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नापाकों (आतंकियों) के पसीने छुड़ाने के लिए आया Apache AH 64 E

जी हां, नापाक हरकतों को अंजाम देने वाले आतंकियों के सीने पर तैनात हो गया है “Apache AH 64 E”।

इन आतंकियों ने हज़ारों माँ की कोख को उजाड़ा है, अब इनको सबक सिखाने की भारत ने ठान ली है और दिन मंगलवार 3 Sep 2019 को ‘Apache AH 64 E’, एक बेहतरीन लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुका है।

अपाचे की उड़ान से ही कांप जाएगा दुश्मनों का दिल

अपाचे लड़ाकू विमान की deal भारत ने Sep 2015 में America और Boeing India कंपनी से की थी। 3 September 2019 को भारतीय परंपरा के अनुसार भारतीय वायुसेना प्रमुख Air Chief Marchel ‘बीएस धनोआ’ की उपस्थिति में पठानकोट airbase पर नारियल फोड़ कर अपाचे लड़ाकू विमान का स्वागत किया गया और ऐसा कहा गया है कि ये अब तक का हमारी वायुसेना का सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान होगा। Boeing India से भारत के पास आज 22 में से 8 Apache विमान आ चुके हैं। 2020 तक भारत को सभी विमान मिल जाएंगे।

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Apache की खूबियां

यह Apache का model, AH-64 E है।

Apache 290 km प्रति घण्टा की रफ़्तार से उड़ान भरने में सक्षम है और सबसे खास बात यह कि इसमें High-Quality Night Vision System है, जिससे कि यह अंधेरे में भी आतंकियों को खोज निकलेगा और इसका special feature ये है कि अपाचे में उन आतंकियों की तस्वीर लेकर उन्हें कमांडों तक पंहुचाने के भी उपकरण available हैं।

Apache की तकनीकी सरंचना

Apache मिसाइल लैस विमान है और लगभग 130 लक्ष्यों को निशाना बना कर उन पर वार कर सकता है। अपाचे 60 फुट ऊंचा और 50 फ़ीट चौड़ा है और इस हेलीकॉप्टर में 2 पायलेट होंगे। इसका कारण यह है कि अपाचे के बड़े विंग को चलाने के लिए 2 इंजन हैं, जिन्हें चलाने के लिए 2 पायलेट जरूरी होंगे।

खास बात यह कि इस लड़ाकू विमान में hellfire और stringer दो मिसाइलें हैं, साथ ही साथ एक sensor भी मौजूद है जिसका नाम है Thermal Imaging Sensor, जिसकी सहायता से ये आतंकियों का पता लगा सकता है यही कारण है कि ये विमान रात को भी operation को अंजाम देने में सक्षम है।

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अब तक का सबसे शक्तिशाली Helicopter

भारत मे 8 Apache हेलिकॉप्टर आने से अब भारतीय वायुसेना सबसे घातक और नवीनतम technique वाले helicopter से लैस हो गयी है।

एक बात सुनकर आपको भी हैरानी होगी कि Apache को इस तरह design किया गया है कि ये RADAR की पकड़ में आना मुश्किल है।

इन special features और latest technique के साथ ये विमान Indian Air Force को और भी मजबूत करने में एक अहम भूमिका निभाएगा।

हमें पता चला है कि Google ने अपने लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System OS) Android 10 से पर्दा उठा दिया है। एंड्रॉयड 10 के आने के बाद से आपके स्मार्टफोन में कई नए फीचर्स शामिल हो जाएंगे। आइए बताते हैं कि किस तरह इस साल आपका ऐंड्रॉयड एक्सपीरियंस बदल जाएगा।

अमेरिकी कंपनी Google ने अपने नए ऑपरेटिंग सिस्टम Android 10 का डेवलपर प्रीव्यू रिलीज कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने एंड्रॉयड क्यू को नए नाम एंड्रॉयड 10 से पेश किया है। वहीं, गूगल ने Android Q का नाम बदलकर Android 10 रखा है।

गूगल ने पिछले दस सालों से चले आ रहे अपने ही ट्रेंड को तोड़ डाला। अब Google ने नए ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड Q का नाम बदलकर Android 10 कर दिया है। गूगल ने नाम बदलने को लेकर जानकारी दी कि कई देश मिठाई के नाम को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए अब एंड्रॉयड वर्जन का नाम संख्या में रखा जाएगा।

Privacy Features and Options

गूगल Android Q में प्रिवेसी पर अधिक फोकस करेगा। यूजर्स को सेटिंग्स में न सिर्फ एक अलग प्रिवेसी सेक्शन मिलेगा बल्कि वे अपनी जरूरत के हिसाब से बेसिक ऐप्स को भी परमिशन दे सकेंगे या रोक सकेंगे।

Focus Mode

पिछले साल गूगल ने डिजिटल टेक्नॉलजी से आम जिंदगी के प्रभावित न होने से जुड़ी जरूरतों पर बात की थी कि ऐंड्रॉयड क्यू में फोकस मोड दिया जाऐ जिसे ऑन करने पर आपको चुनी हुई ऐप्स से नोटिफिकेशंस या अलर्ट्स ना आऐं। इस तरह मन लगाकर आप काम कर सकेंगे। इस दौरान केवल ‘इंपॉर्टेंट’ कॉन्टैक्ट्स आपसे बात कर सकेंगे।

Alert Notification

ऐंड्रॉयड क्यू में यूजर्स नोटिफिकेशन पर कुछ देर तक टैप करेंगे तो उन्हें show silently और keep alerting जैसे फीचर्स मिलेंगे। इस तरह नोटिफिकेशंस को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकेगा।

Location Sharing

अब तक ऐंड्रॉयड पर सभी ऐप्स के लिए लोकेशन शेयरिंग रोकने का ऑप्शन होता था। अब ऐंड्रॉयड क्यू में यूजर्स को अलग से ऑप्शन मिलेगा जिससे वे अपनी जरूरत के हिसाब से चुनिंदा ऐप्स के लिए लोकेशन शेयरिंग ऑन कर सकेंगे।

Undo App Removal

अगर आपने गलती से कोई ऐप्स डिलीट कर दी है तो ऐंड्रॉयड क्यू पर इसे सुधारने का मौका मिलेगा और कुछ समय तक वे इसे अनडू (Undo) कर सकेंगे, जिससे ऐप रीस्टोर हो जाएगी।

Dark Mode

स्मार्टफोन में एंड्रॉयड 10 के आने पर आप अपनी मर्जी के मुताबिक डार्क मोड को इनेबल (enable) कर पाएंगे, जिसके चलते आपके फोन की बैटरी क्षमता बढ़ जाएगी और ‘सिस्टम-वाइड’ डार्क मोड यूजर्स को मिलने वाला है। इसका मतलब है कि डार्क मोड अब कुछ ऐप्स तक ही सीमित नहीं रहेगा।

Bubbles Chat

ऐंड्रॉयड क्यू में आपका SMS और CHAT करने का ढंग बदल जाएगा। मेसेज और चैट्स फेसबुक मेसेंजर बबल्स की तरह दिखेंगे और वहीं से उन्हें रिप्लाई करने का ऑप्शन भी मिल जाएगा।

WiFi Sharing

ऐंड्रॉयड क्यू पर वाई-फाई नेटवर्क शेयर करना अब मुश्किल नहीं होगा और क्यूआर कोड स्कैन करने भर से वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ा जा सकेगा।

Live Caption

डिवाइस पर एक बार टैप करने भर से ही उस मीडिया के लिए कैप्शंन आऐंगे जो हर तरह का ऑडियो प्ले कर रहा है। लाइव कैप्शंस विडियो, पॉडकास्ट और ऑडियो मेसेजेस के साथ काम करेगा और इस तरह यूजर्स अपने जरूरत की बात रिकॉर्ड भी कर सकेंगे। यह फीचर सुनने में असमर्थ लोगों के लिए बहुत काम का है।स्मार्टफोन्स पर हाई-क्वालिटी विडियो कॉन्टेंट और वीडियो को कई तरह के फॉरमैट में देखा जा सकता है।

 

देश में आज सही मायनों में आज़ादी को मान्यता मिली है। आज भारत का स्वर्ग, ‘कश्मीर‘ पूर्णतया भारत का हो गया है।

 

जी हाँ हम बात कर रहे हैं आज की सबसे खास और बड़ी खबर की। जम्मू-कश्मीर में लागू धारा 370 और 35A को पूर्ण रूप से हटा दिया गया है। हालांकि धारा 370 का एक खण्ड अभी भी राज्य में मान्य है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले राज्यसभा तथा फिर लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा इस फैसले को pass करने की जानकारी दी है। गृह मंत्री ने कहा कि अब जम्मू और कश्मीर राज्य से Article 370 और 35A हटा दी गयी है। सरकार के इस फैसले से जहां दूसरे राज्यों में खुशी का माहौल है, वहीं काफी विपक्षी दल इस बात से परेशान नज़र आ रहे हैं।

 

 

धारा 370 हटने के बाद से अब नए दो केंद्र शासित प्रदेश भारत में बन गए हैं। जिनमें से एक जम्मू-कश्मीर है व दूसरा लद्दाख है। सरकार के फैसले के अनुसार जम्मू-कश्मीर राज्य में विधानसभा होगी तथा वहां राज्य सरकार भी बनाई जाएगी। किंतु लद्दाख में कोई भी राज्य सरकार या विधानसभा नहीं होगी।

 

धारा 370 के हटने से 35A भी स्वतः ही खत्म हो गई है यानि अब जम्मू-कश्मीर में विशेष नागरिकता का अधिकार समाप्त हो गया है।

 

धारा 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर असल मायनों में भारत का प्रदेश घोषित हुआ है तथा वहां भी अब भारत का ही सविंधान लागू होगा। जम्मू-कश्मीर का सविंधान अब खत्म हो चुका है। अब दूसरे राज्यों के नागरिक भी जम्मू-कश्मीर में रहने के लिए जमीन ले सकते हैं व अब उन्हें वहां नौकरी करने का भी अधिकार है।

 

इस से पहले विशेष नागरिकता के आधार पर कश्मीर की बेटियों के साथ पक्षपात होता आ रहा है अर्थात किसी गैर-कश्मीर नागरिक से शादी करने पर जम्मू-कश्मीर में रहने वाली बेटी अपनी नागरिकता और सम्पति पर से अधिकार खो बैठती थी। किंतु अब ऐसा नहीं होगा। धारा 370 खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य की बेटियां अब किसी और राज्य के नागरिक से विवाह कर सकती हैं।

 

धारा 370 के खत्म होने से जम्मू-कश्मीर में तनावपूर्ण स्थिति होने के आसार है जिसके चलते घाटी में और ज्यादा army के जवान भेजे जा चुके हैं। Article 370 और 35A के समाप्त होने से बहुत से लोगों को खासा धक्का भी लगा है और इस वजह से जम्मू-कश्मीर में विद्रोह की आशंका जताई जा रही है। कुछ अलगाववादी दल घाटी के लोगों में अफवाह फैलाने की कोशिश भी कर रहे हैं। किंतु सरकार द्वारा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही वहां सैनिक बल तैनात किए जा चुके हैं।

 

अनुच्छेद 370 को लेकर गृह मंत्री ने कहा कि अब तक जम्मू-कश्मीर में इस धारा की वजह से 41 हजार जाने जा चुकी है क्योंकि article 370 आंतकवाद को बढ़ावा देने का एक कारगर तरीका था। इसके चलते घाटी में कोई भी अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करता था।

 

इस फैसले के बाद से Indian constitution के according जम्मू-कश्मीर में भी सरकार का कार्यकाल अब 6 वर्ष की बजाय 5 वर्ष ही हो जाएगा और अब वहां भी भारतीय तिरंगा शान से लहराएगा।

  

सोशल मीडिया आपकी और हमारी सबकी ज़िन्दगी का कितना महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग बन चूका है। इस बात का पता आज की इस घटना से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया के तीन बड़े मंच में दिक्कत आने के थोड़े टाइम में ही हर जगह हलचल मच गई। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप्प की जो आज शाम को दिक्कत करने लग गए और देखते ही देखते सभी ने इस बात का ज़िक्र ट्विटर पर करना शुरू कर दिया क्योंकि ट्विटर ही एक है जो बिलकुल बढ़िया तरीके से काम कर रहा था।

देखा जाए तो फोटो न डाउनलोड हो रहीं, न अपलोड, वीडियो भेजने में भी दिक्कत आ रही है।

वैसे देखा जाए तो ऐसी चीजों की खबर बहुत जल्दी फैलती है और ठीक भी जल्दी हो ही जाती है। पर शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि तीन बड़े मंच में एक साथ दिक्कत आई हो।

आखिर आजकल सोशल मीडिया ही तो है जिसके द्वारा हम सभी अपनी बात जन जन तक पहुंचा सकते हैं। तो इसका थम जाना तो जैसे ज़िन्दगी का थम जाना सा है।  चलिए हम भी ज़रा ट्विटर पर नज़र घुमा कर आते हैं, आखिर वही तो आज सबका हाथ थामे है।
International Yoga Day in Hindi: जैसे की हम सब जानते हैं, प्रतिवर्ष 21 जून को विश्व स्थर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (Antarrashtriya Yoga Diwas) मनाया जाता है। पूरे विश्व भर में इस दिन को मनाने की शुरुवात करने में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का बहुत अहम् योगदान रहा है क्योंकि उन्होंने सर्वप्रथम इस दिन को मनाने की शुरुवात 21 जून 2015 से की थी। भारत में योग दिवस का आयोजन आयुष मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

कब शुरू हुआ विश्व योगा दिवस – Vishwa Yoga Diwas in Hindi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी में United Nation में जा कर योग के लाभ और इसके महत्व को विश्व भर के लोगों को समझाया। मोदी जी द्वारा की गयी इस पहल से ही आज पूरे विश्व भर में इस दिन को बहुत ही उत्साह के साथ और योग कर के मनाया जाता है। नरेन्द्र मोदी जी ने इसके विषय में अपना सुझाव 27 सितम्बर 2014 को यूनाइटेड नेशन के समक्ष रखा था जिसे 11 दिसम्बर 2014 को स्वीकृति मिली व 21 जून को विश्व योगा दिवस घोषित किया गया। International Yoga Day in Hindi Essay.
उसी के बाद से इस दिन को पुरे विश्व भर में 21 जून को मनाया जाने लगा है। इस दिन को Yoga Day भी कहते हैं। इस दिन पूरे विश्व भर में बड़े से छोटे क्षेत्रों में, बड़े से बड़े और छोटे से छोटे लोग मिल जुल कर बड़े मैदानों में योग करते हैं। यहाँ तक की सभी मंत्रिगण और स्वयं पी एम नरेन्द्र मोदी जी भी इसमें भाग लेते हैं।

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कैसे मनाया जाता है International Yoga Day in Hindi

इस दिन योग करने के साथ-साथ लोग विश्व भर में अन्य कार्यक्रम जैसे ध्यान, मीटिंग, योग के लिए लोगों को बढ़ावा देना, योग पर वाद विवाद प्रतियोगिताएं और लेखन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं। योग हमारी संस्कृति की अनमोल दें है, इसकी शुरुवात 5000 वर्ष से भी पूर्व शुरू हो चुकी थी, जिससे यह पता चलता है कि योग का महत्व मानव जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

योगा पुरस्कार

योग हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता है क्योंकि इससे कई प्रकार कि बिमारियों से छुटकारा मिलता है और शरीर निरोग व तंदरुस्त बना रहता है। इस दिन को प्रधानमंत्री योग पुरस्कार कि भी घोषणा कि जाती है।

योग के फायदे Yoga Ke Fayde in Hindi

  • योग में जो शक्ति है वह दुनिया के और किसी भी व्यायाम में नहीं है।
  • योग की सबसे बड़ी खासियत यही है की योग के लिए आपको किसी भी प्रकार के यंत्र की आवश्यकता नहीं है। साथ ही योग एक ऐसी शारीरिक क्रिया है जिससे बिना किसी औषधि के सभी रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।
  • योग के लिए आप प्रतिदिन सुबह बस 20-30 मिनट दें और दिन भर की थकावट से दूर रहे।
  • बच्चों के लिए भी योग एक बेहतर व्यायाम है जिससे बच्चे स्वस्थ रहते हैं और साथ ही इससे उनका दिमाग शांत और मजबूत बनता है।
  • नियमित योग से शरीर का वज़न कम होता है।
  • इससे मन की चिंता दूर होती है जिससे मानसिक तनाव और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियाँ शरीर से दूर रहती हैं।
  • योग करने से मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और साथ ही काम में मन लगता है।
सही नज़रिए से देखा जाए तो सफलता का असली रास्ता है योग।

Types of Yoga in Bhagavad Gita

भगवद गीता में योग के जो तीन प्रमुख प्रकार बताए गए हैं वे हैं |

कर्मयोग

Karma Yoga in Bhagavad Gita: इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है।

भक्ति योग

Bhakti Yoga in Bhagavad Gita: इसमें भगवत कीर्तन प्रमुख है। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है।

ज्ञान योग

Gyan Yoga in Bhagavad Gita: इसमें ज्ञान प्राप्त करना अर्थात ज्ञानार्जन करना शामिल है।

भारत द्वारा स्थापित वल्र्ड रिकॉर्ड

इस अवसर पर दिल्ली में एक साथ 35985 लोगों ने योग का प्रदर्शन किया, जिसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे और भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बनाकर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज करा लिया। पहला रिकॉर्ड एक जगह पर सबसे अधिक लोगों के योग करने का बना, तो दूसरा एक साथ सबसे अधिक देशों के लोगों के योग करने का।

Baba Ram Rahim के द्वारा बताए गए योगाभ्यास के टिप्स

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बाबा राम रहीम एक अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कई मूल्यवान सुझाव प्रदान करते हैं और दैनिक व्यायाम, ताजे फल और सब्जियों सहित स्वस्थ आहार की सलाह देते हैं। बाबा राम रहीम ध्यान के साथ प्राणायाम सिखाते हैं जो मन और शरीर से तनाव को दूर करने में अत्यधिक प्रभावी है। यह मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह को भी सक्षम बनाता है, जिससे मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है। इनके डर बताई गयी विधि से अनेक लोगों की अस्थमा की बीमारी व अन्य श्वास की बीमारियाँ ठीक हुई हैं। इन्होंने बहुत से आसन बताए हैं जिनकी विडियोग्राफी यू ट्यूब पर उपलब्ध है। इन आसनों को हज़ारों लोगों ने अपनाया है और उनकी ला ईलाज बीमारियां ठीक हुई हैं। यही नहीं, यहां योगासनों के साथ साथ आयुर्वेद ईलाज करके 90% नसें बलाक वाले व्यक्ति भी ठीक हुऐ हैं।
29 अप्रैल 2016 को, संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को योगा में, उनके मार्गदर्शन व अपार योगदान के लिए दुनिया के 4 सबसे बड़े योग फेडरेशन द्वारा ‘अवार्ड ऑफ़ ऑनर’ देकर सम्मानित किया गया।
न सिर्फ भारत, बल्कि विश्व के कोने-कोने में इस दिन को उत्सव के साथ मनाया जाने लगा है और योग को लोग अपनाने लगे हैं। इसकी शुरुवात भारत से हुई है परन्तु आज पूरा विश्व इसे अपना मानने लगा है। भारत के इस महान विरासत योग पर हम भारतीयों को गर्व होना चाहिए।

आज 14 जून को, विश्व भर में वर्ल्ड ब्लड डोनर डे, यानी विश्व रक्त्दाता दिवस मनाया जा रहा। यह दिवस हर साल रक्त दान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए, तथा लोगों को स्वैच्छिक रक्त दान करने के लिए प्रोत्साहन देने के लिए मनाया जाता है।

 

इस वर्ष का विषय- “सभी के लिए सुरक्षित रक्त”

हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईज़ेशन द्वारा इस दिन किसी 1 विषय पर ख़ास महत्त्व दिया जाता है, इस वर्ष का विषय है – “रक्तदान और सुरक्षित रक्त आधान तक सभी की पहुँच” और इसके लिए जो नारा विकसित किया गया है, वह है – “सभी के लिए सुरक्षित रक्त”। यह थीम पूरी दुनिया में अधिक लोगों को रक्त दाता बनने के लिए और नियमित रूप से रक्त दान करने के लिए प्रोत्साहित करती है। ऐसी क्रियाएं राष्ट्रीय रक्त की आपूर्ति की मजबूत नींव बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं और सभी रोगियों की रक्त की जरूरतों को पूरा करने के लिए मदद करती हैं।

हर कुछ सेकंड, किसी न किसी को, कहीं न कहीं रक्त की जरूरत होती है। रक्त और रक्त उत्पादों का आधान हर साल लाखों लोगों को बचाने में मदद करता है। रक्तदान करके आप भी अपने जीवन काल में कईं जानें बचा सकते हैं।

कौन कर सकता है रक्त दान

अच्छे स्वास्थ्य में होने पर अधिकांश लोग रक्त दे सकते हैं। रक्त दाता बनने के लिए कुछ बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा, जो इस प्रकार हैं:

-आपकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
– आपका वजन कम से कम 50 किलो होना चाहिए।
– जिस समय आप रक्त दान करते हैं उस समय आप अच्छे स्वास्थ्य में होने चाहिएं।
– अगर आपको सर्दी, फ्लू, गले में खराश, सर्दी-खराश, पेट में कीड़े या कोई अन्य संक्रमण है तो आप रक्तदान नहीं कर सकते।
– अगर आपने एक छोटी सी प्रक्रिया के लिए दंत चिकित्सक का दौरा किया है तो आपको दान करने से 24 घंटे पहले इंतजार करना होगा; प्रमुख दन्त चिकित्सा कार्य करवाने के बाद एक महीने तक प्रतीक्षा करें।
– यदि आप रक्त दान के लिए न्यूनतम हीमोग्लोबिन स्तर को पूरा नहीं करते हैं, तो आपको रक्त दान नहीं करना चाहिए। आपका हीमोग्लोबिन कम से कम 12.5 होना चाहिए।
– गर्भावस्था के दौरान, बच्चे के जन्म के 9 महीने बाद और यदि आप अपने बच्चे को स्तनपान कराते हैं, तो आपको रक्तदान नहीं करना चाहिए।

रक्तदान करने से आपको भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ होता है। रकतदान से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

– मानसिक तनाव कम होता है
– नकारात्मक भावनाओं से छुटकारा मिलता है
– अपनेपन की भावना आती है अलगाव कम होता है
– नियमित रूप से रक्तदान करने से हृदय की बीमारी से बचाव करने वाले औसत कोलेस्ट्रॉल और कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल में कमी आती है।
– नियमित रूप से रक्तदान करने से आपका रक्तचाप भी कम हो सकता है, जो दिल के दौरे के जोखिम को तथा ब्रेन स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है।

डेरा सच्चा सौदा- कायम कर रहा है रकतदान के क्षेत्र में नए आयाम

जहां एक ओर दुनिया में स्वार्थ है, वहीँ दूसरी ओर डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी नियमित रक्त दान करते हैं, तथा लाखों जानें बचाते हैं।
पूजनीय संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां नियमित रकतदान करने की प्रेरणा देते हैं, रक्त बनाया नहीं जा सकता, केवल मनुष्य ही मनुष्य को रक्तदान कर सकता है। गुरूजी फरमाते हैं कि रक्त के अभाव में कोई भी मृत्यु नहीं होनी चाहिए, व स्वैच्छिक रकतदान करने से हम अपने राष्ट्र की रक्त की सभी ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं।

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों द्वारा अब तक 5.25 लाख यूनिट से अधिक रक्तदान किया जा चुका है। डेरा सच्चा सौदा द्वारा मासिक रक्तदान शिविर के अलावा समय समय पर दुनिया भर में रक्तदान किया जाता है, जिसे दुर्घटनाग्रस्त लोगों को, पुलिस, आर्मी, पत्रकारों, थैलेसीमिया के मरीजों को व ज़रूरतमंद गरीबों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

डेरा सच्चा सौदा के नाम 78 गिनीज़ विश्व रिकॉर्डों में से 4 रिकॉर्ड रक्तदान के क्षेत्र में हैं, जो कि 07 दिसंबर 2003, 10 अक्तूबर2004, 08 अगस्त 2010 व 12 अप्रैल 2014 में बनाये गए थे।

पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों को श्रधांजलि देने के लिए भी डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों द्वारा 13653 यूनिट रक्तदान किया गया था। शादी हो या सालगिरह, कोई भी अवसर हो, मानवता के ये पुजारी, मानवता का भला करने से नहीं रुकते।

गर्व है हमें, कि हमारे देश में ऐसे नेक लोग हैं जो दूसरों की ज़िंदगी बचाने के लिए रक्तदान करते हैं। इन्हीं लोगों से प्रेरणा लेते हुए, इस विश्व रक्तदाता दिवस पर, आइये हम सब भी नियमित रक्तदान करने का प्रण करें, व किसी की ज़िन्दगी बचाने के पुण्य कार्य में भागीदार बनें।

मेरे प्यारे दोस्तो, एक तरफ तो मैं भारत का नागरिक होने पर बहुत गर्व महसूस करता हूँ, हालांकि, वहीं दूसरी तरफ यह तथ्य मुझे शर्मिंदा करता है, कि हमारा देश पूरे विश्व में बाल मजदूरों की बड़ी संख्या का घर है। वो भी केवल कुछ लालची और चालाक भारतीय नागरिकों के कारण, जो छोटे से बच्चों को जोखिम वाली मजदूरी के कार्यों में बहुत कम वेतन पर अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए लगाते हैं। वो कभी भी अपने देश के विकास के बारे में नहीं सोचते; वो बहुत स्वार्थी होते हैं और केवल अपना लाभ चाहते हैं। सबसे अधिक बाल श्रमिक ग्रामीण क्षेत्रों में, कृषि में, और शहरी इलाकों में – खनन, जरी, कढ़ाई आदि उद्योगों में पाये जाते हैं।

बाल मजदूरी के कारण

बाल मजदूरी के कुछ प्रमुख कारण गरीबी, सभी के लिए आधारभूत सुविधाओं की कमी, सामाजिक सुरक्षा की कमी आदि है। समाज में अमीर और गरीब लोगों के बीच बहुत बड़ा अन्तर, आधारभूत सुविधाओं की सीमितता और बहुत बड़े स्तर पर असमानता है। इस प्रकार के सामाजिक मुद्दे समाज में, विशेषरुप से गरीबों के बच्चों पर अन्य आयु वर्ग की तुलना में प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

बेकार व लाचार स्थिति और कम ज्ञान के कारण, गरीब बच्चे कम वेतन पर कठिन कार्य करने को तैयार हो जाते हैं, वहीं वो शहरी क्षेत्रों में घरेलू नौकर की तरह प्रयोग किये जाते हैं। बाल श्रम की यह हालत लगभग गुलामी की स्थिति जैसी ही दिखती है।
अधिकतर गरीब माता-पिता बच्चों को जन्म केवल रुपये कमाकर उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए देते हैं। वो अपने बच्चों को घरेलू कामों में अपने सहयोगी के रुप में शामिल करते हैं। हम आमतौर पर बच्चों को चाय के स्टालों, ढाबों, होटलों और अन्य जोखिम वाले कार्य को करते हुए देखते हैं।

यह देखा गया है कि बाल मजदूरी में शामिल बच्चे सामान्य रुप से अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़े वर्ग और मुस्लिम वर्ग से जुड़े होते हैं। इसका अर्थ है कि जातिवाद भारत में बाल श्रम का बड़ा कारण है। इस तरह के एक उन्नत युग में इसके अस्तित्व के कारण अप्रभावी कानून, बुरी प्रशानिक व्यवस्था, इसे पूरी तरह से खत्म करने की राजनीतिक इच्छा की कमी और नियोक्ताओं को भारी लाभ हैं।

बाल मजदूरी बंधक मजदूरी

बाल मजदूरी का एक और दूसरा रुप बंधक बाल मजदूरी भी है जो सामान्यतः अनौपचारिक क्षेत्रों में पायी जाती है। इसमें, गरीब बच्चे एक नियोक्ता के अधीन ऋण, वंशानुगत ऋण या परिवार द्वारा सामाजिक कर्तत्व के कारण बंधक बन जाते हैं। हम बंधुआ मजदूरी को गुलामी का एक रुप कह सकते हैं। बंधुआ बाल मजदूर शारीरिक और यौन शोषण और किसी भी प्रकार की लापरपवाही के कारण मौत की ओर उन्मुख हैं। वो मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बीमार हो जाते हैं और उनके पास जीवित रहने के लिए अन्य कोई विकल्प नहीं होता है।

देश के युवा होने के नाते, हमें राष्ट्र के लिए अपने दायित्वों को समझना चाहिये और इस सामाजिक मुद्दे का उन्मूलन करने के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाने चाहिये।

डेरा सच्चा सौदा संस्था ने बाल मजदूरी को रोकने के लिए क लिए कईं कदम उठाए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं-

– गरीब बच्चों के लिए शाह सतनाम जी शैक्षिक संस्थानों में मुफ़्त पढ़ाई
– गरीब बच्चों को स्टेशनरी, यूनिफार्म, पेन इत्यादि देना।
– अनुयायियों द्वारा गरीब बच्चों को विद्या दान देना, उन्हें कैरियर कॉउंसलिंग देना व ट्यूशन देना।
– संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा द्वारा 6.5 करोड़ से अधिक लोगों ने बाल श्रम न करवाने का व इसे रोकने का प्रण लिया है।

आइये, बाल श्रम के खिलाफ इस विश्व दिवस पर हम सभी यह सुनिश्चित करें कि हर बच्चे को अपना बचपन जीने को मिले। हम सब इस दिशा में कदम बढ़ाएं और अपने देश से बाल श्रम को हमेशा के लिए ख़त्म कर दें।

धन्यवाद।

यदि सुरक्षित होगा बचपन, बन जायेगा भविष्य उज्ज्वल

जय हिन्द, जय भारत।

हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस ( वर्ल्ड नो टोबैको डे) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) ने 1987 में की थी। पूरी दुनिया में प्रति वर्ष लगभग 60 लाख लोग तम्बाकू के प्रयोग के कारण मर जाते हैं, इसलिए इस दिन को मनाने के पीछे का ध्येय यही है कि आम जनता तम्बाकू से होने वाले नुक्सान को जाने, जागरूक रहे और तम्बाकू से बने पदार्थों से दूर रहे।

हमें यह बात स्वीकारने में गुरेज नहीं होना चाहिए कि भारत में पुराने समय से ही तम्बाकू का प्रचलन रहा है। पहले के समय में भी हुक्का-चिल्लम, बीड़ी, खैनी आदि के द्वारा लोग नशा करते रहे हैं, किन्तु आज की स्थिति कहीं ज्यादा विस्फोटक हो चुकी है। अब तो ज़माना एडवांस हो गया है और एडवांस हो गए हैं नशे करने के तरीके! बीड़ी की जगह सिगरेट ने ले ली है तो हुक्का और चिल्लम की जगह स्मैक, ड्रग्स ने और खैनी बन गया है! वहीं शराब ने जितना फैलाव कर लिया है, उसका तो कहना ही क्या! पहले शराब अमीर लोगों का शौक हुआ करती थी, तो अब शराब के कई सस्ते संस्करण व रूप आम लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गए हैं। ये जानते हुए भी कि तम्बाकू एक धीमा ज़हर है, जो सेवन करने वाले व्यक्ति को धीरे धीरे करके मौत के मुँह मे धकेलता रहता है, लोग जाने अनजाने मे तम्बाकू उत्पादों का सेवन करते रहते हैं। धीरे धीरे शौक लत में परिवर्तित हो जाता है और तब नशा आनंद प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि ना चाहते हुए भी किया जाता है। एक शायर ने क्या खूब कहा है –

कौन कमबख्त पीता है मज़ा लेने के लिए,
हम तो पीते हैं क्योंकि पीनी पड़ती है!

तम्बाकू उत्पादों का सेवन अनेक रूप में किया जाता है, जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, जर्दा, खैनी, हुक्का, चिलम आदि। सिगरेट, बीड़ी और हुक्के का हर कश एवं गुटखे, जर्दे, खैनी की हर चुटकी हर पल मौत की ओर ले जा रही होती है।

तम्बाकू उत्पादों के सेवन से नुकसान

तम्बाकू में मादकता या उत्तेजना देने वाला मुख्य घटक निकोटीन (Nicotine) है व यही तत्व सबसे ज्यादा घातक भी है।
इसके अलावा तम्बाकू मे अन्य बहुत से कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पाये जाते है।

धुम्रपान एवँ तम्बाकू खाने से मुँह् ,गला, श्वासनली व फेफडोँ का कैंसर  होता है। दिल की बीमारियाँ, धमनी काठिन्यता,उच्च रक्तचाप, पेट के अल्सर, अम्लपित (Acidity), अनिद्रा आदि रोगों की सम्भावना तम्बाकू उत्पादों के सेवन से बढ़ जाती है।

तम्बाकू की लत के कारण

कभी दूसरों की देखा देखी, कभी बुरी संगत में पड़कर, कभी मित्रों के दबाब में, कई बार कम उम्र में खुद को बड़ा दिखाने की चाहत में, तो कभी धुएँ के छ्ल्ले उड़ाने की ललक में, कभी फिल्मों मे अपने प्रिय अभिनेता को धूम्रपान करते हुए देखकर, तो कभी पारिवारिक माहौल का असर- ये सब तम्बाकू उत्पादों की लत का कारण बनते हैं। अधिकतर लोग किशोरावस्था या युवावस्था में दोस्तों के साथ सिगरेट, गुट्खा, जर्दा, आदि का शौकिया रूप मेँ सेवन करते है शौक कब आदत और आदत कब लत मे बदल जाती है, पता ही नहीं चलता और जब तक पता चलता है तब तक शरीर को बहुत नुक्सान पहुँच चुका होता है।

धूम्रपान, जर्दा, खैनी आदि नशा छोडने के उपाय

1.नशा छोड़्ने का दृढ़ निश्चय करें।

2.यदि नशा एक बार में झटके से छोड़ना मुश्किल लगे तो धीरे धीरे मात्रा कम करते हुए छोड़ें।

3.सभी मित्रों,परिचितों को बता दें कि आपने नशा छोड़ दिया है ताकि वे आपको नशा करने के लिये बाध्य ना करें।

4.डायरी लिखें कि आप कब और कितनी मात्रा मे नशा करते हैं, क्या कारण है जो आप नशा करने के लिये प्रेरित होते हैं।

5.अपने पास सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू, एवम् माचिस आदि रखना छोड दें।

6.खान पान एवं लाइफ स्टाइल में सुधार करें।

नशे छुडवाने की अनोखी मिसाल

हम सभी जानते हैं कि डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी संस्था है जिसमें सबसे ज्यादा मानवता भलाई के कार्य चल रहे हैं उनमें से एक है नशा न करना और नशा छुडवाना , जिसमें डेरा अनुयायियों ने काफी हद तक सफलता प्राप्त की है। बाबा राम रहीम की दिशा निर्देश में यहां अब तक लाखों लोगों के नशे छुडवाऐ जा चुके हैं इसके लिए यहां 7 से 10 दिन तक कैंप भी लगवाया जाता है। यही नहीं बाबा राम रहीम के द्वारा बनाई गई MSG MOVIES में भी देश को नशा मुक्त बनाने के लिए जागरूक किया गया है।

31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस / World No Tobacco Day मनाया जाता है आइये इस अवसर पर हम संकल्प लें कि खुद भी नशा नही करेंगे और अन्य लोगों को भी नशा ना करने के लिये प्रोत्साहित करेंगे।

मई माह में विश्व अस्थमा दिवस आता है। यूं तो कई दिवस आते हैं और हम उनके बारे में चर्चा करके भूल भी जाते हैं, पर अस्थमा दिवस याद रखना जरूरी है, क्योंकि सवाल सांसों का है। अगर इस दिन की गंभीरता को न समझा तो सांसें कभी भी थम सकती हैं। न चाहते हुए भी दुनिया भर में करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो अपने हिस्से की सांस भी पूरी तरह नहीं ले पाते।

आखिर इसकी क्या वजह है, कैसे अस्थमा के रोगियों को कम किया जा सकता है? शहरों में धुएं और धूल के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यही नहीं, पेट्रोल पंप पर काम करने वाला हर दसवां कर्मचारी अस्थमा की चपेट में है। इसकी सबसे प्रमुख वजह है प्रदूषण के बीच कार्य करना। इस रोग को रोका जा सकता है, जरूरत है कुछ सावधानियों की।

अस्थमा अटैक से बचने के टिप्स

  • ज्या‍दा गर्म और नम वातावरण में मोल्ड स्पोर्स के फैलने की सम्भावना अधिक होती है, इसलिए ऐसे वातावरण से बचें। आंधी और तूफान के समय घर से बाहर ना निकलें ।
  • अस्थमा को नियंत्रित रखें और अपनी दवाएं हमेशा साथ रखें।
  • अगर आपका बच्चा अस्थमैटिक है, तो उसके दोस्तों व अध्यापक को बता दें कि अटैक की स्थिति में क्या करना है।
  • हो सके तो अपने पास स्कार्फ रखें जिससे आप हवा के साथ आने वाले पॉलेन से बच सकें।
  • घर के अंदर किसी भी प्रकार का धुंआ ना फैलने दें।
    अल्ग–अल्ग लोगों में दमा के दौरे के कारण भिन्न हो सकते हैं, इसलिए सबसे आवश्यक बात यह है कि आप अपनी स्थितियों को समझें।
  • अस्थमा के मरीज़ों के लिए बरसात से कहीं ज्यादा खतरनाक होती है, धूल भरी आंधी। इसलिए हर संभव प्रयत्न करें की आंधी के समय घर से बाहर न निकलें।
  • एक बार अपनी स्वास्‍थ्‍य स्थितियों को समझने के बाद आपके लिए अस्थमा से बचना आसान हो जायेगा। कुछ सावधानियां बरतकर आप अस्थमा की जटिलता से भी बच सकते हैं और वातावरण के अनुसार स्वास्थ्य को ढाल सकते हैं।

अस्थमा के मरीजों के लिए एक नई दिशा

हम आज कल अखवारों में पढ़ ही रहे हैं कि समाज में एक जानी मानी संस्था डेरा सच्चा सौदा मानवता भलाई के रोज नये कदम उठाती है और अस्थमा को भी रोकने के लिए इन्होंने नए कदम उठाए हैं, जो समाज को जागृत करने में भी सफल हुए हैं।

  • डेरा सच्चा सौदा के मुखिया बाबा राम रहीम की दिशा निर्देश में अस्थमा के मरीजों के लिए आश्रम में कैंप भी लगाए जाते हैं, जिसमें मुफ्त में इन मरीजों का चैकअप और ईलाज किया जाता है।
  • यही नहीं इसके लिए बाबा राम रहीम ने अपनी पहली फिल्म MSG THE MESSENGER में जो कलेक्शन हुई, वो सारा पैसा अस्थमा के मरीजों के लिए परमार्थ के रुप में दे दिया था और समाज में एक नई मिसाल कायम की।
  • बाबा राम रहीम द्वारा बताई गई प्राणायाम की विधि से अस्थमा व फेफड़ों के अन्य रोगों से कईं लोगों सफलतापूर्वक निजात पाई है।
  • डेरा सच्चा सौदा ने समाज को बिमारियों से बचाने के लिए कई महानगरों और शहरों में सफाई अभियान किये।
  • जेल में होने के बावजूद भी बाबा राम रहीम ने समाज को बिमारियों से बचाने के लिए प्रदूषण को रोकने की मुहिम भी चलाई।

इसी प्रकार हमें भी समाज में अस्थमा के मरीज़ों के लिए इस दिन सैमीनार भी लगाना चाहिए जिससे लोगों में जागरूकता उत्पन्न हो। उम्मीद है कि जल्द ही लोगों में जागरूकता उत्पन्न होगी व अस्थमा रोग को नियंत्रित व कम किया जा सकेगा।

सिरसा शहर में आज का माहौल भारी टैफिक से भरपूर रहा और अनेक स्टेटों से अनेक लोगों का आना अभी भी ज़ारी है। सिरसा के लोगों के लिए यह नज़ारा देखना एक आम बात है, पर ऐसा क्या है जो ये शहर इस तरह के नज़ारे देखता रहता है? वजह है वहां पर स्थापित डेरा सच्चा सौदा, जहां पर ये सब लोग एकत्रित हो रहे हैं।

 

कुछ वक़्त से ट्विटर और फेसबुक पर भी ट्रेंड में चल रहे इस विषय पर थोड़ा पढ़ा तो पता लगा की पूरे माह इन्होंने देश भर में गरीब बच्चों को स्टेशनरी का सामान व यूनिफार्म इत्यादि बाँटे हैं, और कुछ जगह पर गरीबों को राशन भी दिया है।

 

अखबारों में यह पढ़ने में आया की पिछले रविवार, 21 अप्रैल को डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने देश भर में अनेक स्टेटों में नामचर्चा मनाई, जिसमे बहुत ज्यादा भीड़ एकत्रित हुई। तब मैने यह जाना कि डेरा सच्चा सौदा के सेवादार स्थापना दिवस मना रहे हैं। भारी तादाद और इतने बड़े पैमाने पर मनाई गयी इस नामचर्चा और उनके द्वारा किये गए मानवता भलाई कार्यों ने उन्हें एक बार फिर अखबारों की सुर्ख़ियों में लाकर खड़ा कर दिया।

 

डेरा सच्चा सौदा का ‘स्थापना दिवस‘ 29 अप्रैल को है और इसी दिन उनके मौजूदा गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 29 अप्रैल 2007 को ‘जाम-ए-इन्सां गुरु का’ भी शुरू किया था। क्यूंकि इस दिन को भंडारे के रूप में मनाया जाता है, तो एक बार फिर से डेरा सच्चा सौदा में उनके सेवादारों का आना शुरू हो गया है और यही वजह है की सिरसा शहर में माहौल किसी त्यौहार के जैसा हो गया है।

 

कल के इस भंडारे पर मुफ्त एलॉपथी मेडिकल कैंप, मुफ्त आयुर्वेदिक मेडिकल कैंप भी लगाए जा रहे हैं, जहाँ पर सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के द्वारा मरीज़ों की मुफ्त जांच की जाएगी, व अति गरीब लोगों को समस्त उपचार व दवाइयां भी मुफ्त दी जाएँगी।

 

यही नहीं, हर बार की तरह इस बार भी गरीबों की मदद के लिए मानवता भलाई के कार्य किये जायेंगे।

 

यह सब देख कर हैरानी भी होती है और कहीं न कहीं इस श्रद्धा के आगे दिल नतमस्तक भी होता है। जिस तरह से ये आज भी इंसानियत को बरकरार रखे हुए हैं, ऐसा शायद ही कभी देखा हो।

डेरा सच्चा सौदा का स्थापना दिवस

★  29 अप्रैल, 1948 को एक फ़कीर, जिन्हें बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के नाम से जाना जाता था, उन्होंने डेरा सच्चा सौदा की नींव रखी थी। इनके बाद इन्होंने अपनी शाह सतनाम जी महाराज को गुरगद्दी सौंपी जिन्होंने शाह मस्ताना जी के लगाए इस बीज को प्रेम से सींचा व सच्चे सौदे का नाम हर तरफ गूंजने लगा। सन 1990 में उन्होंने मौजूदा गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को गद्दीनशीन किया, जिन्होंने मानवता भलाई के अनेक कार्य शुरू किये व समाज से हर बुराई को दूर करने का बीड़ा उठाया।
आज इनके देश व विदेशों में साढ़े छह करोड़ से भी अधिक अनुयायी हैं को इस पूरे माह को हर्षोंउल्लास के साथ मनाते हैं। 29 अप्रैल का यह  दिन भंडारे के रूप में मनाया जाता है।

जाम-ए-इन्सां दिवस

◆ डेरा सच्चा सौदा अपने मानवता भलाई के कार्यों के लिए अनेक विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुका है और देश तथा विदेश में जाना जाता है।  आज से 12 वर्ष पहले 29 अप्रैल 2007 को ही बाबा राम रहीम ने ‘जाम-ए-इन्सां गुरु का’ की शुरुआत की थी, जिससे उन्होंने इंसानियत का सन्देश देते हुए सभी को जात पात व धर्म पर भेद भाव न करने का, व इंसानियत को सबसे ऊपर रखने का संकल्प दिलवाया। इस मुहिम में करोड़ों लोग शामिल हो चुके हैं जो इंसानियत को जीवित रखने के लिए दिन-रात प्रयासरत हैं और समाज में मानवता को एक नया जीवन मिला है। लोगों को पता चला कि दुखियों, लाचारों और बेसहारों का सहारा बन कर जीना ही इंसानी गुण है। किसी के दुख-दर्द को देखकर तड़प उठना ही सच्चे अर्थों में इंसानियत है, और इसी इंसानियत को जीवित रखे हुए है डेरा सच्चा सौदा।

भलाई कार्य

◆ करीब 12 वर्षों में ही डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों ने दुनिया के सामने मानव कल्याणकारी कार्यों के नए कीर्तिमान खड़े कर दिए हैं, फिर चाहे वो गरीबों का घर बना कर देना हो, रक़्तदान हो, सफाई महा-अभियान हो, या मरणोपरांत आँखे दान व शरीरदान। ऐसे 134 मानवता भलाई के कार्य इनके गुरूजी द्वारा चलाये गए हैं। अपने काम धंधों, सुख-आराम की परवाह न करते हुए डेरा अनुयायी दीन-दुखियों की मदद में जुटे रहते हैं।
तो देखना अब यह है की इस बार डेरा सच्चा सौदा के 71वें स्थापना दिवस व ‘जाम-ए-इन्सां गुरु का’ की 12वीं वर्षगांठ पर क्या ख़ास होता है। जानने के लिए ज़रूर पढ़ें हमारा आने वाला अगला आर्टिकल।