Author

Exclusive Samachar

Browsing

इन दिनों कोरोना वायरस (COVID-19) के चलते आईपीएल इस बार UAE में खेला जाएगा, भारत में नहीं। अब तक आईपीएल के 12 सीजन खेले जा चुके हैं। हर बार IPL के कुछ ऐसे रिकॉर्ड बने हैं जिनको तोड़ पाना असम्भव है और इस बार भी इसके रिकॉर्ड को तोड़ पाना बहुत मुश्किल लग रहा है क्योंकि IPL के कुछ अनोखे रिकॉर्ड बन चुके हैं।

Most Dot Balls in IPL History

IPL में इतिहास में सबसे ज्यादा डॉट गेंद फेंकने का रिकॉर्ड हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) के नाम है। उसने अब तक IPL के इतिहास में 562.2 ओवर फेंके हैं और 1,249 गेंद ऐसी फेंकी हैं जिससे बल्लेबाज का रन बना पाना बहुत मुश्किल है। हरभजन सिंह ने IPL में 160 मैच में 150 विकेट लेने में सफलता पाई है जिसके कारण उनकी Economy 7.05 की रही है।

Most Catch in IPL History

IPL History में सबसे ज्यादा कैच लेने का रिकॉर्ड सुरेश रैना (Suresh Raina) के नाम है। Raina ने अबतक कुल 102 कैच (Catch) किए हैं और 193 मैच खेले हैं। सबसे रौच्य बात ये है कि इस बार भी CSK की ओर से रैना आईपीएल (IPL) में खेलते हुए नजर आएंगे। रैना सीएसके (CSK) के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी हैं जिन्हें मिस्टर आईपीएल (Mr IPL) भी कहा जाता है।

Most Successful Team in IPL History

IPL History में सबसे शानदार रिकॉर्ड बनाने वाली टीम Chennai Super Kings की है। CSK ने अब तक IPL के 12 सीजन में से 10 सीजन में भाग लिया जिसमें 8 सीजन में वो फाइनल में पहुंची है और वहीं IPL के हर सीजन में प्ले अॉफ में पहुंची है। ये एक ऐसी टीम है जिसमें आईपीएल के इतिहास में 3 बार खिताब CSK ने ही जीता है।

Most Runs In One Over in IPL History

IPL 2011 में Chris Gayle ने कोच्चि टस्कर्स के गेंदबाज Prasanth Parameswaran की एक ओवर में 37 रन बनाए और Gayle ने 3 चौके और 4 छक्के जमाए थे जिसमें एक No Ball भी शामिल थी।  Parameswaran के द्वारा बनाया ये रिकॉर्ड भी टूटना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।

Players With Most Ducks in IPL History    

IPL History में सबसे ज्यादा बार शून्य (0) पर आउट होने का रिकॉर्ड हरभजन सिंह भज्जी के नाम है। भज्जी अब तक 13 बार बिना कोई रन बनाए आउट हो चुके है। साल 2008 में वह Mumbai Indians की टीम के साथ जुड़े थे लेकिन अब वे CSK की ओर से खेलते हुए नजर आएंगे। हरभजन सिंह के अलावा पार्थिक पटेल भी 13 बार शून्य पर आउट हो चुके हैं। वहीं Rohit Sharma IPL में 12 बार शून्य पर आउट हुए हैं।

Batsman with Most Runs in a Single Season of IPL     

साल 2016 के IPL Season में कोहली ने 973 रन बनाए हैं। किसी बल्लेबाज के द्वारा बनाया गया यह रिकॉर्ड तोड पाना भी असंभव नजर आ रहा है।

समस्त संसार में भारतीय संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है। भारत त्योहारों का देश है। यहां हर त्यौहार का बड़ा महत्व हैं, व यहां हर त्यौहार को बड़े प्यार व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इन्हीं त्योहारों में से एक जन्माष्टमी का त्योहार है। यह हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन को लोग भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रुप में मनाते हैं। इस त्यौहार को रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। लोग इस त्यौहार को पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के इस पर्व को न केवल भारत में अपितु विदेशों में रहने वाले भारतीय भी पूरे उत्साह से मनाते हैं।

happy janmashtami - Exclusive Samachar

क्यों मनाते हैं जन्माष्टमी 

श्री कृष्ण  देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान थे। मथुरा में एक राजा हुआ करता था। जिसका नाम कंस था। जो बहुत ही अत्याचारी था। कंस के अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे।
 फिर एक दिन अचानक आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन की आठवीं संतान उसका वध करेगी। यह सब सुनकर कंस ने अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को काल कोठरी में बंद कर दिया।

कंस ने  एक-एक करके देवकी के 7 बच्चों का वध कर दिया। जब श्री कृष्ण को माता देवकी ने जन्म दिया। तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि श्री कृष्ण को गोकुल धाम माता यशोदा व नंद बाबा के घर पहुंचा आए। जहां वह कंस मामा से सुरक्षित रह सकेगा।

श्री कृष्ण का पालन पोषण यशोदा माता व नंद बाबा की देखरेख में हुआ और तभी से उनके जन्म की खुशी में हर वर्ष जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

अगर हम शास्त्रों की मानें तो भगवान श्री कृष्ण रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी के दिन पैदा हुए थे। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा वृष राशि वृष राशि और सिंह राशि में प्रवेश किया हुआ था। ऐसे में इस कॉल पर श्री कृष्ण के जन्म की खुशी को मनाया जाता है। इस दिन श्री कृष्ण भक्त भगवान के लिए भजन गाते हैं। कृष्ण को माखन मिश्री का भोग लगाया जाता हैं और बाद में इसी प्रसाद को भक्तों में बांटा जाता है।

कब है जन्माष्टमी

श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर हर बार की तरह इस बार भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि जन्माष्टमी कब है। लोग गूगल (Google) पर सर्च कर रहे हैं कि आखिर जन्माष्टमी कब है? आपको बता दें, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह पावन त्यौहार हर बार की तरह इस बार भी 2 दिन पड़ रहा है। गृहस्थ लोगों के लिए 11 अगस्त का दिन व साधु- संतों के लिए 12 अगस्त का दिन शुभ माना जा रहा है। हालांकि कई बार की तरह इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ नहीं पढ़ रहे हैं।

जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां

हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों को खास तौर पर सजाया व संवारा जाता है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों में पहले की तरह शायद रौनक देखने नहीं मिल पाएगे। वही लोग इस बार घर पर कृष्ण जन्माष्टमी को अलग अंदाज से मनाने की तैयारियो में जुटे हैं। 
जन्माष्टमी पर पूरे दिन व्रत रखने का प्रावधान है।  जन्माष्टमी पर लोग 12:00 बजे तक व्रत रखते हैं। मंदिरों में विशेष रुप से झांकियों को सजाया जाता है। कृष्ण जी को झूला झुलाया जाता है। रासलीला का भी आयोजन किया जाता है।

दही-हांडी प्रतियोगिता

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को हर जगह अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। कहीं-कहीं तो दही हांडी व मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाता है। दही हांडी प्रतियोगिता में बच्चे बाल गोविंदा बन कर भाग लेते हैं। छाछ ,दही व मक्खन से भरी मटकी को रस्सी की सहायता से ऊंचाई में लटका दिया जाता है। बाल गोविंदा pyramid बनाकर मटकी फोड़ने का प्रयास करते हैं।  आखिर में मटकी फोड़ प्रतियोगिता के विजेता को इनाम देकर सम्मानित किया जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का प्रावधान है। ज्यादातर सभी लोग इस दिन व्रत रखते हैं। लेकिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखना चाहिए। भगवान कभी किसी को भूखा रहने के लिए नहीं कहते। इसलिए अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखना चाहिए। सारा दिन व्रत में कुछ ना खाने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए भगवान श्री कृष्ण जी के संदेशों को अपने जीवन में अपनाना जरूरी है। यही सही मायनों में त्यौहार मनाने का उद्देश्य है।

मोटापा एक ऐसी बीमारी है, जो किसी  को भी हो सकती हैं, फिर चाहे वो स्त्री, पुरूष या फिर बच्चा हो! 

मोटापे के कारण न केवल इंसान की सुंदरता नष्ट होती है, बल्कि कई बार उसे समाज में हंसी का पात्र बनना पड़ता हैं। अधिक मोटे इंसान के शरीर की ना केवल चर्बी ही बढ़ती है, बल्कि उसके शरीर का विकास भी नहीं हो पाता। मोटा इंसान कम age में भी ज्यादा उम्र का लगता है।  

हमारी बॉडी में सबसे ज्यादा और सबसे पहले चर्बी पेट और कमर  पर ही जमा होती है और पेट की चर्बी होने के कारण body की internal activity slow हो जाती हैं, जिससे  कई तरह की बीमारियाँ होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। जैसे -दिल संबंधी, blood pressure, Gas और Diabetes आदि।
👉चर्बी शरीर के लिए जरूरी होती हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा यह हानिकारक होती हैं।चर्बी शरीर में cell बनाने के लिए जरूरी होती हैं। सामान्य शरीर के लिए प्रतिदिन 60 gm चर्बी जरूरी होती हैं।

मोटापे के कारण :

  • खान-पान सही न होना ।
  • ज्यादा देर तक बैठकर काम करना।
  • व्यायाम न करना।
  • परिश्रम न करना।
  • पूरी नींद न लेना।
  • Due to metabolism
  • रोग व दवाई के कारण।
  • कई बार मोटापा genetic भी होता हैं। अगर परिवार  में सभी लोग मोटे हैं, तो आने वाली संतान भी मोटी हो सकती हैं।

चर्बी बढ़ने का कारण खान-पान

आजकल ज्यादातर लोग green vegetables को छोड़कर fast food की तरफ ज्यादा  भागते है। जो मोटापा  बढ़ाने का मुख्य कारण बनता है।ज्यादा मात्रा में व असमय बार -बार भोजन करना चर्बी को बढ़ावा देता हैं। अक्सर मिठाई व अधिक सूखे, मसालेदार और तेल खाद्य पदार्थो  का बड़ी मात्रा में सेवन करने से यह पाचन तंत्र और वजन बढ़ाने को प्रभावित करता हैं, जिस से चर्बी बढ़ती हैं। 

लगातार बैठकर काम करना 

यह भी चर्बी बढ़ने का एक मुख्य कारण है। अक्सर इंसान सारा-सारा दिन office में बैठकर काम करते रहते हैं, जिस से उनका शारीरिक परिश्रम नहीं हो पाता और मोटापा बढ़ता हैं। 
व्यायाम  न करना

हर समय bed पर पड़े रहना, आपका वजन घटाने के लक्ष्य के लिए किसी भी तरीके से अच्छा नहीं हैं, और exercise न करना भी मोटापा बढ़ने के मुख्य कारण में से एक है। मनुष्य को अपना शरीर स्वस्थ रखने के लिए exercise करना बहुत जरूरी हैं।

परिश्रम न करना

दिन भर आराम करना व कोई काम न करना सिर्फ खाते रहना जिस से खाना हज़म नहीं होता, और वह एक ही जगह पड़ा रहता है, और digest नहीं हो पाता। तब शरीर में fat बनता है और चर्बी बढ़ने लगती है।

पूरी नींद न लेना

पूरी मात्रा में नींद न लेना या आवश्यकता से अधिक मात्रा में नींद लेना इंसान को मोटापे की तरफ ले जाता हैं। अगर मनुष्य 7-8 घंटे की नींद ना ले तो उसकी calories अच्छे  से burn नहीं हो पाती।

Due to Metabolism 

हर व्यक्ति में मेटाबोलिज्म दो तरीको से काम करता है। कुछ का metabolism  कुशल और  तेजी से काम करने वाला होता है। जो फैट को जमा नहीं होने देता।जबकि  कुछ का मेटाबोलिज्म धीमी गति से काम करने वाला होता हैं, जो वजन बढ़ाने की ओर ले जाता है, जिस से मोटापा बढ़ता है।

रोग व दवाई के कारण

कई बार कोई इंसान एक निश्चित रोग से पीड़ित होता हैं, जिसका बुरा प्रभाव मोटापे को बढ़ावा देता हैं। कुछ दवाइयाँ भी मोटापा बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभाती हैं।

आइए जानते हैं मोटापे को कम कैसे करे..?

Proper Nutrients और सही exercise के तालमेल  से fat burning अच्छे से की जा सकती हैं।

आज हम आप को कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताएंगे जिस के लगातार अभ्यास से तेजी से वजन घटने लगता हैं :-

सूर्य नमस्कार

यह एक ऐसा आसन है, जिसे अगर सही तरीके से किया जाए तो किसी दूसरे आसन को करने की जरूरत नहीं पड़ती। सूर्य नमस्कार आसन में सूर्य देव को नमस्कार किया जाता है। नियमित तौर पर सूर्य नमस्कार आसन करने से शरीर स्वस्थ व मन शांत रहता हैं। इसके अलावा इस को करने से पेट की अतिरिक्त चर्बी भी धीरे-धीरे कम हो जाती हैं।

पश्चिमोतानासन –

पश्चिमोतानासन बैठ कर किया जाने वाला आसन है। पेट बढ़े होने के कारण यह अच्छे से नहीं हो पाता। परंतु जितना हो सके करने का प्रयत्न करना चाहिए।इस आसन के result जल्दी ही आने लगते है और आपके पेट पर जमा extra fat कम होने लगता हैं। 

बालासन –

यह आसन आप बहुत Easily कर सकते हैं। इस आसन को करने से हमारे पेट की चर्बी अत्यधिक कम होती चली जाती हैं।

नौकासन –

नौकासन आसन का सबसे अधिक प्रभाव पाचन तंत्र पर होता है। इस आसन को प्रतिदिन करने से पेट से सम्बंधित सभी बीमारियाँ ठीक होने लगती है, और साथ ही पेट का extra fat भी कम होने लगता है। यदि आप पेट के लिए कोई ऐसा आसन चाहते है, जो पेट की चर्बी के साथ-साथ पाचन तंत्र भी ठीक करें तो वह नौकासन है। 

कपाल भाति प्राणायाम –

कपाल भाति प्राणायाम शरीर का वजन कम करने के लिए सबसे अधिक प्रभावशाली सिद्ध हुआ है। कपाल भाति से शरीर में नई उर्जा का संचार होता है। पूरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। वर्तमान समय में कुछ शोधकर्ताओं द्वारा तो यह दावा भी किया गया है कि कपालभाती प्राणायाम से शरीर की 70 से 80% बिमारियों को ठीक किया जा सकता है। किन्तु इसमें कोई दो राय नहीं कि पेट की चर्बी कम करने में कपाल भाति प्राणायाम से अधिक प्रभावशाली कोई और दूसरा योगासन नहीं है।

VVIP TREE || VVIP BODHI TREE || VVIP TREE IN INDIA 

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एवं विदिशा के बीचों-बीच सलामतपुर की पहाड़ी पर लगा हैं – बोधि वृक्ष! जिसकी सुरक्षा के लिए दिन रात होमगार्डो की तैनाती की गई है।

आप यह सुनकर चोंक गए होंगे मगर यह सच है। दरअसल यह VVIP Tree जिसकी यहां बात की जा रही है, करीब आठ साल पहले 21 सितम्बर 2012 को श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे एवं भूटान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जिग्मी योजर थिंगले द्वारा एक पौधे के रूप में रोपित किया गया था। यह वही बोधि वृक्ष की टहनी है, जिसके नीचे बैठकर गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई थी।

बौद्ध धर्म में खास महत्व रखता है- बोधि वृक्ष

यह वृक्ष गौतम बुद्ध की धरोहर है। इसलिए बौद्ध धर्म के लिए इसका खास महत्व है। इसी के चलते जिस पहाड़ी पर यह वृक्ष रोपित है, उस पूरी पहाड़ी को बौद्ध विश्वविद्यालय के लिए आवंटित किया गया है, एवं पूरा क्षेत्र ही बोद्धिस्ट सर्कल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। बौद्ध अनुयायियों के लिए यह वृक्ष श्रद्धा एवं आस्था का केंद्र है।

सुरक्षा एवं रख-रखाव के पूरे प्रबन्ध

आप को बता दें, 15 फीट ऊंची जालियों से घिरे इस वृक्ष की सुरक्षा में कोई कमी नही छोड़ी गई है। 4 होमगार्ड सुरक्षा की दृष्टि से यहां पर दिन-रात पहरा देते हैं। इस वृक्ष के रख-रखाव पर हर साल लगभग 15 लाख रुपये का खर्च होता है । 

वृक्ष तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता भी बनाया गया है। जोकि भोपाल-विदिशा हाइवे से लेकर पहाड़ी तक का है। सिंचाई के लिए भी स्पेशल इंतज़ाम किए गए हैं। सांची नगरपालिका ने पानी के टैंकर सिंचाई व्यवस्था के लिए लगाए हैं। किसी भी प्रकार की बीमारी से बचाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी हर हफ्ते इस वृक्ष की सेहत जांचते है। यह सब कार्य जिला कलेक्टर की निगरानी में सम्पन्न किये जाते है। 

यूनिवर्सिटी पहाड़ी पर लगाया गया यह वृक्ष, लेकिन यूनिवर्सिटी निर्माण अभी भी बाकी हैं। 
 राज्य के पेड़ के रख-रखाव में लगते प्रतिवर्ष 15 लाख, थोड़े से कर्ज की वजह से खुदकुशी कर चुके है राज्य में 51 किसान। 

महिंद्रा राजपक्षे इस पहाड़ी पर यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखने आये थे। तब उन्होंने इस बोधि वृक्ष को रोपित किया। जिसके बाद से इस वृक्ष पर लाखों रुपये लगाए जा रहे है। सुरक्षा, सिंचाई से लेकर कीटों एवं बीमारी से बचाव तक की पूरी व्यवस्था की गई है। मगर यूनिवर्सिटी के निर्माण की शुरुआत भी अभी बाकी है। 

जिस यूनिवर्सिटी के नाम पर इस वृक्ष को रोपित किया गया, 5 साल बाद इसकी चारदिवारी भी टूट गयी है। यूनिवर्सिटी को लगभग 20 लाख किराए पर एक निजी भवन में चलाया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर इसी राज्य के करीब 51 किसान थोड़े से कर्ज की वजह से खुदखुशी कर चुके हैं।

इस बार रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास के आखिरी सोमवार यानी 3 अगस्त को आ रहा है । प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के अटूट रिश्ते को ओर अधिक प्यार व सत्कार मिलता है एवं इसे रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है । 

राखी बांधने का सही तरीका

थाली की सजावट करें ओर उसमें चंदन ,रोली , अक्षत , दही , राखी ओर मिठाई रख लें । थाली में घी का दीपक भी जलाकर रखें । राखी की थाली परमात्मा को समर्पित करके प्रेम-प्यार बना रहने की अरदास करें । 

इसके पश्चात अपने भैया को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करवाकर बैठाएं । माथे पर तिलक लगाएं , राखी बांधे ,आरती करें व मुँह मीठा करवाएं । राखी बांधते समय भाई व बहन का सिर ढका हो तो बहुत अच्छा है । इसके पश्चात घर परिवार के बुजुर्गों का आशिर्वाद लें ।

Raksha Bandhan Puja Vidhi Subh Muhurat - Exclusive Samachar

जानें रक्षाबंधन 2020 का शुभ महूर्त

इस रक्षाबंधन पर भद्रायोग सुबह के 9.30 बजे ही समाप्त हो जाने वाला है जिससे 3 अगस्त को पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है । 

सबसे अधिक शुभ समय या शुभ महूर्त दोपहर 01.48 बजे से लेकर 04.29 बजे तक रहेगा । इसके अलावा दिन का दूसरा शुभ महूर्त 07.10 बजे से लेकर 09.17 बजे तक है ।

क्या कहती है त्योहार के पीछे की धार्मिक मान्यता? 

रक्षाबंधन के त्योहार से एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है जिसके आधार पर यह त्योहार आज तक चला आ रहा है । धार्मिक मान्यता के अनुसार , एक बार देवताओं व असुरों के बीच युद्ध छिड़ गया था जिसमे देवताओं को अपनी हार होना समझ मे आ रहा था । 

तब इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने देवताओं की कलाईयों पर रक्षा-सूत्र धागा बाँधा ओर देवताओं की विजय हुई । ऐसी मान्यता है कि यह विधान श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन ही हुआ था जिस कारण आज भी यह त्योहार इसी नियत दिन को मनाया जाता है ।

इसी तरह एक ओर धार्मिक मान्यता भी इस त्योहार से जोड़कर देखी जाती है । कहा जाता है कि शिशुपाल राजा का वध करते हुए श्री कृष्ण के हाथ से खून बहने लगा तो द्रोपदी ने उसी समय साड़ी के पल्लू से कपड़े का टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण के हाथ पर बांध दिया । ओर श्री कृष्ण तब से द्रोपदी को अपनी बहन मानने लगे । 

raksha bandhan - Exclusive Samachar

सालों पश्चात जब पांडव द्रोपदी को जुए में  हार गए ओर भरी सभा में दुर्योधन ने द्रोपदी का चीरहरण करना चाहा , तो भगवान श्री कृष्ण ने भाई का फर्ज निभाते हुए द्रोपदी की लाज रखी व चीरहरण से बचा लिया ।

वीडियो कॉलिंग व ऑडियो कॉलिंग के जरिये  भी मनाया जाएगा 2020 का रक्षाबंधन ।

कोरोना महाबीमारी के चलते जो भाई-बहन एक दूसरे से नही मिल पाएंगे वे वीडियो कॉलिंग व फोन पर बातचीत करके अपना त्योहार मनाएंगे |

यदि आप भी कोरोना के चलते ऐसी स्थिति में हैं तो पोस्ट ऑफिस की सहायता से राखी भेज सकते हैं व निराश होने की जरूरत नही हैं । समय के साथ बदलाव प्रकृति का नियम है और इसे हमें भी इस रक्षाबंधन स्वीकार करना होगा । 

वीडियो व आडियो कॉलिंग के माध्यम से एक दूसरे से बात करें व दुआएं करें । प्रेम-प्यार का यह रिश्ता भावना व श्रद्धा का प्रतीक है जिसे आप एक दूसरे से दूर रहकर भी मना सकते है व कोरोना जैसी बीमारी से बचे रहकर लम्बी उम्र की मनोकामना कर सकते हैं ।

10 New Women College In Haryana 

जी हां, हरियाणा सरकार की ओर से इस वर्ष रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर महिला कर्मचारियों व उच्च शिक्षा ग्रहण करने की चाह रखने वाली छात्राओं को बेहतरीन उपहार दिया हैं ।एक ओर मुख्यमंत्री जी ने महिला कर्मचारियों को Online स्थानांतरण नीति में स्टेशन का विकल्प चुनने में राहत दी है इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 10 नए महाविद्यालय खोलने की मांग की हैं।हरियाणा की खट्टर सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है।

शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा, कि राज्य के सभी कॉलेजों की मैपिंग के बाद तय किया गया कि कम से कम 10 Km के दायरे में एक महिला महाविद्यालय को होना आवश्यक हैं।

एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया, खट्टर जी ने नए 10 महिला महाविद्यालय खोलने की मंजूरी दे दी हैं।मुख्यमंत्री जी Video Confrence के माध्यम से 3 अगस्त (रक्षाबंधन) के दिन पंचकूला के सेक्टर1 में स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से इन महाविद्यालयों का एक साथ शिलान्यास कर लड़कियों को रक्षाबंधन का विशेष उपहार देंगे।इस शिलान्यास में  ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि व गांव के अन्य प्रबुद्ध व्यक्ति उपस्थित होंगें।

प्रवक्ता का कहना है, कि नए सक्षणिक स्तर से इन महिला महाविद्यालयों में शिक्षा की सुरुआत हो जाएंगी।जब तक ये महाविद्यालय बन कर तैयार नहीं होते तब तक कक्षाएं स्थानीय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में लगाई जाएंगी।

झटपट बनाए नवरात्रि स्पेशल “आलू की कढ़ी”

भारत एक ऐसा देश है जहां पूरे साल में विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें से एक है नवरात्रि। भारत में हिंदू वर्ग की संख्या अधिक होने के कारण नवरात्रि का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।नवरात्रों में आजकल तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। परंतु सीमित सामग्री ही इसके लिए प्रयोग की जाती है। तो आज हम आपके लिए इसी सीमित सामग्री द्वारा बनाई जाने वाली special recipe लेकर आए हैं। इस recipe का नाम है Aloo Ki Kadhi

आलू की कढ़ी एक हल्की recipe है। इसलिए उपवास में खाने के लिए उचित है। आलू की कढ़ी लगभग आधे घंटे में ही तैयार हो जाती है। स्वाद में बहुत ही लजीज है। इसे आप व्रत के चावलों के साथ परोस सकते हैं।

आइए अब आपको बताते हैं इसे बनाने की सामग्री, समय और विधि के बारे में।

aloo ki kadhi recipe

Aloo Ki Kadhi तैयार करने के लिए सामग्री

दोस्तों चार व्यक्तियों के अनुसार आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी

  • आधा किलो उबले आलू
  • आधा कप सिंघाड़े का आटा
  • दो चम्मच सेंधा नमक
  • एक छोटा चम्मच मिर्च पाउडर
  • एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर
  • आधा चम्मच जीरा
  • आधा चम्मच राई (इच्छा अनुसार)
  • दो साबुत लाल मिर्च
  • आधा कप खट्टा दही
  • करी पत्ता
  • एक चम्मच हरी मिर्च कटी हुई
  • एक चम्मच अदरक कटा हुआ
  • तेल तलने के लिए
  • बारीक कटा हरा धनिया garnish के लिए

Time

  • बनाने में समय =10 मिनट
  • पकाने में समय =30 मिनट
  • परोसने को तैयार =40 मिनट
aloo ki kadhi recipe - Exclusive Samachar

पकाने की विधि

आइए अब जानते हैं आलू की कढ़ी पकाने की विधि

  • दोस्तों सबसे पहले आप उबले हुए आलू लें। उसको अच्छी तरह मसल लें। उसमें सेंधा नमक, लाल मिर्च पाउडर तथा सिंघाड़े के आटे को मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें।
  • तैयार मिश्रण के आटे से पकौड़ी बना ले। अब कढ़ाई में अच्छे से तेल गर्म कर लें। पकौड़ी को उस गर्म तेल में तल लें।
  • अब कड़ी के मिश्रण में दही और थोड़ा सा पानी डालकर तरल कर लें।
  • अब कढ़ाई में तेल डालें। फिर उसमें साबुत लाल मिर्च, जीरा और कड़ी पत्ते डाल दें। थोड़ी देर के लिए उसे भूने। कुछ सेकंड के बाद उसमें बारीक कटी अदरक, हरी मिर्च और धनिया पाउडर डालें।
  • 1 मिनट के पश्चात उस में दही का घोल डालकर कुछ देर उबलने दें। कम से कम 15 मिनट तक इसे उबलने दें। तत्पश्चात उसमें पकौड़ी भी डालकर 10 मिनट तक चलाएं। 

दोस्तों अब आपकी आलू की कढ़ी पूरी तरह तैयार है। धनिया से इसे गार्निश करके परोसे।

मोदी सरकार की केंद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति (New Education Policy) को  बुधवार को मंजूरी दे दी । 34 साल बाद शिक्षा प्रणाली में आने वाला ये बदलाव 1986 की शिक्षा नीति की जगह ले लेगा । 

 विभिन्न शिक्षाविदों व जन-प्रतिनिधियों के परामर्श एवं रिपोर्ट्स का मसौदा है नई शिक्षा नीति।
3 सालों से भी अधिक लंबे समय का परिणाम बनकर नई शिक्षा नीति आज हमारे सामने है जोकि विभिन्न शिक्षाविदों , छात्रों ,राज्य सरकारों व जन-प्रतिनिधियों के परामर्श एवं रिपोर्ट्स पर आधारित है । 

नई शिक्षा नीति किन रिपोर्ट्स पर है आधारित ?

2016 में T.R.सुब्रमण्यम ने नई शिक्षा नीति पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी एवं 31 मई 2018 को इसरो के पूर्व अध्यक्ष कस्तूरीरंगन ने अपनी रिपोर्ट पेश की जिसके बाद से दोनों रिपोर्ट्स पर लगातार हो रही बड़े स्तर पर विचार-विमर्श ने आखिरकार एक रूप ले लिया और नई शिक्षा नीति सबके सामने आई।

नई शिक्षा नीति से आशान्वित लक्ष्य

शिक्षा मंत्री के सचिव अमित खरे से बातचीत करने पर बताया कि 2035 तक 50 फीसदी सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrollment Ratio ) का लक्ष्य रखा गया है जिसमे व्यावसायिक शिक्षा को 26.3% से 50% तक ले जाने का लक्ष्य है । 2030 तक प्री प्राइमरी से उच्चतर माध्यमिक तक 100 फीसदी  प्रवेश दर का लक्ष्य भी नई शिक्षा नीति में लेकर चल रहे हैं जबकि उच्च शिक्षा में प्रवेश लक्ष्य 50 प्रतिशत लिया गया है । 100 फीसदी नामांकन के लक्ष्य को लेकर पढ़ाई छोड़ चुके करीब 2 करोड़ बच्चों को फिर स्कूल से जोड़ा जाना है।

इसी के साथ ही बीच में कोर्स छोड़ने वालों के लिए मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट का प्रावधान होगा बहुस्तरीय प्रवेश ओर निकास के कई विकल्प होंगे । उनके क्रेडिट को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स के द्वारा स्थानांतरित किया जाना है । अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) की स्थापना की जानी है जो छात्रों द्वारा अर्जित किये गए क्रेडिट को डिजिटल रूप में संग्रहित करेगा ।

new education policy 2020 - Exclusive Samachar

क्या है Multiple Entry/Exit Rule?

इससे मतलब है यदि किसी छात्र की मजबूरीवश  पढ़ाई बीच मे छूट जाती है तो पिछली की गई सारी पढ़ाई बेकार नही जाएगी । एक साल की हुई पढ़ाई पर सर्टिफिकेट , दो साल की पढ़ाई पर  डिप्लोमा का सर्टिफिकेट एवं 3 से 4 साल पूरे  होने पर डिग्री दी जाएगी। यह छात्रों के लिए अच्छी खबर है ।

MERU (Model Multidisciplinery Education And Research University ) बहु विषयक शिक्षा और अनुसंधान विश्वविद्यालय का होगा गठन ।

IIT व IIM के जैसे मॉडल मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन एन्ड रिसर्च यूनिवर्सिटी का गठन किया जाएगा जोकि समग्र ओर बहु विषयक शिक्षा का लक्ष्य लेकर काम करेगी । 

UGC , NCTE , AICTE होने जा रहे है खत्म , सभी का काम करेगी सिर्फ एक नई रेगुलेटरी बॉडी ।
उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बताया सरकार UGC , NCTE , AICTE जैसी सभी रेगुलेटरी बॉडी को खत्म कर सिर्फ एक रेगुलेटरी बॉडी बनाएगी , जिसके अंतर्गत लीगल और मेडिकल के छात्र नही आएंगे । इसी के साथ ही अप्रूवल व आर्थिक मंजूरी के लिए अलग-अलग वर्टिकल होंगे , यह नियामक Online Self Discloser Based Transparent System पर आधारित होगा । इस प्रणाली के माध्यम से यूनिवर्सिटीज के लिए अब ग्रांट के लिए अप्लाई करना , प्रोपोजल रखना ओर बाकी की सारी प्रक्रिया बहुत तेजी से होगी ।

कॉलेजों को मिलेगी स्वायत्तता (Graded Autonomy ) , यूनिवर्सिटीज से मान्यता लेने का झंझट निपटा ।

15 साल में कॉलेजों की यूनिवर्सिटीज से सम्बन्धता खत्म कर दी जाएगी । सेंट्रल एवं नॉन सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के लिए एक ही स्टैंडर्ड होंगे । सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के संस्थानो के लिए यह बात लागू होगी । धीरे धीरे कॉलेजों को स्वायत्तता दी जायेगी , जिसके लिए उनकी ग्रेडिंग की जाएगी।

new national education policy 2020 in hindi - Exclusive Samachar

शिक्षा बजट पर खर्च होगा GDP का 6 प्रतिशत

मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने शिक्षा के बजट पर कुल जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने को स्वीकृति दे दी है जोकि अब तक केवल 4 प्रतिशत ही हुआ करता था । लेकिन फिर भी भारत क्यूबा , फ़िनलैंड एवं स्वीडन जैसे कई उन देशों से पीछे ही है जोकि जीडीपी का तकरीबन 13 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करते है । 

NSF (National Science Foundation) की तर्ज पर  बनने जा रहा है NRF (National Research Foundation )

अमेरिका के NSF की तर्ज पर भारत मे NRF की स्थापना की जानी है जिसमे Science ही नहीं Social Science भी शामिल की जाएगी । यह संस्थान शिक्षा के साथ साथ रिसर्च में भी बढ़ोतरी लाएगा एवं बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा ।

विद्यालयों का प्रचलित 10+2 फॉर्मेट खत्म , अब से होगा 5+3+3+4 फॉर्मेट

नए फॉर्मेट के 5 से मतलब प्री-प्राइमरी के तीन साल एवं कक्षा 1 ओर कक्षा 2  है जोकि बच्चे की फाउंडेशन स्टेज है । इस पांच सालों की पढ़ाई के लिए एक अलग पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। 3 से 8 साल की आयु इस चरण के लिए निर्धारित की गई है ।अगला चरण कक्षा 3 से कक्षा 5 तक तीन साल का है जिसमें छात्र की आयु 8 से 11 वर्ष निर्धारित की गई ।इसके बाद कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक का चरण आएगा जिसमे छात्र की आयु अमूमन 11 से 14 वर्ष मानकर चल रहे है । कक्षा छठी से ही छात्रों को प्रोफेशनल ओर स्किल की शिक्षा दी जाएगी जिसमे स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी शामिल है ।चौथा एवं अंतिम चरण(कक्षा9वीं से 12वीं) 4 साल का होगा जिसमे 9वीं से ही छात्र को साइंस व गणित के साथ साथ फैशन डिजाइनिंग पढ़ने की भी आजादी होगी । इस चरण में 14 से 18 आयुवर्ग के छात्र होंगे ।

10वीं तथा 12वीं का बोर्ड एग्जाम बनाया जाएगा ज्ञान परीक्षण पर आधारित।

रटने की प्रवृत्ति से दूर करने को नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं को कम महत्व दिया जाएगा । इसी दिशा में कई सुझाव प्रस्तावित है जिसमे साल में दो बार परीक्षाएं करवाना , ऑब्जेक्टिव व सबजेक्टिव श्रेणियों में विभाजन शामिल है । विभिन्न बोर्ड भविष्य में बोर्ड पेपर का प्रेक्टिकल मॉडल तैयार करेंगे जैसे वार्षिक, सेमेस्टर और मॉड्यूलर परीक्षाएं बोर्ड परीक्षाएं आदि।

new national education policy

M.phil. खत्म एवं कॉलेजों को Common Exam का ऑफर।

अब से छात्र ग्रेजुएशन , पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद सीधा PhD करेंगे । M.phil कोर्स को खत्म करना नई शिक्षा नीति का बड़ा बदलाव है । राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी कॉमन एग्जाम की परीक्षा करवाएगी लेकिन कालेजो पर कामन एग्जाम  दबाव नही ,मात्र एक ऑफ़र है ।

5वीं तक मातृभाषा में पढ़ाई एवं समग्र रिपोर्ट कार्ड अच्छा कदम ।
समग्र रिपोर्ट कार्ड न केवल अंको बल्कि छात्र के कौशल एवं अन्य बिंदुओं पर भी गौर करेगा । 5वीं कक्षा तक मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा भी अच्छा कदम है । 

इनके अलावा भी नई शिक्षा नीति में  कई छोटे किंतु विशेष बदलाव किये गए है जोकि इस प्रकार है –
1.  2030 तक हर जिले में कम से कम एक बहुविषयक संस्थान बनाया जाएगा । सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को बहुविषयक संस्थान बनाना होगा जिसमें कम से कम 3000 छात्र होंगे। 
2.संस्थाओं के पास ओपन डिस्टेंस लर्निंग ओर ऑनलाइन कार्यक्रम चलाने का भी विकल्प रहेगा ।
3.मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम  बदलकर पुनः शिक्षा मंत्रालय रखा गया है।
4. विद्यार्थियों के लिए संस्कृत समेत कई विदेशी  भाषाओं को त्रि-भाषा फार्मूला के तहत पढ़ने का अवसर होगा।
5. विदेशी यूनिवर्सिटीज को शिक्षा क्षेत्र में निवेश के तहत भारत मे कैम्पस खोलने की भी अनुमति दी गयी है। SC, ST, OBC, SEDGS विद्यार्थियों के लिए स्कालरशिप पोर्टल में विस्तार किया गया है।
6. ऑनलाइन एजुकेशन पर जोर देते हुए विभिन्न ऐप के माध्यम से फोन, कम्प्यूटर से शिक्षा प्राप्त करने पर भी फोकस किया गया है।
7.प्रत्येक जिले में कला, खेल व करियर संबंधी गतिविधियों के प्रसार हेतु बल भवन भी खोले जाने है।
8. स्कूल एवं कालेजो की फीस पर नियंत्रण के लिए भी एक प्रणाली विकसित की जाएगी ।
9.छात्रों को काउंसलर्स एवं विभिन्नता सामाजिक संस्थाओं से जोड़ा जाना है ।इसी के साथ ही स्वास्थ्य कार्ड भी बनाया जाएगा व समय समय पर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी ।
10. भारतीय साइन लैंगुएज (ISL) को पूरे देश मे मानकीकृत करके सामग्री तैयार की जाएगी जिसका प्रयोग दिव्यांग छात्रों द्वारा किया जाएगा । इसके अलावा विकलांग छात्रों के लिए भी बहुत से प्रावधान किए गए है।
11. Extra Co-Curricular Activities को अब इस नाम से न बुलाकर मुख्य शिक्षा में ही शामिल कर दिया गया है एवं छात्रों को कोडिंग सिखाई जाएगी।
12.नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षा का अधिकार (Right To Education ) के दायरे में अब से 3 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चे आएंगे ।
13. NTA (National Testing Agency) द्वारा यूनिवर्सिटीज प्रवेश परीक्षा साल में दो बार आयोजित करवाई जाएगी ।

कब से लागू होगी नई शिक्षा नीति (NPE)?

MHRD मंत्री रमेश पोखरियाल ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (New Education Policy ) का ड्राफ्ट सबके बीच पेश किया है । इसे लागू करने सम्बंधित अभी कोई विशेष तिथि निर्धारित नही की गई है।

खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक आहार- नवाबी पनीरपनीर को अलग ही तरीके से आकृषित रूप में प्रस्तुत करने का सबसे बढ़िया और आसान सा आहार है नवाबी पनीर । नवाबी पनीर का रिच क्रीमी फ्लेवर सचमें एक बहुत ही  अच्छा  पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है। कुछ ही मिनटों में बनने वाली यह डिश को कैसे बनाएं,आइए जानते हैं |

नवाबी पनीर बनाने का तरीका

काजू और नारियल के मिश्रण के लिए

सामानमात्रा
भिगोए हुए काजू              1/2 कप
हरी मिर्च 3
लौंग 3-4
दालचीनी की छाल2
हरी इलायची के बीज1/4 (छोटा चम्मच)
nawabi paneer recipe - Exclusive Samachar

पनीर तलने के लिए

तेल  1 बड़ा चम्मच
तिकोने आकार के पनीर 250 ग्राम

ग्रेवी बनाने के लिए

मक्खन 1 बडा चम्मच
तेज पत्ता1
अदरक लहसुन पेस्ट1 बडा चम्मच
हरे मटर  1/2 कप
कटी (लाल/पीली) मिर्च1/2 कप
नारियल पानी1कप 
नमकस्वादानुसार
nawabi paneer kaise banta hai - Exclusive Samachar

बनाने की विधि

  • सबसे पहले काजू और नारियल तेल के मिश्रण की सारी सामग्री को मिक्सी में डालें और पेस्ट बना लें।
  • अब एक पैन में तेल लें और गर्म करके उसमें पनीर के टुकड़ों को दोनों तरफ से सुनहरे होने तक तलें।
  • अब ग्रेवी बनाने के लिए एक कड़ाही में थोड़ा सा मक्खन लें और उसमें तेज पत्ता और प्याज डालें और फिर उसमें अदरक लहसुन पेस्ट डालकर दो मिनट के लिए पकाएं।
  • इसके बाद उसमें लाल पीली मिर्च अौर हरे मटर डालें और दो मिनट तक पकाते रहें। ध्यान रहे आग तीव्र गति में हो।
  • अब इसमें काजू पेस्ट और नारियल का दूध डालें और उबाल आने तक पकाएं।
  • 3-4 मिनट पकाने के बाद स्वादानुसार नमक डालें और आधा कप पीसी हुई चीनी डालें। 1 मिनट पकाने के बाद इसे कटोरी में निकालें और हरे धनिए और चिली आइल से गार्निश करें।
  • लीजिए आपका नवाबी पनीर बनके तैयार है गरमागरम चावल के  साथ परोसें ।

बिलासपुर:  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court) ने लाॅकडाउन के दौरान Gaurdians से वसूली जाने वाली स्कूल फीस को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सोमवार को राज्य शासन के उस बड़े आदेश को ठुकरा दिया है जिसमें बोला गया था कि निजी स्कूल लाॅकडाउन (Lockdown) के दौरान फीस (School Fees) की Recovery Postponed रखेंगे और विद्यार्थियों को वेतन देना पक्का करेंगे।

अधिवक्ता अशीष श्रीवास्तव ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकल पीठ ने School Fees से जुड़े राज्य शासन के आदेश को ठुकरा दिया है, लेकिन साथ ही स्कूलों और पेरेंट्स (Parents) दोनों को राहत पहुंचाते हुए Lockdown की अंतिम सीमा तक सिर्फ Tuition fees लेने का आदेश दिया है।

श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने निजी स्कूल संचालकों की Tuition fees लेने की मांग को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि इसके बगैर और किसी भी तरह की फीस अभिभावकों (Parents) से नहीं ली जाएगी और न ही किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाया जाएगा। अदालत के आदेश के अनुसार सभी Online Classes चलती रहेंगी और इस साल स्कूल फीस Increase नहीं होगी।