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हमारा मनुष्य शरीर ईश्वर द्वारा दी गई अनमोल नियामत है । इसका ध्यान रखना हमारा परम् कर्तव्य है ,क्योंकि जब हम बीमार पड़ते है तो हमे बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। बीमारी की अवस्था में हम स्कूल ,कॉलेज या दफ्तर भी नही जा पाते हैं। सरल शब्दों में , हमारी दिनचर्या पूर्णतः बाधित हो जाती है ।

कुछ ऐसे उपाय हैं जिनके द्वारा आप कम खर्च में अपनी सेहत का ध्यान (Health Tips Hindi Mai) रख सकते हैं ।

सर्वप्रथम ,आप जानते ही होंगे की अंग्रेजी भाषा में कहा गया है कि ‘Prevention Is Better than Cure‘ अर्थात इलाज कराने से अच्छा है , हम पहले से ही एहतियात बरतें ताकि हमें बार-बार बीमारी का सामना न करना पड़े |

हम कुछ ऐसे कदम उठा सकते है जिसके द्वारा बार बार होने वाली भयंकर बिमारिओं से बचा जा सकता है ।

Best Health Tips in Hindi – Health Jankari

निम्नलिखित सरल उपाय आपके लिए कारगर सिद्ध हो सकते हैं:

अपने खान-पान का रखें ध्यान

अच्छी सेहत के लिए अति जरूरी है कि आप अपने खान-पान का ध्यान ऱखे । अक्सर देखा जाता है कि लोग मैदे से बने पदार्थों का सेवन बहुत अधिक मात्रा में करते हैं , और जो कि निन्म समस्याओं का कारण बन सकता है |

  • फ़ास्ट-फ़ूड में विद्यमान कैलोरी से आपका वज़न बढ़ता है जो मोटापे का कारण बन जाता है ।
  • सांस लेने में तकलीफ व अस्थमा सहित यह अनेक प्रकार की श्वसन समस्याओं के जोखिम को बढ़ाता है ।

एक शोध के अनुसार , जंक फूड्स की लत एक दम तम्बाकू या अन्य प्रकार के नशे की लत के प्रकार की होती है जिसको दृढ-निश्चय द्वारा ही छोड़ा जा सकता है ।इसके साथ साथ आपको यह भी स्वीकार करना होगा कि यह सेहत के लिए नुकसानदेह है, एक ऐसा नुकसान जिसकी किसी भी कीमत पर भरपाई नही की जा सकती ।

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Take Care of Your Food & Drink

अतः “आहार शुद्धो सत्तव शुद्धि” के नियम का पालन करते हुए आगे बढ़े ,अर्थात “जैसा अन्न होगा वैसा ही मन होगा “।

व्यायाम कीजिये – Do Exercise Regularly – Health Care in Hindi

आप किसी भी उम्र के स्वामी है , चुस्त दुरुस्त जीवन की खातिर आपको कसरत तो करनी ही होगी ।

आखिर कसरत क्यों आवश्यक है?

  • इस से आपकी हड्डियां व मासपेशियां मज़बूत होगी ।
  • कैलेस्ट्रोल का ख़तरा घटेगा । Control cholesterol.
  • आपकी आयु भी बढ़ सकती है ।

यह जानना भी रुचिकर होगा कि आप खेल-कूद अर्थात बास्केटबॉल , टेनिस या फुटबाल द्वारा भी कसरत कर सकते हैं क्योंकि इस से आप मानसिक वृद्धि के साथ-साथ शारीरिक वृद्धि प्राप्त कर लेने की चरम सीमा पर होंगे ।

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नींद की भरपूर मात्रा

एक निरंतर पर्याप्त नींद का होना सभी वर्ग के व्यक्तिओं के लिए नितांत आवश्यक है ।

विद्ववानों के अनुसार , नये जन्मे बच्चे 16 से 18 घण्टे सोते है , 1 से 4 वर्ष के बच्चे 14 घण्टे सोते है । किशोरो को 9 से 10 घण्टे सोना चाईए व बड़ो को 7 से 8 घण्टे ।।

आगे बढ़ते हुए , अब कुछ और महत्वपूर्ण उपायों के बारे में संक्षेप में जानते है जिसके द्वारा आप स्वयं को स्वस्थ रख सकते है ।

  • क्लोरीन युक्त पानी का इस्तेमाल कीजिये ।
  • शाकाहारी भोजन का ही सेवन कीजिए ।
  • साफ-सफाई का ध्यान रखिए ।
  • चिकिसत्क को जेनेरिक दवा लिखने का ही आग्रह कीजिये।have plenty of sleep exclusive samachar

Meditation Benefits for Brain in Hindi

meditation benefits for brain in hindi

इसके साथ-साथ ‘ध्यान’ को कभी न भूलिये : क्योंकि इसके द्वारा आप अपनी बुद्धि व शरीर को सुदृढ़ कर सकते है क्योंकि यह शरीर एक चलता फिरता मंदिर है जिस मंदिर में विद्यमान ईश्वर को ध्यान प्रक्रिया द्वारा ही प्रसन्न किया जा सकता है ।

कभी कभी अचानक ही हमें कुछ अचरज भरा देखने या सुनने को मिलता है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ जब मैं आज कहीं जा रही थी और रास्ते में कुछ लोगों को आपस में बातें करते सुना। वो बात कर रहे थे डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही शाह सतनाम सिंह जी के जन्मदिन की, जिनका जन्म 25 जनवरी 1919 को हुआ था। आज 25 जनवरी 2019 में उनका 100वां जन्मदिन आने वाला है। मगर डेरा सच्चा सौदा के तीसरे गद्दीनशीन बाबा राम रहीम आज-कल जेल में दो केसों की सजा काट रहे हैं, फिर भी इनके अनुयायी यह जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। मैंने उनसे यह भी सुना कि इनके अनुयायियों का जन्मदिन मनाने का तरीका भी अलग है। आइऐ हम चर्चा करते हैं इनके अनूठे तरीकों की।

जन्मदिन कितने दिन मनाया जाता है

आप सोच रहे होंगे, कैसा प्रश्न है ये कि जन्मदिन कितने दिन मनाया जाता है? जन्मदिन तो एक ही दिन मनाया जाता है, जी हां जन्मदिन तो एक ही दिन मनाया जाता है, मगर इनके अनुयायी एक दिन नहीं, दो दिन नहीं, बल्कि पूरा जन्म महीना मनाते हैं। ऐसा क्या है इस महापुरुष में जो इस दुनिया में भी नहीं है, फिर भी इनके अनुयायी इनके जन्मदिन की ख़ुशी पूरा महीना मनाते हैं? वे दयालु स्वभाव के थे, रूहानियत के सच्चे सराबोर थे, उन्होंने लाखों लोगों को बुराइयों से बचाकर नेक इन्सान बनाया, उन्होंने अपनी जीवोद्धार् यात्रा के दौरान 4142 सत्संग किऐ और 1,110,630 लोगों को नाम शब्द देकर उनको रुहानियत का सीधा रास्ता बताया।

कैसे मनाते हैं जन्मदिन

जैसे कि हम सब को पता है कि जन्मदिन केक काटकर, अपने दोस्तों और परिवार के साथ पार्टी करके मनाया जाता है। मगर यहां हमने देखा कि इनके अनुयायियों का जन्मदिन मनाने का तरीका भी अनूठा है। वे नाच कर , गुरु चर्चा करके और मानवता भलाई के कार्य कर के खुशी मनाते हैं।जैसा कि हम सब जानते हैं कि सर्दी के मौसम में कुछ लोग गर्म कपड़े और सिर पर छत न होने के कारण अपनी जान तक गँवा बैठते हैं। इनकी जान बचाने के लिए इस बार डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने गरीबों को रजाई, कंबल, गर्म कपड़े आदि बांट रहे हैं। यही नहीं, जो लोग गरीबी के कारण भूखे पेट फुटपाथ और सटेशन पर सोते हैं, उनको भी यह लोग खाने पीने का सामान, गर्म कपड़े और राशन भी बाँट रहे हैं। गरीब बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ये लोग उनको मुफ्त में किताबें, पैन,पैनसिल, रबड़, शार्पनर, कापियाँ आदि भी प्रदान कर रहे हैं। अचरज भरी बात यह है कि मानवता भलाई के कार्यों में इन अनुयायियों की स्टेट तौर पर प्रतियोगिता भी चल रही है।

अंत में मैं यही कहना चाहूंगी कि किसी भी महापुरुष का जन्मदिन मनाना हो तो इसी तरीके से मनाएं। और अपने जनम दिवस पर भी किसी दीन दुःखी की मदद ज़रूर करें।
अब देखना यह है कि इस बार 25 जनवरी को इनके अनुयायी कैसे मनाऐंगे यह 100वां जन्मदिन। जानने के लिए इंतजार करें हमारे अगले आर्टिकल का।

संगत का असर सब कुछ बदल देता है। संगत अर्थात् दोस्ती, मित्रता, साथ|  संगत के कारण चाल-ढाल, पहरावा, खानपान, बात करने का तरीका, चरित्र, हर चीज़ में बदलाव आ जाता है। हमारी संगत व मित्रता का हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ता है| क्यों ज़रूरी है नेक लोगों का संग करना? इसी बात को हम आज एक आर्टिकल के जरिए बताने जा रहे हैं।

आपने यह कहावत तो सुनी होगी कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है। इस कहावत का अर्थ यह है कि संगत का असर हर किसी पर, कम या अधिक, होता ही है। इस कहावत से मिलती-जुलती राय वैज्ञानिकों की भी है जिनका यही कहना है कि बच्चों की आदतों पर उनके भाई-बहनों और मित्रों के व्यवहार और तौरतरीकों का बहुत ज्यादा असर होता है। बच्चे ज्यादातर बातें अपने भाई-बहनों व अपने माँ-बाप को देखकर ही सीखते हैं।

कदल सीप भुजंग मुख, स्वाति एक गुन तीन

जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन

जैसे एक ही स्वाति बूंद केले के गर्भ में पड़कर कपूर बन जाती है, सीप में पड़कर मोती बन जाती है और अगर सांप के मुंह में पड़ जाए तो विष बन जाती है। ठीक उसी तरह इंसान की संगत का उस पर अच्छा या बुरा प्रभाव ज़रूर पड़ता है|

कहते हैं कि व्यक्ति योगियों के साथ योगी और भोगियों के साथ भोगी बन जाता है। व्यक्ति को जीवन के अंतिम क्षणों में गति भी उसकी संगति के अनुसार ही मिलती है। संगति का जीवन में बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। नेक संगति से मनुष्य जहां महान बनता है, वहीं बुरी संगति उसका पतन भी करती है। छत्रपति शिवाजी बहादुर बने। ऐसा इसलिए, क्योंकि उनकी मां ने उन्हें वैसा वातावरण दिया।

ऐसे ही कुछ दिन पहले मैं भारत की एक ऐसी संस्था, जिसको डेरा सच्चा सौदा के नाम से जाना जाता है, में गई और वहां मैंने देखा कि ऐसे संत हुए हैं जिनका संग करने से करोडों जिंदगियों में बदलाव आया। जहां लोग नशों में धुत्त रहते थे, वैश्य वृत्ति में फंसे हुए थे, चोरी ,ठग्गी, बेईमानी, मोह, लोभ, अंहकार, माया, रिश्वतखोरी आदि जैसी बुराइयों के नुमाइंदे थे, वहां मैंने देखा कि उन लोंगों ने उस सच्चे महापुरुष का संग करके सभी बुराइयों को अलविदा कहा और सच्चे संग के असर को एक नई मिसाल दी। उनका कहना है कि

             अगर बैठोगे पास अग्नि के जाकर

             तो उठोगे अपने कपड़े जलाकर

             और अगर बैठोगे फूलों में जाकर

             तो उठोगे कपडों में खुशबू बसाकर

तो जहां दुनियावी नेक संग से हम दुनियावी ऊँचाइयों को छू सकते हैं, वहीं सत्संग से ना केवल हम दुनियावी, बल्कि रूहानियत ऊँचाइयों को भी छू सकते हैं और अपने अंदर के विकारों से भी निजाद पा सकते हैं| इसलिए आप जहां भी रहें, अपनी मित्रता व संगति का ध्यान रखें, सदा नेकी का संग करें और हो सके तो सर्वश्रेष्ठ सत्संग करें|

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और शाहरुख खान के बीच हुए झगड़े से हर कोई परिचित है इस विवाद के बाद अगर कोई चर्चित विवाद रहा है तो वह कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच हुआ विवाद है जो कि मार्च 2017 में हुआ था जिसकी वजह से सुनील ग्रोवर ने “द कपिल शर्मा शो” को छोड़ा था

लेकिन 1 साल के बाद कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच दोस्ती की खबर आई और दोनों ने फिर से टीवी शो पर वापसी की लेकिन एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग शो में।

जहां कपिल शर्मा ने द कपिल शर्मा सीजन टू शो के साथ तो वही सुनील ग्रोवर ने कानपुर वाले खुरानाज़ शो के साथ वापसी की।

कानपुर वाले खुरानाज़ शो खत्म होने जा रहा है और यह खबर मिली है कि सुनील ग्रोवर कपिल शर्मा के साथ फिर से द कपिल शर्मा शो करने के लिए तैयार हैं जबकि इस खबर के बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।

वही कानपुर वाले खुरानाज़ शो की मेकर्स प्रीति सिमोज़ ने इस खबर को गलत बताया और कहा कि सुनील ग्रोवर पहले से ही बहुत व्यस्त है सलमान खान की भारत फिल्म की शूटिंग मे व्यस्त हैं उनके पास किसी और प्रोजेक्ट के लिए समय नहीं है।

हाल ही में जगबानी टीवी से बातचीत के समय नवजोत सिंह सिद्धू से सुनील ग्रोवर की वापसी की खबर के बारे में पूछा गया।

उन्होंने इस जानकारी की कोई पुष्टि तो नहीं की लेकिन यह कहा कि वह और कपिल दोनों सुनील ग्रोवर का दिल से स्वागत करते हैं अगर वह इस शो में वापसी करना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि कपिल शर्मा शो ईश्वर के बनाए गुलदस्ते की तरह है जिसे कोई भी जोड़ और तोड़ नहीं सकता है। सुनील ग्रोवर शो को छोड़कर गए थे , लेकिन आज भी वह इस फैमिली का हिस्सा है।

एक युवा संन्यासी के रूप में भारतीय संस्कृति की सुगंध विदेशों में बिखेरनें वाले स्वामी विवेकानंद साहित्य, दर्शन और इतिहास के प्रकाण्ड विद्वान थे। स्वामी विवेकानंद ने‘योग’, ‘राजयोग’ तथा ‘ज्ञानयोग’ जैसे ग्रंथों की रचना करके युवा जगत को एक नई राह दिखाई है जिसका प्रभाव जनमानस पर युगों-युगों तक छाया रहेगा। कन्याकुमारी में निर्मित उनका स्मारक आज भी स्वामी विवेकानंद महानता की कहानी बताता है।

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय

संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है असंभव से भी आगे निकल जाना।

ऐसी सोच वाले व्यक्तित्व थे “स्वामी विवेकानंद”। जिन्होनें अध्यात्मिक, धार्मिक ज्ञान के बल पर समस्त मानव जीवन को अपनी रचनाओं के माध्यम से सीख दी वे हमेशा कर्म पर भरोसा रखने वाले महापुरुष थे। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए तब तक कोशिश करते रहना चाहिए जब तक की लक्ष्य हासिल नहीं हो जाए।

तेजस्वी प्रतिभा वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद के विचार काफी प्रभावित करने वाले थे जिसे अगर कोई अपनी जिंदगी में लागू कर ले तो सफलता जरूर हासिल होती है – यही नहीं विवेकानंद जी ने अपने अध्यात्म से प्राप्त विचारों से भी लोगों को प्रेरित किया जिसमें से एक विचार इस प्रकार है –

उठो जागो, और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो‘ ।।

स्वामी विवेकानंद ने अपने आध्यात्मिक चिंतन और दर्शन से न सिर्फ लोगों को प्रेरणा दी है बल्कि भारत को पूरे विश्व में गौरान्वित किया है।

स्वामी विवेकानंद जी की जयंती

स्वामी विवेकानंद के जन्म तिथि 12 जनवरी को राष्‍ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। विवेकानंद जी ऐसी महान शख्‍सियत थे जिनका हर किसी पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

स्वामी विवेकानंद की जिंदगी के रहस्य:

परोपकार

स्वामी विवेकानंद जी का मानना था कि परोपकार की भावना समाज के उत्थान में मद्द करती है इसलिए सभी को इसमें अपना योगदान देना चाहिए। वे कहते थे कि ‘देने का आनंद पाने के आनंद से बड़ा होता है’।

कर्तव्यनिष्ठा

स्वामी विवेकानंद जी का मानना था कि जो भी करो पूरी शिद्दत से करो नहीं तो नहीं करो । वे खुद भी जो भी काम करते थे पूरी कर्तव्यनिष्ठा से करते थे और अपना पूरा ध्यान उसी काम में लगाते थे शायद इसी गुण ने उन्हें महान बनाया।

लक्ष्य का निर्धारण करना

स्वामी विवेकानंद जी मानते थे कि सफलता पाने के लिए लक्ष्य का होना आवश्यक है क्योंकि एक निश्चित लक्ष्य के निर्धारण से ही आप अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।

सादा जीवन

स्वामी विवेकानंद जी सादा जीवन जीने में विश्वास रखते थे । वे भौतिक साधनो से दूर रहने पर जोर देते थे। उनका मानना था कि भौतिकवादी सोच और आनंद इंसान को लालची बनाती है।

डर का हिम्मत से सामना करो

स्‍वामी विवेकानंद का मानना था कि डर से भागने के बजाए उसका सामना करना चाहिए। क्योंकि अगर इंसान हिम्मत हारकर पीछे हो जाता है तो निश्चचत ही असफलता हाथ लगती है वहीं जो इंसान इसका डटकर सामना करता है तो डर भी उससे डर जाता है।

भारतीय नवजागरण के अग्रदूत, भारत के युवाओं के पथ प्रदर्शक, महान दार्शनिक व चिंतक स्वामी विवेकानंदजी को शत्-शत् नमन्। जय हिन्द, जय भारत! वन्दे मातरम!!

 

दोस्तों, जैसा कि हम पिछले चार दिनों से अखबारों की सुखिर्यों में पढ़ ही रहे हैं कि हरियाणा के सिरसा जिले की एक जानी मानी सामाजिक संस्था डेरा सच्चा सौदा ने अपनी दूसरी पातशाही शाह सतनाम सिंह जी महाराज की समृति में 27 वां चार दिवसीय आंखों का कैंप लगाया। यह कैंप 27 वर्षों से संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी के मार्गदर्शन में लगाया जाता है। इस बार भी 12 दिसंबर को शाह सतनाम जी रिसर्च एंड डेवल्पमेंट फाउंडेशन की ओर से आयोजित किए जा रहे इस फ्री नेत्र जांच शिविर की शुरुआत संत गुरमीत राम रहीम के परिवार के सदस्यों और मैनेजमेंट ने अपने गुरु द्वारा दिया पावन नारा “धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा” लगाकर की।

चिकित्सक बोले, नेत्र रोगियों के लिए लाभदायक है कैंप:

कैंप में चिकित्सा सेवा देने के लिए हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व दिल्ली से पहुंचे डॉ. गीतिका, डॉ. कोनिका, डॉ. मोनिका गर्ग, डॉ. राम कुमार, डॉ. विनोद, डॉ. गौरव अग्रवाल, डॉ. पुनीत माहेश्वरी, डॉ. सुशीला आजाद, डॉ. शिप्रा, डॉ. नरेंदर कंसल, डॉ. हर्ष, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. कुलभूषण, डॉ. इकबाल सिंह, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. विजेता, डॉ. हरपुनीत सहित सभी ने संयुक्त रुप से कैंप में दी जा रही सुविधाओं की मुक्तकंठ से तारीफ करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस कैंप में सेवाएं देने के लिए आ रहे हैं तथा हर बार उन्हें यहां आकर बहुत खुशी महसूस होती है। उनका कहना है कि डेरा सच्चा सौदा में लगाए जाने वाले चिकित्सा शिविरों में बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। हर साल लगने वाला आंखों के आप्रेशन का यह कैंप हजारों लोगों के लिए लाभदायक साबित होता है।

महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग वार्ड:

अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में महिला और पुरुष मरीजों के अलग-अलग वार्ड बनाए गए। आप्रेशन के बाद मरीजों के रहने, सोने के लिए बेहतरीन प्रबंध किए गए। मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के रहने व खाने-पीने का प्रबंध भी डेरा सच्चा सौदा की ओर से ही किया गया।

मरीज सराह रहे चिकित्सा शिविर में दी जा रही सुविधाओं को:

शिविर में सेवाएं ले रहे मरीज कैंप में मिल रही चिकित्सीय सुविधाआें व रहने, भोजन इत्यादि की सेवाआें से पूरी तरह संतुष्ट हैं तथा उनका कहना है कि जैसी सेवा उनकी कैंप में सेवादारों द्वारा की जाती है, वैसी तो उनके अपने भी नहीं करते। उन्हें समय पर दवाइयां, खाने, आंखों में दवा डालने, भोजन करवाने, चाय-पानी इत्यादि के लिए सेवादार हर समय तत्पर रहते हैं। सर्दी के मौसम के अनुकूल गर्म कपडे व बिस्तर का प्रबंध भी डेरा सच्चा सौदा द्वारा ही किया गया। कैंप के दौरान कुल 6596 मरीजों की जांच की गई और 90 अपरेशन हुए। यहां पर 27 वर्षों में आज तक आंखों के जितने भी अपरेशन हुए हैं वो सभी 100% सफल हुए हैं। जो अपने आप में ईश्वर की कृपा का साक्षात उदाहरण है।

जिनका पहले दिन अपरेशन हुआ उनको दवाई देकर छुट्टी दे दी और घर भेज दिया गया है और वो जाते वक्त डेरा सच्चा सौदा को धन्यवाद बोल रहे थे।

नमस्कार दोस्तों, आज मैं आपको एक बहुत ही गंभीर विषय की जानकारी देने जा रही हूं। जी मैं यहां पर एक ऐसी बीमारी के बारे में बात करूंगा जिसे कई बार सुनना भी हम पसन्द नहीं करते।

 

यह बीमारी है एड्स, और जहाँ एड्स की बात आतु है यकीनन लोगों के दिमाग में एक और शब्द आता है और वो है एच आई वी। बहुत से लोग एड्स और एच आई वी को एक ही बीमारी मानते है, उन्हें इनके बीच का अंतर नहीं पता। जबकि ये दोनों ही अलग हैं। तो आइये जानते हैं एड्स और एच आई वी के बीच का अंतर।

मुख्य अंतर

एच आई वी का पूरा नाम ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस है जिसके सक्रंमण से इंसान के शरीर का इम्युनिटी सिस्टम प्रभावित हो जाता है। जबकि एड्स एक बीमारी है जो एच आई वी वायरस के सक्रंमण के कारण होती है।

 

हमारे शरीर में हानिकारक बीमारियों तथा कीटाणुओं से लड़ने के लिए एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र होता है। एच आई वी एक ऐसा वायरस है जो सीधे इस रक्षा तंत्र अर्थात इम्युनिटी सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे इंसान की अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता कमज़ोर पड़ जाती है।

एड्स का परिणाम

एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम है। यह एक प्रकार की बीमारी है जो तब होती है जब इंसान का इम्युनिटी सिस्टम पूरी तरह से खराब हो चुका होता है। एड्स की बीमारी व्यक्ति के शरीर में शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बिल्कुल खत्म कर देती है। यही कारण है कि लोग अक्सर इस बीमारी के बाद खुद को अन्य रोगों का शिकार होने से नहीं बचा पाते। पूरे विश्व मे 1 दिसंबर को एड्स दिवस के रूप में जाना जाता है। एड्स दिवस का मुख्य उद्देश्य पूरी दुनिया में लोगों को एच आई वी वायरस तथा इस से होने वाली एड्स नामक खतरनाक बीमारी के प्रति जागरूक करना है।

एच आई वी का इम्यून सिस्टम पर प्रभाव

हमारे शरीर में रोगों से बचने के लिए एक रक्षा तन्त्र होता है जो इस कार्य के लिए सफेद कोशिकाओं का प्रयोग करता है। किंतु एच आई वी सफेद कोशिकाओं के साथ-साथ CD4 को भी प्रभावित करता है। CD4 एक ग्लाइकोप्रोटीन होता है जो इम्यून सिस्टम में सफेद कोशिकाओं की सतह पर पाया जाता है। एच आई वी इन्फ़ेक्शन इन कोशिकाओं के नष्ट होने से होता है जिसका अभी तक कोई इलाज नहीं पता चला है।

 

एच आई वी का एड्स में बदलना

एड्स की बीमारी के कोई मुख्य लक्षण नहीं होते तथा यह अन्य किसी बीमारी के कारण नहीं होता है। यह एच आई वी सक्रंमण का परिणाम होता है और जब यह वायरस इम्यून सिस्टम को नष्ट कर देता है तो उस अवस्था को हम एड्स कहते हैं। एड्स की वजह से वजन कम होना, सिरदर्द होना तथा अन्य शारिरिक और मानसिक शिकायतें हो सकती हैं। एड्स प्रभावित व्यक्ति को किसी भी तरह का रोग आसानी से लग जाता है क्योंकि उस समय व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी होती है।

 

अंत में मैं आप सब से यह कहना चाहूंगी कि आप सभी इस बीमारी से सावधान रहें तथा किसी भी प्रकार के सक्रंमण से बचें क्योंकि सावधानी में ही समझदारी है।
हमारे बड़े बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि खुशियां हमेशा बांटने से बढती हैं और वो खुशियां जब किसी के चेहरे की मुस्कान बनती हैं तो दिल को एक सुकून मिलता है।
जी हां कुछ ऐसा ही नज़ारा बीती 23 नवम्बर को देखने को मिला एक सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित किये गए एक समागम में। यह समागम उस संस्था के संस्थापक के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
यह जन्मोत्सव किसी आम जन्मोत्सव की तरह नहीं था तथा न ही यह आम तरीके से मनाया गया।
तो आइए जानते हैं कि कौनसी संस्था है यह और ऐसा क्या किया उन्हों इस जन्मोत्सव के अवसर पर।
सर्व-धर्म संगम:
जी जिस संस्था की हम बात कर रहे हैं वह कोई छोटी नहीं बल्कि बहुत बड़ी सामाजिक संस्था है जो पिछले कई वर्षों से समाज के हित में कार्य करती आ रही है। इस संस्था का नाम है, डेरा सच्चा सौदा। डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी सामाजिक संस्था है जहाँ जातिवाद और पक्षपात की कोई जगह नहीं है। देर सच्चा सौदा में सभी धर्मों को एक समान माना जाता है तथा सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है।
यहां कोई भी धर्म का इंसान आ सकता है।
सामाजिक कार्यों की शृंखला:
डेरा सच्चा सौदा द्वारा किए जाने वाले सामाजिक कार्यों की सूची बहुत लंबी है। करीबन 133 सामाजिक कार्य इस संस्था द्वारा शुरू किए जा चुके हैं। इसी सूची के अंतर्गत गत 23 नवम्बर को देर सच्चा सौदा द्वारा आश्रम में खूनदान शिविर तथा मुफ़्त चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर रक्तदान किया। डेरा श्रद्धालुओं द्वारा जरूरतमंद लोगों में राशन भी वितरित किया गया तथा विकलांग लोगों को फ्री ट्राइसाइकिल भी दी गयी।
इतना ही नहीं डेरा श्रद्धालुओं द्वारा पूरे भारत के अन्य स्थानों पर भी इस अवसर पर जरूरतमंद परिवारों को राशन तथा गरीब व अनाथ बच्चों को पुस्तकें, कपड़े तथा खिलौने वितरित किए गए।
मदद के पीछे मकसद:
जब डेरा श्रद्धालुओं से उनके इन कार्यों की वजह पूछी गयी तो उन्होंने बताया कि ये सामाजिक कार्य वे लोग अपने आध्यात्मिक गुरु सन्त गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा की बताई गई शिक्षा के अनुसार करते हैं। इन कार्यों को करने के पीछे उनका मकसद केवल समाज मे अच्छाई तथा सच्चाई को बढ़ावा देना है। वे लोग ये सब इसलिए करते हैं ताकि समाज मे इंसानियत हमेशा जिंदा रहे। उनका मकसद सिर्फ अपने देश और धरती माँ की रक्षा करना है और इसके लिए वे हमेशा कोशिश करते रहेंगे।
निष्कर्ष:
बात सिर्फ डेरा श्रद्धालुओं की नहीं है, बल्कि उनके द्वारा समझी गयी समाज के प्रति जिमेवारी की है।
इंसान चाहे कोई भी उसे सदैव अपने समाज तथा अपने देश के हित में ही कार्य करने चाहिए, जिससे हमारी आने वाली पीढियों का भविष्य सुरक्षित रहे।
अपने साथ साथ, समाज मे रहने वाले और लोगों कर हित में सोचना भी न केवल हमारा फ़र्ज़ है बल्कि हमारा धर्म भी है।
दोस्तों, हमारे समाज के मुख्य चार धर्मों में से एक धर्म सिख धर्म है जिसकी शुरुआत श्री गुरु नानक देव जी ने की| सिखों के पहले गुरु कहे जाने वाले गुरु नानक देव जी का जन्म हर साल कार्तिक माह की पूर्णिमा को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है| यह प्रकाश पर्व न सिर्फ सिख धर्म के लोगों के लिए मायने रखता है अपितु हिन्दू धर्म के लोगों में इसकी खास एहमियत है| प्रकाश पर्व को गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है और इस साल यह प्रकाश पर्व 23 नवम्बर को मनाया जा रहा है|

 

गुरु नानक देव जी का व्यक्तित्व:

गुरु नानक देव जी सिखों के सबसे पहले गुरु होने के साथ साथ एक अत्यंत ज्ञानी महापुरुष और मार्गदर्शक भी थे| उन्होंने न केवल लोगों में एकता का सन्देश दिया अपितु इंसानियत का भी संचार किया| गुरु नानक देव जी एक शांत व्यक्तित्व के स्वामी थे| गुरु नानक देव जी अपने प्रवचनों द्वारा सभी को सद्भावना तथा एकता का सन्देश देते थे| प्रकाश पर्व के इस पवन उत्सव पर आज भी उनके दिए गये उपदेशों को याद किया जाता है|

 

गुरु नानक जी द्वारा दिए गये मुख्य उपदेश:

गुरु नानक देव जी ने ‘इक ओंकार’ का नारा दिया जिसका अर्थ है कि ईश्वर एक है और हर जगह मौजूद है| हम सभी के परम पिता एक ही हैं, इसलिए हमे सब क साथ प्रेम से रहना चाहिए|

 

गुरु नानक देव जी ने हमेशा लोगों को हक़ हलाल की कमाई कर के खाने का उपदेश दिया| उन्होंने कहा था की इन्सान को सदा मेहनत कर के ही अपना गुजरा करना चाहिए न की कभी किसी का हक मार लार खाना चाहिए| उन्होंने सम्पूर्ण मानवजाति को न्यायपूर्वक उचित तरीके से धन कमाने का सन्देश दिया तथा कभी भी किसी लोभ में न पड़ने के लिए समझाया| गुरु जी ने हमेशा जरुरतमंदो की यथासम्भव सहायता करने का भी सन्देश दिया|

 

गुरु जी जातिवाद के सख्त खिलाफ थे, उन्होंने सभी से एकता, भाइचारे तथा प्रेम से रहने का अनुरोध किया| उन्होंने उपदेश दिया की कभी भी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए तथा एसी कोई भी बात किसी को नहीं कहनी चाहिए जिससे उसका हृदय दुखी हो क्योंकि हम सब एक परमात्मा की सन्तान है और यदि कोई किसी का दिल दुखाता है तो ये ईश्वर के दिल को दुखाने जेसा है| गुरु जी ने सन्देश दिया की स्त्री तथा पुरुष एक समान है इसलिए सभी को नारीत्व का सम्मान करना चाहिए| उन्होंने बताया की इन्सान को कभी भी अपने जीवन में चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि तनाव तथा चिंता मनुष्य के व्यक्तिव पर बुरा प्रभाव डालते है| इन्सान को सदैव प्रसन्नचित हृदय रखना चाहिए|

 

गुरु जी ने उपदेश दिया था की व्यक्ति संसार को तभी जीत सकता है जब वह अपने अंदर को बुराइयों से लड़ कर उनपर विजय हासिल करे| कोई भी इन्सान जब तक खुद को अंतर्मन से स्थिर नहीं बनाएगा तब तक वह अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता| इन्सान को कभी भी अपने मन में अहंकार को जगह नहीं देनी चाहिए क्योंकि अहंकार ही इन्सान का सबसे बड़ा दुश्मन है जो इन्सान को अच्छाई के मार्ग पर आगे बढने से रोकता है| गुरुनानक देव जी पुरे संसार को एक परिवार की भांति मानते थे तथा सबसे अनुरोध करते थे की आपस में प्यार से मिलकर रहें|

निष्कर्ष:

धर्म चाहे कोई भी हो, भगवन को मानने वाले तथा उस से मिलने का रास्ता दिखने वाले फ़क़ीर तथा गुरु हमेशा सच्चाई तथा अच्छाई को अपनाने का सन्देश देते हैं| तो आइये हम सब मिलकर इस प्रकाश पर्व पर प्रण लें की हम सभी एक दुसरे के हित में सोकहेंगे तथा अपने अंदर की बुराइयों को त्याग कर एक सच्चे इन्सान बनेंगे|

बाजारों की चहल-पहल , घरों की मनोहर सजावट व लोगों के चेहरे की रौनक …..’इन दिनों तो मानो हवा में भी उत्सवों की महक घुली हो’। भारतवर्ष में साल भर त्योहारों की जो अनोखी छटा देखने को मिलती है वह कहीं और कहां। प्रेम तथा भाईचारे का संदेश देते हुए त्यौहार हमें जीवन के सही अर्थ समझाते हैं।

इन्ही में से एक है..”भाई-दूज” । जी हाँ, प्राचीन समय से भाई बहन के प्रेम को प्रकट करता यह त्यौहार अपने आप मे बहुत विशेष है।वैसे तो बहन सदैव ही अपने भाई की लम्बी आयु व स्वस्थ जीवन की कामना करती है, परन्तु कहा जाता है कि भाई-दूज पर भाई के लिए की गई प्रार्थना जरूर फलिभूत होती है।

कब मनाया जाता है भाई-दूज : 

मित्रों ! दीपावली के दो दिन बाद अर्थात कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को भाई-दूज के रूप में मनाया जाता है।हिन्दू धर्मानुसार यह यम द्वितीय तथा भ्रातृ द्वितीय आदि नामों से भी प्रचलित है।h

क्या है भाई-दूज मनाने का उद्देश्य : 

भ्रातृ द्वितीय का उद्देश्य भाई बहन के प्रेम को प्रगाढ करना है।इस दिन एक ओर जहां बहनें भाई की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं वहीं भाई भी उनकी सम्रद्धि व खुशहाली की कामना करते हैं।

क्या है भ्रातृ द्वितीय मनाने की विधि: 

इस दिन धार्मिक प्रथा अनुसार  चावल के घोल से पांच शंक्वाकार आकृतिया बना कर उनमें जल,फल,सिंदूर,पान ,इलायची व जायफल आदि रखे जाते हैं।जिसके बाद भाई को शुभासन पर बिठा कर उनके हाथ पैर धुलाये जाते हैं तथा तिलक लगा कर आरती उतारी जाती है। तत्पश्चात उनकी लम्बी आयु व समृद्धि की प्रार्थना करते हुए उन्हे स्नेहपूर्वक भोजन कराया जाता है।इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है।भाई- दूज पर बहन, भाई को भोजन कराने के बाद ही भोजन ग्रहण करती है।

भाई-दूज की कथा :

भगवान सूर्य नारायण व माता छाया की दो सन्ताने थी, यमराज तथा यमुना । दोनों में अत्यंत स्नेह था।विवाह पश्चात यमुना बार बार भ्राता यम को भोजन पर आने के लिए निवेदन करती थी।परंतु बहुत व्यस्त होने के कारण यम उनका निमंत्रण स्वीकार नही कर पाते थे।

एक बार यमुना ने यमराज को निमंत्रण दे कर वचनबद्ध कर लिया तथा यम ने सहर्ष इसे स्वीकार भी किया। यम यह सोच कर बहुत खुश थे कि प्राण हरण के डर से उन्हे कोई भी घर बुलाना नही चाहता, परन्तु बहन इतने स्नेह से उन्हें  आमंत्रित कर रही है।

वे इतने हर्षित थे कि बहन के घर आते समय उन्होने सभी नर्कवासी जीवों को मुक्ति दे दी। यमुना ने यह दिवस उत्सव की भांति मनाया।भाई का पूजन कर प्रेमपूर्वक ,अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों से उन्हे प्रसन्न किया। खुश हो कर जब यमराज ने उन्हे कोई वर मांगने का आदेश दिया तो यमुना बोली , ” भ्राता ! आप प्रतिवर्ष इसी दिन मेरे घर आएं तथा  मेरी तरह जो भी बहन आज के दिन भाई का टीका सत्कार करे ,उसके भाई को तुम्हारा भय न हो।

तब यमराज ने तथास्तु कहकर उनका वचन स्वीकार कर लिया। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय का दिन था।तभी से भाई-दूज मनाया जाने लगा ।इस दिन विशेष रूप से यम तथा यमुना की पूजा की जाती है।

 

भाई -दूज के उपहार :यह भाई बहनों का विशेष त्यौहार है , इस दिन भाई-बहन दोनो ही एक दूसरे को अपने सामर्थ्य अनुसार उपहार देते हैं।हर बार यह पर्व भाई बहन के प्रेम को ओर अधिक प्रगाढ कर देता है।

हर बहन की भाई दूज पे एक ही आस   

भाई तुम खुश रहो,लम्बी आयु हो तुम्हारी

हमारा प्रेम यूँ ही बढ़ता जाए,हो किस्मत तुम्हारी सुनहरी…..