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गुरु गोबिन्द सिंह जी जयन्ती (Guru Gobind Singh Ji Jayanti)

धर्म के प्रचार, सत्य की जीत और अन्याय को रोकने के लिए समय-समय पर संत, योद्धा और महापुरुष अवतार लेते रहते हैं। ऐसे ही महान शख्सियत हुए गुरु गोबिन्द सिंह जी, जो सिखों के दसवें गुरु थे। धर्म की रक्षा करने और अत्याचारों को रोकने के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था। प्रतिवर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास की शुक्ल सप्तमी को गुरु गोबिंद सिंह जी जयन्ती मनाई जाती है। उनकी शिक्षाओं की पालना आज भी बड़ी शिद्दत से की जाती है।
जीवन वृत्तांत :
गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पिता गुरु तेग बहादुर जी और माता गुजरी जी के घर बिहार के पटना में हुआ। उनका बचपन का नाम गोबिंद राय था, जिसे बाद में गुरु गोबिंद सिंह के रूप में जाना जाने लगा। बचपन के कुछ वर्ष पटना में रहने के पश्चात् उनका परिवार 1670 में पंजाब के आनंदपुर साहिब में आकर रहने लगा। उस स्थान को पहले चक्‌क नानकी के नाम से जाना जाता था। यहाँ उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और एक कुशल योद्धा बनने के लिए सभी कलाएं सीखी। उन्होने संस्कृत और फारसी भाषा का ज्ञान प्राप्त किया |
गोबिंद राय जी की तीन पत्नियाँ थी। 10 वर्ष की उम्र में उनका पहला विवाह माता जीतो के साथ हुआ। जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह उनके और माता जीतो के पुत्र थे। 17 वर्ष की आयु में उनका दूसरा विवाह माता सुन्दरी के साथ हुआ। उनका एक बेटा हुआ, जिसका नाम अजित सिंह था। माता साहिब देवन उनकी तीसरी पत्नी थी, जिनके साथ उनका विवाह 33 वर्ष की आयु में हुआ था।
महान् कवि और लेखक :
गुरु गोबिंद सिंह जी ( Guru Gobind Singh Ji ) एक कुशल योद्धा और गुरु होने के साथ-साथ वि‌द्वानों के संरक्षक भी थे। वे मधुर वाणी के धनी थे। उनके दरबार में 52 कवि और लेखक मौजूद हुआ करते थे। कई भाषाओं मे निपु‌णता रखने वाले गुरु गोबिंद सिंह जी ने कई सारे ग्रंथों की रचना की थी। उनकी रचनाए आज भी समाज को प्रभावित करती हैं। सिखों के पवित्र धर्म ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ जी की रचना गोबिंद सिंह जी ने ही की थी। उनकी कुछ अन्य रचनाएं इस प्रकार से हैं –
जाप माहिब
• जफर नामा
• बचित्र नाटक
• अकाल उत्सतत
• खालसा महिमा
सिखों के दसवें गुरु :
गुरु गोबिंद सिंह जी (Guru Gobind Singh Ji) के पिता गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे। एक बार कश्मीरी पंडित अपनी फरियाद लेकर श्री गुरु तेग बहादुर जी के दरबार में आए। उनसे जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाकर मुसलमान बनाया जा रहा था। उनके सामने शर्त रखी गयी थी कि कोई ऐसा महापुरुष हो जो इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं करने के बदले अपना बलिदान दे सके, तो उन सबका भी धर्म परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
उस समय गुरु गोबिंद सिंह जी नौ वर्ष के ही थे। करमीरी पंडितों की यह बात सुनकर उन्होंने अपने पिता से कहा कि उनसे बड़ा महापुरुष और कौन हो सकता है, जो धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे सके। उनकी इस बात से गुरु तेग बहादुर जी स्वयं को बलिदान करने के लिए तैयार हो गए। इस्लाम स्वीकार न करने के कारण 11 नवंबर 1675 को औरंगजेब ने दिल्ली के चाँदनी चौक में उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। इस घटना के पश्चात् 29 मार्च 1676 को श्री गोविंद राय जी को सिखों का दसवां गुरू घोषित कर दिया गया।
खालसा पंथ की स्थापना :
धर्म की रक्षा करने और बढ़ते हुए अत्याचारों का सामना करने के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख कौम बनाई। 13 अप्रैल 1699 को वैसाखी के दिन गुरु श्री गोबिंद सिंह जी ने *खालसा* पंथ की स्थापना की। वहाँ मौजूद लोगों से उन्होंने पूछा कि ऐसा कोई हो जो धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर सके तो वह आगे आए। तब एक-एक कर पाँच लोग शहीदी के लिए तैयार हुए। उन 5 सिखों को गुरु जी ने ‘पंज प्यारे’ का नाम दिया और उन्हें अमृत’ का रसपान करवाया। तब उन्हें ‘सिंह’ की उपाधि भी दी गई। उसी समय से गुरु साहिब ने स्वंय को भी ‘सिंह’ बना लिया और उन्हें गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम से पहचाना गया। खालसा की स्थापना कर उन्होंने सिंह फौज बनाई, जो बहादुरी और ज़ाबाजी से शोषण और अत्याचारों का सामना करे और धर्म की रक्षा व प्रचार कर सके।
सवा लाख से एक लड़ाऊ,
चिड़ियों सो मैं बाज तड़ऊ,
तभी गोविंद सिंह नाम कहाऊ…
‘अमृत’ का रसपान कर सिंह बनने वाले सिखों के लिए पंज ककार धारण करना अनिवार्य होते हैं। पांच ककारो में केश, कंघा, कड़ा, कृपाण और कछैरा सिख धर्म में विशेष महत्त्व रखते हैं और उनके धर्म के प्रति उनके समर्पण को दर्शाते हैं।
शहादत :
सत्य को स्थापित करने और अधर्म को रोकने के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगलों के खिलाफ 13 युद्ध लड़े। छोटी सेना होने के बावजूद भी उन्होंने बड़ी निडरता और कुशलता से हर बार मुगलों पर जीत हासिल की। औरंगज़ेब की मृत्यु के पश्चात् बहादुर शाह को बादशाह बनने में गुरू गोबिंद सिंह जी ने मदद की थी। उनके बनते मीठे रिश्तों को देखकर सरहिंद का नवाब वजीर खाँ डर गया। उसने अपने दो आदमी गुरु जी के पीछे लगा दिए, जिन्होंने धोखे से गुरु साहिब पर वार किया, जिससे 7 अक्तूबर 1708 को गुरु गोबिंद सिंह जी नांदेड साहिब में दिव्य ज्योति में समा गए।
उन्होने अपने अंत समय में सिक्खों को गुरु ग्रंथ साहिब को अपना गुरु मानने को कहा और स्वयं भी गुरु ग्रंथ साहिब के सामने नतमस्तक हुए थे। गुरु जी के बाद माधोदास ने, जिसे गुरु गोबिंद जी ने बंदा बहादुर का नाम दिया था, सरहिंद पर आक्रमण किया और गुरु जी की शहादत का बदला लिया।
गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों में से बाबा अजीत सिंह और बाबा जोझार सिंह को स्वंय गुरु जी ने मुगलों के खिलाफ युद्ध के लिए चमकौर भेजा था, जो वहाँ शहीद हो गए थे और दो साहिबजादों जोरावर सिंह व बाबा फतेह सिंह व माता गुजरी को वजीर खां ने पकड़ लिया था। उसने दोनों साहिबजादों को जिंदा ही दिवार में चिनवा दिया था और वे भी शहादत को प्राप्त हुए।
गुरु गोबिंद सिंह जी (Guru Gobind Singh Ji ) की पवित्र शिक्षाएं:
गुरु जी ने सिख धर्म का प्रचार किया और लोगों को जीने की सही राह दिखाई। उन्होंने अपने उपदेशों के द्वारा लोगों का उद्धार किया। गुरु साहिब की पवित्र शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रभावित करती हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
धरम दी किरत करनी : अपनी जीविका ईमानदारी पूर्वक काम करते हुए चलाएं ।
जगत-जूठ तंबाकू बिखिया दी तियाग करना : हमेशा नशे व तंबाकू के सेवन से दूर रहें।
किसी दि निंदा, अते इर्खा न करना : इसका अर्थ है कि कभी भी किसी दूसरे की निंदा-चुगली नहीं करनी चाहिए। दूसरों से ईर्ष्या करने की जगह स्वयं मेहनत करनी चाहिए।
बचन करकै पालना : अगर आप किसी को कोई वचन देते हैं, तो उसकी पालना करनी चाहिए। यानि हर कीमत पर अपने वचन को निभाना चाहिए।”
कम करन विच दरीदार नहीं करना : व्यक्ति को अपने काम करने में खूब मेहनत करनी चाहिए, किसी तरह की टाल-मटोल या लापरवाही नहीं चाहिए।
गुरबानी कंठ करनी: गुरु गोबिंद सिंह जी के इस बचन का अर्थ है कि गुरुवाणी को कंठस्थ कर लें और उसकी पालना करें।
दसवंड देना : हर व्यक्ति को अप‌नी कमाई का दसवां हिस्सा दान में दे देना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।
कैसे मनाई जाती है गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती ( Guru Gobind Singh Ji Jayanti) :
इस बार गुरु गोविंद जी की 357 वीं जयंती मनाई जा रही है। इसे प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। विशेष महत्व रखने वाले इस दिन को सिख समुदाय के लोग बहुत धूमधाम से मनाते हैं। पहले दिन नगर कीर्तन व जूलूस निकाला जाता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर, नहाकर व नए कपड़े पहनकर गुरुद्वारे जाते हैं। वहाँ पवित्र भावना से मथ्था टेकते हैं और अपने परिवार व समाज की भलाई के लिए अरदास करते हैं। इस दिन विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है। भजन-कीर्तन व पवित्र गुरबानी का पाठ किया जाता है और इस प्रकाश पर्व के उत्सव को मनाया जाता है।

जीवन में सफलता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रतन टाटा की तरह कड़ी मेहनत और लगन होनी चाहिए

रतन टाटा को तो सभी जानते ही हैं, वे किसी पहचान के मोहताज नहीं है। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर ही आज टाटा कंपनी को बुलंदियों पर पहुंचाया है।

रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ। उन्होंने 25 साल की उम्र में 1962 में अपने कैरियर की शुरुआत की और 21 साल के कैरियर में टाटा कंपनी को कहां से कहां पहुंचा दिया कि आज 80 देशों में टाटा समूह की कंपनियां स्थापित हैं। रतन टाटा, टाटा ग्रुप के 5वें अध्यक्ष बने, इसका मुख्य दफ्तर मुंबई में स्थापित है।

रतन टाटा ने जहां टाटा नमक और चाय से घर की आम ग्रहणी का मन जीता, वहीं नैनो जैसी कार को लांच करके मिडल वर्ग के लोगों के सपने पुरे किए। उन्होंने हर क्षेत्र में अपना उद्योग विकसित किया आयरन, स्टील, सीमेंट, कपड़ा और इसके साथ-साथ कृषि उपकरण और ट्रक का उत्पादन करने वाली कंपनियों के समूह का भी केंद्र बना।

रतन टाटा ने सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने अपनी ही कंपनी की फैक्ट्री में मजदूरों के साथ काम किया। क्योंकि वह मजदूरों की जिंदगी के बारे में नजदीक से जानना चाहते थे। वे बड़े नरमदिल इंसान थे, उन्होंने गरीबों की हमेशा मदद की। इसलिए ताज होटल में हुए हमले में प्रभावित लोगों को घर जाकर उनका हाल चाल पूछा और पास लगने वाले ठेले वाले जो इस हमले से प्रभावित हुए थे, उन्हें भी आर्थिक मदद की।

कड़ी मेहनत और लगन –

रतन टाटा रातों-रात अमीर होने वालों में से नहीं हैं, बल्कि उनकी कामयाबी पाने के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और काम के प्रति उनकी लगन छुपी हुई है। उनकी मेहनत के सदके ही टाटा कंपनी का नाम दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में आता है।

सोच का दायरा बड़ा होना –

रतन टाटा का मानना है कि इंसान को कभी भी खाली नहीं बैठना चाहिए। बल्कि अपनी सोच का दायरा बड़ा करना चाहिए और हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए कुछ ऐसा करना चाहिए कि सोते समय भी इंसान की इनकम बढ़ती रहनी चाहिए।

सकारात्मक सोच –

उनका मानना है कि इंसान को अपनी सोच साकारात्मक रखनी चाहिए। तभी जीत के लक्ष्य पर पहुंच सकता है। नाकारात्मकता को अपने मन में कभी नहीं लाना चाहिए।

निश्चित समय का इंतजार ना करो –

रतन टाटा कहते हैं कि कोई भी काम करने के लिए निश्चित समय का इंतजार ना करो, बल्कि काम को करने के लिए लगन और शिद्दत से लग जाओ, सफलता जरुर आपके कदम चूमेगी।

सभी को एक समान समझें –

आप कभी भी किसी को छोटा बड़ा ना समझे। बल्कि सबके साथ प्यार और सम्मान का व्यवहार करें। क्योंकि किस्मत इंसान को पता नहीं कहां से कहां ले जाती है। जैसे कि बहुत कम लोगों को पता है कि झारखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री ने टाटा कंपनी में 17 साल काम किया है।

हमेशा नया करने की कोशिश और काम के प्रति समर्पित –

रतन टाटा का मानना है कि इंसान को नए आइडिया लेते रहना चाहिए और सफलता पाने के लिए अपने काम के प्रति पूरी तरह से समर्पित हो। ये नहीं कि थोड़ी सी प्रसिद्धि मिली और पोलिटिक्स में चले गए। इसलिए वे अपने काम के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं।

हर कोई चाहता है कि वह रतन टाटा की तरह सफलता हासिल करे। पंरतु इसके लिए उनकी तरह पूरी शिद्दत से अपने काम को समर्पित होना होगा। तभी जीवन में सफलता हासिल की जा सकती है और अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

लाखों लोगों के लिए लाइफ लाइन बनने वाले देश के असली हीरो – ई.श्रीधरण

एक निश्चित योजना के तहत काम करने वाले केरल वासी सिविल इंजीनियर ईश्रीधरण ने अपनी कार्यशैली व कुशलता से भारत में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा ही बदल दिया। दिल्ली मेट्रो को बुलंदियों तक पहुंचाने वाले श्रीधरन 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो रेल निगम के निर्देशक रहे। ई.श्रीधरन के लिए दिल्ली एनसीआर की लाइफ लाइन दिल्ली मेट्रो का निर्माण कार्य किसी सपने से कम नहीं था। लेकिन उन्होंने अपनी कुशलता और श्रेष्ठता से इसे पूरा कर दिखाया।

इनके विकास के कार्य को देखते हुए अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध पत्रकार टाइम मैग्नीज ने इन्हें एशिया का हीरो का टाइटल दिया।

जन्म व आरंभिक जीवन-

श्रीधरन का जन्म केरल के पलक्कड़ जिले में 12 जून 1932 को करूकापुथूर गांव में पिता नीलकंदन मूसा व माता अम्मालुअम्मा के घर हुआ। आरंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल में पूरी करने के बाद श्रीधरन ने इंजीनियर की डिग्री के लिए आंध्रप्रदेश के काकीनाडा में गए। पढ़ाई पूरी करने के बाद शुरुआत के कुछ दिनों के लिए शिक्षक के पद पर काम किया।

श्रीधरन का व्यक्तिगत जीवन-

ई.श्रीधरन का विवाह राधा श्रीधरन के साथ हुआ था। श्रीधरन के चार बच्चे है 3 बेटे और एक बेटी है।

ई. श्रीधरन द्वारा लिखी गई जीविनयां-

दो जीविनयां

प्रथम जीवनी – कर्मयोगी द स्टोरी ऑफ़ इंडिया ई. श्रीधरंस लाइफ कथा जोकि एम.एस. एसोशिएशन द्वारा लिखित है।

दूसरी जीवनी – जीविथाविजयाथिन्ते पादपुस्तकम जोकि पी. वीं. अल्बी द्वारा लिखित है।

मेट्रो मैन – मेट्रो मैन के नाम से प्रसिद्ध हुए श्रीधरन ने कोलकाता मेट्रो से लेकर दिल्ली मेट्रो तक में अहम योगदान दिया। दिल्ली जैसे व्यस्त शहर में श्रीधरन ने मेट्रो का काम बहुत कम समय में पूरा कर दिखाया और देश के कई अन्य शहरों में मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी की। भारत की पहली कोलकाता मेट्रो सेवा की योजना उन्हीं की ही देन है।

कई प्रोजेक्टों में अहम योगदान –

दिल्ली मेट्रो ना केवल उत्तर प्रदेश के बल्कि हरियाणा के भी दो प्रमुख शहरों गाजियाबाद और नोएडा की शान है। दिल्ली मेट्रो के जरिए दिल्ली एनसीआर के 30 लाख लोग रोजाना सफर करते हैं। लेकिन अब कोरोना के चलते यात्रियों की संख्या कम है। 60 वर्ष तक तकनीकी विद्वान के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले 89 वर्षीय श्रीधरण का कोंकण रेल और दिल्ली मेट्रो समेत देश के कई बड़े प्रोजेक्ट में अहम योगदान रहा है।

90 दिन का कार्य 46 दिन में –

दिसंबर 1964 में समुद्री तूफ़ान ने रामेश्वरम और तमिलनाडु को आपस में जोड़ने वाले पम्बन ब्रिज को तबाह कर दिया, तो उस दौरान एक ट्रेन रेलवे ट्रैक पर थी। जिसकी वजह से हादसे में सैंकडों यात्रियों की जान चली गई। पम्बन ब्रिज 164 में से 125 गार्डर पानी में पूरी तरह से डूब गया, तो रेलवे ने उनके निर्माण के लिए 6 महीने का लक्ष्य तय किया लेकिन उस क्षेत्र के इंचार्ज ने काम की अवधि 3 महीने कर दी और जिम्मेदारी श्रीधरन को सौंपी। समय के पाबंद श्रीधरन ने मात्र 45 दिनों के में ही काम पूरा कर दिखाया।

ई. श्रीधरन की मेट्रो परियोजनाएं –

  • दिल्ली मेट्रो- 1997 दिल्ली मेट्रो मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया। इनके नाम और उपलब्धियों के बहुत चर्चे होने के कारण इन्हें मेट्रो मैन की अनौपचारिक उपाधि से नवाजा गया।
  • कोंकण रेलवे- 1990 में इनको काॅन्ट्रैक्ट कोंकण रेलवे का चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया।
  • कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड
  • कोच्ची मेट्रो

ई. श्रीधरन को दिए गए पुरस्कार और सम्मान –

मेट्रो क्रांतिकारी परिवहन में इनके योगदान को देखते हुए 1963 को रेलवे मंत्री का पुरस्कार, 2021 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री, 2002 को ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ द्वारा मैन ऑफ़ द इयर और श्री ओम प्रकाश भसीन अवार्ड फॉर प्रोफेशनल एक्सीलेंस इन इंजीनियरिंग, 2008 में पद्म विभूषण, फ्रांस सरकार द्वारा 2005 में सर्वोच्च नागरिक अवार्ड से सम्मानित किया गया।

दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं, जो सितारे बन कर उभरते है। जिनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। जिनकी वजह से देश उन्नति के सिखर पर पहुंचता है। भारत को अब आधुनिकता के पहिए पर चलाने के लिए सबकी उम्मीदें श्रीधरन पर टिकी है।

रक्तदान करके किसी की जिंदगी बचाने का जरिया बनें-

अक्सर कहा जाता है कि एक माँ की उम्र उसके बच्चे को नहीं बचा सकती, परन्तु आपके द्वारा किया गया रक्तदान किसी का जीवन जरूर बचा सकता है।

रक्तदान वहीं होता है, जो इंसान अपनी स्वेच्छा से करे। रक्त एक ऐसी चीज है, जिसे बनाया नहीं जा सकता। इसकी आपूर्ति किसी साधन से नहीं हो सकती, यह सिर्फ इंसानी शरीर में ही बनता है।

रक्तदान करने की बात सुनते ही लोग अजीब सा व्यवहार करने लगते है। कई लोगों के मन में यह धारणा है कि कि खून दान करने से हमारे शरीर में कमजोरी आ जाएगी, लेकिन यह सत्य नहीं है।एक यूनिट में मात्र तीन सो पचास एम एल रक्त ही निकाल सकते हैं। खून दान करने से कोई नुकसान नहीं होता बल्कि कई प्रकार के फायदे हैं।

विश्व रक्तदान दिवस क्यों मनाया जाता है-

 हमारे देश में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो खून की कमी के कारण अपनी जिंदगी गवा देते हैं। उन्हें बचाने और लोगों को रक्तदान करने के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 14 जून को “विश्व रक्तदान दिवस” मनाया जाता है। रक्तदान दिवस पहली बार 2004 में विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय संघ ने मनाया था।

विश्व रक्तदान दिवस की शुरुआत-

14 जून को विश्व भर में “ रक्त दान दिवस ” मनाया जाता है। वर्ष 1997 को WHO ने स्वैच्छिक रक्तदान की नींव रखी थी, जिसका मुख्य उदेश्य यह था कि जब कभी भी किसी जरूरत मंद को खून की आवश्यकता हो तो उसे बिना पैसे दिये खून मिल सके । साल 2004 में पहली बार रक्त दान दिवस मनाया गया।
इसे 14 जून को इसलिए मनाया जाता है, क्योकि 14 जून को ही  कार्ल लैंडसटीनर का जन्मदिन होता है और कार्ल  को      ( Blood transfusions) का संस्थापक कहा जाता है।

रक्त क्या है-

हमारे शरीर में एक लाल रंग का तरल पदार्थ पाया जाता है, उसे ही रक्त कहते हैं। हमारे शरीर में रक्त की मात्रा लगभग पांच से छह लीटर तक होती है। हमारे शरीर में रक्त का कार्य शरीर मे बने विषैले पदार्थ जैसे कार्बन डाइऑक्साइड को शरीर से बाहर निकालना होता है तथा शरीर में हारमोन व अन्य पदार्थों को लेकर जाने का काम भी रक्त ही करता है।

रक्तदान क्यों जरूरी है-

आज के समय में थैलेसीमिया जैसी बीमारी के कारण बहुत से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी से छोटे-छोटे बच्चे भी जूझ रहे हैं। ऐसे बच्चों की मदद के लिए रक्त दान की बहुत आवश्यकता है‌।
रक्त दान को सबसे बड़ा दान कहा गया है। हम किसी भी जरूरत मंद के लिए खून दान करके उसकी जिंदगी बचाकर उस परिवार के जीवन में खुशियाँ भर सकते हैं। जरा सोचिए कोई व्यक्तिगत अपनी जिंदगी और मौत से लड़ रहा है और आप अचानक एक उम्मीद की किरण बनकर उसकी जिंदगी बचा लेते है, तो आपको भी कितनी खुशी होगी। तो रक्त दान से जुड़ी हुई सब भ्रांतियो को दूर करते हुए किसी की जिंदगी बचाने का जरिया बनाना चाहिए ।

रक्तदान करने के अद्भुत फायदे-

रक्तदान करने के हमारे शरीर को कईं तरह के फायदे होते हैं। एक तो हम किसी के अनमोल जीवन को बचा सकते है।

  • एक यूनिट खूनदान करने से तीन जिंदगियां बचाई जा सकती है
  • खून दान करने से हार्ट अटैक जैसी बीमारी को भी कम किया जा सकता है। क्योंकि जब हम खून दान करते हैं, तो हमारे शरीर में खून का थक्का नहीं जमता। इससे खून पतला रहता है और हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है।
  • रक्त दान करने से वजन कम करने में भी मदद मिलती है। एक बार खून दान करने से लगभग पांच सौ कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। साल में कम से कम तीन बार तो खून दान अवश्य करना चाहिए।
  • रक्तदान करने से नए ब्लड सेल्स बनते हैं, जिससे शरीर में एनर्जी बनती है और शरीर तंदुरुस्त रहता है।
  • रक्त दान करने से लीवर से संबंधित समस्याओं में भी राहत मिलती है। शरीर में अगर आयरन की मात्रा ज्यादा होती हैं, तो वह लीवर पर दवाब डालती हैं। परन्तु यदि हम रक्त दान करते हैं, तो आयरन की मात्रा बराबर रहती है।
  • रक्त दान करने से कैंसर जैसी बीमारी का भी खतरा कम हो जाता है। खून दान करने से हमारे शरीर में कैलोरी की मात्रा भी कम होती हैं।
  • रक्त दान करने के कारण पुराना रक्त जब शरीर से बाहर निकल जाता है, तो उसी वक्त नया खून बनना शुरू हो जाता है। शरीर में जो सेल्स गतिहीन होते हैं, वो फिर से कार्यशील हो जाते हैं। जिससे हमारे ब्लड में यदि किसी भी प्रकार की बीमारी के कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो ये नए सेल्स उन्हे पहले ही नष्ट कर सकते हैं।

रक्त दान कौन नहीं कर सकते हैं-

जिन लोगों को एड्स, मलेरिया, शुगर, किडनी से संबंधित रोग, हैपेटाइटिस, उच्च और निम्न रक्त चाप, टीबी, अस्थमा, पीलिया, एलर्जी डिपथीरिया आदि में से कोई भी बीमारी हो, तो उन्हें खून दान नहीं करना चाहिए। महामारी के दौरान महिलाओं को रक्त दान नहीं करना चाहिए।
साथ ही गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी खून दान ना करे।

  • 18 से कम आयु और 60 से ज्यादा आयु वाले लोगों को रक्त दान नहीं करना चाहिए।
  • खून दान करने से पहले फास्ट फूड और अधिक वसा युक्त भोजन नहीं करना चाहिए। धूम्रपान और शराब या अन्य किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए।

रक्तदान करने के बाद क्या खाना चाहिए

रक्तदान करने के बाद हमें हरी सब्जियां, दूध फल, आयरन, विटामिन व पौष्टिक आहार वाले भोजन का सेवन करना चाहिए।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
  • रक्त दान के बाद केवल तरल पदार्थ ही ना लें, ऐसा करने से कमज़ोरी महसूस होगी। इसलिए हेलथी डाईट अवश्य लें।

निष्कर्ष

आज  लोगों में रक्त दान को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। युवा वर्ग बहुत जागरूक हो रहा है। जो मिथ्या भ्रांतियाँ थी, वो कम हो रही है। तो क्यों न खुद की एक पहचान बनाये रक्त दान करें और करवाए।   

स्वच्छता सर्वेक्षण के पांचवे संस्करण “स्वच्छ सर्वेक्षण 2020” के परिणामों की घोषणा हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए किया।

इसमें इंदौर जो मध्यप्रदेश प्रदेश का एक शहर हैं, इसे सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल हुआ।आपको याद भी होगा लगातार पिछले तीन साल से सबसे स्वच्छ शहर का ख़िताब इंदौर को ही मिल रहा हैं।इसके अलावा करनाल जिले ने 17 वां स्थान प्राप्त किया है इसके साथ ही हरियाणा ने राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया।

swachh survekshan 2020 - Indore - Exclusive Samachar

यह उस संरक्षण के परिणाम है जिसमे 1 लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों को ही शामिल किया गया हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण में रेटिंग के आधार पर झारखंड 2325.42 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा, वही  हरियाणा के  1678.84 अंक रहे।करनाल जिले को 4655.07 अंक मिले, इस श्रेणी में प्रथम आने वाले शहर अम्बिका पुर को भी 4655.07 अंक मिले।

आइये हरियाणा के अन्य जिलों के बारे में जानते है

  • जिला रोहतक 4180.55 अंको के साथ 35 वें नंबर पर रहा।
  • जिला पंचकूला 3683.01 अंक के साथ 56 वें नम्बर पर रहा।
  • जिला गुरुग्राम 3733.97 अंक के साथ 63 वें नम्बर पर रहा।

इस तरह स्वच्छ सर्वेक्षण में 100 जिलों में हरियाणा के 4 जिले ही शामिल हो सकें। इसके अलावा सोनीपत 103 व हिसार 105 वें नम्बर पर हैं।

इस संरक्षण का मुख्य मकसद स्वच्छ शहरों का निर्माण, नागरिक सेवा वितरण में सुधार और सफाई के प्रति नागरिकों की सोच व्यवहार बदलने से है।यह शहरों और महानगरों के बीच स्वस्थ स्पर्धा की भावना को बढ़ावा देने में सहायक भी साबित हुआ हैं।

इसके लिए लोगो की जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है ,अगर हम सब मिल कर ऐसा करें तभी शहरों और महानगरों को और भी बेहतर बनाया जा सकता है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) 2019 की परीक्षा में देश में तीसरा स्थान हासिल करने वाली प्रतिभा वर्मा का मानना है कि समाज और सुरक्षा में आज भी बेटियों के लिए बहुत बड़ी चुनौतियां हैं। बेशक हम कितने भी अच्छे विचारों के धनी क्यों न हों लेकिन एक बेटी या औरत को हर मुकाम पर चुनौती का सामना करना ही पड़ता है लेकिन अगर कोई मजबूत लक्ष्य है तो हमें मंजिल पर पहुंचने से कोई भी नहीं रोक सकता। 

Pratibha Vera UPSC CSE Topper - Exclusive Samachar

उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाली प्रतिभा वर्मा का IAS बनने का जुनून उसके दृढ़ संकल्प को पूर्ण रूप से ब्यान करता है। प्रतिभा ने पहले भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की परीक्षा पास की जिसके कारण उसे आयकर विभाग में सहायक आयुक्त की नौकरी मिली। फिर भी उसने IAS बनने के संकल्प को टूटने नहीं दिया। आखिरकार 2019 में उसने इस लक्ष्य को पूरा कर ही दिया। उसने वरीयता क्रम में तीसरा स्थान प्राप्त किया मगर फिर भी वे महिलाओं में सबसे अव्वल थी। 

प्रतिभा ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि बेटियों के लिए यह संसार अभी भी मुश्किलों से भरा है लेकिन एक औरत को इसका सामना तो करना ही होगा। तभी तो बेटियां अपने लक्ष्य को हासिल कर सकेंगी। 

Indian Administrative Services - Exclusive Samachar

अगर एक बेटी हिम्मत जुटा कर घर से निकल भी जाती है तो अपनी सुरक्षा के लिए वे अपने मन में डर हमेशा रखती है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई गांव में पूरा कर 2010 में उन्होंने सुलतानपुर छोड़ दिया। एक दशक घर परिवार से दूर रहकर किताबों और शिक्षा के मंदिरों में साधनारत रही। वर्ष 2018 में IAS की परीक्षा देने से पहले अनुभव के लिए प्रतिभा ने वोडाफोन की कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्य किया। 2018 में IRS के नाते सहायक आयुक्त Income Tax बनी। इस पद पर कार्य करते हुए उसने IAS की परीक्षा दी और देश में तीसरा स्थान हासिल किया जबकि महिला वर्ग में देश में पहले स्थान की रैंकर बनी।

“World environment Day के अलावा इस दिन लगते हैं लाखों पेड़”

आज वैश्विक स्तर पर बहुत सी चिंताएं जन्म ले चुकी हैं। इनमें सबसे अधिक चिंता का विषय climate change है। दिन-ब-दिन हो रहे climate change के बहुत से कारण हैं। परंतु सबसे पहले आपको बता देंगे climate change होता क्या है?

किसी भी क्षेत्र के औसत मौसम में जब परिवर्तन आता है।  उसे जलवायु परिवर्तन (climate change) कहा जाता है। इसके लिए natural और human दोनों पक्ष जिम्मेदार हैं। परंतु वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 93% मानवीय गतिविधियों द्वारा ही climate change हो रहा है। जिस में वनों की कटाई मुख्य भूमिका निभा रही है।

आखिर क्यों बढ़ रही है वनों की कटाई (deforestation)?प्रत्येक वर्ष 3.5 से 7 बिलियन तक वनोन्मूलन हो रहा है। यदि प्रतिदिन की बात करें तो लगभग 100000 एकड़ जंगलात को काटा जा रहा है। व्यापक पशुपालन की बात करें तो 80% deforestation इसी की देन है। शेष नुकसान सामग्री, आवास और विकास के लिए हो रहा है। जिसके बहुत भयंकर परिणाम सामने आ रहे हैं। फिर भी मनुष्य अंधाधुंध पेड़ों की कटाई कर रहा है।

आइए अब जानते हैं  deforestation के दुष्प्रभावों के बारे में:-

  • बाढ़ में वृद्धि
  • वातावरण में Green house gases के प्रभाव का बढ़ना
  • स्वदेशी लोगों (indigenous tribals) के लिए निरंतर समस्याएं बढ़ रही है
  • वन्य जीवों एवं पौधों की प्रजातियों को खतरा
  • भू क्षरण (soil erosion) की समस्या बढ़ रही है। जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होने की वजह से फसलें कम हो रही है।
  • मरुस्थलीकरण (desertification) में वृद्धि

यह समस्याएं आज के लिए तो खतरा बनी ही हुई है। साथ ही साथ भविष्य के लिए भी जानलेवा सिद्ध होने वाली है। हम सब इसके लिए चिंतित अवश्य हैं। इसकी रोकथाम के लिए कदम कम ही उठा रहे हैं।

कैसे आ सकता है बदलाव?

बदलाव लाने की सोच तो सबके अंदर पनपती है। परंतु सही तरीका अपनाने से ही बदलाव आता है। जलवायु परिवर्तन से बचाव का सबसे आसान तरीका पेड़ लगाना (reforestation) है। इसके द्वारा ही भू क्षरण पर काबू पाया जा सकता है। वन्य जीवों व अन्य प्राणियों का संरक्षण भी इसी तरह ही संभव हो सकता है। पेड़ हमारी नदियों और झीलों के लिए “प्राकृतिक फिल्टर” की तरह सिद्ध होते हैं। पेड़ बारिश के पानी के धरती पर गिरने की गति को धीमा करते हैं। जल मार्ग में मिट्टी को भी नष्ट होने से पेड़ ही रोकते हैं। जिससे बाढ़ से होने वाली क्षति कम हो जाती है।

औसतन एक पेड़ द्वारा 260 पाउंड ऑक्सीजन छोड़ी जाती है। इसके तहत दो पेड़ों द्वारा चार सदस्यों के परिवार के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन दी जाती हैं। इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए।

हमारे ही देश की एक संस्था ऐसी है जो ऐसा सराहनीय कार्य कर रही है। 6 करोड लोगों द्वारा एक ही दिन में पौधे प्रत्येक वर्ष लगाए जाते हैं। यही नहीं बल्कि उनकी देखरेख का जिम्मा भी लेते हैं। इस संस्था से जुड़े सदस्य देश विदेश में पौधा रोपण करते हैं। जिससे वह धरती मां की रक्षा कर सकें।

वर्ष 2007 से लेकर 2018 तक इस संस्था द्वारा लगभग 40 करोड पौधे लगाए जा चुके हैं। यह संस्था पौधे लगाने में 3 World Records स्थापित कर चुकी है। यह संस्था हरियाणा राज्य के सिरसा जिला में स्थित है।

“डेरा सच्चा सौदा” नाम की संस्था द्वारा 15 अगस्त को प्रत्येक वर्ष पौधे लगाकर ही मनाया जाता है। इस दिन उनके गुरु “संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा” का जन्मदिन होता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनकी प्रेरणा पर चलते हुए मानवता भलाई के कार्य करने की इच्छा जागृत होती है। पौधारोपण के साथ-साथ खून दान, राशन दान, गरीबों को मकान बनाकर देना आदि कार्य करते हैं।

अगर इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति वातावरण के संरक्षण के लिए आगे आए। तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा

हाल ही में घोषित किये गए बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में उतरप्रदेश के किसान के बेटे ने 98.2% अंक प्राप्त कर अपना नाम सुनहरी अक्षरों में दर्ज कराने का काम किया है ।

विदेश में पूर्णतः स्कालरशिप पर पढ़ने का मिला अवसर

बारहवीं के परीक्षा परिणाम में पाई सफलता के चलते US की कोर्नेल यूनिवर्सिटी में पढ़ने का अवसर मिलने से सम्पूर्ण परिवार में खुशी की लहर है।बारहवीं में प्राप्त 98.2% अंक हासिल करने पर यूएस (US) की प्रतिष्ठित आइवी लीग यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप के माध्यम से एडमिशन लेने का मौका मिला है ।  अनुराग तिवारी जोकि लखीमपुर जिले के सरसन गांव से हैं , बताते हैं कि उन्हें अमेरिका में कोर्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University) में पढ़ने हेतु चुना गया है जहां वे इकोनॉमिक्स में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा सोमवार को घोषित किये गए बारहवीं के परीक्षा परिणाम में 18-वर्षीय अनुराग तिवारी ने गणित में 95 ,अंग्रेजी में 97 , राजनीति विज्ञान में 99 ओर इसके साथ ही इतिहास और इकोनॉमिक्स दोनों विषयों में 100 अंक प्राप्त किये हैं।

SAT (स्कॉलरशिप असेसमेंट टेस्ट) में भी पाई सफलता

बाहरवीं की परीक्षा में प्राप्त सफलता के साथ ही अनुराग ने स्कॉलरशिप असेसमेंट टेस्ट में 1,370 अंक हासिल किये जोकि अमेरिका के प्रमुख कॉलेजों में प्रवेश के लिए लिया जाता है ।

अनुराग ने बताया कि उसके लिए यह सफ़र बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से उन्हें सीतापुर जिले के आवासीय विद्यालय में ही अपनी पढ़ाई करनी पड़ी। 
चूंकि अनुराग एक किसान परिवार से संबंध रखते हैं इसलिए उसके माता-पिता इस विद्यालय में भी भेजने को राजी नहीं थे।उनका कहना था कि यदि अनुराग पढ़ाई के लिए चला गया तो वह खेती में नहीं आएगा। लेकिन अनुराग की बहनों ने पढ़ाई जारी रखने की इजाजत दिलाई । ओर आज सारे परिवार को अनुराग पर गर्व है।

विदेश में पढ़ाई के विचार पर पूछने पर अनुराग ने बताया कि उसका झुकाव हमेशा से ही लिबरल आर्ट्स ओर ह्यूमैनिटीज की ओर ज्यादा रहा है। उन्होंने बताया , ” आइवी लीग कॉलेजों के लिए ट्राई करने की सलाह उसके दिल्ली के शिक्षकों ओर काउंसलर्स ने दी ,जिसके चलते मैने कोर्नेल यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए आवेदन किया ओर SAT का एग्जाम दिया.”

आगे की बातचीत में अनुराग ने बताया कि इसी साल अगस्त में कोर्नेल यूनिवर्सिटी में जाना तय था लेकिन कोरोना महामारी को लेकर लगाए वीजा प्रतिबन्धों के चलते अब वह फरवरी 2021 तक ही जा पाएंगे ।

अनुराग में पढ़कर लौटने के बारे में पूछने पर बताया कि “हमारे देश मे भी विभिन्न अच्छे कॉलेज हैं लेकिन विदेश में पढ़ाई भी एक अच्छा अवसर है ।शिक्षा पूरी करने ओर कुछ अनुभव प्राप्त करने पर मैं निश्चित रूप से भारत लौटूंगा ओर यहाँ शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दूंगा।”

हरियाणा के इस गांव में ऐसा क्या खास है? जो पीएम मोदी इसकी तारीफ करते नहीं थकते!

गांव का असली सच

speciality of this village in Haryana - Exclusive Samachar

 जिनके हौसले बुलंद होते हैं, सफलता उनके कदम चूमती है।ऐसा ही कर दिखाया है, पलवल जिले के भिडूकी गांव की ग्राम पंचायत ने। पलवल जिले की सबसे बड़ी पंचायतो में शामिल गाँव भिडूकी आजकल प्रदेश भर में अपनी पहचान बना रहा है।

जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पलवल जिले के गांव भिडूकी की पंचायत की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मन की बात कार्यक्रम में की।इसको ट्विटर पर भी शेयर किया गया। यह गांव आज के समय में  सुविधाओं के मामले में आज शहरो को भी पीछे छोड़ रहा है। इस गांव में 2.5 एकड़ जगह में श्री सिद्ध बाबा खेल परिसर, open Jim, वीर अभिमन्यु डिजीटल लाइब्रेरी, बच्चों के लिए मनोरंजन पार्क,  CCTV camera  से युक्त चौपाल इस गांव के विकास की गाथा को ब्यान करती है। 

गांव की पंचायत ने उठाये बड़े कदम

ग्राम पंचायत भिडुकी ने जोहड़ के ओवरफ्लो पानी से खेतों की सिंचाई करने की योजना तैयार की है। योजना के अनुसार करीब 2 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन डालकर जोहड़ के पानी को नालो तक पहुंचाया जाएगा और ओवरफ्लो होने वाले जोहड़ के पानी को खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

पंचायत की इस पहल की तारीफ ग्रामीण तो कर ही रहे हैं। साथ ही साथ पूरे देश में भी इसकी चर्चा हो रही है।

The village panchayat took big steps - Exclusive Samachar

Water Harvesting System  लगाकर जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल कर चुकी पलवल के गांव की पंचायत ने जोहड़ के ओवरफ्लो होने वाले पानी से सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की योजना की है। जोहड़ के पानी को अब सिवर लाइन के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए जोहड़ का वाटर लेवल तय किया जाएगा। तथा उसके ऊपर पहुंचने वाला पानी करीब 2 किलोमीटर लंबी लाइन में प्रवेश करेगा। वहां से पानी साफ होकर खेतों तक पहुंचेगा। इस से जुहड़ का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर नहीं आएगा। वहीं सिंचाई के लिए भी अतिरिक्त व्यवस्था हो जाएगी।

भिडूकी गाँव के सरपंच 

भिडूकी गांव के सरपंच सत्य देव गौतम ने फरीदाबाद में रहकर B.Tech और MBA  किया है। लाखों रुपए की नौकरी को छोड़ कर गांव के सरपंच बने और गांव की तस्वीर बदलने में लगे हुए हैं।
सत्यदेव गौतम ने बताया कि भिडुकी में वैसे तो सिंचाई के लिए नहर के पानी की व्यवस्था है। लेकिन इसके बावजूद पंचायत जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल करती रहती है।

जो जोहड़ के ओवरफ्लो पानी तथा घरों से निकलने वाले पानी के संरक्षण की योजना के तहत सिविल लाइन डाली जा रही है। जोहड़ से सिंचाई वाले नाले तक करीब 2 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन में जल शोधन की योजना तैयार की गई है। सीवर लाइन में करीब हर 300 फुट की दूरी पर 15 मैनहोल बनाए गए हैं। जिनमें से पानी साफ होकर आगे जाएगा।अगर किसी किसान को अपने खेतों में सिंचाई करनी होगी तो वह मैनहोल में पाइप डाल कर खेत तक अपना पानी ले जा सकता है। अन्यथा सारा पानी सिंचाई के लिए नाले में इकट्ठा हो जाएगा। 

Sarpanch of bhiduki village - Exclusive Samachar

सत्यदेव का कहना है कि दिन प्रतिदिन  जल का स्तर नीचे जा रहा है। तो ऐसे में हमें  जल संरक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है। उनका कहना है कि हमारे गाँव में 4 जोहड़ हैं और एक लेवल के बाद उनके ओवरफ्लो पानी को सीवर लाइन के माध्यम से सिंचाई के लिए इस्तेमाल में ला सकते हैं। ऐसा करने से जल स्तर भी ऊंचा होगा।और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

इसके साथ-साथ गांव में 3 जगहों पर – सरकारी स्कूल – स्वास्थ्य केंद्र – बस्ती (छोटी कॉलोनी) वहाँ पानी को निकालने की समस्या थी। इसलिए वहां पर ग्राम पंचायत द्वारा Rain Water Harvesting System  लगाया गया है। जिसमें सारी कॉलोनी का पानी, स्कूल का व स्वास्थ्य केंद्र का पानी अलग-अलग  जो multiple manhole system है।  जिसमें तीन Manhole बनाए गए हैं। 1.  Heavy impurities  को रोकने के लिए। 2. Filtration Tank है। जिसमे कंकरीट  (stone) डाले गए हैं, जो पानी साफ करते हैं3. 10 इंच का बोर जो 100 से 120 फुट गहरा है। तो पानी आता है। साफ होने के बाद जमीन में चला जाता है। जिसके दो फायदे हैं। 1 जल स्तर बढ़ रहा है। 2.जो अनुभव किया गया।वो  TDS Value है यानी पानी का खारापन इसमे सुधार हुआ है।

jinke hosle buland hote hai safalta unke kadam chumti hai

गाँव के लोगों ने कहा

हमारे गाँव की ग्राम पंचायत ने जो   जल संरक्षण को बढ़ावा देने की पहल की है, वो क़ाबिले तारिफ हैं।  इस से जल स्तर तो बढ़ेगा ही साथ ही  खेती करने में भी मदद मिलेगी। आज हमारे लिए यह गौरव की बात है कि प्रदेश भर में व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी तक हमारे गाँव के चर्चे हो रहे हैं।नंबरदार वीरेंद्र का कहना है – उन्होंने कहा कि हमारे गाँव भिडूकी की ग्राम पंचायत से अन्य ग्राम पंचायतों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। हमारे गाँव में digital library होने से गाँव के बच्चों की समस्याएं भी दूर हो गई है। बच्चों को अपने सपने साकार में यह लाइब्रेरी बहुत सहायक होगी।

स्थानीय निवासी

ग्राम पंचायत के सदस्यों व गांव के सहयोग से गांव में काफी कार्य किए गए हैं। लेकिन अभी कुछ कार्य करना बाकी है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की नजर अब हमारी गाँव पर आई है, तो जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ गई है। आने वाले समय में इस गांव में वह हर सुविधा होगी जो  NCR के बड़े शहरों में हैं।