Earth’s fast rotation become a matter of concern for all, which doesn’t happened in past 50 years

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धरती का तेजी से घूमना बना चिंता का विषय –

आपको बता दे पिछले 50 सालों के समय में ऐसा पहली बार हुआ है कि धरती तेजी से घूम रही है। चिंता का विषय यह है कि मौजूद समय में धरती सामान्य गति से तेज चल रही है, अर्थात् पृथ्वी 24 घंटे से पहले ही अपना चक्कर पूरा कर रही है।

वैज्ञानिकों ने किया धरती को लेकर बड़ा खुलासा –

धरती पर मौजूद सभी देशों का समय बदल रहा है। यह इस बात को दर्शाता है कि धरती अपनी धुरी पर तेजी से घूम रही है और पिछले 50 सालों में समय की तुलना में अब की बार धरती ने 24 घंटे से कम समय में एक चक्कर पूरा किया है। जो कि वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
आपको बता दे पृथ्वी के घूमने का  उचित समय 24 घंटे में 86,400 होता है। कहने का अर्थ इतने सेकंड में पृथ्वी अपना एक चक्कर पूरा करती है। लेकिन पिछले वर्ष जून में 86,400 second 0.5  mili second की कमी आई है। जिससे कि धरती अपने तय समय से कम समय में चक्कर पूरा कर रही है। 19 जुलाई 2020 जुलाई का दिन सबसे छोटा दिन माना जाता है। क्योंकि यह 24 घंटे से 1.4602 मिली सेकंड कम था।

Negative Leap Second –

वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती का समय के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए नेगेटिव लीप सेकेंड का जोड़ना आवश्यक है। वैसे देखा जाए तो 70 के दशक से अब तक 27 लीप सेकेंड जोड़े जा चुके हैं। 2016 में लीप सेकेंड जोड़ा गया था, लेकिन इस बार धरती की रफ्तार बहुत तेज है। जिसकी वजह से लीप सेकेंड को हटाना पड़ेगा यानी नेगेटिव लिप सेकेंड जोड़ना पड़ेगा।
नेशनल फिजिकल लैबोरेट्री के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट पीटर  का कहना है कि यह तो तय है कि धरती अपने तय समय से कम समय में एक चक्कर पूरा कर रही है। जो कि पिछले 50 सालों में पहली बार हो रहा है, जिसका परिणाम यह होगा साइंटिस्ट को इसमें एक नया लीप सेकेंड जोड़ना पड़ेगा ताकि धरती का समय के साथ और आमजन के जीवन के साथ तालमेल बनाया जा सके।

Atomic Clock –

सभी देशों का समय बदलने की वजह से साइंटिस्ट को अपनी अपनी जगह पर मौजूद एटॉमिक क्लॉक में नेगेटिव लीप सेकेंड जोड़ना पड़ेगा। ताकि आमजन धरती के समय के साथ अपना तालमेल रख सके इसका प्रभाव आम जन पर भी पड़ेगा। 

आप सभी के दिमाग में एक सवाल चल रहा होगा कि ऐसा क्यों होता है। हम आपको बताना चाहते हैं कि एक अध्ययन के अनुसार यह बदलाव Global Warming के कारण हो सकता है और शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्लेशियरों का पिघलना भी एक मुख्य कारण है। जो कि पृथ्वी की रफ्तार को बढ़ावा दे रहा है और इसका प्रभाव बहुत बुरा हो सकता है |

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