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हमें पता चला है कि Google ने अपने लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System OS) Android 10 से पर्दा उठा दिया है। एंड्रॉयड 10 के आने के बाद से आपके स्मार्टफोन में कई नए फीचर्स शामिल हो जाएंगे। आइए बताते हैं कि किस तरह इस साल आपका ऐंड्रॉयड एक्सपीरियंस बदल जाएगा।

अमेरिकी कंपनी Google ने अपने नए ऑपरेटिंग सिस्टम Android 10 का डेवलपर प्रीव्यू रिलीज कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने एंड्रॉयड क्यू को नए नाम एंड्रॉयड 10 से पेश किया है। वहीं, गूगल ने Android Q का नाम बदलकर Android 10 रखा है।

गूगल ने पिछले दस सालों से चले आ रहे अपने ही ट्रेंड को तोड़ डाला। अब Google ने नए ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड Q का नाम बदलकर Android 10 कर दिया है। गूगल ने नाम बदलने को लेकर जानकारी दी कि कई देश मिठाई के नाम को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए अब एंड्रॉयड वर्जन का नाम संख्या में रखा जाएगा।

Privacy Features and Options

गूगल Android Q में प्रिवेसी पर अधिक फोकस करेगा। यूजर्स को सेटिंग्स में न सिर्फ एक अलग प्रिवेसी सेक्शन मिलेगा बल्कि वे अपनी जरूरत के हिसाब से बेसिक ऐप्स को भी परमिशन दे सकेंगे या रोक सकेंगे।

Focus Mode

पिछले साल गूगल ने डिजिटल टेक्नॉलजी से आम जिंदगी के प्रभावित न होने से जुड़ी जरूरतों पर बात की थी कि ऐंड्रॉयड क्यू में फोकस मोड दिया जाऐ जिसे ऑन करने पर आपको चुनी हुई ऐप्स से नोटिफिकेशंस या अलर्ट्स ना आऐं। इस तरह मन लगाकर आप काम कर सकेंगे। इस दौरान केवल ‘इंपॉर्टेंट’ कॉन्टैक्ट्स आपसे बात कर सकेंगे।

Alert Notification

ऐंड्रॉयड क्यू में यूजर्स नोटिफिकेशन पर कुछ देर तक टैप करेंगे तो उन्हें show silently और keep alerting जैसे फीचर्स मिलेंगे। इस तरह नोटिफिकेशंस को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकेगा।

Location Sharing

अब तक ऐंड्रॉयड पर सभी ऐप्स के लिए लोकेशन शेयरिंग रोकने का ऑप्शन होता था। अब ऐंड्रॉयड क्यू में यूजर्स को अलग से ऑप्शन मिलेगा जिससे वे अपनी जरूरत के हिसाब से चुनिंदा ऐप्स के लिए लोकेशन शेयरिंग ऑन कर सकेंगे।

Undo App Removal

अगर आपने गलती से कोई ऐप्स डिलीट कर दी है तो ऐंड्रॉयड क्यू पर इसे सुधारने का मौका मिलेगा और कुछ समय तक वे इसे अनडू (Undo) कर सकेंगे, जिससे ऐप रीस्टोर हो जाएगी।

Dark Mode

स्मार्टफोन में एंड्रॉयड 10 के आने पर आप अपनी मर्जी के मुताबिक डार्क मोड को इनेबल (enable) कर पाएंगे, जिसके चलते आपके फोन की बैटरी क्षमता बढ़ जाएगी और ‘सिस्टम-वाइड’ डार्क मोड यूजर्स को मिलने वाला है। इसका मतलब है कि डार्क मोड अब कुछ ऐप्स तक ही सीमित नहीं रहेगा।

Bubbles Chat

ऐंड्रॉयड क्यू में आपका SMS और CHAT करने का ढंग बदल जाएगा। मेसेज और चैट्स फेसबुक मेसेंजर बबल्स की तरह दिखेंगे और वहीं से उन्हें रिप्लाई करने का ऑप्शन भी मिल जाएगा।

WiFi Sharing

ऐंड्रॉयड क्यू पर वाई-फाई नेटवर्क शेयर करना अब मुश्किल नहीं होगा और क्यूआर कोड स्कैन करने भर से वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ा जा सकेगा।

Live Caption

डिवाइस पर एक बार टैप करने भर से ही उस मीडिया के लिए कैप्शंन आऐंगे जो हर तरह का ऑडियो प्ले कर रहा है। लाइव कैप्शंस विडियो, पॉडकास्ट और ऑडियो मेसेजेस के साथ काम करेगा और इस तरह यूजर्स अपने जरूरत की बात रिकॉर्ड भी कर सकेंगे। यह फीचर सुनने में असमर्थ लोगों के लिए बहुत काम का है।स्मार्टफोन्स पर हाई-क्वालिटी विडियो कॉन्टेंट और वीडियो को कई तरह के फॉरमैट में देखा जा सकता है।

  

सोशल मीडिया आपकी और हमारी सबकी ज़िन्दगी का कितना महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग बन चूका है। इस बात का पता आज की इस घटना से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया के तीन बड़े मंच में दिक्कत आने के थोड़े टाइम में ही हर जगह हलचल मच गई। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप्प की जो आज शाम को दिक्कत करने लग गए और देखते ही देखते सभी ने इस बात का ज़िक्र ट्विटर पर करना शुरू कर दिया क्योंकि ट्विटर ही एक है जो बिलकुल बढ़िया तरीके से काम कर रहा था।

देखा जाए तो फोटो न डाउनलोड हो रहीं, न अपलोड, वीडियो भेजने में भी दिक्कत आ रही है।

वैसे देखा जाए तो ऐसी चीजों की खबर बहुत जल्दी फैलती है और ठीक भी जल्दी हो ही जाती है। पर शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि तीन बड़े मंच में एक साथ दिक्कत आई हो।

आखिर आजकल सोशल मीडिया ही तो है जिसके द्वारा हम सभी अपनी बात जन जन तक पहुंचा सकते हैं। तो इसका थम जाना तो जैसे ज़िन्दगी का थम जाना सा है।  चलिए हम भी ज़रा ट्विटर पर नज़र घुमा कर आते हैं, आखिर वही तो आज सबका हाथ थामे है।

मेरे प्यारे दोस्तो, एक तरफ तो मैं भारत का नागरिक होने पर बहुत गर्व महसूस करता हूँ, हालांकि, वहीं दूसरी तरफ यह तथ्य मुझे शर्मिंदा करता है, कि हमारा देश पूरे विश्व में बाल मजदूरों की बड़ी संख्या का घर है। वो भी केवल कुछ लालची और चालाक भारतीय नागरिकों के कारण, जो छोटे से बच्चों को जोखिम वाली मजदूरी के कार्यों में बहुत कम वेतन पर अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए लगाते हैं। वो कभी भी अपने देश के विकास के बारे में नहीं सोचते; वो बहुत स्वार्थी होते हैं और केवल अपना लाभ चाहते हैं। सबसे अधिक बाल श्रमिक ग्रामीण क्षेत्रों में, कृषि में, और शहरी इलाकों में – खनन, जरी, कढ़ाई आदि उद्योगों में पाये जाते हैं।

बाल मजदूरी के कारण

बाल मजदूरी के कुछ प्रमुख कारण गरीबी, सभी के लिए आधारभूत सुविधाओं की कमी, सामाजिक सुरक्षा की कमी आदि है। समाज में अमीर और गरीब लोगों के बीच बहुत बड़ा अन्तर, आधारभूत सुविधाओं की सीमितता और बहुत बड़े स्तर पर असमानता है। इस प्रकार के सामाजिक मुद्दे समाज में, विशेषरुप से गरीबों के बच्चों पर अन्य आयु वर्ग की तुलना में प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

बेकार व लाचार स्थिति और कम ज्ञान के कारण, गरीब बच्चे कम वेतन पर कठिन कार्य करने को तैयार हो जाते हैं, वहीं वो शहरी क्षेत्रों में घरेलू नौकर की तरह प्रयोग किये जाते हैं। बाल श्रम की यह हालत लगभग गुलामी की स्थिति जैसी ही दिखती है।
अधिकतर गरीब माता-पिता बच्चों को जन्म केवल रुपये कमाकर उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए देते हैं। वो अपने बच्चों को घरेलू कामों में अपने सहयोगी के रुप में शामिल करते हैं। हम आमतौर पर बच्चों को चाय के स्टालों, ढाबों, होटलों और अन्य जोखिम वाले कार्य को करते हुए देखते हैं।

यह देखा गया है कि बाल मजदूरी में शामिल बच्चे सामान्य रुप से अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़े वर्ग और मुस्लिम वर्ग से जुड़े होते हैं। इसका अर्थ है कि जातिवाद भारत में बाल श्रम का बड़ा कारण है। इस तरह के एक उन्नत युग में इसके अस्तित्व के कारण अप्रभावी कानून, बुरी प्रशानिक व्यवस्था, इसे पूरी तरह से खत्म करने की राजनीतिक इच्छा की कमी और नियोक्ताओं को भारी लाभ हैं।

बाल मजदूरी बंधक मजदूरी

बाल मजदूरी का एक और दूसरा रुप बंधक बाल मजदूरी भी है जो सामान्यतः अनौपचारिक क्षेत्रों में पायी जाती है। इसमें, गरीब बच्चे एक नियोक्ता के अधीन ऋण, वंशानुगत ऋण या परिवार द्वारा सामाजिक कर्तत्व के कारण बंधक बन जाते हैं। हम बंधुआ मजदूरी को गुलामी का एक रुप कह सकते हैं। बंधुआ बाल मजदूर शारीरिक और यौन शोषण और किसी भी प्रकार की लापरपवाही के कारण मौत की ओर उन्मुख हैं। वो मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बीमार हो जाते हैं और उनके पास जीवित रहने के लिए अन्य कोई विकल्प नहीं होता है।

देश के युवा होने के नाते, हमें राष्ट्र के लिए अपने दायित्वों को समझना चाहिये और इस सामाजिक मुद्दे का उन्मूलन करने के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाने चाहिये।

डेरा सच्चा सौदा संस्था ने बाल मजदूरी को रोकने के लिए क लिए कईं कदम उठाए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं-

– गरीब बच्चों के लिए शाह सतनाम जी शैक्षिक संस्थानों में मुफ़्त पढ़ाई
– गरीब बच्चों को स्टेशनरी, यूनिफार्म, पेन इत्यादि देना।
– अनुयायियों द्वारा गरीब बच्चों को विद्या दान देना, उन्हें कैरियर कॉउंसलिंग देना व ट्यूशन देना।
– संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा द्वारा 6.5 करोड़ से अधिक लोगों ने बाल श्रम न करवाने का व इसे रोकने का प्रण लिया है।

आइये, बाल श्रम के खिलाफ इस विश्व दिवस पर हम सभी यह सुनिश्चित करें कि हर बच्चे को अपना बचपन जीने को मिले। हम सब इस दिशा में कदम बढ़ाएं और अपने देश से बाल श्रम को हमेशा के लिए ख़त्म कर दें।

धन्यवाद।

यदि सुरक्षित होगा बचपन, बन जायेगा भविष्य उज्ज्वल

जय हिन्द, जय भारत।

हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस ( वर्ल्ड नो टोबैको डे) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) ने 1987 में की थी। पूरी दुनिया में प्रति वर्ष लगभग 60 लाख लोग तम्बाकू के प्रयोग के कारण मर जाते हैं, इसलिए इस दिन को मनाने के पीछे का ध्येय यही है कि आम जनता तम्बाकू से होने वाले नुक्सान को जाने, जागरूक रहे और तम्बाकू से बने पदार्थों से दूर रहे।

हमें यह बात स्वीकारने में गुरेज नहीं होना चाहिए कि भारत में पुराने समय से ही तम्बाकू का प्रचलन रहा है। पहले के समय में भी हुक्का-चिल्लम, बीड़ी, खैनी आदि के द्वारा लोग नशा करते रहे हैं, किन्तु आज की स्थिति कहीं ज्यादा विस्फोटक हो चुकी है। अब तो ज़माना एडवांस हो गया है और एडवांस हो गए हैं नशे करने के तरीके! बीड़ी की जगह सिगरेट ने ले ली है तो हुक्का और चिल्लम की जगह स्मैक, ड्रग्स ने और खैनी बन गया है! वहीं शराब ने जितना फैलाव कर लिया है, उसका तो कहना ही क्या! पहले शराब अमीर लोगों का शौक हुआ करती थी, तो अब शराब के कई सस्ते संस्करण व रूप आम लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गए हैं। ये जानते हुए भी कि तम्बाकू एक धीमा ज़हर है, जो सेवन करने वाले व्यक्ति को धीरे धीरे करके मौत के मुँह मे धकेलता रहता है, लोग जाने अनजाने मे तम्बाकू उत्पादों का सेवन करते रहते हैं। धीरे धीरे शौक लत में परिवर्तित हो जाता है और तब नशा आनंद प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि ना चाहते हुए भी किया जाता है। एक शायर ने क्या खूब कहा है –

कौन कमबख्त पीता है मज़ा लेने के लिए,
हम तो पीते हैं क्योंकि पीनी पड़ती है!

तम्बाकू उत्पादों का सेवन अनेक रूप में किया जाता है, जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, जर्दा, खैनी, हुक्का, चिलम आदि। सिगरेट, बीड़ी और हुक्के का हर कश एवं गुटखे, जर्दे, खैनी की हर चुटकी हर पल मौत की ओर ले जा रही होती है।

तम्बाकू उत्पादों के सेवन से नुकसान

तम्बाकू में मादकता या उत्तेजना देने वाला मुख्य घटक निकोटीन (Nicotine) है व यही तत्व सबसे ज्यादा घातक भी है।
इसके अलावा तम्बाकू मे अन्य बहुत से कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पाये जाते है।

धुम्रपान एवँ तम्बाकू खाने से मुँह् ,गला, श्वासनली व फेफडोँ का कैंसर  होता है। दिल की बीमारियाँ, धमनी काठिन्यता,उच्च रक्तचाप, पेट के अल्सर, अम्लपित (Acidity), अनिद्रा आदि रोगों की सम्भावना तम्बाकू उत्पादों के सेवन से बढ़ जाती है।

तम्बाकू की लत के कारण

कभी दूसरों की देखा देखी, कभी बुरी संगत में पड़कर, कभी मित्रों के दबाब में, कई बार कम उम्र में खुद को बड़ा दिखाने की चाहत में, तो कभी धुएँ के छ्ल्ले उड़ाने की ललक में, कभी फिल्मों मे अपने प्रिय अभिनेता को धूम्रपान करते हुए देखकर, तो कभी पारिवारिक माहौल का असर- ये सब तम्बाकू उत्पादों की लत का कारण बनते हैं। अधिकतर लोग किशोरावस्था या युवावस्था में दोस्तों के साथ सिगरेट, गुट्खा, जर्दा, आदि का शौकिया रूप मेँ सेवन करते है शौक कब आदत और आदत कब लत मे बदल जाती है, पता ही नहीं चलता और जब तक पता चलता है तब तक शरीर को बहुत नुक्सान पहुँच चुका होता है।

धूम्रपान, जर्दा, खैनी आदि नशा छोडने के उपाय

1.नशा छोड़्ने का दृढ़ निश्चय करें।

2.यदि नशा एक बार में झटके से छोड़ना मुश्किल लगे तो धीरे धीरे मात्रा कम करते हुए छोड़ें।

3.सभी मित्रों,परिचितों को बता दें कि आपने नशा छोड़ दिया है ताकि वे आपको नशा करने के लिये बाध्य ना करें।

4.डायरी लिखें कि आप कब और कितनी मात्रा मे नशा करते हैं, क्या कारण है जो आप नशा करने के लिये प्रेरित होते हैं।

5.अपने पास सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू, एवम् माचिस आदि रखना छोड दें।

6.खान पान एवं लाइफ स्टाइल में सुधार करें।

नशे छुडवाने की अनोखी मिसाल

हम सभी जानते हैं कि डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी संस्था है जिसमें सबसे ज्यादा मानवता भलाई के कार्य चल रहे हैं उनमें से एक है नशा न करना और नशा छुडवाना , जिसमें डेरा अनुयायियों ने काफी हद तक सफलता प्राप्त की है। बाबा राम रहीम की दिशा निर्देश में यहां अब तक लाखों लोगों के नशे छुडवाऐ जा चुके हैं इसके लिए यहां 7 से 10 दिन तक कैंप भी लगवाया जाता है। यही नहीं बाबा राम रहीम के द्वारा बनाई गई MSG MOVIES में भी देश को नशा मुक्त बनाने के लिए जागरूक किया गया है।

31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस / World No Tobacco Day मनाया जाता है आइये इस अवसर पर हम संकल्प लें कि खुद भी नशा नही करेंगे और अन्य लोगों को भी नशा ना करने के लिये प्रोत्साहित करेंगे।

मई माह में विश्व अस्थमा दिवस आता है। यूं तो कई दिवस आते हैं और हम उनके बारे में चर्चा करके भूल भी जाते हैं, पर अस्थमा दिवस याद रखना जरूरी है, क्योंकि सवाल सांसों का है। अगर इस दिन की गंभीरता को न समझा तो सांसें कभी भी थम सकती हैं। न चाहते हुए भी दुनिया भर में करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो अपने हिस्से की सांस भी पूरी तरह नहीं ले पाते।

आखिर इसकी क्या वजह है, कैसे अस्थमा के रोगियों को कम किया जा सकता है? शहरों में धुएं और धूल के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यही नहीं, पेट्रोल पंप पर काम करने वाला हर दसवां कर्मचारी अस्थमा की चपेट में है। इसकी सबसे प्रमुख वजह है प्रदूषण के बीच कार्य करना। इस रोग को रोका जा सकता है, जरूरत है कुछ सावधानियों की।

अस्थमा अटैक से बचने के टिप्स

  • ज्या‍दा गर्म और नम वातावरण में मोल्ड स्पोर्स के फैलने की सम्भावना अधिक होती है, इसलिए ऐसे वातावरण से बचें। आंधी और तूफान के समय घर से बाहर ना निकलें ।
  • अस्थमा को नियंत्रित रखें और अपनी दवाएं हमेशा साथ रखें।
  • अगर आपका बच्चा अस्थमैटिक है, तो उसके दोस्तों व अध्यापक को बता दें कि अटैक की स्थिति में क्या करना है।
  • हो सके तो अपने पास स्कार्फ रखें जिससे आप हवा के साथ आने वाले पॉलेन से बच सकें।
  • घर के अंदर किसी भी प्रकार का धुंआ ना फैलने दें।
    अल्ग–अल्ग लोगों में दमा के दौरे के कारण भिन्न हो सकते हैं, इसलिए सबसे आवश्यक बात यह है कि आप अपनी स्थितियों को समझें।
  • अस्थमा के मरीज़ों के लिए बरसात से कहीं ज्यादा खतरनाक होती है, धूल भरी आंधी। इसलिए हर संभव प्रयत्न करें की आंधी के समय घर से बाहर न निकलें।
  • एक बार अपनी स्वास्‍थ्‍य स्थितियों को समझने के बाद आपके लिए अस्थमा से बचना आसान हो जायेगा। कुछ सावधानियां बरतकर आप अस्थमा की जटिलता से भी बच सकते हैं और वातावरण के अनुसार स्वास्थ्य को ढाल सकते हैं।

अस्थमा के मरीजों के लिए एक नई दिशा

हम आज कल अखवारों में पढ़ ही रहे हैं कि समाज में एक जानी मानी संस्था डेरा सच्चा सौदा मानवता भलाई के रोज नये कदम उठाती है और अस्थमा को भी रोकने के लिए इन्होंने नए कदम उठाए हैं, जो समाज को जागृत करने में भी सफल हुए हैं।

  • डेरा सच्चा सौदा के मुखिया बाबा राम रहीम की दिशा निर्देश में अस्थमा के मरीजों के लिए आश्रम में कैंप भी लगाए जाते हैं, जिसमें मुफ्त में इन मरीजों का चैकअप और ईलाज किया जाता है।
  • यही नहीं इसके लिए बाबा राम रहीम ने अपनी पहली फिल्म MSG THE MESSENGER में जो कलेक्शन हुई, वो सारा पैसा अस्थमा के मरीजों के लिए परमार्थ के रुप में दे दिया था और समाज में एक नई मिसाल कायम की।
  • बाबा राम रहीम द्वारा बताई गई प्राणायाम की विधि से अस्थमा व फेफड़ों के अन्य रोगों से कईं लोगों सफलतापूर्वक निजात पाई है।
  • डेरा सच्चा सौदा ने समाज को बिमारियों से बचाने के लिए कई महानगरों और शहरों में सफाई अभियान किये।
  • जेल में होने के बावजूद भी बाबा राम रहीम ने समाज को बिमारियों से बचाने के लिए प्रदूषण को रोकने की मुहिम भी चलाई।

इसी प्रकार हमें भी समाज में अस्थमा के मरीज़ों के लिए इस दिन सैमीनार भी लगाना चाहिए जिससे लोगों में जागरूकता उत्पन्न हो। उम्मीद है कि जल्द ही लोगों में जागरूकता उत्पन्न होगी व अस्थमा रोग को नियंत्रित व कम किया जा सकेगा।

 

अभी केरला बाढ आने के बाद उसी स्थिति से उभर नहीं पाया था कि फिर दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के पास अरब सागर में सीज़न का पहला चक्रवाती तूफान फानी विकसित हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक यह तूफान राज्य में भारी नुकसान पहुंचा सकता है। प्रशासन ने तटवर्ती जिलों में अलर्ट जारी किया है।

 

तमिलनाडु और केरल में भारी बारिश और लक्षद्वीप में भी चक्रवाती तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

 

मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे के दौरान तमिलनाडु और केरल में भारी बारिश के साथ 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं भी चलेंगी। वहीं, लक्षद्वीप में  40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज़ हवाएं और आंधी तूफान आने की संभावना है।

 

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आज रविवार को मौसम की चेतावनी जारी करते हुए कहा कि चक्रवाती तूफान फानी एक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। “30 अप्रैल तक इस तूफ़ान की उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की बहुत संभावना है और इसके बाद धीरे-धीरे उत्तर-पूर्व की ओर जाएगा, इस तूफ़ान के अगले 12 घंटों के दौरान एक गंभीर चक्रवाती तूफान में और बाद के 24 घंटों के दौरान अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में परिवर्तित होने की संभावना है।” मौसम विभाग ने आज जारी बुलेटिन में कहा।
इस तूफान ने अपना कहर दिखाना शुरू कर किया है। जगह-जगह पर पेड़ और होर्डिंग गिरे पड़े हैं, समुद्र में ऊंची व भयानक लहरें उठ रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण भारत में इस चक्रवात को आगे बढ़ने के चलते हालात और भी ज्‍यादा खराब हो सकते हैंं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वह अपने घरों में रहें और समुद्र तट के पास आने से बचें। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। बताया जाता है कि तूफान की रफ़तार तेजी से बढ़ रही हैैै, जिसके कारण प्रशासन ने अलर्ट जारी किया हुआ है।

 

बंगाल और पड़ोस के दक्षिण पूर्व खाड़ी में 80-90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली आंधी हवा की गति प्रचलित है जिसकी 28वीं सुबह से 90-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 115 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है; बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी में 29 वीं सुबह से 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के चलने की संभावना है।

 

तूफान की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई जगह पर घर पूरी तरह से गिर चुके हैं और जगह- जगह पर पेड़ गिरे होने के कारण यातायात भी रुक गया है। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही यह चक्रवात बिना किसी की जान को नुक्सान पहुंचाए खत्म हो जाए और फिर से इन सभी राज्यों में सामान्य जन जीवन शुरू हो सके।

क्यों 22 अप्रैल पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है?

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी जीवन वाला एकमात्र ज्ञात ग्रह है। इसलिए, हमें पृथ्वी से जो कुछ भी प्राप्त होता है, उसका सम्मान करना चाहिए और उन्हें बनाए रखना चाहिए। हमें धरती माँ की रक्षा करनी चाहिए, ताकि हमारे भविष्य की पीढ़ियाँ सुरक्षित वातावरण में रह सकें। हम पृथ्वी की रक्षा पेड़ों, प्राकृतिक वनस्पति, पानी, प्राकृतिक संसाधन आदि की रक्षा करके कर सकते हैं। हमें पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने वाले संभव प्रयासों का कड़ाई से पालन करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पृथ्वी जीवन दायिनी साबित हो।

पृथ्वी दिवस क्या है?

पर्यावरण प्रोजेक्ट के अन्तर्गत पृथ्वी को बचाने के लिए 1970 से हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला दिन पृथ्वी दिवस कहलाता है। इस प्रोजेक्ट को शुरु करने का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ वातावरण में रहने के लिए प्रोत्साहित करना है।

विस्कॉन्सिन से अमरीका के एक सीनेटर, गेलॉर्ड नेल्सन ने इस दिन की स्थापना की थी ताकि लोगों को आज के दिन औद्योगिकीकरण की बढ़ती हुई दर और पृथ्वी पर रहने वाले लोगों की लापरवाह रवैये के बारे में जागरूक किया जा सके। लोगों के बीच प्राकृतिक संतुलन के विचार को प्रोत्साहित करने के साथ ही ग्रह की संपत्ति का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उनके द्वारा यह कदम उठाया गया। सदियों से क्रूर लोगों ने प्राकृतिक संसाधनों का निर्दयतापूर्वक उपयोग किया, जिससे अनेक दिक्कतें आयीं हैं और जानवरों व पौधों की कईं प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं। स्वस्थ और जीवित रहने के लिए पर्यावरणीय मुद्दों का ध्यान रखना जरूरी है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण ओज़ोन परत की कमी है, जो हमें सूरज की अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाती है। एक और बड़ी समस्या औद्योगिक विषैले पदार्थों को नदियों में बहा देना है, जो अनेक नदियों की मौत का कारण बनता है, जो की एक बार फिर ग्लोबल वार्मिंग की ओर जाता है। दैनिक आधार पर औद्योगीकरण में वृद्धि, तथा जनसँख्या में वृद्धि से वनों की कटाई हो रही है जो अंततः पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है। छोटे पेड़ों  के वृक्षारोपण, वनों की कटाई को रोकना, वाहनों को सीमित करना, वायु प्रदूषण को कम करना, बिजली के अनावश्यक उपयोग को कम करना इत्यादि के माध्यम से पर्यावरण व ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता है। ज़रुरत हैं इन कदमों पर चलने की। इस तरह के छोटे कदम एक बड़ा कदम बन जाते हैं अगर दुनिया भर में लोगों द्वारा देखभाल की जाती है।

ऐसे में पृथ्वी की देखभाल के लिए कुछ कदम बाबा राम रहीम की दिशा निर्देश में डेरा सच्चा सौदा ने उठाए हैं जो इस प्रकार है:-
१ वातवरण रक्षा:- किसानों को पराली जलाने की बजाय गौशालाओं में चारे हेतू भेजने की प्रेरणा देना।

२ जल संरक्षण :- जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया और इसके लिए बाबा राम रहीम ने कई तरह के तरीक़े भी बताऐ हैं, जैसे बरसात के पानी का इस्तेमाल, काम पानी से खेती करना, ड्रिप सिस्टम से पानी लगाना।

३ बिजली बचाना:- बिजली का सही तरीके से प्रयोग करना जैसे सोलर ऊर्जा लगाने से हम बिजली की बचत कर सकते हैं। डेरा सच्चा सौदा में भी सोलर एनर्जी द्वारा बनी बिजली का उपयोग किया जाता है।

४ स्वच्छता अभियान : सफाई अभियान द्वारा लोगों को प्रदूषण और बिमारियों से बचाना। इस दौरान डेरा सच्चा सौदा अब तक 32 शहरों में महा सफाई अभियान कर चुका है, जिससे देश को ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जागरूकता पैदा हुई है।प्रधान मंत्री मोदी द्वारा भी इस मुहिम को सराहा व अपनाया गया है।

५ नेचर कैंपेन :पर्यावरण संरक्षण हेतु पौधे लगाना। डेरा सच्चा सौदा ने पौधारोपण के लिए सिर्फ जागरूक ही नहीं किया बल्कि खुद भी करोड़ों पौधे लगाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है और आज तक इनके गिनिज बुक में ३ रिकॉर्ड दर्ज हैं।

६ मिट्टी और जल प्रदूषण से बचने के लिए लोगों को प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित किया और आश्रम में भी यही मुहिम चलाई।

७ रीसाइक्लिंग और पुराने सामग्रियों के पुन: उपयोग के बारे में सीखना। बाबा राम रहीम ने एक फिल्म जट्टू इंजनियर के जरिए भी गोबर का रिसाइकिल करके बायो गैस प्लांट लगाना सिखाया। डेरा सच्चा सौदा में बायो गैस प्लांट लगा हुआ है तथा आस पास के गाँवों में ऐसा प्लांट लगाने के लिए डेरा सच्चा सौदा द्वारा पूर्ण मदद की जाती है।

निष्कर्ष:-

पृथ्वी हमारी माता है, जो हमें हमारे जीवन के लिए आवश्यक सभी वस्तुएं देती है। इसलिए, हम इसकी प्राकृतिक गुणवत्ता और हरे-भरे वातावरण को बनाए रखने के लिए भी जिम्मेदार है। हमें छोटे लाभों के लिए इसके प्राकृतिक संसाधनों को बर्बाद और प्रदूषित नहीं करना चाहिए, व इसे इसके प्राकृतिक रूप में रखने के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए।

एक मुलाकात जो छोड़ गई गंभीर सवाल….

गर्मी की छुट्टियां बिताने निवेदिता काफी अरसे के बाद अपनी 12 वर्षीय बेटी देवांशी के साथ अपने पीहर पालमपुर आ रही थी। मरांदा रेलवे स्टेशन पर पांव पडते ही एक अलग सी रौनक उसके चेहरे पर आ गई। दिवांशी को साथ लेकर उसनें कदम टैक्सी स्टैण्ड की तरफ बडाऐ, तभी एक बेहद अपनी सी आवाज ने उसे पुकारा। रेलवे स्टेशन पर गाडिय़ों और आते-जाते लोगों के शोर के बीच उस अपनी सी आवाज को सुनकर निवेदिता के कदम वहीं रुके और अपनी बचपन की सबसे प्रिय सहेली सागरिका को सामने पाकर उसकी आखें सहसा चमक उठी। उसके मस्तिष्क पटल पर वो ‘घुग्गर स्कूल की पढाई’, वो ‘गोबिंद की मिठाई’, वो ‘शर्मा की कुल्फी’, वो कालेज की टिक्की’, वो ‘न्यूगल कैफे की हवा’ सब यादें एक साथ तस्वीर बन गऐ।

निवेदिता ने सागरिका को आलंगिन मे लिया और अपनी बेटी को उसका परिचय देते हुऐ कहने लगी, ये है मेरे बचपन की ‘बेस्टी’ और दोनों सहेलियां खिल-खिलाकर हंस पडी। सागरिका ने भी दिवांशी को प्यार दिया। सागरिका की शादी पालमपुर मे ही हुई थी और उसका ससुराल निवेदिता के घर के पास ही था, इसलिए दोनों ने एक ही टैक्सी लेने का मन बनाया ताकिं कुछ वक्त साथ मे बिताया जा सके।

चूंकि दोनो सहेलियां एक अरसे बाद मिल रही थी तो दोनों ने एक दूसरे के परिवार के बारे मे जानने के लिए उत्सुकता दिखाई। सागरिका के परिवार मे उसके पति और तीन बच्चे हैं। निवेदिता ने बताया वह अपने सास-ससुर, पति और बेटी के साथ नई दिल्ली मे रहती है, यह जानकर हैरानी भरे भाव से सागरिका ने पूछा, अच्छा तो फैमिली कब पूरी कर रही हो? निवेदिता उसकी हैरानी की वजह समझ चुकी थी, पर फिर भी मुस्कराहट के साथ जवाब देते हुऐ कहने लगी, परिवार तो पूरा ही है और हम सब खुशी से अपनी जिदंगी व्यतीत कर रहें है। “अरे तुम समझी नहीं, मेरा मतलब तुम्हारा वंश….? निवेदिता का जवाब फिर से एक सहज मुस्कराहट के साथ था “हमारी बेटी बढाऐगी हमारा वंश”। और इस बात का व्यावहारिक तौर पर क्या अधार है? सागरिका एक के बाद एक प्रश्नो के साथ तैयार थी।

अब बारी निवेदिता की थी वो सागरिका के सारे सवालों को सतुंष्ट करे। निवेदिता ने बताया कि उसके पति अनुराग हरियाणा के एक संत बाबा राम रहीम के अनुयायी है और वो उन्हीं के साथ एक बार… । उसकी बात को काटती हुई सागरिका बोली वोही बाबा राम रहीम जिनके बारे मे गत 1-2 सालों से मीडिया काफी कुछ दिखा रहा है, क्या तुम्हारे पति अब भी उनके अनुयायी हैं? निवेदिता ने कहा हां अब भी, और सिर्फ वो ही नही, मैं भी उनको अपना गुरु मानती हूँ।

सागरिका ने कहा आज तुम मुझे क्यों बार बार हैरान किए जा रही हो, जिस निवेदिता को मैं बचपन से जानती हूँ वो तो एकदम नास्तिक, तर्कशील सोच, वैज्ञानिक द्रष्टिकोण रखने वाली निवेदिता थी। तुम कब से बाबाओं और संतो की बात करने लगी। जब से अनुराग जी के साथ बाबा जी के आश्रम मे जाने का मौका मिला, निवेदिता का जवाब था। अपनी बात को पूरा करते हुए निवेदिता बोली बाबा राम रहीम सिर्फ एक आध्यात्मिक गुरु नहीं हैं, बल्कि एक समाज सुधारक भी हैं। धर्म के सच्चे अर्थों को वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से इतनी सरलता से आमजन तक पहुंचाने वाले और ‘नर सेवा नरायण सेवा’ को यथार्थ रुप देने वाले एक सच्चे और सहासपूर्ण संत हैं। उनकी परहित की सोच ने उसे बहुत प्रभावित किया।

बाबा राम रहीम द्वारा चलाऐ मानवता भलाई कार्यों के एक लंबी सूची है जिसमें से एक है ‘कुल का क्राउन‘, जिसके तहत जिन माता पिता के इकलौती संतान बेटी है, वो शादी कर के लडके को अपने माता पिता के घर लाऐगी और ऐसी शादी से हुई संतान का नाम उसके माता पिता के नाम से होगा, तांकि उनका वंश आगे बढाया जा सके। और बाबा जी की प्ररेणा से ऐसे बहुत से लडके आगे आऐ हैं जो लडकी के मां-बाप को अपने मां-बाप के समान समझ कर उनका हर तरह से सहारा बन कर साथ रहेंगे। समाज मे भी इस नई सोच को सहारा गया हैं और इस मुहिम के तहत अब तक कई शादियां भी सम्पन्न हुई हैं।

मेरी दिवांशी भी हमारे कुल का दीपक नहीं ‘ताज’ बनेगी। निवेदिता की बातों से सागरिका के मन मे एक बेहद सकरात्मक समाज की तस्वीर बन रही थी। जिन बाबा राम रहीम के बारे वो मीडिया से ने जाने क्या कुछ अनाप शनाप सुन चुकी थी, आज उनकी सच्चाई जान कर वो उनसें काफी प्रभावित थी, वह बाबा जी और उनके मानवता भलाई के कार्यों के बारे मे और जानना चाहती थी, लेकिन निवेदिता का घर आ चुका था और जिदंगी के रुझानो के चलते अगली मुलाकात अनिश्चित थी।

सागरिका निवेदिता को तो अलविदा कह चुकी थी लेकिन अपने मन मै पैदा हुऐ सवालों की उत्सुकता को अलविदा न कह पाई, बाबा राम रहीम जैसे सच्चे संत जो समाज को सही राह दिखाते है, परहित के कार्य करते हैं आखिर उन्हें क्यों विरोध और यातनाएं सहनी पडती हैं? अगर सागरिका के सवालों का जवाब आपके पास हो तो हमे बताऐगा जरूर कमेंट बॉक्स मे।

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और शाहरुख खान के बीच हुए झगड़े से हर कोई परिचित है इस विवाद के बाद अगर कोई चर्चित विवाद रहा है तो वह कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच हुआ विवाद है जो कि मार्च 2017 में हुआ था जिसकी वजह से सुनील ग्रोवर ने “द कपिल शर्मा शो” को छोड़ा था

लेकिन 1 साल के बाद कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच दोस्ती की खबर आई और दोनों ने फिर से टीवी शो पर वापसी की लेकिन एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग शो में।

जहां कपिल शर्मा ने द कपिल शर्मा सीजन टू शो के साथ तो वही सुनील ग्रोवर ने कानपुर वाले खुरानाज़ शो के साथ वापसी की।

कानपुर वाले खुरानाज़ शो खत्म होने जा रहा है और यह खबर मिली है कि सुनील ग्रोवर कपिल शर्मा के साथ फिर से द कपिल शर्मा शो करने के लिए तैयार हैं जबकि इस खबर के बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।

वही कानपुर वाले खुरानाज़ शो की मेकर्स प्रीति सिमोज़ ने इस खबर को गलत बताया और कहा कि सुनील ग्रोवर पहले से ही बहुत व्यस्त है सलमान खान की भारत फिल्म की शूटिंग मे व्यस्त हैं उनके पास किसी और प्रोजेक्ट के लिए समय नहीं है।

हाल ही में जगबानी टीवी से बातचीत के समय नवजोत सिंह सिद्धू से सुनील ग्रोवर की वापसी की खबर के बारे में पूछा गया।

उन्होंने इस जानकारी की कोई पुष्टि तो नहीं की लेकिन यह कहा कि वह और कपिल दोनों सुनील ग्रोवर का दिल से स्वागत करते हैं अगर वह इस शो में वापसी करना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि कपिल शर्मा शो ईश्वर के बनाए गुलदस्ते की तरह है जिसे कोई भी जोड़ और तोड़ नहीं सकता है। सुनील ग्रोवर शो को छोड़कर गए थे , लेकिन आज भी वह इस फैमिली का हिस्सा है।

दोस्तों, जैसा कि हम पिछले चार दिनों से अखबारों की सुखिर्यों में पढ़ ही रहे हैं कि हरियाणा के सिरसा जिले की एक जानी मानी सामाजिक संस्था डेरा सच्चा सौदा ने अपनी दूसरी पातशाही शाह सतनाम सिंह जी महाराज की समृति में 27 वां चार दिवसीय आंखों का कैंप लगाया। यह कैंप 27 वर्षों से संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी के मार्गदर्शन में लगाया जाता है। इस बार भी 12 दिसंबर को शाह सतनाम जी रिसर्च एंड डेवल्पमेंट फाउंडेशन की ओर से आयोजित किए जा रहे इस फ्री नेत्र जांच शिविर की शुरुआत संत गुरमीत राम रहीम के परिवार के सदस्यों और मैनेजमेंट ने अपने गुरु द्वारा दिया पावन नारा “धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा” लगाकर की।

चिकित्सक बोले, नेत्र रोगियों के लिए लाभदायक है कैंप:

कैंप में चिकित्सा सेवा देने के लिए हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व दिल्ली से पहुंचे डॉ. गीतिका, डॉ. कोनिका, डॉ. मोनिका गर्ग, डॉ. राम कुमार, डॉ. विनोद, डॉ. गौरव अग्रवाल, डॉ. पुनीत माहेश्वरी, डॉ. सुशीला आजाद, डॉ. शिप्रा, डॉ. नरेंदर कंसल, डॉ. हर्ष, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. कुलभूषण, डॉ. इकबाल सिंह, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. विजेता, डॉ. हरपुनीत सहित सभी ने संयुक्त रुप से कैंप में दी जा रही सुविधाओं की मुक्तकंठ से तारीफ करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस कैंप में सेवाएं देने के लिए आ रहे हैं तथा हर बार उन्हें यहां आकर बहुत खुशी महसूस होती है। उनका कहना है कि डेरा सच्चा सौदा में लगाए जाने वाले चिकित्सा शिविरों में बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। हर साल लगने वाला आंखों के आप्रेशन का यह कैंप हजारों लोगों के लिए लाभदायक साबित होता है।

महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग वार्ड:

अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में महिला और पुरुष मरीजों के अलग-अलग वार्ड बनाए गए। आप्रेशन के बाद मरीजों के रहने, सोने के लिए बेहतरीन प्रबंध किए गए। मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के रहने व खाने-पीने का प्रबंध भी डेरा सच्चा सौदा की ओर से ही किया गया।

मरीज सराह रहे चिकित्सा शिविर में दी जा रही सुविधाओं को:

शिविर में सेवाएं ले रहे मरीज कैंप में मिल रही चिकित्सीय सुविधाआें व रहने, भोजन इत्यादि की सेवाआें से पूरी तरह संतुष्ट हैं तथा उनका कहना है कि जैसी सेवा उनकी कैंप में सेवादारों द्वारा की जाती है, वैसी तो उनके अपने भी नहीं करते। उन्हें समय पर दवाइयां, खाने, आंखों में दवा डालने, भोजन करवाने, चाय-पानी इत्यादि के लिए सेवादार हर समय तत्पर रहते हैं। सर्दी के मौसम के अनुकूल गर्म कपडे व बिस्तर का प्रबंध भी डेरा सच्चा सौदा द्वारा ही किया गया। कैंप के दौरान कुल 6596 मरीजों की जांच की गई और 90 अपरेशन हुए। यहां पर 27 वर्षों में आज तक आंखों के जितने भी अपरेशन हुए हैं वो सभी 100% सफल हुए हैं। जो अपने आप में ईश्वर की कृपा का साक्षात उदाहरण है।

जिनका पहले दिन अपरेशन हुआ उनको दवाई देकर छुट्टी दे दी और घर भेज दिया गया है और वो जाते वक्त डेरा सच्चा सौदा को धन्यवाद बोल रहे थे।