युग के उगारिट शहर में 3247 साल पहले दिखाई दिया था, जो कि वर्तमान सीरिया में है।

When was the solar eclipse first discovered?
अनेक्सागोरस (Anaxagoras) नामक एक ग्रीस विद्वान ने सबसे पहले सूर्य और चंद्र ग्रहण के लिए सटीक वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की। ई०पू० के समय में ग्रहणों से संबंधित सही थ्योरी उनकी ही थी। वर्तमान में कई चीनी और ग्रीक दार्शनिकों ने ग्रहण को विस्तार से जानने के प्रयत्न किए। परंतु जोहानस केपलर ने 1605 में पूर्ण सूर्यग्रहण की प्रमाणिक व्याख्या पेश की।

Noble Gas first observed during solar eclipse?
हीलियम (Helium) एक ऐसी गैस है, जिसे 18 अगस्त, 1868 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सबसे पहले पाया गया। (noble gas first observed during solar eclipse) लार्कयर ने हीलियम को सूर्य के करोमोस्फीयर में पाया। गौरतलब है कि उससे पहले तक यह गैस धरती पर भी नहीं पाई गई|

How A Solar Eclipse first proved Einstein right?
सूर्य ग्रहण विज्ञानिकों को शोध, रिसर्च व खोज के नये अवसर प्रदान करते हैं। इसी कड़ी में 29 मई 1919 का सूर्य ग्रहण विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा महत्त्वपूर्ण साबित हुआ। 1919 के सूर्य ग्रहण ने महान वैज्ञानिक आइंस्टीन की सामान्य सापेक्षता (General Relativity) की थ्योरी को सही साबित कर दिया था।
1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने रिलेटिविटी से संबंधित एक सिद्धांत प्रस्तुत किया। जिसके अनुसार तारों से निकलने वाला प्रकाश सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण मुड़ जाता है। यानि की अब दिखाई देने वाले तारों का स्थान उनका वास्तविक स्थान नहीं है। उनकी यह थ्योरी 1919 के सूर्य ग्रहण ने सच साबित कर दी(solar eclipse proved Einstein right).

भारत में सूर्यग्रहण (in India) :
भारत में (in India) सूर्य और चंद्रग्रहण की सर्वप्रथम व्याख्या आर्यभट्‌ट ने की। माना जाता है कि भारत में सूर्यग्रहण को धार्मिक महत्वों के साथ जोड़ा जाता है। इस साल 8 अप्रैल का सूर्यग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा। भारत में (in India) अगला सूर्यग्रहण 2031 में देखा जा सकेगा।

Chandigarh Tourist Places: अगर आपका वीकेंड में घूमने का है प्लान, तो 2 दिनों में चंडीगढ़ की इन जगहों को कर सकते हैं आप कवर

Best Places to Visit in Chandigarh: यदि आप घूमने का सोच रहे हैं, तो चंडीगढ़ शहर में ऐसी कई जगह हैं जहां पर आप अपने वीकेंड को बहुत ही अच्छे तरीके से enjoy कर सकते हैं। आइए आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताते हैं, जहां आप बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं और आपका ज्यादा समय भी बर्बाद नहीं होगा। चंडीगढ़ के ये स्थान बेहद शांत और खूबसूरत हैं।

Top and Famous  Chandigarh tourist places: जब भी हम घूमने की बात करते है, तो एक्साइटमेंट तो बहुत ज्यादा हो जाती है, बहुत से लोगों को घूमना बहुत पसंद होता है। लेकिन जैसे ही ट्रैवलिंग (Travelling) के बारे में सोचते है, तो लगता है कि एक से दो दिन तो सफर में ही बीत जाएंगे। घूमने का तो समय ही नहीं मिलेगा। तो घबराइए मत, यदि आप घूमना भी चाहते हैं और अपनी ट्रैवलिंग का समय भी बचाना चाहते हैं, तो ऐसी बहुत से place हैं, जो आपके शहर में मौजूद हैं। जहां जाने के लिए आपके पास समय ही समय है।

घूमते-घूमते हुए गुजारें अपना वीकेंड- यदि आप लोग चंडीगढ़ घूमने का प्लान कर रहे हैं, तो यहां ऐसी कई जगहें हैं, जहां पर आप अपना वीकेंड बहुत ही अच्छी तरह से enjoy कर सकते हैं। आप किसी दूसरे शहर से आए हैं तो भी आप यहां शानदार वीकेंड गुजार सकते हैं और अगर आप चंडीगढ़ (Weekend Plan in Chandigarh) के बाहर भी आस-पास जाना चाहते हैं, तो भाई क्या ही कहने। चंडीगढ़ से कुछ ही दूरी पर कुछ हिल स्टेशन भी है, जहां जाने में आपको ज्यादा समय नहीं लगेगा।

चंडीगढ़- शांत और खूबसूरत- आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने वाले हैं, जहां आप बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां जाने पर आपका समय ज्यादा बर्बाद नहीं होगा। चंडीगढ़ की ये जगहें बेहद शांत, रोमांचक और खूबसूरत हैं। यानी की आप आराम से अपनी छुट्टियां एन्जॉय कर सकते हैं। इतना पढ़ने के बाद मन में चंड़ीगढ़ जाने के बारे में एक बार तो सोच ही लिया होगा आपने।

चंडीगढ़ में क्या है खास – आइये पहले चंडीगढ़ के बारे में कुछ जान लेते हैं। जी हां यदि आप कहीं घूमने जाने का प्लान कर रहें हैं तो जाहिर सी बात है कि आपको उस जगह के बारे में पता होना चाहिए। बहुत नहीं पर थोड़ा बहुत इतिहास जानना तो बनता है न दोस्त।
सबसे पहले आपको जानकारी के लिए बता दें कि चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब की राजधानी है। हालांकि, देश आज़ाद होने से पहले पंजाब की राजधानी लौहार हुआ करती थी, लेकिन देश की आज़ादी के बाद नई राजधानी की जरूरत पड़ी और 1947 में चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी घोषित किया गया। चंडीगढ़ का नाम यहां पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक मंदिर मां चंडी मंदिर के नाम से मिला है। ये दिल्ली से 245 किलोमीटर दूर स्थित है। देश-दुनिया के पर्यटक यहां आते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं रॉज गार्डन से और रॉक गार्डन से जो यहां सबसे ज्यादा फेमस है। जहां घूमने वालों की संख्या भी सबसे ज्यादा होती है।

रोज गार्डन (Rose Garden)- चंडीगढ़ में स्थित रोज गार्डन(Rose Garden) को एशिया(Asia) के सबसे बड़े रोज गार्डन में से एक माना जाता है। रोज गार्डन चंडीगढ़ (Chandigarh) में रॉक गार्डन के बाद सबसे ज्यादा घूमा जाने वाला गार्डन है। रोज गार्डन का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के नाम पर रखा गया है। इस खूबसूरत उद्यान की स्थापना 1967 में की गई थी। यह पार्क 10 एकड़ में फैला हुआ है और यहां गुलाब की कई प्रजातियां है। इन्हें बेहद खूबसूरत तरीके से प्रदर्शित किया गया है। यहां 1600 से अधिक तरह के फूल पाए जाते हैं। आपको बता दें कि इस रॉज गार्डन में वार्षिक गार्डन फेस्टिवल भी मनाया जाता है। ये फरवरी और मार्च के दौरान एक प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम(cultural program) होता है।

आख़िर क्या है खास रोज़ गार्डन में:- यहां तरह-तरह के गुलाब के फूल मिलेंगे। यहां 32,500 किस्म के पेड़ व औषधीय पौधे मौजूद हैं। यहां लोगों के लिए जॉगिंग ट्रैक भी उपलब्ध है और लोगों को आकर्षित करने के लिए पानी का फव्वारा भी है।

रॉक गार्डन (Rock Garden)- रॉक गार्डन चंडीगढ़ शहर की जानी-मानी घूमने की जगह है। यह चंडीगढ़ की सबसे ज्यादा घूमने वाली जगहों में से एक है। यहां सबसे ज्यादा पर्यटकों का आना-जाना है। यह गार्डन मूर्तिकला, वास्तुकला और पौराणिक कथाओं का मिश्रण है। रॉक गार्डन चंडीगढ़ में स्थित 35 एकड़ की भूमि में बनाया गया एक बड़ा गार्डन है। इसकी खास बात यह है कि यह घरेलू कचरे और कई औद्योगिक वस्तुओं से बनाया गया है। इस उद्यान में चूड़ियां, चीनी मिट्टी के बर्तन, टाइलें, बोतलें और बिजली के कचरे जैसी वस्तुओं का उपयोग करके मूर्तियां बनाई गई हैं।

इतिहास- History
रॉक गार्डन के पीछे की कहानी यह है कि इसके संस्थापक नेक चंद ने 1957 में अपने खाली समय में गुप्त रूप से इस गार्डन को बनाना शुरू किया था। इस गार्डन का layout एक खोए हुए साम्राज्य की कल्पना पर आधारित है। इसमें 14 कमरे बने हुए हैं। लगभग हर त्योहार के समय रॉक गार्डन त्योहार जैसा माहौल बना देता है।

आखिर क्या खास है रॉक गॉर्डन में?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मनुष्यों और जानवरों की आकृतियां बनाने के लिए टूटे हुए कांच के टुकड़े, शौचालय के उपकरण और टूटी टाइलों का उपयोग किया गया है। रॉक गार्डन में जाने के बाद आपको ऐसा लगेगा, जैसे आप किसी गांव में आ गए हों। इसमें सुंदर झोपड़ियां बनाई गई है। यह गार्डन रोमन वास्तुकला से प्रेरित होकर बनाया गया है। यहां बच्चों के लिए झूले भी लगे हुए हैं। यहां झरने और एक्वैरियम भी बने हुए हैं, जहां हम चारों ओर घूमती हुई मछलियां भी देख सकते हैं। यहां पर एक तरह का ओपन एयर थिएटर है, जिसकी सीढ़ियों पर बैठकर आप हंसता हुआ दर्पण प्रदर्शन, एंटीक वस्तुओं की दुकान, ऊंट और रेलगाड़ी की सवारी और फूड कोड का आनंद ले सकते हैं।

पता और एंट्री फीस:
ये उद्यान चंडीगढ़ के उत्तर मार्ग, सेक्टर-1 में स्थित है। यहां पर एंट्री फीस भी है। बड़ों के लिए 30 रुपए और बच्चों के लिए- 10 रुपए ticket है।

सुखना लेक (Sukhna Lake): Sukhna Lake भी चंडीगढ़ में आकर्षण का केंद्र है। आपको बता दें सुखना लेक 3 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली हुई है, सुखना लेक में सर्दियों के महीनों में कई विदेशी प्रवासी पक्षी, साइबेरियन, बत्तख और क्रेन का आवागमन होता है। सुखना लेक (Sukhna lake) को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय आर्द्रभूमि घोषित किया गया है। मानसून के समय यहां अधिकतर लोग यहाँ पर घूमने आते हैं। यहां पर ज़्यादातर लोग अपने परिवार को लेकर आते हैं। सुखना लेक एशिया में नौकायन व नौकायन आयोजनों के लिए प्रचलित है।

क्या खास है सुखना लेक में: Boating: यहां पर लोग सैलानी बोटिंग भी करते हैं। यहां पर आपको 2 सीटर, 4 सीटर, शिकारा बोट, सोलर क्रूज मिल जाती हैं, जिसमें बोटिंग करके आप इस लेक का आनंद उठा सकते हैं और अपने वीकेंड को यादगार बना सकते हैं।
Park: इस लेक पर पार्क भी बनाया गया है। जिसमें बच्चे ट्रेन की सवारी कर सकते हैं। यहां पर बुल राइड भी की जाती है, जो बेहद मजेदार होती है यक़ीनन यह आपको बहुत पसंद आएगी।
Food court: यहां पर खाने-पीने के लिए सिटको कैफेटेरिया, शेफ लेक व्यू और कई फूड कोर्ट बने हुए हैं।
सुखना लेक की सुंदरता को बढ़ाने के लिए यहाँ पर विभिन्न मूर्तियां भी बनाई गई हैं। यहां आपको जॉगिंग ट्रैक भी मिलेगा, जहां पर आप सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य का आनंद उठा सकते हैं।

कहां है स्थित सुखना लेक- Address
सुखना लेक(Sukhna lake) चंडीगढ़ शहर के सेक्टर-1 में स्थित है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां पर जाने के लिए कोई एंट्री फीस नहीं है।

सेक्टर-17 मार्किट – Sector -17 Market
आप चंडीगढ़ घूमने आ ही गए हैं, तो मन कर रहा होगा कि थोड़ी शॉपिंग भी की जाए। चंडीगढ़ का सबसे फेमस मार्केट यहां पर सेक्टर-17 में है। शहर के बीचों-बीच होने के कारण इसे सिटी सेंटर भी कहा जाता है। यह इलाका 240 एकड़ में बना हुआ है। यहां पर आपको कई बड़े ब्रांड की दुकाने, इंटरनेशनल फूड भी मिलता है। खाने-पीने की सभी दुकानें सेक्टर-17 के बाज़ार में मिल जाती हैं।

क्या है खास यहाँ पर?
यहां एक मूवी थिएटर है। यहाँ पर स्थानीय दुकानें और अंतर्राष्ट्रीय ब्रेंड स्टोर है। शाम के म्यूजिकल फाउंटेन शो होता है, जो कि 7 बजे, 8 बजे और 09:00 बजे आयोजित किया जाता है। इन म्यूजिकल फाउंटेन शो में लोग इतने घुल जाते हैं कि वे खुद नाचने गाने लगते हैं।

चंडीगढ़ में स्थित म्यूजियम : Museum in Chandigarh

चंडीगढ़ के म्यूजियम बड़ी तेजी से पर्यटकों के लिए आकर्षणों का एक अहम हिस्सा बन रहे हैं। चंडीगढ़ में प्रतिष्ठित सरकारी संग्रहालय, आर्ट गैलरी, चंडीगढ़ के तीन वास्तुकला संग्रहालय, प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय, रॉक गार्डन में राग गुड़िया संग्रहालय और उच्च न्यायालय संग्रहालय लोगों के लिए इतिहास के बारे में जानने के लिए बेहद खास बनता जा रहा है। ये संग्रहालय चंडीगढ़ में घूमने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

इंटरनेशनल डॉल्स म्यूजियम- इंटरनेशनल डॉल्स म्यूजियम की स्थापना वर्ष 1985 में बाल भवन परिसर में की गई थी। इसमें 25 देशों (25 countries) की विरासत गुड़ियों का संग्रह दिखाया गया है। जिसमें ऐतिहासिक, भौगोलिक कलात्मक, सामाजिक-सांस्कृतिक, फैशन डिजाइन और पोशाक विशेषताओं के साथ विदेशी और स्वदेशी गुड़िया शामिल हैं। इसमें बच्चों के लिए गुड़ियों के रंगीन आदमकद कटआउट भी हैं।
इस खबर से जुड़ी सभी जानकारी चंडीगढ़ की अधिकारिक वेबसाइट (official website) से ली गई है।

लाल मिर्च पाउडर में भरा होता है ईंट का चूरा, चिरने लगेंगी आपकी आंतें, FSSAI ने बताया घर में इस तरीके से करे नकली मिर्च की जांच-

आज के आधुनिक समय में मसालों में मिलावट करना आम बात हो गई है और मिलावटी चीजें खाने से इंसान की सेहत पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। आप सभी के घरों में इस्तेमाल होने वाले लाल मिर्च पाउडर में भी ईंट के चुरे की मिलावट हो सकती है। जानिए घर पर रहते हुए इसकी पहचान कैसे करे।
 हम सभी के घरों में लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों में से एक है। खाना में सब्जी को स्वाद और गहरा रंग देने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। पुराने समय में साबुत लाल मिर्च को धूप में सुखाकर और पीसकर उसका पाउडर बनाया जाता था और फिर इसके इस्तेमाल में लिया जाता था। लेकिन अब लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) के पैकेट मिलने लगे हैं।
लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) में भरा होता है ईंट का चूरा, जो दे रहा बिमारियों को बुलावा, FSSAI ने बताया हम घर में रहते कर सकते है लाल मिर्च की जांच-

आज के समय में खाने-पीने की लगभग सभी चीजों में मिलावट होने लगी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आप जो लाल मिर्च पाउडर अपनी रसोई में इस्तेमाल कर रहे हैं, आख़िर वह कितना सुरक्षित है? क्या आपके लाल मिर्च पाउडर में कोई मिलावट तो नहीं है?
आजकल लोग अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए व पिसे हुए मसालों की मात्रा बढ़ाने और उन्हें गहरा रंग देने के लिए उनमें मिलावट कर रहे है। अधिकतर व्यापारी मसालों का वजन बढ़ाने के लिए उन में लकड़ी का बुरादा, ईंट का चूरा और कृत्रिम रंगों का उपयोग कर रहे है। यह मसाले इंसान के पेट में जाकर कई खतरनाक बीमारियों को बुलावा देकर उन्हें मरीज बना सकते हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने एक आसान तरीक़ा बताया है जिसके द्वारा आप कुछ ही सेकंड में असली-नकली लाल मिर्च पाउडर की जांच कर सकते हैं।
लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) में मिलावट क्यों की जाती है?
आज के समय में खाने में मिलावट करना आम बात हो गई है। लोग पैसे कमाने में इतने लीन हो गए हैं कि न जाने वो कितने लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे है। ऐसे ही आज हम बात कर रहे है लाल मिर्च पाउडर की। आमतौर पर पिसे हुए मसालों की मात्रा बढ़ाने और उनका रंग निखारने के लिए उनमें मिलावट की जाती है। मिर्च पाउडर में आमतौर पर ईंट पाउडर, नमक पाउडर या टैल्क पाउडर की मिलावट की जाती हैं।
असली-नकली लाल मिर्च पाउडर की ऐसे करें जांच-
घर पर लाल मिर्च पाउडर में मिलावट की जांच ऐसे करें
  • एक गिलास सादे पानी ( normal water) में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाए।
  • पानी में घुले हुए पाउडर को थोड़ी मात्रा में लेकर अपने हाथ में रगड़ें।
  • यदि इसको रगड़ने के बाद कोई खुरदरापन महसूस होता है, तो इसमें लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) में ईंट का पाउडर या रेत की मिलावट है।
  • यदि अवशेष साबुन जैसा और चिकना लगता है, तो इसमें सोप स्टोन की मिलावट है।
आर्टिफिशियल कलर की ऐसे करें जांच-
  • इसे चमकीला रंग देने के लिए लाल मिर्च पाउडर में आर्टिफिशियल कलर मिक्स किए जाते हैं।
  • एक गिलास पानी में थोड़ा सा मिर्च पाउडर छिड़कें।
  • अगर इसमें आपको एक रंगीन लकीर नजर आती है, तो लाल मिर्च पाउडर मिलावटी हो सकता है।
  • लाल मिर्च पाउडर में कई बार पानी में घुलनशील तारकोल रंग मिलाया जाता है।
स्टार्च का पता लगाने के लिए ऐसे करें जांच-
  • लाल मिर्च पाउडर की मात्रा बढ़ाने के लिए अक्सर इसमें स्टार्च भी मिलाया जाता है।
  • स्टार्च की जांच के लिए पिसे हुए मसाले में टिंचर आयोडीन या आयोडीन घोल की कुछ बूंदें मिलाए।
  • यदि यह नीले रंग में बदलता है, तो यह लाल मिर्च पाउडर में स्टार्च की वजह से हो सकता है।
सेहत के लिए खतरनाक है ईंट का पाउडर
ईंट पाउडर आमतौर पर ईंट के चूरे से बनता है, जो दिखने में लाल रंग का होता है। इस पाउडर का रंग और बनावट लाल मिर्च के पाउडर के समान होती है। इसलिए इसका उपयोग अक्सर मिलावटी पदार्थ के रूप में किया जाता है। यह सेहत के लिए बहुत खतरनाक होता है। इसके नियमित सेवन से शरीर पर गंभीर परिणाम होते हैं। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है।

ISRO का सबसे आधुनिक, महत्वपूर्ण व अडवांस मौसम सैटेलाइट INSAT -3DS किया गया सफलतापूर्वक लॉन्च-

ISRO का सबसे आधुनिक व महत्वपूर्ण मौसम सैटेलाइट INSAT-3DS सफलतापूर्वक लॉन्च हो चुका है। इस सैटेलाइट GSLV-F14 को राकेट श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 2 से छोड़ा गया है, यह सैटेलाइट समुद्र, मौसम और इमरजेंसी सिग्नल सिस्टम की जानकारी देने के साथ-साथ राहत एवं बचाव कार्यों में मदद करेगा। इसलिए इसे बनाया गया है।
17 फरवरी 2024 की शाम को 5 बजकर 35 मिनट पर भारत का सबसे एडवांस मौसम सैटेलाइट INSAT-3DS  सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है। इसके श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से GSLV- F14 राकेट के जरिए इनसेट -3 डीएस सैटेलाइट को उसकी तय कक्षा में छोड़ा गया है, जोकि इस सीरीज का तीसरी पीढ़ी का सैटेलाइट है।
इस लॉन्चिंग में तीन बड़ी उपलब्धियां हासिल हुईं। जैसे कि यह GSLV के द्वारा 16वीं उड़ान है, स्वदेशी क्रायो स्टेज की ये 10वीं उड़ान और स्वदेशी क्रायो स्टेज की सातवीं ऑपरेशनल फ्लाइट होगी। GSLV-F14 रॉकेट ने लॉन्चिंग के बाद इनसैट-3डीएस सैटेलाइट को उसकी तय कक्षा में पहुँचाया है, आपको बता दें, इसके पश्चात अब सैटेलाइट के सोलर पैनल्स भी खुल गए हैं। सूरज से मिलने वाली रोशनी से सैटेलाइट को ऊर्जा मिलती रहेगी और यह लगातार काम करता रहेगा।
यह सैटेलाइट 170 किलोमीटर पेरीजी और 36,647 किलोमीटर वाली अंडाकार जीटीओ की कक्षा में अब चक्कर लगाएगा। सैटेलाइट का कुल वजन 2274 किलोग्राम इसकी फंडिंग पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने की है जिसमें 6 चैनल इमेजर (Channel Imager) है और 19 चैनल साउंडर मेटियोरोलॉजी पेलोड्स मौजूद हैं। यह नया सैटेलाइट अपने पुराने सैटेलाइट के साथ मिलकर हमें मौसम की जानकारी देगा।
यह सैटेलाइट क्या-क्या काम करेगा-
  • अलग-अलग स्पेक्ट्रल वेवलेंथ के जरिए धरती की सतह, समुंद्र और पर्यावरण पर नजर रखेगा।
  • वैज्ञानिकों को अलग-अलग जगहों से डेटा कलेक्ट करके देगा।
  • वायुमंडल में होनी वाली अलग-अलग मौसमी पैरामीटर्स का वर्टिकल प्रोफाइल देगा।
  • बचाव व राहत कार्यों के दौरान मदद करेगा।
सातवां सैटेलाइट हुआ लॉन्च-
आपकी जानकारी के लिए बता दें, अब सातवां सैटेलाइट लॉन्च हुआ है। पहले छह सैटेलाइट 2000 से 2004 में लॉन्च हुए थे।
जिससे संचार, टीवी ब्रॉडकास्ट और मौसम संबंधी जानकारियां मिल रही थी। अब इस सातवें सैटेलाइट के द्वारा समुंद्र, मौसम और इमरजेंसी सिग्नल सिस्टम की जानकारी के साथ-साथ बचाव कार्यों में मदद मिलेगी।
मौसम की सटीक जानकारी-
यह यंत्र भारत व उनके आसपास मौसम में होने वाले बदलावों में जानकारी देगा, ताकि लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के आने से पहले ही सूचना दी जा सके और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

Dera Chief Gurmeet Ram Rahim को मिली 50 दिनों की पैरोल

हरियाणा में स्थित डेरा सच्चा सौदा के Chief Baba Ram Rahim, जो आए दिन सुर्ख़ियों में रहते है उनको एक बार फिर पैरोल मिल चुकी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें, इस बार यह पैरोल 50 दिनों के लिए मिली है। हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को इस पैरोल के लिए मंजूरी दी है। जिसके तहत Dera Chief कभी भी जेल से बाहर आ सकते हैं। रोहतक की सुनारिया जेल में रह रहे Gurmeet Ram Rahim पहले भी कई बार पैरोल पर बाहर आ चुके हैं। हरियाणा सरकार का कहना है कि उन्हें यह Parole नियमों के आधार पर ही दी जाती है।

क्या Baba Ram Rahim को बार-बार Parole मिलना सही है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें, आमतौर पर पैरोल कैदी की अस्थायी रूप से रिहाई होती है। लेकिन पैरोल कैदी के अनुरोध पर दी जाती है, जबकि पैरोल मिलना कैदी का क़ानूनी अधिकार है। पैरोल सरकार द्वारा जेल में बंद लोगों को दिया गया एक मौका है। जिसका उद्देश्य होता है की क़ैदी को कुछ समय तक जेल में रहने के बाद सामान्य जीवन में वापस आने में मदद मिले। Baba Ram Rahim की कहानी के मामले में, यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि उन्हें पैरोल देना कोई साधारण बात नहीं है। इस बारे में हरियाणा सरकार का कहना है कि वह राम रहीम को पैरोल देकर कानून का पालन कर रहे है।

क्यों मिल रही है Baba Ram Rahim को बार-बार पैरोल?

आपको बता दें, साल में कोई भी कैदी तीन बार फरलो ले सकता है। फरलो पारिवारिक, व्यक्तिगत व सामाजिक गतिविधियों को पूरा करने के लिए दी जाती है। वहीं अगर बात करें Parole की, तो इसके लिए कारण बताना जरूरी होता है। पैरोल की अवधि एक महीने तक बढ़ाई जा सकती है। इस बार Baba Ram Rahim को 50 दिन के लिए Parole मंज़ूर की गई है। नियमों की बात करें, तो एक क़ैदी को साल में 98 दिन तक की पैरोल मिल सकती है। आपको बता दें की पैरोल के दौरान कैदी जेल के बाहर जो समय बिताते हैं उसे उनके कुल जेल के समय को कम किए बिना उनकी सजा के हिस्से के रूप में गिना जाता है।

इसलिए, जब हम Baba Ram Rahim के बारे में बात करते हैं, तो हमें यह समझना चाहिए कि यह कोई सहायता नहीं है बल्कि कानूनन अधिकार है। राम रहीम सिंह कानून का पालन कर रहा है। हमारी कानूनी प्रणाली हर किसी को उचित मौका देने के लिए इसी तरह काम करती है और Baba Ram Rahim भी क़ानून का सम्मान करते हैं।

Baba Ram Rahim को कितनी बार मिल चुकी है Parole-

2022 से लेकर अब तक Baba Ram Rahim की यह 7वीं पैरोल होगी। इसके साथ ही Baba अब तक 2 बार फरलो पर आ चुके है। आपको बता दें इस बार Parole के दौरान Dera Chief Baba Ram Rahim Uttar Pradesh के बागपत जिले के बरनावा आश्रम में रहेंगे। इस से पहले भी Dera Chief बरनावा आश्रम में ही रूकते आए हैं। हाल ही में, नवंबर 2023 में Gurmeet Ram Rahim को 21 दिनों की फरलो  दी गई थी। हालांकि कुछ क़ानूनी प्रक्रियाओं के चलते उन्हें डेरा सच्चा सौदा के सिरसा आश्रम में जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। जिसके चलते Dera Chief वर्चुअल माध्यमों के द्वारा अपने अनुयायियों से रू-ब-रू होते रहे है।

क्या सच में Baba Ram Rahim की पैरोल को लेकर दी जाती है अतिरिक्त ढील?

आपकी जानकारी के लिए बता दें, इस बारे में दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता अरुण शर्मा से जब पूछा गया कि क्या बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल देते हुए ढील बरती जा रही है? तो इस पर अधिवक्ता ने कहा कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। कोई भी कैदी अपनी सजा का कुछ हिस्सा जेल में बिता चुका है और इस दौरान उसका व्यवहार और आचरण ठीक रहा है तो उसे पैरोल दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि हर साल तिहाड़ जेल से सैकड़ों कैदी पैरोल पर बाहर आते हैं। उन्होंने बताया दरअसल, जब हम बड़े मामलों से जुड़े अपराधियों पर ज्यादा गौर करते हैं, तो हमें लगता है कि उनको अतिरिक्त सुविधा दी जा रही है। जबकि सत्य यह है की ऐसा बिलकुल नहीं होता है। यह राज्य सरकार का विशेषाधिकार होता है। अगर सरकार को लगता है कि सजा काट रहे व्यक्ति के आचरण में सुधार है, उसके आवेदन का आधार मजबूत है और उसकी रिहाई से किसी को कोई नुकसान नहीं है, तो उसे पैरोल दी जा सकती है।

बाबा राम रहीम (Baba Ram Rahim) की पैरोल को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया-

बाबा राम रहीम की पैरोल इन दिनों काफी सुर्खियों में बनी हुई है। यह एक ऐसा विषय है जो social media पर बहुत चर्चा में है। समाचारों में और जनता में Baba Ram Rahim Singh के पैरोल की ख़बर आते ही काफी हलचल पैदा हो जाती है। सिक्के के अगर एक पहलू की तरफ़ देखें तो कुछ लोग बाबा राम रहीम की पैरोल की ख़बर सुनते ही वाद विवाद शुरू कर देते हैं। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जो बाबा राम रहीम के आने का बेसब्री से इंतज़ार करते है। उनका मानना है कि जब इनके गुरु जी पैरोल पर आते हैं, तो वह अपने श्रद्धालुओं को इंसानियत की शिक्षा व परहित कार्यों को करने का आह्वान करते है। हैरानी कर देने वाली बात यह है कि इन लोगों का मानना है कि बाबा राम रहीम हर नेक कार्य की शुरुआत स्वयं करते हैं उसके बाद ही लोगों को वह कार्य करने का आह्वान करते है ।

Parole मिलते ही आख़िरकार करते क्या है 

आइए आज Baba की Parole की कहानी पर विचार डालते है की आख़िरकार Ram Rahim जेल के बाहर अपना समय कैसे बिताते हैं। हालाँकि, Baba Ram Rahim को कई बार पैरोल मिल चुकी है। इस बार भी बाबा को 50 दिन की पैरोल मंजूर हुई है। आइए गौर करते है कि इस अवधि के दौरान बाबा करते क्या है। बाबा राम रहीम समाचार की रिपोर्टों ने विभिन्न welfare works में उनकी भागीदारी पर प्रकाश डाला है, जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने के उनके प्रयासों को प्रदर्शित करता है।

बाबा राम रहीम ऑनलाइन सत्संगों के माध्यम से करते है लाखों लोगों को जागरूक-   

बाबा राम रहीम के अनुयायियों का आँकड़ा 6 करोड़ को पार कर चुका है। ग़ौरतलब है की उनके हर सत्संग पर लाखों लोग नशा छोड़ने के लिए आते है और राम नाम का रसपान करते है। जेल से बरनावा आश्रम में पधारने के बाद बाबा राम रहीम का ऑनलाइन सत्संग करते है, जिसमें ब्लॉक स्तर पर बने सत्संग घरों में हज़ारों लोग शामिल होते हैं और ऐसे हर सत्संग घर का मिलाकर देखें तो लाखों लोगों का हुजुम इकट्ठा होता है बाबा के प्रवचन सुनने के लिए। बाबा का मात्र एक सत्संग सुनने से हज़ारों लोग रोज़ाना नशा व बुराइयाँ छोड़ देते हैं व आगे से न करने का प्रण करते हैं। लोगों की बुराइयाँ छुड़वाने से बाबा का ऑनलाइन समागम सम्पन्न होता है ।

Baba Ram Rahim ने Parole के दौरान शुरुआत की नशा मुक्त अभियान की और नाम दिया “Depth Campaign”-

आज समाज में नशों का दरिया बह रहा है। इस नशे रूपी दैत्य को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए बाबा राम रहीम ने Parole के दौरान Depth Campaign की शुरुआत की। इस मुहीम का उद्देश्य देश को, विशेषकर युवा पीढ़ी को नशीली दवाओं की लत और अन्य मादक द्रव्यों के सेवन से बचाना है।

राम रहीम की पैरोल के दौरान शुरू हुआ यह अभियान युवाओं को नशे रूपी दैत्य को समाज से दूर भगाने व युवा पीढ़ी को नशे की लत से उबरने के लिए सशक्त बनाता है। लोगों का दावा है कि इस मुहीम से जुड़कर लाखों लोगों ने नशे रूपी दैत्य का त्याग किया है।

Gurmeet Ram Rahim जब भी पैरोल पर बाहर आए हैं, वे अपना समय मानवता को समर्पित करते रहे हैं। अपने इस समय में उन्होंने कई मुहिम शुरू की, जिसके तहत देश को नशा मुक्त बनाने का उनका प्रयास प्रमुख रहा। इसके लिए उन्होंने डेप्थ(DEPTH) और सेफ(SAFE) मुहिम चलाई और नशों के खिलाफ समाज को जागरूक करने के लिए कई भाषाओं में गीत भी बना चुके हैं। जिनसे प्रभावित होकर लाखों की संख्या में लोग हर बार नशे को छोड़कर स्वस्थ समाज की ओर कदम बढ़ाते हैं। इसके साथ ही Dera Sacha Sauda के अनुयायियों ने बाबा राम रहीम की रहनुमाई में गत वर्ष जनवरी 2023 में पूरे हरियाणा व राजस्थान को 5 से 6 घंटो में स्वच्छता अभियान चलाकर शीशे की तरह चमका दिया था।

Baba Ram Rahim को Parole मिलना समाज के लिए कितना सही है?

जिस प्रकार हमारा देश व समाज आए दिन बुराइयों की चर्म सीमा पर जा रहा है। युवा पीढ़ी नशे की दलदल में फँसी हुई है। देश में अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में ज़रूरत है समाज सुधारक की, जो हमारे समाज को नई दिशा दे, जो बुराइयों का ख़ात्मा करे, मरती हुई इंसानियत को पुनर्जीवित करे । बाबा राम रहीम अब तक 6 करोड़ से अधिक लोगों की बुराइयाँ छुड़वा चुके है। उनकी शिक्षाओं पर चलकर आज लाखों लोग 161 मानवता भलाई के कार्य पूरे जोश के साथ कर रहे हैं। बाबा राम रहीम की हमारे समाज को बहुत ज़रूरत है।

Conclusion-

आज आपके साथ पैरोल से जुड़ी कुछ बातें साँझा की और आपने बाबा राम रहीम से जुड़ी कुछ बातें जानी। बाबा द्वारा किए जा रहे मानवता भलाई के कार्यों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। उनका आचरण इस बात पर पुनर्विचार करने के लिए कहता है कि हम उनकी पैरोल को कैसे देखते हैं सकारात्मक या नकारात्मक!