लगातार चुम्बकीय क्षमता खो रहा हैं। धरती का चुम्बकीय क्षेत्र ,नासा ने की पुष्टि। सूर्य की घातक किरणों से होता नुकसान बना चिंता का विषय।
धरती का सुरक्षा कवच जो कि घातक सूर्य किरणों से हमारी रक्षा करता है, आज खतरे में है। अमेरिका की प्रतिष्टित अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस बात की पुष्टि की है। सूर्य की खतरनाक किरणों से धरती के निचले सतह का चुम्बकीय क्षेत्र अपनी चुम्बकीय क्षमता लगातार खो रहा है। नासा के मुताबिक चुम्बकीय क्षेत्र का लगातार कम होना दक्षिण अमेरिका और दक्षिण अटलांटिक समुद्र के बीच में कही कमजोर होता जा रहा है।
धरती के सुरक्षा कवच के लगातार कमजोर होने के कारण इसमें दरार आ गयी है। जो लगातार बढ़ती चली जा रही है। यदि इसी गति से चुम्बकीय शक्ति का हताश होता रहा तो वह दिन दूर नही जब ये सुरक्षा कवच दो हिस्सों में बट जाएगा।
खगोलविदों ने प्रति सेकंड बढ़ती इस दरार की प्रक्रिया को दक्षिण अटलांटिक विसंगति ( South Atlantic Anomaly ) कहा है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह दरार धरती के भीतर बढ़ती चली जा रही है। लेकिन इसका असर धरती की ऊपरी सतह पर भी साफ महसूस किया जा रहा है। इसका एक बुरा प्रभाव धरती के वातावरण में चुम्बकीय प्रभाव का लगातार कमजोर होना है। जोकि सूर्य से आ रही घातक किरणों को धरती की सतह पर आने से रोकने का काम करता है।
कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र से मतलब हैं कि सूर्य से आ रही खतरनाक विकिरणें धरती की सतह से नजदीक होती जा रही हैं। इसके अलावा कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र से कम्पास के कार्य मे बाधा और सैटेलाइट मिशन में भी दिक्कतें आने वाली हैं। हालांकि सीधे तौर पर इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है।
200 वर्षों में बनी दरार
वैज्ञानिकों के अनुसार, चुम्बकीय क्षेत्र के कमजोर होने के चलते धरती के सुरक्षा कवच में दरार आने के साथ ही यह कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र पूरे आर्कटिक की ओर फैल गया है।
मई में अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ने रिपोर्ट दी थी कि 200 वर्षों के दरमियान धरती के चुम्बकीय क्षेत्र ने अपनी चुम्बकीय क्षमता का 9 फीसदी खो दिया है।
सन 1970 से कवच के पतला होने की प्रक्रिया में तेजी आई हैं और यह 9 फीसदी कमजोर हो चुका है। हालांकि कवच का दो हिस्सों में बंटना अभी साबित नही किया जा सका है। लेकिन नासा ने इस कवच का लगातार पतला होने की पुष्टि की है, जोकि अत्यंत चिंता का विषय है।
सैटेलाइट मिशनों के घर पर खतरा, प्रोटोन कणों के बौछार की आशंका।
धरती के नजदीकी वातावरण पर इसका असर साफ दिख रहा है। जिसमें से एक बुरा प्रभाव सेटेलाइटस के घर पर भी है।यदि कोई सैटेलाइट कमजोर चुम्बकीय प्रभाव वाले इलाके से गुजरेगा तो उसे सूर्य से सीधे हो रही प्रोटोन कणों की बौछार का सामना करना होगा। इस तरह से सेटेलाइट के कम्प्यूटर पूरी तरह भी खराब हो सकते हैं।
सैटेलाइट की पावर कम करके ही बचा जा सकता हैं इस प्रभाव से।
नासा के अनुसार, प्रोटोन कणों की बौछार से होने वाले नुकसान से बचने के लिए प्रभावित इलाके में सैटेलाइट की पावर कम करनी होगी। ऐसा करने से सूर्य की खतरनाक किरणों से सेटेलाइट को बचाया जा सकेगा।
Government Job: 2670 पदों पर भर्ती, जानें आवेदन करने की तारीख
देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग सरकारी विभागों में भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए हैं जिसमें 10वीं पास से Graduate तक के विद्यार्थियों के लिए नौकरी करने का बहुत सुनहरा मौका है। यहां आपको बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), State Selection Board (SSB), Bharat Electronics Limited (BEL), South East Central Railway (SECR) के तहत 2670 पदों पर निकली भर्तियों की जानकारी दी जाएगी जिसके बारे में जानकर अपनी इच्छा के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।
BPSSC
बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC) ने Range Officer Of Forest के 43 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगा है। इन पदों पर उम्मीदवारों की Selection Written Examination और Physical Test के आधार पर की जाएगी। परीक्षा देने के इच्छुक उम्मीदवार bpssc.bih.nic.in website पर आवेदन कर सकते हैं। Selected उम्मीदवारों को वेतनमान के तौर पर 35,400-1,12,400 रुपए दिए जाएंगे। Online आवेदन की Last date 16 Sept. 2020 निर्धारित की गई है।
HAL में 2,000 Vacancies
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने Apprentice Visiting Faculty मेंमर के पदों पर Vacancy निकाली है जिसमें 2000 उम्मीदवार नियुक्त किए जाएंगे। इन पदों पर आवेदन की आखिरी तारीख 05 Sept. 2020 है।
State Selection Board (SSB)
State Selection Board, Odisha ने Junior Assistant Or Junior Stainographer के 136 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन किया है। इन पदों की अंतिम तिथि 31August कर दी गई है और इन पर आवेदन 32 वर्ष तक के उम्मीदवार ही कर सकते हैं।
BHARAT ELECTRONICS LIMITED (BEL)
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने Project Engineer के पदों पर भर्ती के लिए 60 Vacancy जारी की है जिसके लिए उम्मीदवारों की आयु 28 वर्ष तक होनी जरूरी है। आॅनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 26 August 2020 रखी गई है।
SOUTH EAST CENTRAL RAILWAY (SECR)
साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (SECR) के बिलासपुर मंडल ने ट्रेड अप्रेंटिस (Apprentice) के 432 पदों पर भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली है। रेलवे की इस भर्ती के तहत Stainographer, Fitter, Electrician, Wireman, Electronic Mechanic, RAC Machanic, Builder, Plumber, Carpainter, Turner समेत विभिन्न ट्रेडों में नियुक्तियां की जाएंगी। आवेदन के लिए न्युनतम आयु 15 साल और अधिकतम उम्र 24 वर्ष निर्धारित की गई है। उम्मीदवार 30 August तक आवेदन कर सकते हैं।
पैन कार्ड बनवाने के लिए अब किसी साइबर कैफे या कॉमन सर्विस सेंटर जाने की जरूरत नहीं रही । यदि आप नया पैन कार्ड बनवाना चाहते हैं तो इसे घर बैठे भी अप्लाई कर सकते हैं और अपना पैन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं ।
पैन कार्ड जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है क्योंकि बैंक में नया खाता खोलना हो , लोन लेना हो या इनकम टैक्स भरना हो ,आप से हर जगह पैन कार्ड की मांग की जाती है । और यदि पैन कार्ड नहीं है तो आपके काम लटक सकते हैं इसलिए लगभग सभी के लिए ही पैन कार्ड बनवाना अनिवार्य हो गया है ।
असल में पैन कार्ड में 10 डिजिट का एक unique नम्बर होता है जिसे इनकम टैक्स विभाग ( Income Tax Department ) जारी करता है ।
आईये जानें नए पैन कार्ड को अप्लाई करने से लेकर प्राप्त करने तक की प्रक्रिया क्या है –
3. होमपेज पर पहुंचकर आपको बाईं तरफ Instant Pan Through Aadhar का ऑप्शन नजर आएगा , इस पर क्लिक कीजिए ।
4. इसके बाद एक नया पेज आपके सामने खुल जायेगा , जहां आपको Get New Pan का एक ऑप्शन नजर आ रहा होगा , इस पर क्लिक कीजिए ।
5. अब नया पेज खुलेगा जिस पर आपसे आधार कार्ड का नम्बर भरने को कहा जायेगा , वहाँ आधार कार्ड का नम्बर भरकर ‘ I Confirm ‘ पर क्लिक कर दीजिए ।
6. आपके आधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर OTP आएगा , इसे साइट पर भरकर वेरिवाई कीजिये।
7. वेरिफिकेशन होने के तुरंत बाद ही आपको e-pan जारी कर दिया जाएगा।
8. e-pan में आपको pdf फॉर्मेट में पैन कार्ड की एक कॉपी मिलती है , जिसपर QR कोड होता है, इसी QR कोड में आवेदक या यूं कहें कि आपकी डेमोग्राफिक डिटेल व फोटो होती है ।
इस तरह आप मात्र 10 मिनट में नया पैन कार्ड बिना किसी असुविधा के आसानी से प्राप्त कर सकते हैं । इस नई सुविधा का लाभ उठाते हुए अब तक कुल 6.7 लाख लोगों ने नया पैन कार्ड प्राप्त किया है ।
यदि आप भी नया पैन कार्ड बनवाना चाहते हैं तो घर बैठे इस प्रक्रिया से अपना पैन कार्ड बनवा सकते हैं ।
World Humanitarian Day: मानवता एक ऐसा शब्द हैं, जिसका अर्थ बहुत ही गहरा है।कहा जाता हैं कि वह जिंदगी बेहद खूबसूरत होती है, जो दूसरों की मदद करते हुए बिताई जाए। दोस्तों Humanitarian भी ऐसे ही लोग हैं, जो बिना किसी भेदभाव के अपनी जान को जोखिम में डालकर दूसरों की निःस्वार्थ भावना से मदद करते हैं। वह अपनी जान की परवाह किए बिना की जान बचाते हैं।
कब मनाया जाता है ? मानवतावादी दिवस हर वर्ष 19 अगस्त को विश्व भर में मनाया जाता है।
कौन होते हैं मानवतावादी ?
एक सच्चा मानवतावादी वो है जो किसी दुखी व तड़पते हुए इंसान की मदद करे उसके दुःख दर्द में शामिल हों और उसके दुःख को दूर करने की पूरी कोशिश करे वो ही सच्चा Humanitarian है।इसमें डॉक्टर, नर्से, अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारी, पुलिस ऑफिसर, सरकारी कर्मचारी और वह संस्थाएं आती है जो दिन रात लोगों की मदद करने में समय लगाते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक 2020 में 168 मिलियन लोगों को Humanitarian Services और Protection की जरूरत है। मानवतावादी जरूरतमंदों लोगों को खाना, पानी, चिकित्सक सुविधा और घर मुहैया कराते है।
मानवतावादी जहाँ कही भी प्राकृतिक आपदा आती हैं जैसे- बाढ़़, भूकंप, आग लगना, व सूखा पड़ता है, वहां पहुँच कर पीड़ित लोगों की हर संभव मदद करते हैं।
उद्देश्य
इसका उद्देश्य दिन रात लोगों की मदद करने वाले लोगों को सम्मान देना हैं और उनको याद करना है जो मानवता की सेवा करते करते शहीद हो जाते हैं।
शुरुआत
इस दिन 19 अगस्त 2003 में इराक के बगदाद में स्थित कैनाल होटल पर हुए बॉम्ब अटैक को याद करते हुए भी मनाया जाता है। इस अटैक में इराक के Chief Humanitarian Sergio Vieria De Mello सहित 22 मानवतावादियों की मृत्यु हो गई थी। तो United Nation General Assembly ने इस दिन को मानवता की सेवा करते हुए शहीद हो जाने वाले लोगों को याद रखने के दिन के रूप में घोषित किया।
पहला World Humanitarian Day 2009 में मनाया गया था। हर साल इस दिन को एक Theme के साथ मनाया जाता है।
Theme 2020
इस वर्ष World Humanitarian Day RealLifeHeroes को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जा रहा है। जिन्होंने दूसरों की मदद करने में अपना सारा जीवन लगा दिया। जैसे- मदर टेरेसा, महात्मा गांधी, बिल गेट्स, अब्राहम लिंकन, नेल्सन मंडेला आदि।
इन्होंने अपना सारा जीवन गरीबों की मदद करने में और मानवता की सेवा करते हुए बिता दिया। मानवतावादी लोगों की जरुरत
जैसा की आप सभी को पता है, आज पूरी दुनिया में कोविड-19 महामारी से लड़ रही है। तो इस मुश्किल दौर में ही Humanitarian की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ गई है।
इस कार्य में बहुत सी संस्थाएं आगे आ रही है। जो जरूरतमंद लोगों की हर संभव तरीके से मदद कर रही हैं। इन्ही में से Organisation IFRC हैं।
आइए जानते हैं IFRC के बारे में
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस क्रीसेंट सोसायटी (IFRC) दुनिया की सबसे बड़ी संस्था है।जो बिना किसी भेदभाव से जरूरतमंदों की मदद करती है।
यह संस्था Covid-19 महामारी के समय में जरूरतमंद लोगों को खाना, पानी, चिकित्सक और जरूरी वस्तुएं उपलब्ध करा रही है।
यह organisation ब्लड डोनेशन कैंप लगाकर जरूरतमंद लोगों को रक्त सप्लाई कर रही है। प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित लोगों की मदद कर रही है। आज मानवतावादी कोविड-19 जैसे pandemic में जरूरतमंद महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षित स्थान प्रदान कर रहे हैं। गर्भवती महिलाओं की भी हर संभव तरीके से मदद की जा रही है।
संदेश
हर साल World Humanitarian Day सभी लोगों को यही संदेश देता हैं कि जरूरतमंद की हर सम्भव मदद करे। हर कोई मानवतावादी बन सकता है। बस जरूरत है मदद करने के लिए कदम बढ़ाने की।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) 2019 की परीक्षा में देश में तीसरा स्थान हासिल करने वाली प्रतिभा वर्मा का मानना है कि समाज और सुरक्षा में आज भी बेटियों के लिए बहुत बड़ी चुनौतियां हैं। बेशक हम कितने भी अच्छे विचारों के धनी क्यों न हों लेकिन एक बेटी या औरत को हर मुकाम पर चुनौती का सामना करना ही पड़ता है लेकिन अगर कोई मजबूत लक्ष्य है तो हमें मंजिल पर पहुंचने से कोई भी नहीं रोक सकता।
उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाली प्रतिभा वर्मा का IAS बनने का जुनून उसके दृढ़ संकल्प को पूर्ण रूप से ब्यान करता है। प्रतिभा ने पहले भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की परीक्षा पास की जिसके कारण उसे आयकर विभाग में सहायक आयुक्त की नौकरी मिली। फिर भी उसने IAS बनने के संकल्प को टूटने नहीं दिया। आखिरकार 2019 में उसने इस लक्ष्य को पूरा कर ही दिया। उसने वरीयता क्रम में तीसरा स्थान प्राप्त किया मगर फिर भी वे महिलाओं में सबसे अव्वल थी।
प्रतिभा ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि बेटियों के लिए यह संसार अभी भी मुश्किलों से भरा है लेकिन एक औरत को इसका सामना तो करना ही होगा। तभी तो बेटियां अपने लक्ष्य को हासिल कर सकेंगी।
अगर एक बेटी हिम्मत जुटा कर घर से निकल भी जाती है तो अपनी सुरक्षा के लिए वे अपने मन में डर हमेशा रखती है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई गांव में पूरा कर 2010 में उन्होंने सुलतानपुर छोड़ दिया। एक दशक घर परिवार से दूर रहकर किताबों और शिक्षा के मंदिरों में साधनारत रही। वर्ष 2018 में IAS की परीक्षा देने से पहले अनुभव के लिए प्रतिभा ने वोडाफोन की कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्य किया। 2018 में IRS के नाते सहायक आयुक्त Income Tax बनी। इस पद पर कार्य करते हुए उसने IAS की परीक्षा दी और देश में तीसरा स्थान हासिल किया जबकि महिला वर्ग में देश में पहले स्थान की रैंकर बनी।
MS Dhoni ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा, Suresh Raina का भी क्रिकेट से सन्यास का एलान || तालियों की गूंज से नम आँखो तक का सफर ।
MS Dhoni | MS Dhoni Retirement News | Dhoni Announcement
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिकेट के 15 साल के अपने कैरियर पर पर्दा डालते हुए 15 अगस्त की शाम को इंस्टाग्राम के अकाउंट पर इस बारे में लिखते हुए क्रिकेट को अलविदा कह दिया है ।
उन्होंने इंस्टाग्राम की पोस्ट में लिखा , ‘अब तक के आपके प्यार और सहयोग के लिए शुक्रिया । शाम 7:29 मिनट से मुझे रिटायर समझियेगा |
इसी के साथ ही भारतीय हरफनमौला सुरेश रैना ने भी इंस्टाग्राम के पोस्ट के जरिये अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास लेने की जानकारी दी है । रैना ने धोनी के ऐलान पर कहा कि इस समय में भी आपके साथ हूँ जिसके बाद से इंटरनेट पर सभी सुरेश रैना को धोनी का सच्चा साथी बता रहे हैं । भारत ने चाहे 2011 में वर्ल्ड कप का ख़िताब जीता या 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती , रैना और धोनी एक साथ ही खेले थे । दोनों को एक साथ 73 पारियों में खेलने का मौका मिला । दोनों क्रिकेटरों का शुरुआती सफर तालियों से शुरू ओर तालियों पर ही खत्म हुआ मगर इस सफर का अंत लाखों लोगों की आंखे नम कर गया ।
उनके लाखों फैन्स उनके इस एलान से बेहद भावुक हैं । एमएस धोनी ने भारतीय क्रिकेट दर्शकों को जश्न मनाने के कई अवसर दिए हैं । भारतीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों में उनका रिकॉर्ड खुद बोलता है । लगातार शानदार प्रदर्शन से फैन्स को धोनी से बहुत उम्मीदें थी ।
हालांकि धोनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनका यह ऐलान महज अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए ही है या नहीं मगर CSK ( Chennai Superkings / चेन्नई सुपरकिंग्स ) की तरफ से यह संकेत मिल रहे हैं कि धोनी व रैना दोनों ही फ्रेंचाइजी के लिए IPL के 2021 एडिशन तक बने रहेंगे ।
बता दें कि दोनों ही खिलाड़ी इस वक्त चेन्नई सुपरकिंग्स के कैम्प में चेन्नई में है जहां IPL के 13वें सीजन के लिए चिंदबरम स्टेडियम में प्रैक्टिस जारी है । IPL का 13वां सीजन 19 सितंबर से UAE में होने जा रहा है ।
रविवार की सुबह चेन्नई सुपरकिंग्स ( Chennai Super Kings ) ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें धोनी ट्रेनिंग से लौटते हुए सुरेश रैना को गले मिलते हुए नज़र आ रहे हैं । इसके साथ ही वीडियो में अन्य खिलाड़ी भी बस में बैठते हुए नज़र आ रहे हैं ।
दोनों क्रिकेटरों के इस सन्यास की घोषणा के बाद से ही देशभर से क्रिकेटरों , बड़ी हस्तियों से लेकर लाखों दर्शकों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आ रही है ।
टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने मांग की है कि धोनी के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के सम्मान में उनकी जर्सी नम्बर 7 को भी रिटायर कर दिया जाए । इससे पहले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के जर्सी नम्बर को भी रिटायर किया गया है ।
“World environment Day के अलावा इस दिन लगते हैं लाखों पेड़”
आज वैश्विक स्तर पर बहुत सी चिंताएं जन्म ले चुकी हैं। इनमें सबसे अधिक चिंता का विषय climate change है। दिन-ब-दिन हो रहे climate change के बहुत से कारण हैं। परंतु सबसे पहले आपको बता देंगे climate change होता क्या है?
किसी भी क्षेत्र के औसत मौसम में जब परिवर्तन आता है। उसे जलवायु परिवर्तन (climate change) कहा जाता है। इसके लिए natural और human दोनों पक्ष जिम्मेदार हैं। परंतु वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 93% मानवीय गतिविधियों द्वारा ही climate change हो रहा है। जिस में वनों की कटाई मुख्य भूमिका निभा रही है।
आखिर क्यों बढ़ रही है वनों की कटाई (deforestation)?प्रत्येक वर्ष 3.5 से 7 बिलियन तक वनोन्मूलन हो रहा है। यदि प्रतिदिन की बात करें तो लगभग 100000 एकड़ जंगलात को काटा जा रहा है। व्यापक पशुपालन की बात करें तो 80% deforestation इसी की देन है। शेष नुकसान सामग्री, आवास और विकास के लिए हो रहा है। जिसके बहुत भयंकर परिणाम सामने आ रहे हैं। फिर भी मनुष्य अंधाधुंध पेड़ों की कटाई कर रहा है।
आइए अब जानते हैं deforestation के दुष्प्रभावों के बारे में:-
बाढ़ में वृद्धि
वातावरण में Green house gases के प्रभाव का बढ़ना
स्वदेशी लोगों (indigenous tribals) के लिए निरंतर समस्याएं बढ़ रही है
वन्य जीवों एवं पौधों की प्रजातियों को खतरा
भू क्षरण (soil erosion) की समस्या बढ़ रही है। जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होने की वजह से फसलें कम हो रही है।
मरुस्थलीकरण (desertification) में वृद्धि
यह समस्याएं आज के लिए तो खतरा बनी ही हुई है। साथ ही साथ भविष्य के लिए भी जानलेवा सिद्ध होने वाली है। हम सब इसके लिए चिंतित अवश्य हैं। इसकी रोकथाम के लिए कदम कम ही उठा रहे हैं।
कैसे आ सकता है बदलाव?
बदलाव लाने की सोच तो सबके अंदर पनपती है। परंतु सही तरीका अपनाने से ही बदलाव आता है। जलवायु परिवर्तन से बचाव का सबसे आसान तरीका पेड़ लगाना (reforestation) है। इसके द्वारा ही भू क्षरण पर काबू पाया जा सकता है। वन्य जीवों व अन्य प्राणियों का संरक्षण भी इसी तरह ही संभव हो सकता है। पेड़ हमारी नदियों और झीलों के लिए “प्राकृतिक फिल्टर” की तरह सिद्ध होते हैं। पेड़ बारिश के पानी के धरती पर गिरने की गति को धीमा करते हैं। जल मार्ग में मिट्टी को भी नष्ट होने से पेड़ ही रोकते हैं। जिससे बाढ़ से होने वाली क्षति कम हो जाती है।
औसतन एक पेड़ द्वारा 260 पाउंड ऑक्सीजन छोड़ी जाती है। इसके तहत दो पेड़ों द्वारा चार सदस्यों के परिवार के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन दी जाती हैं। इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए।
हमारे ही देश की एक संस्था ऐसी है जो ऐसा सराहनीय कार्य कर रही है। 6 करोड लोगों द्वारा एक ही दिन में पौधे प्रत्येक वर्ष लगाए जाते हैं। यही नहीं बल्कि उनकी देखरेख का जिम्मा भी लेते हैं। इस संस्था से जुड़े सदस्य देश विदेश में पौधा रोपण करते हैं। जिससे वह धरती मां की रक्षा कर सकें।
वर्ष 2007 से लेकर 2018 तक इस संस्था द्वारा लगभग 40 करोड पौधे लगाए जा चुके हैं। यह संस्था पौधे लगाने में 3 World Records स्थापित कर चुकी है। यह संस्था हरियाणा राज्य के सिरसा जिला में स्थित है।
“डेरा सच्चा सौदा” नाम की संस्था द्वारा 15 अगस्त को प्रत्येक वर्ष पौधे लगाकर ही मनाया जाता है। इस दिन उनके गुरु “संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा” का जन्मदिन होता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनकी प्रेरणा पर चलते हुए मानवता भलाई के कार्य करने की इच्छा जागृत होती है। पौधारोपण के साथ-साथ खून दान, राशन दान, गरीबों को मकान बनाकर देना आदि कार्य करते हैं।
अगर इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति वातावरण के संरक्षण के लिए आगे आए। तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा
इस दिन का हमारे इतिहास में बड़ा महत्व है। सदियों से भारत अंग्रेजों की दासता में था। उनके अत्याचारों से हर कोई वाकिफ था। खुली हवा में सांस लेने की को बेचैन भारत में आजादी का पहला बिगुल 1857 में बजा। परंतु कुछ कारणों से हम गुलामी के बंधनों से मुक्त नहीं हो सके।
आपको बता दे वास्तव में आजादी का संघर्ष तब अधिक हुआ। जब बाल गंगाधर तिलक ने कहा कि स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। इसी बात से प्रभावित होकर ना जाने कितने वीरों ने अपनी आंखें बंद कर ली। ताकि आज यहां पर जन्म लेने वाला हर बच्चा आजाद भारत में आजाद आकाश के नीचे अपनी आंखें खोल सके। बहुत से वीरो ने अपने सिर पर कफन बांध कर देश की आजादी के लिए अपनी कुर्बानी दी और मंजिल एक दिन 15 अगस्त 1947 के रूप में सामने आ गई और भारत देश आजाद हुआ।
तभी से 15 अगस्त के दिन को स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है।
कैसे मनाया जा रहा है इस बार स्वतंत्रता दिवस
इस बार 15 अगस्त 2020 शनिवार को लाल किले की प्राचीर से नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे। हर साल 15 अगस्त के दिन लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के द्वारा देश को संबोधित किया जाता है। इस साल 15 अगस्त के दिन को अलग तरीके से मनाया जा रहा है। इस वर्ष कोविड-19 के चलते बच्चों व बुजुर्गो को इस कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जा रहा है।
वीरों के त्याग की याद दिलाता हैं
स्वतंत्रता दिवस का यह दिन हमें वीरों के त्याग की याद दिलाता है। देश के वीरों की कुर्बानी व बहुत संघर्ष के बाद मिली यह आजादी भारत देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, गोपाल कृष्ण गोखले, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक आदि के बलिदान के कारण ही हम आजाद भारत देश में सांस ले पा रहे हैं।
स्वतंत्रता दिवस का महत्व
भारत में स्थित दिल्ली का लाल किला स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक है। यहां सबसे पहले 15 अगस्त 1947 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने झंडा फहराया था। यह परंपरा आज तक चली आ रही है। इस दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले के प्राचीर पर तिरंगा फहराते हैं व देश को संबोधित करते हैं।
उद्देश्य
भारत देश के नागरिक होने के नाते स्वतंत्रता का ना तो अपने आप पर दुरुपयोग करें और ना ही दूसरों को करने दे। आपस में सभी एकता व भाईचारे से रहे। लड़ाई झगड़ों से बचे। हमें इस दिन को अच्छे नेक कार्य करके मनाना चाहिए और देश को आगे बढ़ाना चाहिए। रिश्वत, जमाखोरी व कालाबाजारी को देश से समाप्त करें।
क्या सही मायनों में हम आज भी आजाद है
वैसे कहने में तो हम स्वतंत्र देश में रहते हैं। हम दिखाते भी कुछ ऐसा ही हैं कि हम खुले विचारों वाले, आजाद सोच व खुले दिल वाले इंसान हैं लेकिन जब हम हकीकत पर गौर करें तो नजारा देखने में कुछ और ही दिखाई पड़ता है।
यह बात सुनने में बहुत कड़वी जरूर लग रही होगी। परंतु यह सत्य है। जहां आज हम 74वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं इसमें बहुत कुछ परतंत्र भी है। इतने वर्षों की आजादी के बाद भी हम आज वास्तव में आजाद नहीं है। कहने – सुनने में तो हम आजाद दिख सकते हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं है।
आज आप भारत के किसी भी कोने में चले जाएं। कहीं ना कहीं इस बात की सत्यता को जरूर परखेंगे कि जो जैसा दिखता हैं, वास्तव में वह वैसा नहीं होता। फिर चाहे वह नेता, राजनेता, हमारे रिश्तेदार, सगे-संबंधी या घर परिवार कोई भी क्यों ना हो।
इस बात में बिल्कुल संदेह नहीं कि हमारे देश के वीर क्रांतिकारीयो और स्वतंत्रता सेनानियों के कारण हम खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। लेकिन केवल घूमने-फिरने और खुली हवा में सांस लेने से ही हमें संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
यह हमारा फर्ज बनता है कि जो सपना हमारे देश के वीर जवानों, स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा उस सपने को हम सभी मिलकर साकार करें और भारत देश को सही मायनों में आजाद कराएं।
आइए जानते हैं उन कारणों के बारे में जिसके कारण हमारी स्वतंत्रता का मतलब अधूरा है। अगर इन कारणों व कमियों को सुधारा जाए तो हम सच में आजादी के हकदार बनेंगे।
नशो से आजादी
हमारे भारत देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। हर कोई अपने- अपने धर्म को मानता है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि धर्मों की बातों को लोग नहीं मानते। क्योंकि हर धर्म में नशा करने की मनाही है। नशा बर्बादी का घर हैं।नशे के कारण घरो के घर बर्बाद हो जाते हैं। गरीबी का एक कारण नशा भी है। अगर देश को समृद्ध और शक्तिशाली बनाना है, तो सरकार को सभी नशा पर रोक लगानी चाहिए। इसको रोकने के लिए सख्त कानून लागू होने चाहिए। तभी देश की तरक्की हो सकती है।
पाखंडवाद से आजादी
आज के समय में लोग धर्म को कम मानते हैं। लेकिन दिखावा ज्यादा करते हैं। धार्मिक स्थान बनाना गलत नहीं है। परंतु जिस देश में शिक्षा से अधिक धार्मिक स्थानों को बनाने में जोर दिया जाता हो।वहां विकास डावाडोल स्थिति में ही रहता है। धर्म को मानना गलत नहीं है। लेकिन धर्म की बात भी माननी जरूरी है। पाखंडवाद को छोड़कर शिक्षा प्रणाली पर ध्यान देना जरूरी है। मानसिक गुलामी से आजादी
हमारा देश भले ही 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। लेकिन भारत में बहुत से लोग अभी भी मानसिक रूप से गुलाम है। हमारी भारतीय संस्कृति व परंपरा को छोड़कर लोग आज पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे है। यह मानसिक गुलामी नहीं तो क्या है। जब तक हम वेस्टर्न कल्चर को अपनाते रहेंगे। तब तक हम अपने देश व अपने आप को आजाद नहीं समझ सकते हैं।
रिश्वतखोरी से आजादी
आज भारत में चंद रुपयों के लिए लोग अपना जमीर तक बेच देते हैं। भ्रष्टाचार को लेकर भारत की स्थिति बहुत खराब है। यहां बहुत से लोग रिश्वत देकर कुछ भी काम करवा सकते हैं। जब तक देश में रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। तब तक भारत तरक्की नहीं कर सकता। इसको रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने व सख्त से सख्त कानून लागू करने की जरूरत है।
अगर हम सभी देशवासी मिलकर इन कमियों व कारणों पर विचार करें और इनमें सुधार लाए। तो एक दिन सच में हम देशवासी बहुमूल्य आजादी के हकदार बनेंगे और वीरों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
आखिर में सभी को इस 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकानाएं। जैसा कि आप सभी को पता है कि Covid-19 चल रहा है। तो उसको ध्यान में रखते हुए और सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए इस स्वतंत्रता दिवस को घर पर रहकर ही मनाए। क्योंकि हमें अपनी सुरक्षा के साथ समाज व देश की सुरक्षा के बारे में सोचकर देशभक्ति का परिचय देना है। अपने लोकतंत्र के इस सर्वश्रेष्ठ त्यौहार को उपरोक्त बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य में एक वास्तविक स्वतंत्रता दिवस को मनाने के हकदार बने।
आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की रिलीज का इंतजार कर रहे फैंस के लिए एक बुरी ख़बर सामने आ रही है।
फिल्म मेकर्स ने इस बात का ऐलान किया हैं, कि अब दर्शकों को एक साल तक का इंतजार और करना पड़ सकता है। फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने Social Media पर फिल्म की नई रिलीज डेट का ऐलान किया है। क्रिसमस पर रिलीज होने वाली इस फिल्म को अब एक और साल रिलीज होने का इंतजार करना होगा। लेकिन ये फिल्म अगले साल क्रिसमस के मौके पर ही रिलीज होगी। फिल्म की रिलीज डेट पोस्टपोन करने की यहीं वजह है, कि मेकर्स नहीं चाहते कि फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो।
COVID-19 Lockdown के बाद आमिर खान ने शूटिंग शुरू कर दी है। जिसमें उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तुर्की में नजर आ रही है। फिल्म को लेकर आमिर ने कोलकाता से लेकर पंजाब, राजस्थान, गुजरात जैसे कई राज्यों में शूटिंग की तो वहीं अब विदेश के शूटिंग शेड्यूल को पूरा करने में लग गए हैं।
‘लाल सिंह चड्ढा’ फिल्म रॉबर्ट जेमेकिस द्वारा निर्देशित 1994 की फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की Official Hindi रीमेक है। जिसमें लीड रोल में हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम हैंक्स नजर आए थे। वहीं ‘लाल सिंह चड्ढा’ का निर्देशन अद्वैत चंदन कर रहे हैं। आमिर खान और उनकी पत्नी किरण राव फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म में करीना के साथ आमिर की जोड़ी बनी है। इससे पहले ये दोनों ‘3 Idiots’ और ‘Talaash’ फिल्म में साथ काम कर चुके हैं।
ये कहानी है आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा छेत्र की, विजयवाड़ा का एक ऐसा होटल जो कोरोना देखभाल केंद्र में परिवर्तित किया गया था, उसमें रविवार सुबह भीषण आग लग गई।
कोविड केंद्र में 5 बजकर 9 मिनट पर आग लगी , आग लगने के महज 4 मिनट बाद ही दमकलकर्मी घटना स्थल पर पहुच गए।विभाग के पांच विशेष दमकलकर्मियों ने पूरा मामला सम्भाला। इसके पश्चात विजयवाड़ा के पुलिस आयुक्त बी श्री निवासुलु आकर दमकलकर्मियों के साथ काम मे जुट गए।
आंध्रप्रदेश आपदामोचन और अग्निशमन सेवा कर्मियों ने 32 लोगों की जान को बचाया।
कोरोना वायरस देखभाल केंद्र के तीसरे तल से मरीज को अपने कंधे पर नीचे लाता हुआ दमकलकर्मी अपने आंसू नहीं रोक पाया।दमकलकर्मी ने बहुत हिम्मत कर के 39 लोगों की टीम के सहयोग से सभी मरीज़ो की जान बचायी, यह कोई छोटा काम नहीं था, वे घातक विषाणुओं से पीड़ित (महामारी के शिकार हुए) लोगों को बचा रहे थे।
किसी भी क़ीमत पर दमकल्मर्मी ने अपने मिशन को पूरा कर सभी की जान बचायी।दमकलकर्मी ने भावुक होते हुए कहा, “आज मुझे यह काम कर के काफ़ी सन्तोष मिला हैं,वही दूसरी तरफ मुझे इस घातक बीमारी का खतरा सता रहा है, क्योंकि मेरे भी घर परिवार है”।
श्रीनवासुलु ने कहा, अग्निशमन कर्मियों ने बहुत ही शानदार तरीके से काम को पूरा किया है, यह काम उन्होंने महज 3 घण्टे में पूरा किया।उन्होंने न केवल वहाँ फँसे हुए लोगो को कंधे के सहारे बाहर निकाला, बल्कि मृतकों के शरीरों को भी बाहर निकाला।इतनी खतरनाक स्थिति को इन्होंने बहुत शानदार तरीके से अन्जाम दिया।
आंध्रप्रदेश आपदामोचन और अग्निशमन सेवा विभाग के महानिदेशक मोहम्मद अहसन रजा ने जवानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन्हें पुरुस्कृत किया जाएगा।उन्होंने कहा कि परिस्थिति बहुत ही भयंकर थी, लेकिन इन्होंने काम को बहुत अच्छे से अंजाम दिया।
इसके साथ साथ इन सब के कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री वाइ एस. जगनमोहन रेड्डी, ग्रह मंत्री एम सुचरिता और अन्य मंत्रियों ने भी काफी प्रशंसा की हैं।