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 23 सितम्बर से जुड़ा बाबा राम रहीम का सच

दोस्तों पिछले कुछ दिनों से मेरे मन में एक सवाल चल रहा था। शायद आप में से भी बहुत लोगों के दिमाग में ये सवाल उठा हो। तो आज में आप सब को उसी के बारे में बताना चाहती हूं।
हम सब सोशल मीडिया से जुड़े हैं और आप में से भी बहुत लोग आजकल ट्रेडिंग में चल रहे सभी मुद्दों पर गौर करते होंगे। मैंने पिछले कुछ दिनों से देखा है कि डेरा सच्चा सौदा जो कि एक सामाजिक संस्था के रूप में जानी जाती है उनके हैशटैग जो कि हमेशा उनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों और उनके गुरुजी की शिक्षाओं से जुड़े होते हैं, सोशल मीडिया पर हर जगह ट्रेंड करते हैं। हालांकि पिछले एक साल के चलते समाज में उनके लिए एक नकारात्मक सोच पैदा हुई है लेकिन उसके बावजूद डेरा के लोगों ने अपने सामाजिक कार्यों को चालू रखा है। मुझे ये देखकर हैरानी भी हुई और उत्सुकता भी कि आखिर ऐसा क्या है जो इन लोगों का हौंसला कम नहीं पड़ने दे रहा है। और अगर बात इस महीने की करें तो डेरा के लोगों के लिए ये उनके मौजूदा गुरु का गुरुगद्दी दिवस का महीना है, और ये अब मुझे इसलिए पता है क्योंकि हाल ही में मेरे ऑफिस की एक कलीग ने मुझे इस बारे में बताया जो कि डेरा से ही ताल्लूक रखते हैं।
मेरे मन में उठ रहे सवालों के जवाब जानने के लिए मैंने उनसे मिलने का प्लान बनाया। उनसे मिलने पर मैंने उनसे पूछा कि इतना सब होने के बाद भी आप को अपने गुरु पर इतना विश्वास क्यों है? और आखिर क्या है ये गुरुगद्दी दिवस,  जिस के लिए आप लोग इतने खुश नजर आते हैं और आए दिन सोशल मीडिया पर इस बारे में पोस्ट डालते हैं?
मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि ये गुरुगद्दी दिवस का त्योहार वो सब इसलिए मनाते है क्योंकि इस दिन उनके दूसरे गुरु “सतनाम सिंह जी महाराज ने उनके मौजूदा गुरु बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह जी को डेरे का उत्तराधिकारी बनाया था।” गुरमीत राम रहीम जी ने मात्र 23 साल की उम्र में ही अपना घर और परिवार का त्याग कर के डेरे में आकर अपने गुरु की तरह ही लोगों को राम के नाम से जोड़ने का कार्य शुरू किया। उनके अनुसार डेरा के लोग उनके गुरु की शिक्षा के अंतर्गत 133 सामाजिक कार्य करते हैं जिनमें वेश्यावृत्ति में फंसी हुई लड़कियों को छुड़ाकर उनकी शादी करवाना, जगह जगह सफाई अभियान चलाना, पौधरोपण, कन्या भ्रूण हत्या रोकने जैसे कार्य सम्मिलित हैं। उन्होंने बताया कि डेरा में 23 सितम्बर का दिन बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन डेरा श्रद्धालु गरीबों के लिए दान करते हैं और आंखे दान, गुर्दा दान , शरीर दान जैसे कार्यों के लिये लिखित फार्म भी भरते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में उनके गुरु और उन्हें बहुत कुछ कहा गया लेकिन फिर भी उन्होंने अपने गुरु का साथ और उनकी अच्छी शिक्षाओं को नहीं छोड़ा है।
जब मैं उनसे मिलकर वापिस लौटी तो मन में काफी हद तक कुछ जवाब मिल चुके थे। मैं कुल मिलाकर इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यदि किसी की वजह से समाज का भला हो, लोग अच्छाई को महत्व दें और  सच्चाई के लिए आगे बढ़े तो समाज को एक नई दिशा ही मिलेगी। और वैसे भी ये बात बहुत प्रचलित है कि कई बार जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है और जो होता है उसे हम देख नहीं पाते। तो क्या पता कि जो नकारात्मक धारणा हमनें डेरा और डेरा श्रद्धालुओं के लिए बना रखी है वो असल में बेबुनियाद हो या फिर हम शायद कोई ऐसा सच हो जिसे हम अपनी मानसिकता की वजह से देख नहीं पा रहे। अंत में मैं केवल इतना कहना चाहूंगी कि बात चाहे देश की हो या एक व्यक्ति की एक अच्छा नागरिक होने के नाते हमें हर चीज़ को परखना चाहिए तभी हम सही निर्णय ले सकते हैं। तो इसी नाते मैं इस बारे में और भी जानकारी जुटाना चाहूंगी ताकि सच आप सब के सामने रख सकूँ।

अब घर पर बनाए रसमलाई

जैसा कि आप सब जानते है कि रसमलाई का नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है तो आइये हम आपको बहुत ही आसान तरीके बाजार जैसी रसमलाई बनाना सिखाते है जिसे आप बहुत आसानी से अपने घर पर बना सकते है और सभी मिल कर खा सकते है।
तो चालिए, इससे बनाना शुरू करे। इसके लिए हमे ज्यादा साम्रगी की जरुरत भी नही पडती ये चीजे बहुत ही आसानी से घर मे मिल जाती है।।

साम्रगी:

*2 कप गाय का दूध, छैना बनाने के लिए यानी रसगुल्ले बनाने के लिए

* 2 कप फूल क्रीम का, दूध मलाई बनाने के लिए

*1 कप चीनी चाशनी यानी सिरप बनाने के लिए

* 1 नींबू का रस या विनेगर, दूघ को फाडने के लिए

*कलर के लिए केसर

*सजावट के लिए कुछ मेवे जैसे बादाम,पिस्ता ,काजू आदि बारिक कटे हुए

आईए हम रसमलाई बनाना शुरू करते है।

छैना बनाने कि विधि:

सबसे पहले हम रसगुले बनाएगें उसके लिये हम छैणा तैयार करेगें जिसके लिये हम गैस पर एक पैन या कढाई चड़ायेंगे उसमे थोड़ा सा पानी डालेगें जिससे दुध बर्तन पर ना लगे या ना चिपके अब इसमें दो कप गाय का दूध डालेंगे इसमे उबाल आने के बाद इसमे धीरे धीरे निंबू का रस डालेंगे जिससे कि दूध फटना शुरु हो जाएगा फिर इसे सफेद कपड़े मे छानकर टूंटी पर लटका दी जिए जब इसका पानी सूख जाए तो इसका मुलायम सा आटा तैयार कर लिजिए और इसकी लोई बनाकर इसे रसमलाई की तरह गोल आकार दी जिए ।

चाशनी बनाने की विधि:

अब एक अलग बर्तन मे सिरप बनाने के लिए एक कप चीनी डालेगें उसमे से थोड़ी सी चीनी हम मलाई बनाने के लिए रख लेगें अब हम ढाई कप पानी डालेगें जब तक चीनी पानी मे घुल ना जाए तब तक करछी चलाएगें,उबाल आने फिर हमने जो रसगुल्ले तैयार किए हैं वो डालेगें उसे हम 20 मिनट के लिए ढक कर पकाएगें इसे हम तेज गैंस पर ही पकाएगें तो जब तक ये पेकगा

मलाई तैयार करने कि विधि:

हम मलाई तैयार करते है इसके लिए हम एक कढाई को मिडियम से हाई गैस पर ऱख दिया है इसमे हमने 2 कप फुल क्रीम वाला दूध डालना है इसे हमने तब तक चलाना है जब तक यह आधा नही हो जाता अब इसे चलाते रहना है जब तक यह गाढा ना हो जाए अब इसमे इलायची पाऊडर व बची हुई शुगर मिलाएगें और अब सिरप को 20 मिनट बाद बंद करके ठंडा होने के लिए रख देते है। अब थोडी देर मलाई को और चलाने के बाद मलाई वाला गैस बंद कर देगें और उसे भी ठंडा होने देगें अब सिरप मे से रसगुल्ले निकार कर उन्हे थोडा निचोड कर एक बाऊल मे डालेंगें फिर उसके ऊपर मलाई डालेगें फिर उसे हम बादाम,पिस्सा,काजू,केसर से सजा कर ठंडा होने के लिए फ्रिज मे रख कर खाऐगें।यह खाने मे भी बहुत स्वददिष्ट लगती है

आशा करती हूँ कि आपको मेरी ये आसान रेसिपि जरुर पंसद आई होगी प्लीज ट्राई किजिए और हमे बताईए आपको कैसी लगी।

बिना संघर्ष अपंग है जीवन

दोस्तों आज मैं आपसे एक प्रेरणादायक कहानी साझा करने जा रही हूं। ये कहानी है संघर्ष की और संघर्ष के महत्व की। संघर्ष एक व्यक्ति के जीवन में ऐसे ही जरूरी है जैसे किसी सोने के आभूषण के लिए आग की तपन, जिस से उसमें और भी निखार आता है। जो व्यक्ति जीवन में संघर्ष की सीढ़ी अपनाता है वही व्यक्ति सफलता के मुकाम को हासिल कर सकता है। वही इंसान अपने सपनों को हकीकत का रूप दे सकता है। संघर्ष के इस महत्व को समझने के लिए आइए जानते है ये कहानी।

दोस्तों, आप में से कई लोगों ने सुना होगा कि तितली अपने कोकून से बाहर आने के लिए बहुत संघर्ष करती है क्योंकि ये संघर्ष ही उसके जीवन का आधार होता है। ये संघर्ष ही उसे उसके पँखो को उड़ने की ताकत देता है। यदि तितली बिना संघर्ष के ही कोकून से बाहर आ जाए तो उसके शरीर का तरल पदार्थ उसके पँखो तक नहीं पहुंच पाता और वह कभी उड़ नहीं पाती। बस इसी संघर्ष से जुड़ी है यह कहानी।

एक बार एक व्यक्ति बाग में घूमने गया। घूमते घूमते वहाँ उसकी नज़र एक पेड़ पर एक कोकून यानि तितली के अंडे पर पड़ी। व्यक्ति को अंडे में एक छोटा सा छेद दिखाई दिया। उस व्यक्ति का कोतुहल बढ़ गया और वह वहीं बैठकर उस तितली के अंडे को देखने लगा। थोड़ी देर में उस अंडे का छिद्र थोड़ा बढ़ गया। उस व्यक्ति ने देखा कि एक तितली उस छिद्र से बाहर निकलने की जदोजहद कर रही है। किन्तु बहुत कोशिश करने पर वह तितली भी निकल नहीं पा रही थी। कुछ समय के बाद अंत में वह तितली शांत हो गयी। व्यक्ति को लगा कि तितली हार चुकी है इसलिए उसने उस तितली की सहायता करने के लिए अंडे का सुराख बड़ा कर दिया और तितली उसमें से बहुत ही आसानी से बिना किसी मेहनत के बाहर निकल आई। किन्तु तभी उस व्यक्ति ने देखा कि तितली के पंख सुख चुके थे और उसके शरीर में सूजन आ गयी थी और अंत में वह मर गयी। चूंकि तितली बिना सँघर्ष के बिना मेहनत के बाहर आई थी, इसलिए उसके शरीर का तरल पदार्थ उसके पँखो तक नहीं पहुंच पाया और वह अपनी जान से हाथ धो बैठी।

यह कहानी हमें सिखाती है कि जब तक व्यक्ति संघर्ष की आग में न जले उसका जीवन निर्थक है।
यदि हमें अपने जीवन को सार्थक बनाना है तो संघर्ष को अपना रास्ता बनाना होगा सफलता तक पहुंचने का। क्योंकि बिना मेहनत और संघर्ष के मिली सफलता का सुख क्षणमात्र ही रहता है। किंतु संघर्ष से हासिल की हुई सफलता का साथ हमारे जीवन को और अधिक खुशनुमा बना देता है। संघर्ष अंधकार में जलती एक लौ की तरह है जिसके सहारे व्यक्ति अपने किसी भी दुख और मुसीबत को भूलकर अपने अंदर के आत्मविश्वास को कायम रख सकता है। और वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी, “भगवान भी उन्हीं की मदद करता है, जो अपनी सहायता खुद करते हैं” । तो संघर्ष को जीवन का नियम बनाइए और सफलता की हर सीढ़ी चढ़ जाइए।

सफलता का सूचक – गुरूमंत्र

कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं।

हारा वही, जो लडा नहीं।।

‌आज हम जिस विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं वो विषय है “सफलता का सूचक – गुरुमंत्र”। गुरूमंत्र का हमारे जीवन में बहुत ज्यादा महत्व है। गुरुमंत्र के जाप के बिना हम जीवन में सफल नहीं हो सकते। गुरूमंत्र के पहले हमें अपने जीवन में एक गुरु की आवश्यकता है जो हमें सही गुरुमंत्र का मार्गदर्शक कर सके।

‌गुरु और गुरूमंत्र का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। गुरुमंत्र के माध्यम से गुरु शिष्य के जीवन में उतरता है और शिष्य का जीवन सफल बन जाता है। सच्चा गुरुमंत्र एक सच्चे संत द्वारा ही सिखाया जाता है। वही इसका सही तरीका बता सकता है। ये कोई नहीं जानता कि हमारे अंदर एक दिव्य शक्ति है जो पूरे विश्व में हर एक की मदद करती है। केवल एक गुरु ही इस के बारे में मार्गदर्शक कर सकता है। गुरुमंत्र का लगातार अभ्यास करने से हम अपनी सोई हुई आत्मा को जगा सकते हैं और जब एक बार आत्मा जाग जाऐ तो इसके बाद हमारे अंदर एक जुनून पैदा हो जाता है। फिर सुमिरन से उठने का दिल ही नहीं करता ये एक ऐसा सुकून भरा जुनून है। इससे हमारी जिंदगी में कई तरह के बदलाव आ जाते हैं जैसे हर प्रकार की समस्या हल हो जाती है, मन शांत रहता है। क्रोध, लोभ, मोह, ममता और माया ये पांच चोरों से भी पीछा छूट जाता है। गुरुमंत्र का जाप करने से हमारी आत्मा ताकतवर वन जाती है और अंदर बाहर से हम खुशियों से मालामाल हो जाते हैं और सुमिरन से हम दसवें द्वार को भी खोल सकते हैं जिसके खुलने से परमात्मा का ऐसा नूर दिखाई देता है जो कहने सुनने से परे है और उसमें जो आनन्द मिलता है वो दुनिया की किसी चीज में नहीं।

‌सफलता और असफलता के बीच जरा सा फासला है और वो है जुनून का। ऐसा जुनून जो रात को सोने नहीं देता, जो मजबूर कर देता है शिद्दत से गुरुमंत्र का जाप करने के लिए।

यूं ही नहीं मिलती राही को मंजिल,

एक जुनून दिल में जगाना पडता है।

पूछा चिड़िया से कैसे बना आशियाना,

बोली, भरनी पडती है उड़ान बार – बार।

सबसे पहले आप अपनी कमजोरी पता करें और उसे दूर करने की बार- बार कोशिश करें जैसे आप सुबह जल्दी नहीं उठ सकते लेकिन आप के पास सुबह 2-5 के बीच ही सुमिरन करने का वक्त है। तो पहले आप 4 बजे उठे धीरे-धीरे उसे बढाते जाए और फिर आप देखना एक दिन आप की आंख 2बजे खुद-ब-खुद ही खुलने लगेगी। कई बार हमारा मन बगावत करता है इसकी भावनाओं को काबू में रखने के लिए ध्यान केंद्रित करने के लिए रोज योगा के साथ सुमिरन करें।

हिम्मत करे इन्सान, तो सहायता करे भगवान।

दुनिया में कोई इन्सान इतनी आसानी से सफल नहीं होता, ठोकरें खानी पड़ती है। अभी ठोकरों से डरोगे तो कभी सफल नहीं हो पाओगे। राह में चाहे जितनी भी ठोकरें आऐ आप अपने लक्ष्य को मत छोड़ो। ये ठोकरें तो आपकी परीक्षा लेती है आपके कदम को मजबूत करती है उसी प्रकार हमें गुरुमंत्र का जाप करते रहना चाहिए कभी भी यह मत सोचना कि हमें कुछ हासिल तो हो नहीं रहा। उस भगवान को सब पता है कहां हमारे लिए क्या सही है वो समय आने पर खुद हमारी रक्षा करता है इसलिए हमें लगातार सुमिरन करते रहना चाहिए।

‌आज मैं आपके साथ कुछ अपने अनुभव शेयर करना चाहती हूं कैसे मुझे गुरुमंत्र का जाप करने से जिदंगी में सफलता हासिल हुई है। मेरी जिंदगी गुरुमंत्र लेने से पहले कुछ भी नहीं थी पर गुरुमंत्र लेने के बाद मेरी जिंदगी की काया ही पलट गई। मैंने 13 साल की उम्र में ही गुरुमंत्र ले लिया था। जैसे – जैसे मैं गुरूमंत्र का जाप करती गई मेरी जिंदगी की हर मुश्किल अपने आप हल होती गई। पढ़ाई के दौरान भी गुरुमंत्र का बहुत महत्वपूर्ण रहा है। जब पढ़ाई से मन ऊब जाता मैं 10 मिनट सुमिरन करती और फिर पढ़ाई करने बैठ जाती। ऐसा करने से पढ़ाई में मन ज्यादा लगता और याददाश्त भी बढ जाती। मेरे अंदर पहले बहुत गुस्सा था पर अब सुमिरन का अभ्यास करने से गुस्से पर मैंने 70% काबू पा लिया है। एक और बात मैं आपके साथ शेयर करना चाहूँगी। जब मेरे बेवी होने वाला था डाक्टर ने मेरे और बच्चे की जान बचाने से जबाव दे दिया मैंने हिम्मत न हारते हुए लगातार सुमिरन किया और 15 मिनट के बाद ही मेरे बेवी हो गया और हम दोनों मां बेटे की जान बच गई। मैं अपने गुरु की आभारी हूँ जिसने मेरे को गुरुमंत्र दे कर गुरु भक्ति करने का सच्चा मार्ग बताया और मुझे जिंदगी में वो हर सफलता दी जिसका मैंने कभी अनुमान भी नहीं लगाया था।

‌अंत में मैं यही कहना चाहूँगी कि हमें ब्रह्म मुहूर्त में सुमिरन करना चाहिए इससे हमारी हर जायज मांग पूरी होती है। गुरुमंत्र के जाप के द्वारा हम सफलता की हर ऊंचाई को छू सकते हैं। गुरूमंत्र ही एक ऐसा तरीका है जिससे हम बड़ी से बड़ी मुश्किल को पार कर सकते हैं।

रात गवाई सोय के दिवस गवाया खाय।

हीरा जन्म अनमोल है, कोडी बदले जाय।।

कही आप भी तो डायबिटीज के शिकार नही?

डायबिटीज जिसे  मधुमेह  भी  कहा जाता  है एक गंभीर बीमारी है जिसे धीमी मौत (साइलेंट किलर ) भी कहा जाता है। संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है विशेष रूप से भारत में। आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से ब्लड शुगर को कन्ट्रोल करने के कुछ महत्वपूर्ण तरीके बताने जा रहे है…

शरीर मे शुगर लेवल बढ़ने पर मिलते है ये संकेत

शरीर मे शुगर लेवल का बढ़ना या कम होना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। शुगर लेवल के अनकंटरोल होने पर शरीर के कई आॅगनस ड़ैमेज भी हो सकते है। इसलिए शरीर मे शुगर लेवल का सही होना बहुत जरूरी होता है।

▶ड़ायबिटीज के मरीजो को फाइबर रिच से भरपूर चीजे जरूर खानी चाहिए।

अगर आप हेल्दी रहना चाहते है तो आप आपनी ड़ेली ड़ाइट मे फाइबर खाना शुरू कर दे। फाइबर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने मे मदद करता है ।

इन चीजो को खाने से कंट्रोल मे रहेगी ब्लड शुगर:-

मेथी :- मेथी के बीज और पत्तियां दोनो ही ड़ायबिटीज से लड़ने मे मददगार है,भरपूर मात्रा मे फाइबर होने से पाचन क्रिया धीमी होती है।ये शरीर मे खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाते है ।

दाले :- दालें प्रोटीन के साथ-2 फाइबर का भी अच्छा स्त्रोत होती है। दालों मे पाई जाने वाली कार्बोहाइड्रेट का कुल 40% फाइबर होता है जो ब्लड शुगर को कम करने मे मददगार होता है ।

अमरूद:- अमरूद मे भी खूब फाइबर होता है,  इससे कब्ज से लड़ने मे मदद मिलती है । ड़ायबिटीज के मरीजो को अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है। यह एक बढ़िया स्नैक्स साबित हो सकता है ।

▶ इसके अलावा पपीता, चेरीज, तरबूज, हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, कदू के बीज भी ड़ायबिटीज के मरीजो को खाने चाहिए ; इसके अलावा रोजाना एक्सरसाइज भी करनी चाहिए।

ड़ायबिटीज के लक्षण

1.) अत्यधिक भूख:- आपको इसलिए भूख महसूस होती है क्योंकि आपका शरीर उस ऊर्जा का प्रयोग नही कर पाता जितनी वह कर सकता है। इसके बजाए ज्यादातर कैलोरी यूरिन के द्वारा निकाल जाती है ।

2.) वजन घटना:- ऐसा शरीर मे पानी की कमी की वजह से होता है । शरीर का पानी भी कम हो जाता है ।शरीर के पानी और अन्य तत्व यूरिन के माध्यम से बाहर निकल जाते है ।

3.) थकान:- आपको थकावट और भूख दोनो महसूस होगी। आपका शरीर उस कैलोरी को नही पचा पाता जिसे शरीर ग्रहण करता है । वही आपके शरीर को पर्याप्त ऊर्जा भी मिल जाती है ।

4.) चिड़चिड़ापन या व्यवहार परिवर्तन:- ड़ायबिटीज होने का यह भी संकेत है, जब व्यवहार परिवर्तन होने लगे और चिड़चिड़ापन होने लगे तो यह ठीक नही है ।

5.) सांसो से फलों की गंध का आना:- ड़ायबिटीज के लक्षणों मे यह भी है कि, इस अवस्था मे सांसो मे फलों के जैसी गंध भी आती है यानी आपकी सांसो मे एक तरह का स्मेल आता है।

 

कड़वे तेल के नाम से पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाने वाला सरसों का तेल अपनी तासीर और गुणों के कारण कई तरह की समस्याओं में औषधि‍ के रूप में भी उपयोग किया जाता है। अगर आप अब तक इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों से अनजान हैं, तो आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से सरसों के तेल के फायदे (sarso ke tel ke fayde) बताने जा रहे हैं कि आपकी जिंदगी में कितना महत्वपूर्ण है। इसका सेवन करने से आपकी जिंदगी में किस तरह के बदलाव आएंगे। हम सभी घरों में सब्जी बनाने में सरसों के तेल का इस्तेमाल करते हैं। कुछ जगह पर इसको कडवा तेल के नाम से जाना जाता है।

यदि आप भारत में रहते हैं, तो इसकी बहुत संभावना है कि आप हर महीने अपनी किराने की सूची में सरसों का तेल जरूर लाते होंगे । यह एक आवश्यक चीज़ है, और कुछ खाने के पदार्थ जैसे कि लेडीफिंगर का स्वाद सबसे ज्यादा अच्छा लगता है जब इसमें पकाया जाता है। यह तेल सरसों के पौधे के बीजों से निकाल कर बनाया जाता है और अन्य तेलों से बहुत अलग होता है। इसमें हल्का पीला रंग, एक मजबूत सुगंध, तेज स्वाद और तीखा स्वाद है। इसका अपने आप मे स्वाद इतना अच्छा तो नहीं है लेकिन इसे अपने व्यंजनों में जोड़ने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते है उनमें से कुछ यहाँ एक सूची में हैं।

सरसों का तेल सेहत और सुंदरता दोनों के लिए ही बहुत फायदेमंद है | इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो दर्दनाशक का काम करते हैं। ये एक औषधि की तरह काम करता है। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ तेल समझकर ही इस्तेमाल करते हैं पर आप को इसके फायदे जान कर बहुत हैरानी होगी |

Sarso Ke Tel Ke Fayde

दर्दनाशक के रूप में

जोडों का दर्द हो चाहे कानों का दर्द हो या फिर कहीं चोट लगी हो सरसों का तेल इन सब की एक आयुर्वेदिक दवाई है। सरसों के तेल की मालिश करने से जोडों का दर्द ठीक हो जाता है। सरसों के तेल को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

त्वचा के लिए फायदेमंद

सरसों के तेल में वेसन और हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर निखार तो आता ही है साथ में त्वचा की नमी भी बनी रहती है। पुरुष सरसों के तेल को चेहरे पर लगाकर शेव करें तो चेहरा और भी निखार आ जाता है।

भूख बढ़ाने में मददगार

अगर आपको भूख नहीं लगती तो ये तेल आपके लिए बहुत फायदेमंद है ये हमारे पेट में ऐपिटाइजर का काम करता है जो भूख बढाता है।

बजन घटाने में मददगार

सरसों के तेल में मौजूद विटामिन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढाते है जिससे बजन कम हो जाता है।

अस्थमा की रोकथाम

अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए सरसों का तेल बहुत फायदेमंद है। इस में मैग्नीशियम पाया जाता है जो अस्थमा के मरीजों के लिए फायदेमंद है। सर्दी हो जाने पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

दांत दर्द में फायदेमंद

दातों पर सरसों के तेल में नमक मिलाकर लगाने से दांत सफेद और मजबूत बनते हैं।

Sarso Ke Tel Ke Fayde Balo Ke Liye

Mustard Oil Benefits for Hair in Hindi: बालों की मजबूती के लिए फायदेमंद – सरसों के तेल को बालों में लगाकर रोजाना मालिश की जाऐ तो बाल मजबूत बन जाते हैं। सरसों के तेल और बादाम दोनों को मिलाकर अच्छी तरह से उबाल लें और फिर ठंडा कर लें और फिर उस से बालों की जड़ों में मालिश करें जिससे बाल तो मजबूत बनते ही है साथ में दिमाग भी तेज होता है। रात को सोने से पहले सिर में सरसों का तेल लगाने से तनाव दूर हो जाता है।

नाभि

सोने से पहले सरसों का तेल नाभि पर लगाऐ इससे होंठ फटने की समस्या दूर हो जाती है और होंठ खूबसूरत दिखने लगते हैं। नाभि पर सरसों का तेल लगाने से पेट दर्द और डाइजेस्ट की समस्या दूर हो जाती है।

चोट

अगर लम्बे समय से लगी चोट ठीक नहीं हो रही तो सरसों के तेल लगाने से वो सूख कर जल्दी ठीक हो जाती है।

स्वस्थ शरीर

स्वस्थ शरीर और मजबूती बनाने के लिए रोजाना सुबह नहाने से पहले सरसों के तेल की मालिश की जाऐ। इससे शरीर निरोग बन जाता है। फलस्वरूप आप लंबे समय तक सुखद और जवान रह पाएंगे।

पैर के तलबे पर मालिश

रात को सोने से पहले अगर रोजाना पैरों के तलवों पर मालिश करके सोयेंगे तो बहुत फायदेमंद है। इससे आखों की रोशनी तेज होती है। इससे नींद अच्छी आती है।

दिल की सेहत में सुधार

सरसों के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड (Monounsaturated) और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड(Polyunsaturated Fatty Acids), ओमेगा -3 (Omega-3) और ओमेगा -6 फैटी एसिड(Omega-6 Fatty Acid) होते हैं जो इस्केमिक हृदय रोग (Ischemic Heart Disease) के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम कर सकता हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

कैंसर की रोकथाम के लिए

खोज से साबित हुआ है कि सरसों के तेल में कैंसर से लड़ने वाले गुण होते हैं। यह आपके पेट को कैंसर के खतरे से लड़ने में मदद करता है।

खांसी और जुखाम को खत्म करे

ज्यादातर लोग खांसी और जुखाम को खतरनाक मानते हैं क्योंकि इससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल है। शुक्र है कि सरसों का तेल खांसी और जुखाम का कारण बनने वाली भीड़ से छुटकारा दिलाता है। खांसी और जुखाम से छुटकारा पाने के लिए गर्म पानी मे गाजर के बीज और थोड़ा सा सरसों का तेल मिलाकर भाप लें।

मांसपेशियों का सुन्न होना बंद करे

त्वचा पर सीधे सरसों के तेल की मालिश करने से सुन्न मांसपेशियों में सनसनी होने में मदद मिलेगी। यह तनाव ग्रस्त मांसपेशियों को आराम करने में भी मदद करेगा।

अंगों का प्रदर्शन बढ़ाये

जब रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) बढ़ जाती है, तो यह आपके शरीर को ताज़ा कर सकता है और जरूरी अंगों के काम करने की गति को बढ़ा सकता है। यही कारण है कि न केवल नवजात बच्चों को बल्कि वयस्कों (Adults) को भी सरसों के तेल की मालिश का विकल्प चुनना चाहिए। यह न केवल ताकत बढ़ाएगा बल्कि आपके शरीर को गर्माहट भी प्रदान करेगा।

जोड़ों या गठिया के दर्द

जो लोग जोड़ों या गठिया के दर्द के कारण पीड़ित हैं उन्हें सरसों के तेल को जहा-जहा दर्द है उन क्षेत्रों पर रगड़ने से कुछ राहत मिल जाती है। यह आपके रक्त परिसंचरण को बढ़ाएगा। यह ओमेगा -3 फैटी एसिड के साथ भी भरा हुआ है जो इस दर्द का विरोधी है।

बैक्टीरिया से लड़ता है

आप यह भी भरोसा कर सकते हैं कि सरसों के तेल में एंटी-बैक्टीरियल प्रभाव होता है। इसमें जीवाणु रोधी एजेंट होते हैं जो बैक्टीरिया को हराने के लिए काम करते हैं। इसमें ग्लूकोसिनोलेट भी है जो खराब बैक्टीरिया और रोगाणुओं के विकास को रोकने में भी मदद करता है।

फंगी से लड़ता है

इस तेल में ऐंटिफंगल गुण भी होते हैं, जिसका अर्थ है कि यह फफूंद के कारण होने वाले स्पर्श रोग और लाल चकत्ते का इलाज कर सकता है। एक अध्ययन में, एलिल आइसोथियोसाइनेट नामक यौगिक के लिए फफूंद से लड़ने में अन्य तेलों के मुकाबले सरसों का तेल सबसे प्रभावी साबित हुआ।

दिमाग के लिए महत्वपूर्ण

आप संज्ञानात्मक कार्यों, स्मृति और यहां तक ​​कि अवसाद के इलाज में मदद करके अपने मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए इस तेल में फैटी एसिड पर भरोसा कर सकते हैं। बच्चों को परीक्षा के मौसम में यह तेल दिया जा सकता है ताकि उन्हें बेहतर याद रखने में मदद मिल सके।