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क्या है धनतेरस

धनतेरस का शाब्दिक अर्थ है धन और तेरा (13)। इसका मतलब है धन के लिए मनाया जाने वाला त्योहार है धनतेरस जो कार्तिक महीने के 13वें दिन होता है।

 

धनतेरस उत्सव

धनतेरस के त्योहार को महान उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार पर, लोग धन की देवी लक्ष्मी जी और मृत्यु के देवता यम की पूजा करते हैं, भगवान यम से अच्छे स्वास्थ्य और देवी लक्ष्मी से समृद्धि के रूप में आशीर्वाद प्राप्त करते है। लोग अपने घरों और कार्यालयों को सजाते है।

 

सभी अपने घर आँगन के प्रवेश द्वार को सजाने के लिए लोग रंगीन रंगोलियां बनाकर सजावट करते है । चावल के आटे और सिंदूर से लक्ष्मी जी के छोटे पैरों के निशान बनाये जाते हैं जो कि देवी लक्ष्मी के लंबे समय से प्रतीक्षित आगमन का संकेत होता है। धनतेरस पर सोने या चांदी जैसी कीमती धातुओं से बने नए बर्तन या सिक्के खरीदना बहुत लोकप्रिय है क्योंकि यह शुभ माना जाता है और यह हमारे परिवार के लिये सुख सम्रद्धि और अच्छा भाग्य लाता है।

 

धन तेरस की पूजा

 

धनतेरस के दिन शाम को ‘लक्ष्मी जी की पूजा’ के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। देवी लक्ष्मी जी के लिए लोग भक्ति गीत गाते हैं। सभी दुखों को दूर करने के लिए छोटे-छोटे दीपक जलाते है। धनतेरस की रात, लोग पूरी रातभर के लिए दीपक को जलाते हैं। पारंपरिक मिठाई पकायी जाती हैं और देवी माँ को प्रसाद समर्पित किया जाता हैं।

 

धनतेरस पर कहानी

एक  कथा के अनुसार प्राचीन समय में हेम नाम के एक राजा रहता था. विवाह के कई सालो बाद उसकी एक संतान हुई. जब ज्योतिषियों ने बालक देखी तो पता चला की राजकुमार के विवाह के ठीक चार दिन बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी. यह बात जानकार राजा और रानी बहुत दुखी हो गए. धीरे धीरे समय बितता गया और राजकुमार ने गन्धर्व विवाह कर लिया.

 

विवाह के चार दिन बाद यमदूत राजकुमार के प्राण लेने लेकर चले गए लेकिन राजकुमार की पत्नी के शोक विलाप को देखकर उन्होंने यमराज से पूछा की कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे इंसानों की अकाल मृत्यु न हो सके.  यमराज ने इसका उपाय बताते हुए कहा की  कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की रात को जो मनुष्य   दक्षिण दिशा की और दीप जलाएगा वो अकाल मृत्यु से बच सकता है. तभी से धनतेरस (Dhanteras) के दिन दीया जलने की परम्परा की शुरुआत हुई.

धनतेरस 2018 में क्या ख़रीदे?

1.शंख खरीदना:- पुरानी कथाओ के अनुसार इस दिन दक्षणीवर्ती शंख खरीदना अच्छा माना जाता है |
2.रूद्राक्ष खरीदना:- कुछ लोग इस दिन रूदाक्ष की माला भी खरीदते है |

 

3.लोहा खरीदने का शुभ दिन:- लोहा खरीदने का शुभ दिन धन तेरस को ही माना गया है|
4.बर्तन खरीदना:- इस दिन बर्तन खरीदने को शुभ माना जाता है |

 

 

5.चांदी की खरीदारी:- इस दिन चांदी भी खरीदना शुभ माना जाता है | प्रचीन प्रथा के अनुसार चांदी चाँद का प्रतीक होती है जिस से शीतलता प्राप्त होती है इसलिए इसको लाना शुभ होता है |

 

6.सोना खरीदना:-इस दिन सोने को भी खरदीना अच्छा होता है |

 

 

7.गाय को सजाना:- इस दिन दक्षिण भारत के कुछ लोग गायों को भी सजाते है क्योंकी गाय लक्ष्मी का रूप मानी जाती है |

 

बदलते दौर के साथ लोगों की पसंद और जरूरत भी बदली है। इसलिए धनतेरस के दिन अब बर्तनों और आभूषणों के आलावा वाहन, मोबाइल आदि भी ख़रीदे जाने लगे हैं। वर्तमान समय में धनतेरस के दिन वाहन खरीदने का फैशन सा बन गया है। इस दिन लोग गाड़ी खरीदना शुभ मानते हैं। कई लोग इस दिन कम्पूटर और बिजली के उपकरण भी खरीदते हैं।

 

मगर सच्चे संत फरमाते हैं इस दिन हमें दुनियाभी वस्तुएं न खरीद कर  गरीबों की मदद करके ,उनके बच्चों को नऐ कपडे और मिठाई दिलाकर रुहानी दौलत खरीदनी चाहिए।

 

आजकल एलोवेरा अपने गुणों के कारण काफी प्रसिद्ध है पर कई लोग इसके बारे में नहीं जानते। लेकिन आज हम आपको इसी गुणों के बारे में बताएंगे।यह एक औषधिवर्धक गुणकारी पौधा है इसको धृतकुमारी नाम से भी जाना जाता है। इसका इस्तेमाल औषधियों को बनाने में किया जाता है जैसे आजकल बाजार में भी एलोवीरा ज्यूस के कई तरह के स्वाद अनुसार फ्लेवर आते हैं जिनका आसानी से सेवन किया जा सकता है। एलोवेरा में 12 प्रकार के विटामिन, मिनरलस, एमिनो एसिड उपलब्ध है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। वह रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है इसका रोजाना सेवन करने से पुराने रोग जैसे जोड़ों के दर्द बवासीर आदि में लाभ मिलता है। एलोवेरा पेट दर्द , गैस, तेजाब, कब्ज दूर कर शरीर की पाचन क्रिया को मजबूत करता है। इतना ही नही एलोवेरा सभी रोगों में फायदेमंद है जैसे माइग्रेन, ब्लड प्रेशर ,एलर्जी ,जोड़ों के दर्द, साइटिका बाय,गठिया बाय ,गुर्दे की पथरी आदि अनेक रोगों में लाभकारी है।
बालों के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है, साथ मे आंखों की रोशनी को भी बढ़ाता है त्वचा संबंधी रोगों हेतु भी यह बहुत ही लाभदायक है। खून साफ कर करता है त्वचा कोमल मुलायम बनाता है कील मुंहासे ,एलर्जी आदि चर्म रोगों में भी काफी लाभदायक है। एलोवेरा जेल एलर्जी ,जलने- कटने में धूप से बचाव करता है और एलोवेरा जेल को चेहरे पर लगाने से चेहरे में निखार भी आता है।
एलोवेरा का रोजाना सुबह खाली पेट सेवन करने से यह अत्यधिक लाभ करता है जिससे धरण जैसी बीमारियां भी दूर हो जाती है इसलिए इसका सेवन लगातार करना चाहिए। यह कई रोगों में फायदेमंद है। यह घुटनों के दर्द में भी मॉयल का काम करता है।
एलोवेरा का पौधा हमें आसानी से उपलब्ध हो जाता है ।एलोवेरा की खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। चाहे तो आप एलोवेरा के पौधे को घर में भी एक गमले में लगा सकते हैं और उसका रोजाना इस्तेमाल कर सकते हैं ।इसका एक टुकड़ा लेकर उसके गुदे को जो कि प्राकृतिक जेल का काम करती है को हम चेहरे पर रोजाना लगाएं तो हमारे चेहरे में निखार आता है और जो दाग धब्बे साफ होते जाते हैं।बहुत ही गुणकारी पोधा है एलोवेरा। शरीर को स्वस्थ ,तंदरुस्त व सुंदर बनाता है।

दोस्तों ,आज कल नजर का चश्मा तो बस बुढ़ापे का प्रतीक माना जाने लगा है। क्योंकि युवाओं में इसका प्रयोग अब चलन के बाहर हो गया है।जिसे देखिए वह चश्मा  हटवा कर कॉन्टेक्ट लेंस लगवाने की सलाह देता नजर आता है। दें भी क्यों न , इसे लगा कर नजर की समस्या का समाधान भी हो जाता है और फैशन से समझौता भी नही करना पड़ता।

परन्तु देखा-देखी कॉन्टेक्ट लेंस प्रयोग करने की बजाय पहले इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।

कॉन्टेक्ट लेंस के प्रयोग के साथ-साथ इसके साइड इफेक्ट्स भी पता होने चाहिए।

अधिकतर लोग इस बात से अनजान हैं की आंखों में लगाये जाने वाले लेंस ही आंखों के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।

आइए जानें, कैसे?

  •  बिना धुले हाथों से लेंस छूने पर हाथों के किटाणु लेंस के द्वारा आंखों तक पहुंच सकते हैं|
  • जो लोग रात को लेंस पहन कर सोते हैं उनकी आंखों में ऑक्सीजन की आपूर्ति घट जाती है जो बाद में इंफेक्शन का कारण बन सकता है। जब आंखे बंद होती हैं तो लेंस के जीवाणु आंखों में फैल जाते हैं तथा जलन व लालपन पैदा कर देते हैं|
  • लम्बे समय तक लेंस पहन कर रखना आँखों के लिए हानिकारक होता है। हालांकि कहा जाता है कि सिलिकॉन हाइड्रोजेल लेंस को लम्बे समय तक पहना जा सकता है परंतु इन्हे भी एक निश्चित अंतराल के बाद बदलना पड़ता है। लेंस का प्रयोग करते हुए लापरवाही बरतना कभी-कभी बहुत महंगा पड़ सकता है।

जी हाँ ! लेंस का प्रयोग कभी-कभी केराटाइटिस नामक रोग को भी आमन्त्रण दे सकता है।

 

आइये जानें ,क्या है केराटाइटिस?

कई बार लम्बे समय तक आँखों में कॉन्टेक्ट लेंस लगाये रखने से कॉर्निया में सूजन आ जाती है । जो आँखों में जलन व खुजली का कारण बनती है तथा धीरे – धीरे केराटाइटिस का रूप ले सकती है।

इस बीमारी की सामान्य अवस्था अधिक खतरनाक नही होती ,परन्तु यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाये तो ये इंसान को अंधा भी बना सकती है। सिलिकॉन हाइड्रोजैल लेंस के साथ सोने से केराटाइटिस जैसे संक्रमण की आशंका कम होती है।

केराटाइटिस का कारण :

कॉन्टेक्ट लेंस लगाने से आँखों के प्राकृतिक माइक्रोबियल वातावरण में बदलाव आने लगता है जिस कारण इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।लेंस के कारण , त्वचा पर पाये जाने वाले जीवाणुओं की संख्या आँखों की सुरक्षा करने वाले सूक्ष्मजीवों के मुकाबले अधिक हो जाती है तथा संक्रमण सम्भावना बढ़ जाती है।

 केराटाइटिस से बचाव : 

* कॉन्टेक्ट लेंस पहन कर गर्म पानी के टब, तालाब व समुन्द्र में नहाने से बचना चाहिए।

* सोते समय लेंस निकाल कर सोना चाहिए।

*लेंस को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लेना चाहिए तथा लेंस बॉक्स को साफ-सुथरा रखना चाहिए।

* नेत्र विशेषज्ञ की सलाह से एक निश्चित समय बाद लेंस बदलते रहना चाहिए।

* आँखों में जलन,खुजली ,लालपन या सूजन आदि की शिकायत होने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ का परामर्श लेना चाहिए।

*लगातार लम्बे समय तक कॉन्टेक्ट लेंस पहनने से बचना चाहिए।

 

तो मित्रों ! पूरी जानकारी और सावधानी से कॉन्टेक्ट लेंस का प्रयोग करें व स्वस्थ रहें।

पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है। जोनास सॉक ने पोलियो के खिलाफ़ वैक्सीन का विकास किया था। यह दिवस उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2016 में इस दिवस का मुख्य विषय-‘एक दिन एक फोकसः पोलियो समाप्त’ है। भारत सरकार ने वर्ष 1995 में पोलियो उन्मूलन अभियान की शुरूआत की। 27 मार्च, 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया।

उद्देश्य:

इस दिवस को मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य पोलियो जैसी बीमारी के विषय में लोगों में जागरूकता फैलाना है। पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इस बीमारी का शिकार अधिकांशत: बच्चे होते हैं। पोलियो को ‘पोलियोमाइलाइटिस’ या ‘शिशु अंगघात’ भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है, जिससे कई राष्ट्र बुरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। हालांकि विश्व के अधिकतर देशों से पोलियो का खात्मा पूरी तरह से हो चुका है, लेकिन अभी भी विश्व के कई देशों से यह बीमारी जड़ से खत्म नहीं हो पायी है।

पोलियो क्या है?

पोलियो एक वायरल संक्रमण रोग है, जो कि अपनी प्रकृति में संक्रामक है तथा अति गंभीर मामलों में सांस लेने में कठिनाई एवं अपरिवर्तनीय पक्षाघात का कारण बनता है।
यह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में मुख्य रूप से मल के माध्यम से फैलता है या बेहद कम स्तर पर सामान्य माध्यमों (जैसे कि दूषित भोजन एवं पानी) के माध्यम से फैलता है तथा आंत में पनपता है।
यह रोग वन्य पोलियो वायरस के कारण होता है।
यह रोग मुख्यत: 5 वर्ष की आयु से कम उम्र के सभी बच्चों को प्रभावित करता है।
पोलियो को केवल रोका जा सकता है, क्योंकि पोलियो का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है।
पोलियो वैक्सीन की निर्धारित ख़ुराक से बच्चे को जीवन भर के लिए पोलियो से सुरक्षित किया जा सकता है।
पोलियो से दो प्रकार का टीकाकरण सुरक्षित करता हैं। पहला मौखिक टीका है, जिसे मौखिक तौर पर यानि कि दवाई के रूप में पिलाया जाता है तथा दूसरा निष्क्रिय पोलियो वायरस टीका है, जिसे रोगी की उम्र के आधार पर हाथ या पैर में लगाया जाता है।

पोलियो के लक्षण:

पोलियो की बीमारी में मरीज़ की स्थिति वायरस की तीव्रता पर निर्भर करती है। अधिकतर स्थितियों में पोलियो के लक्षण ‘फ्लू’ जैसै ही होते हैं, लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार होते हैं-
  • पेट में दर्द होना।
  • गले में दर्द।
  • सिर में तेज़ दर्द।
  • जटिल स्‍‍थितियों में हृदय की मांस-पेशियों में सूजन आ जाती है।
  • तेज़ बुखार।
  • खाना निगलने में कठिनाई होना।

पोलियो की रोकथाम:

पोलियो के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। इस रोग को केवल टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है। पोलियो टीकाकरण निर्धारित अनुसूची के अनुसार कई बार दिया जा सकता है। यह जीवनभर बच्चे की रक्षा करता हैं। वैक्सीन दो प्रकार के होते हैं, जो कि पोलियो से रक्षा करते हैं-निष्क्रिय पोलियो वायरस वैक्सीन (आईपीवी) एवं जीवित-तनु वैक्सीन मौखिक पोलियो वायरस वैक्सीन (ओपीवी)। मौखिक वैक्सीन को मौखिक रूप से दिया जाता है तथा निष्क्रिय पोलियो वायरस वैक्सीन को रोगी की उम्र के आधार पर हाथ या पैर में लगाया जाता है।
भारत में भी डेरा सच्चा सौदा नाम की एक संस्था इसको रोकने के लिए प्रयास कर रही है इसके लिए उन्होंने बहुत सी मुहिम शुरू की है जैसे:-
मुफ्त पोलियो शिविर आयोजित करना और नवजात शिशु को पोलियो टीकाकरण की सुविधा देना।
  • माँ-बेटा सम्भाल– नि:शुल्क कैंप लगाकर गर्भवती महिला व उसके होने वाले बच्चे के लिए स्वस्थ।

 

  • जननी-शिशु सुरक्षा – गरीब जच्चा-बच्चा का भरण-पोषण करना।

 

  • जननी सत्कार – गरीब गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार देना व इलाज करवाना।

 

  • कायाकल्प – बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलवाना व पोलियो कैंप द्वारा मरीजों के मुफ्त आप्रेशन करवाना।

 

  • कदम से कदम – गुणवान विकलांगों की शादी करवाना और उनको रोजगार दिलवाना।

 

  • साथी -विकलांगों को ट्राई साईकिल उपलब्ध करवाना |

 

 

प्रिय पाठकों, आज मैं आपको एक ऐसे तरीके के बारे में बताऊंगी जिसे अपनाकर हम अपनी व्यस्त जिंदगी में भी दूसरों का भला कर सकते हैं। तो आइये जानते हैं कि क्या है वो तरीका और कौन है वो जिन्होंने इसे ईजाद किया है।

ईश्वर का दिया हुआ हमारा ये भौतिक शरीर तीन चीजों पर आधारित होता है। हवा, पानी तथा भोजन। मनुष्य को हवा और पानी तो फिर भी कहीं न कहीं से प्राप्त हो जाता है, किंतु भोजन प्राप्त के लिए मनुष्य न जाने क्या क्या करता है। इस संसार में कुछ अभागे जीव ऐसे भी हैं जिन्हें 2 वक़्त का भोजन भी नसीब नहीं हो पाता।

 

हमारे देश में ऐसे लाखों लोग है जिनके लिए एक वक़्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मौत को गले लगाने जैसा होता है। ये लोग खाने के लिए कुछ भी करने को मजबूर हो जाते हैं। कहते हैं कि इंसान को पापी पेट के लिए क्या कुछ नहीं करना पड़ता। कभी किसी की जान लेनी भी पड़ती है और कभी जान देनी भी पड़ती है। और ये भुखमरी एक मुख्य कारण है कि आज हमारे देश के नौजवान जुर्म की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं। एक ओर जहां देश में लोग दाने-दाने के लिए मोहताज हैं, वहीं दूसरी और ऐसे लाखों लोग हैं जो प्रतिदिन झूठी शानो-शौकत का दिखावा कर भोजन को बर्बाद करते हैं। आज कल लोग दिखावे के लिए शादी, बर्थडे पार्टी और यहां तक कि अंतिम भोग में भी तरह तरह के पकवान बनाते हैं और बाद में बचने के बाद उन्हें फेंक देते हैं।

भोजन को बिना किसी मतलब के बर्बाद करना किसी अपराध से कम नहीं है। भोजन की बर्बादी न जाने कितने मासूम लोगों से उनका हक छीन लेती है। भोजन की कमी से ही पेट की आग के हाथों मजबूर होकर न जाने कितने निर्दोष लोग अपराधी बन जाते हैं। भोजन की बर्बादी कहीं न कहीं हमारे देश को गलत दिशा की ओर धकेल रही है। और हम सब को मिलकर इसे रोकना चाहिए।

 

इस मतलब से भरी दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दुनियादारी में रहते हुए भी अपने आप से पहले दूसरों का, समाज का भला सोचते हैं। ऐसे लोगों के कारण ही इस विकट समय में भी कहीं न कहीं इंसानियत आज भी जिंदा है। वो लोग जो खुद भूखे रहकर दूसरों के पेट की भूख को शांत करते हैं, वे लोग जो अन्न को बर्बाद नहीं बल्कि अन्न को बचाना तथा उसका सही उपयोग करना आता है। आज के इस संसार में ऐसे जीव मिलना एक दुर्लभ बात है किन्तु इस हकीकत के प्रमाण खुद डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी हैं। डेरा सच्चा सौदा एक सामाजिक संगठन है जो सभी धर्मों को एक समान मानने में विश्वास रखता है। डेरा अनुयायी आए दिन कोई न कोई समाजिक कार्य करते रहते हैं और इन्हीं में से एक है- सप्ताह में एक दिन का उपवास रखना तथा उस दिन के बचे हुए अन्न को गरीबों में बांट देना।

 

जी हाँ इस ये लोग अपने गुरु गुरमीत राम रहीम जी की दी गयी शिक्षा के अनुरूप करते हैं। उनका कहना है कि सप्ताह में एक दिन उपवास रखने स्व शरीर की मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं आपका शरीर सुचारू रूप से कार्य करता है। इसके साथ ही ये लोग बचे हुए अन्न को दान कर देते हैं जो कि एक सराहनीय कार्य है।

दोस्तों, वजह चाहे कोई भी हो, अपने शरीर को स्वस्थ रखने की या फिर आस्था को ध्यान में रख कर किए गए उपवास की, महत्वपूर्ण ये है कि किसी भी इंसान के उठाये गए कदम में दूसरों के लिए क्या हित है? और अगर यह कदम समाज की भलाई के लिए उठाया जाए तो यह अति प्रशंसनीय है।

आजकल हर कोई सुंदर दिखने के लिए अच्छा मेकअप करना चाहता है। मेकअप से हमारे चेहरे की अनेक खामिया समाप्त हो जाती हैं और हमारा चेहरा खूबसूरत लगने लगता है। चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए मेकअप के तौर पर फाउंडेशन सबसे बेस्ट है। मेकअप की अगर बात करे तो आमतौर पर फाउंडेशन से ही मेकअप की शुरुआत की जाती है।
क्योंकि फाउंडेशन से हम चेहरे के दाग-धब्बो को आसानी से छुपा सकते हैं। यह एक बहुत ही अच्छा स्किन मेकअप है जिसकी मदद से चेहरे की अनेक खामियों को आसानी से छुपाया जा सकता है और चेहरे को खूबसूरत बनाया जा सकता है। फाउंडेशन त्वचा के कलर का एक उत्पाद होता है, जो त्वचा के टोन को इवन करता है। इसे चेहरे पर अप्लाई करने के लिए सबसे पहले मॉइस्चर या कंसीलर लगाना चाहिए। यदि आप भी चाहती हैं आपका चेहरा खूबसूरत लगे तो आप फाउंडेशन की मदद से अपने चेहरे का मेकअप कर सकते हैं।

फाउंडेशन लगाने के बेस्ट टिप्स

स्टेप 1

स्किन को अच्छी तरह मॉइश्चराइज करें। मॉइश्चराइजर को अब्जॉर्व होने के लिए कुछ समय दें।

स्टेप 2

चेहरे और गर्दन पर प्राइमर लगाएं। कुछ लोग मेकअप किट में प्राइमर नहीं रखते लेकिन इसका मेकअप में बेहद अहम रोल होता है। यह आपके चेहरे के छिद्रों को बंद करता है साथ ही इससे मेकअप ज्यादा देर तक टिका रहता है।

स्टेप 3

फाउंडेशन से पूरे चेहरे और गर्दन पर डॉट-डॉट बनाएं। जॉ-लाइन और चिन पर लगाना न भूलें। ब्रश से अच्छी तरह चेहरे पर एकसार करें। आंखों के नीचे ठीक से ब्लेंड करें ताकि सिकुड़न में फाउंडेशन भरा न दिखाई दे।

स्टेप 4

आखिर में मुलायम ब्रश या स्पंज से पूरा एकसार कर लें। रोशनी में एक बार चेक करें कि इसकी परत न दिखाई दे रही हो। इसके बाद कंसीलर और कॉम्पैक्ट पाउडर लगा सकती हैं।

ये गलतियां न करें

फाउंडेशन की खरीदारी

पाउडर फाउंडेशन फाइन लुक नहीं देता। तरल फाउंडेशन को तरजीह दें। लगाना ही है तो लिक्विड फाउंडेशन के ऊपर हल्का लगाएं।

शेड की जांच

सही टोन वाले फाउंडेशन की खरीदारी करते समय इसकी जांच गालों या कलाई के गोरे भाग पर न करें। इसे अपनी ठुड्डी, आंखों के नीचे, नाक के आसपास और हाथ पर जांच करें।

सिर्फ चेहरे पर फाउंडेशन लगाते हैं

यकीनन यह खतरनाक हो सकता है। चेहरा और नेकलाइन का अलग-अलग दिखना बहुत बुरा लगता है। गर्दन के आस-पास फाउंडेशन लगाना न भूलें।

स्पॉन्ज का इस्तेमाल न करें

स्पॉन्ज में फाउंडेशन बहुत बर्बाद होता है। ब्रश से फाउंडेशन लगाऐं।

कैसे चुनें सही फाउंडेशन

त्वचा के अनुसार

सही टोन वाले फाउंडेशन को चुनने के लिए सबसे पहले अपनी त्वचा को जानना जरूरी है। त्वचा सामान्य है या रूखी या तैलीय।
अगर त्वचा रूखी है तो ऐसे फाउंडेशन का चुनाव सही होगा, जिसमें मॉइस्चराइजर और हाईड्रेटिंग तत्व हो।  जिनकी त्वचा तैलीय है, उनके लिए मॉइस्चराइजर वाले फाउंडेशन का चुनाव गलत होगा। तैलीय त्वचा के लिए ऑयल फ्री फाउंडेशन लेना चाहिए। रूखी व तैलीय मिली-जुली त्वचा के लिए पाउडर आधारित फाउंडेशन और जिन लोगों की त्वचा ज्यादा संवेदनशील है उनके लिए मिनरल फाउंडेशन सही पसंद है।
फाउंडेशन दिन में खरीदें ताकि उसे ठीक से देख सकें। त्वचा पर लगाकर शेड की जांच करें। इसे खरीदने से पहले दुकानदार आपकी उल्टी कलाई पर इसका रंग दिखाता है। आप हाथ सीधा करके जांच कीजिए। त्वचा के टोन से यदि यह मैच करता है तो समझ लें कि यह आपके लिए सही है।

 

आज जहां एक तरफ डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी बाबा राम रहीम के पिताजी- नम्बरदार बापू मग्घर सिंह जी की पुण्य तिथि के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ सीबीआई कोर्ट में बाबा राम रहीम की ज़मानत की कार्यवाही चल रही थी। ३ अगस्त को बाबा राम रहीम पर कथित रूप से साधुओं को नपुंसक बनाने के आरोप लगाए गए थे, व सीबीआई ने बाबा राम रहीम, डॉ एम् पी सिंह व् डॉ पंकज गर्ग पे केस तय किया था। २३ अगस्त को जज सुनील राठी द्वारा बेल याचिका ख़ारिज करने के बाद बाबा राम रहीम ने जज जगदीप सिंह की अदालत में याचिका दायर की थी।

इस केस में सीबीआई की स्थानीय विशेष अदालत ने बाबा राम रहीम को ज़मानत दे दी है।बचाव पक्ष के वकील तनवीर अहमद मीर व ध्रुव गुप्ता की दलीलों से सहमत होते हुए सीबीआई कोर्ट के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने बाबा राम रहीम की ज़मानत का फैसला सुनाया। डॉ एम् पी सिंह को भी इस मामले में बेल दे दी गई है। डेरा के प्रबंधकों का कहना है की उन्हें माननीय न्यायालय पे पूरा भरोसा है।

उल्लेखनीय है की डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों में जहाँ उनके गुरूजी पे उनका ढृढ़ विश्वास बना हुआ है, वहीँ उन्हें यकीन भी है की जल्द ही सच उजागर होगा और उनके गुरूजी जल्द ही वापिस आएंगे। ऐसे में अपने गुरूजी की प्रेरणा पे चलते हुए आज भी उन्होंने रक्तदान शिविर लगाया है, व किसी भी अवसर पे वे मानवता भलाई के कार्य करने से नहीं चूकते, फिर चाहे वह स्वच्छ भारत दिवस हो, पौधरोपण , या मरणोपरांत शरीरदान। गौरतलब है की बाबा राम रहीम के 6.5 करोड़ से भी अधिक अनुयायी हैं।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओ के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

भगवान ने जहां औरत को माँ का दर्जा देकर खुद भी बडा बताया,वही उसी भारत की धरती पर उसे मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने पर रोक लगाई जाती है। केरल स्थित सबरीमालामंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि सभी उम्र की महिलाएं मंदिर में प्रवेश कर सकती है। उच्चतम न्यायालय ने 4:1की बहुमत से सुनाए इस फैसले में कहा कि महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक लगाना लैंगिक भेदभाव है। पाँच सदस्यों वाली संविधान पीठ की अगुआई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा कर रहे थे।कोर्ट ने माना कि केरला हिंदू प्लेसेज आॅफ पब्लिक वर्कशिप (अथाॅराइजेशन आॅफ एंट्री) रूल्स 1965 का प्रावधान हिंदू महिलाओं के धर्म के पालन खे अधिकार को सीमित करता है। इस बडे फैसले के बाद यह समझते है कि यह पूरा मामला आखिर है क्या।

पाँच महिला वकीलों के एक समूह ने केरला हिंदू प्लेसेज आॅफ पब्लिक वर्कशिप रूल्स,1965 के रूल 3 बी को चुनौती दी थी। यह नियम महावारी वाली महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने से रोकने का अधिकार देता है। वकीलों के समूह ने सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त गुहार लगाई, जब हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि सिर्फ पुजारी ही परंपराओं पर फैसला लेने का अधिकारी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि ये प्रतिबंध संविधान के आर्टिकल 14,15,17 के खिलाफ है और महिलाओं को अपनी पंसद के स्थान पर पूजा करने की आजादी मिलनी चाहिए।

 

जहां तक मंदिर प्रशासन का सवाल है, वह महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाए जाने पर कायम था। मंदिर प्रशासन का कहना था कि यह परंपरा भेदभाव करने वाला नहीं है क्योंकि यह उस विश्वास वाले भगवान “नैतिक ब्रह्मचारी है। वही, महिला श्रद्धालुओं का एक समूह ऐसा भी था, जो इस पाबंदी के समर्थन में था। जब सोशल मीडिया पर इस बदंश के खिलाफ #राइट_टू_प्रे अभियान चलाया। उनका कहना था कि सिर्फ निश्चित उम्र वाली महिलाओं को ही मंदिर में दाखिल होने के लिए 50 साल की उम्र का इंतजार कर सकते है। जहां तक केरल सरकार के रूख का सवाल है, राज्य ने सुप्रीम कोर्ट को इस साल सुनवाई के दौरान कहा था कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने के पक्ष में है।

सुप्रीम कोर्ट में यंग लायर्स एसोसिएशन की ओर से इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर केस लड़ा जा रहा है ऐसे में ज्यादातर यही बात सामने आ रही है कि मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश न होने के पीछे कारण इनके पीरियड्स है, असल सच्चाई क्या है अभी पूरी तरह नहीं पता परंतु मंदिर के आख्यान में इसके पीछे कोई दूसरी ही कहानी बताई जा रही है कि मंदिर के देवता ने शादी न करने की शपथ ले रखी है।

एक लेख में एम ए देवैया इस आख्यान के बारे में बताते है वे लिखते है कि मैं पिछले 25सालों से सबरीमाला मंदिर जा रहा हूं और लोग मुझसे अक्सर पूछते है कि इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध किसने लगाया है मैं छोटा-सा जवाब देता हूं “खूद अयप्पा (मंदिर में स्थापित देवता) ने, आख्यानों (पुरानी कथाओं ) के अनुसार, अयप्पा अविवाहित है और वे अपने भक्तों की प्रार्थनाओं पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। साथ ही उन्होने तब तक उनके पास कन्नी स्वामी (यानी वे भक्त जो पहली बार सबरीमाला आते हैं) आना बंद नहीं कर देते “माना जाता है कि अयप्पा किसी कहानी का हिस्सा न होकर एक ऐताहासिक किरदार हैं। वे पंथालम के राजकुमार थे यह केरल के पथानामथिट्टा जिले में स्थित एक छोटा-सा राज्य था। परंपरा को लेकर इन लोगों का कहना है कि अगर इस पूर्व कहानी पर लोगों का विश्वास नहीं तो फिर मंदिर में श्रद्धा के साथ दर्शन करें क्या फायदा होगा? इसीलिए वे कह रहे है कि जज के फैसले से इस पर क्या फर्क पड़ेगा क्योंकि पूर्व कहानी में श्रद्धा के बिना उन्हें दर्शन से पूण्य नहीं मिलेगा।

खैर, अदालत द्वारा प्रवेश के लिए अनुमति भले दे दी गई हो, परंतु लोगों की मानसिकता आज भी वही ही पड़ी हुई है। वे आधुनिकता के इस दौर में भी सोच को परंपराओं से जोड़ कर सीमित किए हुए हैं। कोर्ट द्वारा फैसला देना ही काफी नहीं है, बल्कि लोगों को परंपराओं की बेडियां तोड़ कर आगे बढ़ना जरूरी है। लोगों को स्त्री-पुरूष के समान दर्जे के प्रति जागरूक करना होगा।

 

 

आधार – आम आदमी की पहचान । आधार कार्ड भारत सरकार दुवारा भारत के
नागरिकों को जारी किये जाने वाला पहचान पत्र  मात्र है , यह नागरिकता का पहचान पत्र नही है। इसमे 12 अंको की ए क विशिष्ट संख्या छ्पी होती है जिसे भारतीय विशेष्ट संख्या छ्पी होती है जिसे भारतीय विशेस्ट पहचान प्राधिकरण जारी करता है।
  • पिछ्ले कुछ दिनों से मीडिया, न्यूज़ चेनल्स मे आधार कार्ड की संवेधानिक वेध्ता पर बहुत चर्चा चल रही थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फ़ैसला सुनाते हुए इसकी सांविधानिक वैधता मे कुछ बद्लाव करते हुए बरकरार रखा है।
  • देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को आधार पर फेसला सुनाते हुआ साफ किया है कि आधार कहाँ जरूरी है कहाँ नही । प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिन चली लंबी बहस के बाद फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके सन्दर्भ मे कुल 31 याचिकाएं दायर की गई थी।
  •  केन्द्र सरकार ने आधार योजना का बचाव करते हुए कहा था की बिना आधार कार्ड सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नही किया जा सकता । जो की योजनाओं मे फर्ज़िवाडा और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिय आधार कार्ड की अनिवार्यता जरूरी है। केंन्द्र ने ये भी तर्क दिया की आधार समाज के कमजोर वर्गो के अधिकारों की रक्षा करता है।

 

आधार कहाँ जरूरी है

  • पेन कार्ड बनाने के लिये, आयकर  रिटर्न्स के लिए, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिये आधार जरूरी है।

 

 आधार कहाँ जरूरी नही है
  • मोबाईल सिम के लिये, बैंकों मे अकाउंट खुलवाने के लिये, इनके अलावा सी बी एस ई ,नीट , युजिसी नेट के लिय भी आधार जरुरी नही है।

 

  • 14 साल से कम के बच्चों के पास आधार नही होने पर उसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली जरुरी सेवाओं से वंचित नही किया जा सकता है।
फैसले के दोरान कोर्ट ने कहा आधार एकदम सुरक्षित है। इसके डुप्लीकेट होने का कोई खतरा नही है।

 

नमस्कार दोस्तों, मैं आपके सामने एक बार फिर अपने विचार लेकर हाज़िर हूं। यदि आपने मेरे पिछले ब्लॉग को पढ़ा है तो आपको याद होगा कि उसमें मैंने बात की थी 23 sept से जुड़ा बाबा राम रहीम का  सच  ।

बाबा राम रहीम और डेरा सच्चा सौदा से जुड़े बहुत सारे सवालों के जवाब

दोस्तों बाबा राम रहीम और डेरा सच्चा सौदा से जुड़े बहुत सारे सवालों में से कुछ जवाब मुझे मेरी कलीग से मिल तो चुके थे लेकिन फिर भी एक सामाजिक प्राणी होने के नाते मुझे प्रत्यक्ष प्रमाण की आवश्यकता थी और मैं केवल तभी इन सब बातों पर विश्वास कर सकती थी यदि ये सब मैंने खुद देखा हो। तो जैसा कि मैंने आप सब से कहा था कि मैं इस बारे में और जानकारी जुटाना चाहती थी ताकि हकीकत जान सकूं और आप सब के सामने रख पाऊं। बस इसी सिलसिले में कल रात ही मेरे दिमाग में एक विचार आया कि 23 सितम्बर को(आज) डेरा के गुरु गुरमीत राम रहीम जी का गद्दी दिवस है (मेरी कलीग के अनुसार) तो मुझे वहाँ जा कर सच का पता करना चाहिए कि जो कुछ भी मेरी कलीग ने मुझे बताया है वह वाकई में सच है या केवल एक मिथक है।

मैंने अपने मम्मी-पापा को डेरा जाने के विषय में बताया तो उन्होंने पहले मुझे मना कर दिया लेकिन जब मैंने उन्हें मेरे वहां जाने के उद्देश्य तथा मेरी कलीग से हुई बातचीत के बारे में बताया तो बहुत सोचने पर वो मान गए।

तो मैंने डेरा जाने का तय किया और उन कलीग से डेरे का पता तथा रास्ता जानकर मैं घर से निकल पड़ी। मैंने अपनी कलीग को अपनी योजना के बारे में नहीं बताया क्योंकि मैं सच्चाई का पता अपने तरीके से लगाना चाहती थी। रास्ते भर बहुत से सवाल मेरे दिमाग में दोबारा उठने लगे कि जो मैंने डेरा के बारे में लोगों से सुना है, जो पढ़ा है वह सच है या जो मेरी उन कलीग ने बताया वह सच है।

ख़ैर करीब 6 घण्टे के सफर के बाद मैं डेरा सच्चा सौदा के सामने थी और वहाँ का नज़ारा देख कर एक पल के लिए मैं दंग रह गई। लाखों की तादाद में लोग डेरा की ओर आ रहे थे और हज़ारों की तादाद में वाहन भी मौजूद थे। लोगों का इतना बड़ा हुजूम मैंने आज तक केवल सुना था लेकिन अपनी आंखों से पहली बार देख रही थी। वहाँ अंदर जाने के लिए श्रद्धालु लंबी लंबी कतारों में खड़े थे, मैं भी एक कतार में लग कर अंदर जाने की प्रतीक्षा करने लगी।

डेरा के अंदर का सच 

अंदर पहुंच कर मैंने देखा कि लोगों का जितना बड़ा हुजूम बाहर नज़र आ रहा था उस से दुगुनी तादाद में लोग डेरा के अंदर मौजूद थे। एक पल के लिए मुझे लगा कि मैं इंसानों के समुद्र में आ गई हूं। मैंने आगे बढ़ कर एक महिला से पूछा कि ये सब लोग यहाँ किसलिए इकट्ठा हुए हैं? यहाँ ऐसा क्या होने वाला है? मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि आज उनके मौजूदा गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा (गुरुजी का पूरा नाम जो मुझे भी उसी वक़्त पता लगा) का गुरु गद्दी दिवस है और इसी उपलक्ष्य में वहां एक नामचर्चा (उनके अनुसार) मतलब सत्संग का आयोजन किया गया है, जिसमें सभी श्रद्धालु गुरु गद्दी दिवस मनायेंगे। उन्हें धन्यवाद देकर में आगे बढ़ी। मैंने देखा कि वहां एक बहुत बड़ा शैड़ था जिसके नीचे सभी श्रद्धालु एकत्रित हुए थे। वहां एक ओर सभी महिलाएं बैठी थीं और दूसरी ओर पुरूष। मैं भी महिलाओं वाली ओर आगे बढ़ गई।

डेरा सच्चा सौदा में खूनदान शिविर 

मैंने सुना कि माइक पर बार बार अनाउंसमेंट हो रही थी कि जो भी व्यक्ति रक्तदान करना चाहते हैं वो सचखंड हाल के अंदर पहुंच जाएं। मुझे लगा कि मुझे भी वहां जाकर देखना चाहिए। मैंने देखा कि सामने एक हालनुमा बिल्डिंग थी और रक्तदान करने वाले लोग उसी ओर बढ़ रहे थे। मैं भी उत्सुकतावश उस ओर बढ़ गई। अंदर मैंने देखा कि हज़ारों लोग रक्तदान के लिए कतारों में खड़े थे और बहुत से लोग रक्तदान कर रहे थे और बहुत से लोग कर चुके थे। पर एक अलग बात ये हुई कि वहाँ मौजूद सभी लोगों के चेहरे पर एक खुशी थी। मैंने ऐसा पहली बार देखा था कि कुछ देने पर किसी के चेहरे पर ऐसी खुशी हो। वहाँ दूसरी ओर अन्य मेडिकल चेकअप के लिए भी कैम्प लगे हुए थे। मैं वहां से बाहर आ कर श्रद्धालुओं के बीच बैठ गई।

बाबा राम रहीम की अनुपस्थिति में कैसे किया जाता है डेरा  सच्चा सौदा में सत्संग 

सत्संग की कारवाई शुरू हो चुकी थी और मैं ये देखकर हैरान थी कि वहाँ न किसी प्रकार का शोर था न कोई तमाशा। शान्ति से सभी श्रद्धालु भजन गा रहे थे तथा उसके बाद गुरुजी के वचनों की वीडियो स्क्रीन पर चलाई गई। मैंने गुरुजी के वचनों को ध्यान से सुना और मुझे हैरानी हुई कि सभी गुरुजी के सभी कथन समाज के भले और मानवता को बचाने के लिए थे। गुरुजी के वचनों में भगवान के नाम की एहमियत को बताया गया था तथा ऐसा कुछ भी नहीं था जो भड़काऊ या लोगों के बुरे के लिए हो। करीब 4 घण्टे बाद सत्संग की कारवाई समाप्त हुई। सत्संग के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर शांति से नाम शब्द (गुरुजी द्वार दिया गया गुरुमन्त्र) का जाप किया। इसके अतिरिक्त वहाँ कुछ शादियां भी सम्पन्न हुईं जो कि बिल्कुल सादे तरीके से दूल्हा दुल्हन ने वरमाला डाल कर की।

कैसे मनाया गया 23 sept का खास दिन 

सत्संग के दौरान बहुत से गरीब परिवारों को डेरा की तरफ से राशन भी   गया तथा दिव्यांग लोगों को ट्राइसाइकिल भी वितरित की गई। इसके बाद कुछ गरीब लोगों को नए बनाए गए मकानों की चाबी भी दी गई। मेरे लिए ये सब देखना एक बहुत ही नया और अलग तरह का अनुभव था। मैंने अपने पास बैठी एक महिला श्रद्धालु से पूछा कि क्या ये सब करने के लिए यहां कोई दान वगैरह लिया जाता है? या यहां कोई दान पेटी तो होगी (जैसा कि सभी तीर्थ स्थानों पर होता है)? लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि यहाँ पर किसी प्रकार का दान या चढ़ावा नहीं लिया जाता और ये सब जो भी डेरा की तरफ से मानवता भलाई के काम किये जाते हैं ये गुरुजी के परिवार की तरफ से अपनी की गई कमाई में से किए जाते हैं। इसके अलावा डेरा श्रद्धालु इन सामाजिक कार्यों को करने के लिए प्रतिदिन एक रुपया निकल कर उस से एकत्रित होने वाली राशि को इस्तेमाल करते हैं।

एक रुपया! एक रुपया बहुत ही छोटी रकम है एक दिन में यदि हम अपनी तरफ से किसी के भले के लिए सोचें तो। लेकिन ये एक दुखद बात है कि हम अपनी जरूरतों से आगे कभी बढ़ ही नहीं पाते, कभी सोच ही नहीं पाते। डेरा के इस कदम ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हम सच में इतने गरीब है कि हम किसी की मदद के लिए प्रतिदिन एक रुपये की राशि निकालने का भी न सोच पाएं।

अंत में प्रसाद ग्रहण कर मैं वहां से बाहर आ गई। डेरा परिसर में एक अलग बात जो मैंने महसूस की वो ये थी कि वहां मौजूद हर एक व्यक्ति में अपनापन था। वहां के लोग देशद्रोही नहीं बल्कि समाज में इंसानियत को जिंदा रखने वाले थे। डेरा में कोई हथियार नहीं बल्कि सहायता के लिए तत्पर लाखों हाथ थे। जो कुछ भी मैंने डेरा के बारे में पिछले एक साल में लोगों से सुना, अखबारों में पढ़ा, न्यूज़ चैनलों पर देखा वो सब बातें यहां आकर केवल एक भ्रम  साबित हुईं। केवल एक धारणा, एक नकारात्मक धारणा जो पिछले एक साल में  हमारे समाज ने बिना कुछ सोचे समझे डेरा के लिए बना ली। डेरा के हालात पिछले दिनों में जो भी रहे लेकिन एक बात है जो डेरा के लोगों ने कभी नहीं छोड़ी वो है सच्चाई और इंसानियत।

उपरोक्त लिखी सारी घटना स्वयं मेरी आंखों देखी है और मैंने जो कुछ भी आपके साथ साझा किया है यह मेरा खुद का अनुभव है जो मुझे डेरा में आकर महसूस हुआ। अब मेरे सभी सवाल शांत थे। और इसके अतिरिक्त मैं एक सभ्य समाज की नागरिक होने के नाते डेरा से एक प्रेरणा लेकर आई थी, कि हर हाल में सच के साथ और अच्छाई के लिए खड़े रहना।

यदि अब भी आप लोगों को मेरी बातों पर किसी प्रकार का संशय हो तो मैं आप सबसे अनुरोध करती हूं कि आप भी स्वंय डेरा में जाएं और इस हकीकत तथा इस अनुभव के साक्षी बनें।

और एक बात, मैं उपरोक्त घटना के साक्ष्यों के तौर पर डेरा की कुछ तस्वीरें साझा करना चाहती हूं जो मैंने घर आने पर अपनी कलीग से मांगी।