

किसी भी देश, शहर, जिले व क्षेत्र में रहने वाले लोगों की कुल संख्या को जनसंख्या कहा जाता है। किसी भी देश की जनसंख्या अपने राष्ट्र की अमूल्य पूंजी होती है, जो वस्तुओं व सेवाओं का उत्पादन, वितरण और उपभोग करती है। जनसंख्या आर्थिक विकास का संवर्द्धन करती है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि किसी भी राष्ट्र के विकास में रुकावट पैदा करती है।
किसी क्षेत्र, देश व शहर की जनसंख्या का बढ़ना जनसंख्या वृद्धि कहलाता है, जो अन्य प्रकार की चुनौतियां व बहुत सी समस्याओं को पैदा करती है। जब जनसंख्या हद से ज्यादा बढ़ने लग जाती है, तो देश व दुनिया के ऊपर कई प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं। जनसंख्या वृद्धि से बहुत सी समस्याएं जन्म लेती हैं, जैसे कि जनसंख्या बढ़ने से सरकार के पास काम की कमी हो जाती है, बेरोज़गारी की समस्या बढ़ जाती है, और अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं। विश्व में जनसंख्या वृद्धि एक समान नहीं है। स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाना अति आवश्यक है। आइए हम जनसंख्या विस्फोट के कारण, प्रभाव व उपाय के बारे में विस्तार से जानते हैं।
विश्व जनसंख्या दिवस को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालित परिषद द्वारा 1989 में पहली बार हुई। जब विश्व भर की आबादी का आंकड़ा 5 अरब के पास पहुंच गया, तो संयुक्त राष्ट्र की गवर्निंग काउंसिल द्वारा किए गए फैसले के अनुसार 1989 में विकास समुदाय की सिफारिश द्वारा तय किया गया। तब से हर साल 11 जुलाई के दिन को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।
इस वर्ष की नई थीम तैयार की गई है। इस बार की थीम का विषय स्वास्थ्य विकास व पर्यावरण पर तेजी से बढ़ती जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। साल 2024 में यह लक्ष्य रखा गया है कि यदि विश्व की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती रही तो इसके दुष्प्रभाव स्वास्थ्य विकास, पर्यावरण सभी क्षेत्रों पर होगा। इसलिए बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण करने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा।
विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में दिनों-दिन बढ़ रही आबादी को नियंत्रित करने के लिए लोगों को जागरूक करना है। लोगों को जागरूक करने के लिए इस दिन रैलियां निकाल कर, रोड शो किए जाने के साथ-साथ सोशल मीडिया, विभिन्न कार्यक्रमों व सभाओं को आयोजित किया जाता है। जिसका उद्देश्य लोगों में जागरूकता फैलाना है और जनसंख्या को नियंत्रित करना है।
दिनों-दिन बढ़ती जा रही जनसंख्या विश्व के देशों के सामने बड़ी भयंकर समस्या का रूप ले चुकी है। विकासशील देशों के लिए जनसंख्या विस्फोट एक गंभीर चिंता का विषय बन रहा है। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता और मानवाधिकार के बारे में जानकारी दी जाती है।
जनसंख्या वृद्धि से होने वाले नुक्सान:
जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए दिए गए सुझाव:
निष्कर्ष: साल 2011 में हुई जनगणना के अनुसार भारत देश की आबादी लगभग 121 करोड़ थी, जो 2030 तक चीन से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में अगर भारत की जनसंख्या ऐसे ही निरंतर बढ़ती गई, तो यह भारत सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगी। जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास होने चाहिए और परिवार नियोजन के लिए लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए।