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Food Recipe: आम और पूदीने से बनाएँ स्वादिष्ट खीर, जो खाने में लगे लाजवाब और सेहत के लिए बेहद फ़ायदेमंद (Delicious Mango and Mint Kheer: A Delectable and Healthy Dessert)

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आम और पूदीने की खीर: परिचय खीर का इतिहास, खीर का महत्त्व, खीर के प्रकार
आम और पूदीने की खीर के फायदे आम के स्वास्थ्य लाभ, पूदीने के गुण, खीर में इनके लाभ
खीर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री ताजे आम, ताजे पूदीने के पत्ते, दूध, चावल, चीनी, ड्राई फ्रूट्स
आम और पूदीने की खीर बनाने की विधि प्रारंभिक तैयारी, चावल पकाने की विधि, आम का मिश्रण तैयार करना, पूदीना का उपयोग
खीर बनाने के महत्वपूर्ण सुझाव सही सामग्री का चयन, खीर पकाने की विधि में सावधानियाँ, परोसने के तरीके
खीर को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के टिप्स मसाले और उनका उपयोग, गार्निशिंग के तरीके
आम और पूदीने की खीर के पोषण तत्व विटामिन्स और मिनरल्स, कैलोरीज, प्रोटीन
खीर के अन्य वैरिएंट्स चॉकलेट खीर, ड्राई फ्रूट खीर, सैफरन खीर
खीर के साथ क्या परोसें परफेक्ट पेयरिंग्स, भोजन का संतुलन, पेय पदार्थ
आम और पूदीने की खीर के पारंपरिक तरीके भारतीय राज्यों में खीर, पारंपरिक खीर रेसिपीज़
खीर के स्वास्थ्य लाभ पाचन के लिए लाभकारी, ऊर्जा का स्रोत, रोग प्रतिरोधक क्षमता
बच्चों के लिए खीर बच्चों के लिए पौष्टिक, पसंदीदा खीर रेसिपी
व्रत के लिए खीर रेसिपी व्रत में खीर का महत्त्व, व्रत में खीर बनाने का तरीका
डायबिटीज़ मरीजों के लिए खीर शुगर फ्री खीर, स्वास्थ्यवर्धक खीर
खीर का सांस्कृतिक महत्व त्योहारों में खीर, धार्मिक आयोजन में खीर
खीर से जुड़े मिथक और सच्चाई खीर के बारे में सामान्य भ्रांतियाँ, सच्चाई
खीर को सहेजने के तरीके खीर को फ्रिज में रखने के तरीके, खीर को फ्रेश कैसे रखें
खीर के साथ लोकप्रिय व्यंजन भारतीय भोजन, विदेशी भोजन, मिठाईयां
खीर से जुड़ी खास बातें खीर के रोचक तथ्य, प्रसिद्ध खीर रेसिपीज़
खीर बनाने में होने वाली आम गलतियाँ खीर को बिगाड़ने वाली चीज़ें, सुधार के तरीके
खीर का अर्थशास्त्र खीर बनाने की लागत, बजट फ्रेंडली खीर
खीर के परंपरागत परिदृश्य पुराने समय की खीर, वर्तमान में खीर की लोकप्रियता
खीर के लिए बाजार में उपलब्ध उत्पाद बाजार में मिलने वाले खीर के मिक्स, खीर बनाने की मशीनें
खीर के साथ खानपान के टिप्स संतुलित आहार, हेल्दी ईटिंग
FAQ: आम और पूदीने की खीर
Conclusion

आम और पूदीने से बनाएँ स्वादिष्ट खीर, जो खाने में लगे लाजवाब और सेहत के लिए बेहद फ़ायदेमंद (Make Delicious Mango and Mint Kheer: A Tasty and Healthy Dessert)

खीर भारतीय मिठाइयों में एक प्रमुख स्थान रखती है। यह सिर्फ़ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद होती है। आम और पूदीने से बनने वाली खीर एक अनोखा संयोजन है, जो न सिर्फ़ आपके स्वाद को संतुष्ट करता है बल्कि इसमें पौष्टिक तत्वों की भी भरमार होती है। इस लेख में हम जानेंगे कैसे आम और पूदीने से स्वादिष्ट खीर बनाई जा सकती है और इसके स्वास्थ्यवर्धक गुण क्या-क्या हैं।

आम और पूदीने की खीर: परिचय खीर, जिसे विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, एक लोकप्रिय भारतीय मिठाई है। इसे दूध, चावल और चीनी के साथ पकाया जाता है और इसमें कई प्रकार के मसाले और मेवे मिलाए जाते हैं। आम और पूदीने की खीर एक विशेष प्रकार की खीर है जिसमें आम की मिठास और पूदीने की ताजगी का अनोखा मेल होता है।

आम और पूदीने की खीर के फायदे आम और पूदीने की खीर केवल स्वाद में ही अद्वितीय नहीं होती, बल्कि इसके अनेक स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। आम में विटामिन ए, सी और फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। पूदीना पाचन के लिए बेहद लाभकारी होता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो शरीर को विषमुक्त रखने में मदद करते हैं।

खीर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री खीर बनाने के लिए ताजे आम, ताजे पूदीने के पत्ते, दूध, चावल, चीनी और ड्राई फ्रूट्स की आवश्यकता होती है। इन सामग्रियों का सही अनुपात खीर को लाजवाब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आम और पूदीने की खीर बनाने की विधि सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर आधे घंटे के लिए भिगो दें। फिर दूध को उबालें और उसमें चावल डालकर धीमी आंच पर पकने दें। जब चावल अच्छी तरह से पक जाएं तो उसमें प्यूरी किए हुए आम और बारीक कटे पूदीने के पत्ते डालें। इसमें चीनी मिलाएं और धीमी आंच पर पकाते रहें जब तक खीर गाढ़ी न हो जाए। अंत में कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर सर्व करें।

खीर बनाने के महत्वपूर्ण सुझाव खीर बनाते समय ताजे और अच्छे गुणवत्ता वाले आम और पूदीने का उपयोग करें। दूध को धीमी आंच पर उबालें ताकि वह अच्छी तरह से गाढ़ा हो सके। खीर को लगातार हिलाते रहें ताकि वह बर्तन के तले में चिपके नहीं।

खीर को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के टिप्स खीर में केसर और इलायची पाउडर मिलाने से उसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इसे ठंडा करके सर्व करने पर इसका स्वाद और भी अधिक लाजवाब हो जाता है। गार्निश के लिए ताजे आम के टुकड़े और पूदीने की पत्तियाँ उपयोग करें।

आम और पूदीने की खीर के पोषण तत्व इस खीर में विटामिन्स, मिनरल्स, कैलोरीज और प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है, जो आपके शरीर के लिए आवश्यक पोषण प्रदान करती है। आम और पूदीने के साथ दूध और चावल का संयोजन इसे एक संपूर्ण आहार बनाता है।

खीर के अन्य वैरिएंट्स खीर को और भी रोचक बनाने के लिए आप इसमें चॉकलेट, ड्राई फ्रूट्स या सैफरन का उपयोग कर सकते हैं। प्रत्येक वैरिएंट का अपना अलग ही स्वाद और महत्त्व होता है।

खीर के साथ क्या परोसें खीर को खाने के बाद मिठाई के रूप में परोसा जा सकता है। इसे खाने के साथ या बिना भोजन के भी खाया जा सकता है। खीर के साथ किसी भी हल्के स्नैक या पेय का संयोजन इसे और भी अधिक मजेदार बनाता है।

आम और पूदीने की खीर के पारंपरिक तरीके  भारत के विभिन्न राज्यों में खीर को विभिन्न प्रकार से बनाया और परोसा जाता है। हर राज्य की अपनी खासियत होती है और उनके पारंपरिक तरीकों से खीर का स्वाद भी अलग होता है।

खीर के स्वास्थ्य लाभ खीर में मौजूद आम और पूदीना पाचन के लिए लाभकारी होते हैं। यह एक ऊर्जा का स्रोत होता है और इसमें मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

बच्चों के लिए खीर बच्चों के लिए खीर एक पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प है। इसमें मौजूद दूध और चावल बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

व्रत के लिए खीर रेसिपी व्रत के दौरान खीर एक महत्वपूर्ण व्यंजन होता है। इसे व्रत के अनुकूल बनाने के लिए चीनी की जगह गुड़ का उपयोग किया जा सकता है और इसे बिना चावल के भी बनाया जा सकता है।

डायबिटीज़ मरीजों के लिए खीर डायबिटीज़ मरीजों के लिए शुगर फ्री खीर एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें चीनी की जगह प्राकृतिक मिठास देने वाले तत्वों का उपयोग किया जाता है।

खीर का सांस्कृतिक महत्व खीर का भारतीय त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में विशेष स्थान होता है। इसे प्रसाद के रूप में भी परोसा जाता है।

खीर से जुड़े मिथक और सच्चाई खीर के बारे में कई मिथक प्रचलित हैं। इनमें से कई मिथक सत्य पर आधारित नहीं होते, और सच्चाई जानना महत्वपूर्ण होता है।

खीर को सहेजने के तरीके खीर को लंबे समय तक फ्रेश रखने के लिए उसे फ्रिज में रखा जा सकता है। इसे सहेजने के लिए उचित तापमान और सही बर्तन का उपयोग करना चाहिए।

खीर के साथ लोकप्रिय व्यंजन खीर को विभिन्न प्रकार के भारतीय और विदेशी व्यंजनों के साथ परोसा जा सकता है। इसे मिठाई के रूप में भी परोसा जाता है।

खीर से जुड़ी खास बातें खीर के बारे में कई रोचक तथ्य हैं, जिन्हें जानना और समझना आवश्यक होता है। विभिन्न प्रकार की प्रसिद्ध खीर रेसिपीज़ भी इसमें शामिल हैं।

खीर बनाने में होने वाली आम गलतियाँ खीर बनाते समय कई बार लोग कुछ आम गलतियाँ कर बैठते हैं। इन गलतियों से बचने के उपाय जानना महत्वपूर्ण होता है।

खीर का अर्थशास्त्र खीर बनाने की लागत और इसे बजट फ्रेंडली बनाने के तरीकों के बारे में जानना भी आवश्यक होता है।

खीर के परंपरागत परिदृश्य  खीर का परंपरागत महत्व और वर्तमान में इसकी लोकप्रियता के बारे में जानना रोचक होता है।

खीर के लिए बाजार में उपलब्ध उत्पाद आजकल बाजार में खीर बनाने के लिए कई मिक्स और मशीनें उपलब्ध हैं। इनका उपयोग खीर बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।

खीर के साथ खानपान के टिप्स संतुलित आहार और हेल्दी ईटिंग के लिए खीर को सही प्रकार से परोसना और खाना महत्वपूर्ण होता है।

FAQs

  • आम और पूदीने की खीर कैसे बनाई जाती है? आम और पूदीने की खीर बनाने के लिए पहले चावल को दूध में पकाया जाता है। फिर इसमें प्यूरी किए हुए आम और पूदीने के पत्ते मिलाए जाते हैं। अंत में चीनी और ड्राई फ्रूट्स डालकर पकाया जाता है।
  • आम और पूदीने की खीर के क्या-क्या फायदे हैं? आम और पूदीने की खीर में विटामिन्स और मिनरल्स की उच्च मात्रा होती है। यह पाचन के लिए लाभकारी होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
  • खीर को सहेजने के तरीके क्या हैं? खीर को फ्रिज में रखा जा सकता है। इसे फ्रेश रखने के लिए उचित तापमान और सही बर्तन का उपयोग करना चाहिए।
  • डायबिटीज़ मरीजों के लिए खीर कैसे बनाई जाती है? डायबिटीज़ मरीजों के लिए शुगर फ्री खीर बनाई जाती है। इसमें चीनी की जगह प्राकृतिक मिठास देने वाले तत्वों का उपयोग किया जाता है।
  • खीर को और अधिक स्वादिष्ट कैसे बनाया जा सकता है? खीर में केसर और इलायची पाउडर मिलाने से उसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इसे ठंडा करके सर्व करने पर इसका स्वाद और भी अधिक लाजवाब हो जाता है।
  • खीर के साथ क्या परोसें? खीर को खाने के बाद मिठाई के रूप में परोसा जा सकता है। इसे खाने के साथ या बिना भोजन के भी खाया जा सकता है।

आम और पूदीने की खीर एक अद्वितीय और स्वास्थ्यवर्धक मिठाई है जो न सिर्फ़ आपके स्वाद को संतुष्ट करती है बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती है। इसे बनाने की प्रक्रिया सरल है और इसमें उपयोग होने वाले सभी तत्व आसानी से उपलब्ध हैं। यह मिठाई विभिन्न अवसरों पर परोसी जा सकती है और इसका सांस्कृतिक महत्व भी अत्यधिक है। इसलिए, अगली बार जब आप कोई मीठा बनाने का सोचें, तो आम और पूदीने की खीर को अवश्य आजमाएँ।

When and Why is the International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking Celebrated?

(नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब और क्यों मनाया जाता है )

नशा इंसान की जिंदगी दीमक की तरह पूरी तरह खराब कर देता है। यह केवल नशा करने वाले इंसान तक असर नहीं करता बल्कि नशे के कारण, परिवार समाज, देश यहां तक की इसका असर पूरे विश्व स्तर पर दिखता है।

नशे की चपेट में आज देश के बच्चे, बुजुर्ग, युवा आदि सब आए हुए हैं। नशे के कारण आज की युवा पीढ़ी अपने भविष्य को खराब करने में लगी हुई है। यहां तक कि महिलाएं भी नशे के उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। मादक पदार्थों के सेवन ने आज पूरा विश्व को खोखला बना दिया है। नशा केवल एक स्तर तक सीमित नहीं रहा। नशीली दवाओं के रूप में आज युवा पीढ़ी नशे की आदि बनी हुई हैं।

विश्व में बढ़ती नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और अवैध तस्करी के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरोध में” अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।

आइए जानते हैं इसकी शुरुआत कब हुई और सरकार का इसमें क्या योगदान है। जो इंसान नशे का आदी हो जाता है उसे इसकी लत छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। नशा पूरे परिवार की खुशियां छीन लेता है।

History and Themes

(इतिहास और विषय)

नशे के खिलाफ और नशीली दवाओं के अवैध दुरुपयोग को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसंबर 1987 को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाने की शुरुआत की। तब से हर वर्ष 26 जून को यह दिन लोगों में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाने लगा। हर साल यह दिन एक विषय के तहत मनाया जाता है।

2024 की थीम

इस वर्ष नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) 2024 का विषय है – “नशीली दवाओं और अवैध तस्करी को रोकने के साक्ष्य पर जोर दिया जाए और उसकी रोकथाम में कदम उठाया जाए।” नशे को रोकने के लिए जरूरी है कि बढ़ते नशे के कारणों पर गौर करें और उसकी रोकथाम में कदम उठाएं और उसके लिए लोगों में जागरूकता फैलाएं।

Objectives and Significance

(उद्देश्य और महत्त्व)

इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर देश व विश्व से नशे को जड़ से उखाड़ फेंकना है। नशे रूपी दैत्य को जड़ से खत्म कर समाज में अच्छाई को बढ़ाना ही इस दिन को मनाने का उद्देश्य है।

नशा देश से खत्म हो और हर घर खुशहाल जीवन व्यतीत करे इसी महत्व के तहत यह दिन विश्व स्तर पर एक विषय के साथ मनाया जाता है।

Reasons for Increasing Drug Addiction in Society and Country

(समाज और देश में नशा बढ़ने के कारण)

बढ़ते नशे का मुख्य कारण गरीबी और अनपढ़ता है। गरीबी के कारण जुड़ी तनाव भरी जिंदगी। ज्यादातर इंसान इसका हल खोजने की बजाय नशे में लिप्त होकर अपनी जिंदगी और खराब करना शुरू कर देते हैं।

Government’s Contribution in Creating a Drug-Free Society

(नशा मुक्त समाज बनाने में सरकार का योगदान)

नशीली दवाओं के सेवन से इंसान को हो रहे शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए सरकार भी कदम उठा रही है। नशा इंसान को कुछ समय के लिए तनाव मुक्त कर, हमेशा के लिए इसकी बुरी लत का आदी बना देता है। जिसके कारण बाद में बहुत से घर परिवार बिखर जाते हैं। नशे के अवैध व्यापार को रोकने के लिए सरकार ने कानून बनाए हैं।

भारत सरकार की पहल

नशे को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए भारत सरकार द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान, नशीली दवाओं की मांग में गिरावट हो इसके लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए राष्ट्रीय कोष आदि।

यही नहीं नशे के खिलाफ वैश्विक स्तर पर भी अनेकों अभियान कार्यरत हैं। जैसे कि:

  • सिंगल कन्वेंशन ऑन नारकोटिक्स ड्रग्स, 1961
  • कन्वेंशन ऑन साइकोट्रोपिक सब्सटेंस, 1971

इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र प्रत्येक वर्ष वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट का प्रकाशन भी करता है। ताकि इसके आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए नशे के खिलाफ लोगों में जागरूकता अभियान चलाते रहें।

आइए हम भी नशा मुक्त भारत बनाने में अपना योगदान दें और इस विश्व को नशा मुक्त बनाएं। (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking)

योग शब्द संस्कृत के युज शब्द से बना है जिसका अर्थ है दो या दो से अधिक चीजों का आपस में जुड़ना। यह एक ऐसी क्रिया है जो शरीर में शारीरिक व मानसिक संतुलन को बनाने में सहायता करती हैं।

क्या है योग? (What is Yoga?)

योग एक प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्रिया है, जिससे हम अपने शरीर में लचीलापन, शक्ति और अपने श्वास पर नियंत्रण करके अपने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।

“सुबह हो या शाम,
यदि व्यक्ति करें योग, तो निकट ना आएगा आपके कोई भी रोग।”

कैसे हुई अंतरराष्ट्रीय Yoga Day की शुरुआत?

प्रत्येक वर्ष 21 जून को International Yoga Day मनाया जाता है क्योंकि उत्तरी गोलार्ध में यह दिन सबसे लंबा होता है और योग से व्यक्ति की दीर्घायु होती है। 11 दिसंबर 2014 को 21 जून के दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्य थे। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 में पूरे विश्व में मनाया गया था। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके संबोधन के दौरान अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा हुई थी। इसके बाद हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने यूनाइटेड नेशनल जनरल असेंबली को एड्रेस किया और योगा के लाभ के बारे में बताया। तब से 2015 से यूनाइटेड नेशंस हर साल 21 जून को इंटरनेशनल योगा दिवस मनाता है। देखा जाए तो लगभग यूनाइटेड नेशन के सभी देशों ने योगा को अपना लिया है।

Yoga Day and Yoga मनाने का उद्देश्य

योग करने से मनुष्य जीवन में चिंता, तनाव और परेशानियों को खत्म करने की समर्था बढ़ जाती है, जिससे व्यक्ति स्वस्थ व चिंताओं से मुक्त जीवन जी सकता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को योग से होने वाले लाभों के बारे में जागरूक करना है और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित करना है।

इस साल की थीम

वर्ष 2024 की थीम है “स्वयं और समाज के लिए योग”। इस वर्ष भारत समेत दुनियाभर में दसवें योग दिवस का आयोजन किया जा रहा है ताकि लोगों को योग के महत्व के बारे जागरूक किया जा सके।

योग कितने समय करना चाहिए?

विशेषज्ञ का मानना है कि रोजाना 30 मिनट योग करना चाहिए, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। बाद में इसके समय को आप अपनी क्षमता व सहुलियत के हिसाब से बढ़ा सकते हैं।

योग के साथ ध्यान

योग और ध्यान को विश्राम का एक अच्छा स्रोत माना जाता है, जो रक्तचाप को कम करता है। यदि योग के साथ ध्यान को किया जाए तो और बेहतर नतीजे मिलते है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चिंताओं से छुटकारा पाने और सोच को सकारात्मक बनाने के लिए योग के साथ ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

योग करने का सही समय और कब करें योग?

योग सुबह 4-7 बजे के बीच करना चाहिए, नहीं तो आप सूर्यास्त के समय भी योग कर सकते हैं। योग खाना खाने से पहले करना चाहिए या तो खाने के 3-4 घंटे बाद करना चाहिए और योग करते समय कपड़े भी ढीले पहनने चाहिए।

योग करने के लाभ

योग करने से शरीर में कई रोगों का खात्मा हो जाता है और व्यक्ति अपने आप को तंदुरुस्त महसूस करता है। माना जाता है कि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग व मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए योग बहुत लाभदायक काम करता है।

  • योगा मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक बीमारी का इलाज करने के लिए सही और स्टीक है।
  • हमारे अंदर के तनाव को दूर करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
  • योग हमारे शरीर की बीमारियों को दूर करता है।
  • योग एक ऐसा रास्ता है जिससे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
  • परिवार के साथ योग करने से आप सुरक्षित रहेंगे और यह यादगार भी होगा।
  • योग शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करता है।
  • योग ही एक ऐसा रास्ता है जिससे आपका मन स्वतंत्र होता है।
  • योगा आपके आंतरिक बाहरी और भावनात्मक दर्द को दूर करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है।

किन लोगों को योग नहीं करना चाहिए?

गर्भवती महिलाओ को, जिस व्यक्ति को कोई भी रोग है जैसे कि सांस की समस्या व अन्य कोई भी समस्या होने पर आप डॉक्टर की सलाह लेकर योग कर सकते हैं। यदि आप पहली बार योग कर रहे हैं तो किसी की निगरानी में रहकर योग करें।

निष्कर्ष

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी को योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। योग करने से दवाओं से छुटकारा मिलता है और शरीर सेहतमंद रहता है।

हर बच्चे के जीवन में उसके पिता का रूप अमृत के समान होता है (The Father’s Role in Every Child’s Life is Like Ambrosia)

हर बच्चे के जीवन में उसके पिता का रूप अमृत के समान होता है। पिता केवल एक शब्द ही नहीं है, बल्कि यह आशाओं व उम्मीदों से भरा हुआ एक आसमान है। पिता शब्द सुनते ही बच्चों के चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान आ जाती है। मां के बारे में तो अक्सर बहुत कुछ कहा जाता है, जिसकी वह हकदार भी होती है, परंतु पिता का महत्व भी हमारे जीवन में माता से कम नहीं होता है। एक पिता ही है, जो सुरक्षा कवच बन कर अपने परिवार की रक्षा करता है। वह कभी अपने बच्चों व परिवार के किसी भी जीव पर कोई आंच नहीं आने देता।

संसार के हर पिता के लिए दो पंक्तियां

मेरी शोहरत, मेरी इज़्ज़त, मेरा सम्मान है मेरे पापा
मेरी ताकत, मेरी पूँजी, मेरी पहचान है मेरे पापा..!!

हमारी सारी पूंजी, ताकत, हमारी पहचान हमारे माता-पिता से है। हम सभी अपने माता-पिता के बिना अधूरे है। जैसे कि हमारी एक बाजू न होने व शरीर का कोई अंग न होने पर हम अपने आप को लाचार व अपंग महसूस करते हैं, ठीक उसी तरह से माता और पिता किसी एक के न होने से हमारी जिंदगी अधूरी है। क्योंकि किसी ने सच ही कहा है:

पसीने में यदि माँ डूबती है, तो धूप में पिता तपता है, तब कहीं जाकर बच्चा लाड़-प्यार से पलता है।

पिता का महत्व (Importance of father)

पिता न केवल हमारे पिता की ही भूमिका निभाता है, बल्कि एक अच्छे दोस्त व गाइड की तरह है। जैसे मां बच्चे को ममता की छांव देती है, तो पिता बच्चे को जिंदगी जीना सिखाता है। बड़े नसीबों वाले होते‌ हैं वो‌ लोग, जिनके सिर पर पिता का हाथ होता है। उनके कहने से पहले ही उनकी हर ज़िद पूरी हो जाती है, क्योंकि उनके साथ एक पिता खड़ा होता है।

Father’s Day कब मनाया जाता है (When is Father’s Day Celebrated?)

जिस तरह से माँ को सम्मान देने के लिए हम मदर्स डे मनाते हैं, उसी प्रकार पिता को सम्मान देने के लिए हर साल जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। 2024 में इसे 16 जून को मनाया जा रहा है।

Father’s Day मनाने की शुरुआत (The Beginning of Father’s Day)

सबसे पहले फादर्स डे की शुरुआत 5 जुलाई 1908 को पश्चिमी वर्जीनिया के फेयरमाउंट में पहली बार मनाकर की गई थी। यह दिवस पश्चिमी वर्जीनिया के एक दुर्घटना में मारे गए उन 250 पिताओं को 6 दिसम्बर 1907 में सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।

Father’s Day का इतिहास (The History of Father’s Day)

फादर्स डे मनाने की प्रेरणा 1909 में मदर्स डे को मनाने से मिली थी। स्पोकेन शहर के वॉशिंगटन ने सोनारा डॉड ने अपने पिता की स्मृति में इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। इसके बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन द्वारा 1916 में इस दिवस को मनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी। इसके बाद राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने 1966 में फादर्स को सम्मान देने के लिए तीसरे रविवार को मनाने की स्वीकृति दी। परन्तु इतिहासकारों में इस पर एकमत नहीं है।

Father’s Day मनाने का उद्देश्य (The Purpose of Celebrating Father’s Day)

दुनिया भर में फादर्स डे मनाने का उद्देश्य एक पिता का हमारे जीवन में महत्व और यह दिन पिता को धन्यवाद व सम्मानित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

हमारे जीवन में पिता का महत्व (The Significance of a Father in Our Lives)

हमारे जीवन में पिता का महत्व माता से कदापि कम नहीं है। माता अगर घर को सजाती-संवारती है, तो पिता घर को चलाता है। पिता की कमाई से ही घर में खुशियों का आगमन होता है।

  • बच्चों के उज्जवल भविष्य की नींव रखने में पिता का बहुत बड़ा योगदान होता है। प्रत्येक पिता का सपना होता है, उनके बच्चों को किसी तरह की मुसीबत का सामना न करना पड़े। कई तरह के बलिदान देकर वह अपने बच्चों का हर सपना पूरा करता है। पिता अपने बच्चों को किसी भी परेशानी में नहीं देख सकता। अपने पिता को सम्मान देने के लिए इस खास दिन को अवश्य मनाएं।
  • हमारे माता-पिता हमेशा दुखों को स्वयं सहते हैं और हमें केवल खुशियां देते हैं। वो हमें जीवन में हर खुशी का एहसास दिलाते है। तभी हम अपने सपनों को पूरा कर पाते हैं। इसके बदले में हम सभी का भी यह कर्तव्य बनता है की हमें अपने पिता के संघर्षों को कभी नहीं भूलना चाहिए और एक अच्छा इंसान बनने के साथ ही एक अच्छी संतान भी बनना चाहिए।
  • हमें अपने माता-पिता को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। क्योंकि उन्हीं की बदौलत आज हम सभी ने अपने जीवन में सफलताएं प्राप्त ही है। हमारी सफलता उनके संघर्ष और विचारों का ही फल है।

एक आदर्श पिता: सच्चा मार्गदर्शक (An Ideal Father: A True Guide)

एक आदर्शवादी पिता अपने बच्चो को हर अच्छा व नेक कार्य करना सिखाता है। वह अपने बच्चों को ज्ञानयोगी व कर्मयोगी बनाता है। बच्चों को उनकी प्रतिभा को पहचानने में मदद करता है। बच्चों के सपनों को अपना समझ कर उन्हें पूरा करने में अपनी पूरी कोशिश लगा देता है। परंतु बच्चों के सपनों को उनसे अलग नहीं होने देता। एक पिता की डांट बच्चों को निखारती है। पिता समय का सदुपयोग करना सिखाता है। धन का इस्तेमाल करना और उसका सदुपयोग करना सिखाता है।

बच्चों की हर छोटी-बड़ी जरूरतों को पिता ही पूरी करता है। फिर चाहे इसके लिए उसे अपनी आवश्यकताएं नजरअंदाज क्यों न करनी पड़ी हो। वह कभी अपने दु:खों को बच्चों पर जाहिर नहीं होने देता। पिता सचमुच पर्वत सा दृढ़ होता है।

रुहानियत के पिता (Spiritual Fathers)

लेकिन जब बात आती एक ऐसे रुहानियत के पिता की जो, इस जहां में तो क्या दोनों जहानों में अपने बच्चे के साथ रहता है, उनकी पूरी संभाल करता है, जो हमारे सभी कर्मों का बोझ अपने ऊपर उठाता है, जन्म मरण के चक्र से आजाद कराता है, हम उनका ऋण अनेकों जन्म ले कर भी नहीं चुका सकते। आज हम बात कर रहे हैं, रूहानियत के मसीहा की जिन्हें लोग गुरु पापा कहकर भी पुकारते है।

ऐसे रुहानी पिता जो एक-दो नहीं बल्कि 6 करोड़ लोगों के मार्गदर्शक (A Spiritual Father Who Guides Millions)

जी हां, आज हम बात कर रहे है, ऐसे पिता की जो एक-दो नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के मार्गदर्शक हैं। जिनको करोड़ों लोग पिताजी, गुरु पापा कहकर पुकारते है‌। जिन्होंने करोड़ों लोगों को सच्चाई व इंसानियत का पाठ पढ़ाया है व उन्हें एक सच्चा व अच्छा इंसान बनाया। ऐसे पिता, ऐसे गुरु जिनका नाम बहुत ही अदब सत्कार से लिया जाता है। वह कोई और नहीं बल्कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख ”पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां” है। पूज्य गुरु जी को लाखों लोग अपना रूहानी गुरु मानने के साथ-साथ पिता भी मानते हैं।

फिर चाहे वह बच्चा हो, अधेड़ हो या बुज़ुर्ग, पूज्य गुरु जी को सभी लोग पिता जी कहकर पुकारते हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां भी अपने सभी अनुयायियों को अपने ही बच्चे मानते हैं। एक पिता की भांति ही उनकी सभी समस्याओं का समाधान करते हैं। उनसे नि:स्वार्थ भावना से प्रेम करते हैं।

  • आज पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम जी की पावन शिक्षा से डेरा सच्चा सौदा संस्था द्वारा 165 मानवता भलाई के कार्य पूरी लग्न व ईमानदारी से किए जा रहे है।
  • आज करोड़ो लोग अपने गुरु पापा के मात्र एक आह्वान से नशा, वैश्यावर्ती, ठगी, शराब, माँसाहार व रिश्वतखोरी जैसी सामाजिक बुराईयों को त्याग कर चुके है और आज एक खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
  • पूज्य गुरु Saint Dr. MSG से अब तक लाखों लोग गुरूमंत्र की अनमोल दात प्राप्त कर चुके है। जिसका निरंतर अभ्यास करने से लोगों के शारीरिक, मानसिक व सामाजिक रोग जड़ से खत्म हो चुके है।
  • आपको बता दें, दुनियावी पिता केवल इसी जहान में अपने बच्चे का ध्यान रख सकता है। किंतु एक सच्चा गुरु अपने बच्चों का दोनों जहां का सच्चा साथी होता है, वह कभी भी अपने बच्चे को अकेला नहीं छोड़ते।

हर कला में निपुण गुरु पापा (A Multi-talented Guru Papa)

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ दुनिया के हर अच्छे नेक क्षेत्रों का भी ज्ञान रखते हैं:

  • पूज्य गुरु जी से गुरुमंत्र लेकर करोड़ों लोग अपना लोक परलोक संवार चुके हैं। आज ये लोग अपनी बुराइयों का त्याग कर एक खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
  • पूज्य गुरु जी ने समाज को नशामुक्त बनाने व युवाओं को नशे जैसी तमाम बुराईयों से दूर करने व आध्यात्म से जोड़ने के लिए 5 फिल्में भी बनाई हैं। उनका मानना है कि आज का युवा फिल्में ज्यादा देखता है, सत्संग को सुनना पसंद नहीं करता। इसलिए पूज्य गुरु जी ने युवा पीढ़ी को उन्हीं की भाषा में समझाने के लिए फिल्मी जगत का सहारा लिया। पूज्य गुरु जी के जीवन का एकमात्र उद्देश्य है, लोगों की बुराइयां छुड़वाकर उनको राम के नाम से जोड़ना है‌।

हजारों खिलाड़ियों के पापा कोच (Coach of Thousands of Players)

पूज्य गुरु जी अब तक 32 ननल गेम खेल चुके हैं। वह शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थानों के हजारों खिलाड़ियों को कोचिंग दे चुके हैं। हजारों खिलाड़ियों ने पूज्य गुरु जी से विभिन्न खेलों की तरकीबें व कोचिंग प्राप्त की है, जो आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक और पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। ये खिलाड़ी प्यार से पूज्य गुरु जी को अपना पापा कोच कहते हैं। हैरानी की बात है कि इन एथलीटों को अन्य किसी पेशेवर द्वारा प्रशिक्षित नहीं किया गया। पूज्य गुरु जी द्वारा ऐसे अंतर्राष्ट्रीय खेल के गुर सिखाए गए हैं, जो सभी को हैरान कर देते हैं।

  • योगा में भी पूज्य गुरु जी का कोई सानी नहीं है, उनके द्वारा प्रशिक्षित किए गए बच्चे‌ नेशनल व इंटरनेशनल लेवल पर कीर्तिमान स्थापित कर आए दिन नए मुकाम हासिल कर रहे हैं। पूज्य गुरु जी एकाग्रता को बढ़ाने के लिए गुरुमंत्र के साथ प्राणायाम करने की सलाह देते हैं, जो बहुत फायदेमंद है।

दलितों का उत्थान

पूज्य गुरु जी ने नि:स्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करने के लिए लाखों लोगों को प्रेरित करने के साथ-साथ दलितों का उत्थान किया। समाज में ऐसे कई वर्ग हैं, जिन्हें तिरस्कार की दृष्टि से देखा जाता है। उनके उत्थान के लिए गुरु जी आगे आए और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जैसे:

  • वेश्यावृत्ति में फंसी महिलाओं को गुरु जी ने बचाया और उनका इलाज करवा कर बेटी के रूप में गोद लेकर उनकी शादी अच्छे परिवारों में करवाई और उनकी नर्क भरी जिंदगी को स्वर्ग बनाया।
  • असभ्य कहलाने वाले छत्तीसगढ़ के आदिवासी, जो पूरी तरह से असभ्य थे। पूज्य गुरुजी ने करीब डेढ़ साल तक चले एक कार्यक्रम में उन्हें ना केवल आत्मनिर्भर बनाया बल्कि वे पूज्य गुरु जी के पावन प्रयासों से सभ्य भी बन गए। जो आज पूज्य गुरु जी को अपना आध्यात्मिक पिता मानते हैं।
  • किन्नरों को समाज में थर्ड जेंडर का दर्जा दिलवाया। अब उन्हें भी समाज का हिस्सा माना जाता है। वे भी खून दान कर सकते हैं और मानव कल्याण के कार्य कर सकते हैं।

बेसहारा व अनाथ बच्चों को गोद लेना

ऐसी बेटियां व बेटे जिनके मां बाप ने उनको मरने के लिए गंदगी के ढेर पर फेंक दिया या जो अनाथ थे। पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी ने ऐसे बच्चों को गोद लिया और माता-पिता का नाम देकर उनका जीवन ही बदल दिया और इस तरह कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनता को शिक्षित करने और नवजात बेटी, बेटियों को न मारने की शिक्षा दी। इनमें से कई बेटे, बेटियां शानदार अंक हासिल कर, खेलों व योगा में राष्ट्रीय स्तर पर चैंपियनशिप जीतकर अपनी काबिलियत को साबित कर चुके हैं। ये बेटियां, बेटे गुरु जी को अपना आध्यात्मिक पिता व जीवन में सफल होने के लिए अंतिम प्रेरणा मानते हैं।

इस बार Father’s Day कैसे मनाएं (How to Celebrate Father’s Day This Time)

किसी भी त्यौहार को एक अच्छे तरीके से मनाएं। जैसे कि डेरा सच्चा सौदा के स्वयंसेवक कोई भी विशेष त्यौहार पूज्य संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा के मार्गदर्शन से 165 मानवता भलाई कार्य करके मनाते हैं। जैसे- रक्तदान, भोजन दान, जरूरतमंद का सहारा बनना, वृक्ष लगाना इत्यादि। हमें लगता है कि फादर्स डे मनाने का सबसे अच्छा तरीका यही है। इससे एक तो सारी सृष्टि का भला होता है, दूसरा उस व्यक्ति को सम्मान दें जिसके लिए यह दिन है। अगर इस कलयुग में बच्चे अच्छे कर्म करते हैं, तो पिता तो खुद ही अपने आप पर गर्व महसूस करेंगे कि उनके बच्चे ऐसे नेक कार्य कर रहे है।

निष्कर्ष

भाग्यशाली होते हैं, वे लोग जिनको ऐसे पिता के रूप में ऐसे गुरु पिता मिले, जिन्होंने करोड़ों बच्चों को नेक शिक्षा दी। जिस पर चल कर आज करोड़ों लोग मानवता भलाई के कार्य कर मिसाल कायम कर रहें है। हमारे गुरु पापा के हमारे ऊपर अनगिनत परोपकार हैं, जो मां बाप से बढ़ कर हमारी संभाल कर रहे हैं। ऐसे रूहानियत के पिता का ऋण हम लाखों जन्म ले कर भी नहीं चुका सकते। हम सभी आपको व पूज्य गुरु जी को इस फादर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं।

Father’s Day का इतिहास और इसे क्यों मनाएं खास

पिता का महत्व

पिता एक ऐसा शब्द है, जो हर इंसान की जिंदगी से जुड़ा है। पिता के बिना जीवन अधूरा है। जन्म से लेकर जब तक बच्चा खुद पर निर्भर नहीं हो जाता, एक पिता अपने बच्चों का साथ निभाता है। लेकिन एक समय ऐसा भी आता है जब बच्चे बेशक बाप का साथ नहीं चाहते, पर पिता फिर भी अंत तक साथ निभाता है। पिता के बिना जीवन की कल्पना अधूरी होती है।

Father’s Day की शुरुआत

फादर्स डे की शुरुआत 20वीं सदी में हुई थी। पहली बार फादर्स डे 19 जून 1910 को वाशिंगटन के स्पोकेन में मनाया गया था। इस दिन को सोनौरा स्मार्ट डोड ने अपने पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट को सम्मानित करने के लिए चुना था। विलियम जैक्सन स्मार्ट एक गृहयुद्ध के अनुभवी थे और 6 बच्चों का अकेले पालन-पोषण करते थे। सोनौरा ने अपने पिता के समर्पण और त्याग को मान्यता दिलाने के लिए यह दिन चुना।

1924 में राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज ने पिता को सम्मानित करने के उद्देश्य का समर्थन किया। इसके बाद 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने फादर्स डे को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मान्यता दी। तभी से हर साल जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है।

Father’s Day का महत्व

फादर्स डे हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। यह दिन पिता के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। पिता की अहमियत हर रिश्ते से ऊपर है, पिता के बराबर कोई नहीं। एक पिता अपने बच्चों के लिए जो कुछ करता है, वह अनमोल होता है। पिता अपने परिवार के प्रति सभी फर्ज बखूबी निभाते हैं, समाज में अपने बच्चों को हर अधिकार दिलाते हैं, और बच्चों को अच्छे संस्कार देकर एक अच्छे इंसान बनाते हैं।

Father’s Day को कैसे मनाएं

फादर्स डे का हर इंसान बेसब्री से इंतजार करता है। वैसे तो हर दिन ही पिता के सम्मान में मनाना चाहिए, लेकिन

Father’s Day विशेष होता है। इस दिन अपने पिता को खुश रखने के लिए कुछ खास करें:

  1. मनपसंद जगह पर घूमने जाएं: अपने पिता की मनपसंद जगह पर घूमने जाएं और वहां का मनपसंद खाना खाएं।
  2. मोहल्ले में पार्टी का आयोजन करें: पिताओं के सम्मान में इकट्ठे होकर पार्टी का आयोजन करें।
  3. उपहार दें: पिता की मनपसंद चीजें खरीदकर उन्हें उपहार में दें।
  4. ग्रीटिंग कार्ड: पिता के लिए ग्रीटिंग कार्ड बनाकर अपनी दिल की बात साझा करें।

इस तरह से आप इस फादर्स डे को बहुत ही खास बना सकते हैं। पिता के लिए जितना भी करें, हमेशा कम ही होगा। क्योंकि पिता जो अपने बच्चों के लिए करता है, उसका कोई मूल्य नहीं होता।

पिता के महत्व को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। फादर्स डे पिता के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करने का दिन है। यह दिन खास बनाने के लिए अपने पिता के साथ समय बिताएं, उन्हें खुश रखें और उनके प्रति अपने प्यार और सम्मान को व्यक्त करें। हर दिन पिता का सम्मान करें और उन्हें यह महसूस कराएं कि वे आपके जीवन में कितने महत्वपूर्ण हैं।

World Blood Donor Day 2024: Why is World Blood Donor Day Celebrated and What is its History and Importance?

क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस और क्या है इसका इतिहास और महत्व?

हमारी जिंदगी अनमोल है, हम किसी भी तरीके से अपने जीवन को नहीं खरीद सकते। लेकिन अगर कोई इंसान रक्त के अभाव में जिंदगी और मौत से लड़ रहा हो, तो हम रक्तदान कर उस इंसान की जिंदगी बचा सकते हैं। आज के समय में बहुत से लोग रक्त के अभाव में जिंदगी गवां कर चले जाते हैं। रक्तदान करना कोई शर्म की बात नहीं है और ना ही इससे इंसान को कोई शारीरिक नुकसान होता है। बल्कि रक्तदान करने से इंसान का नया रक्त बनता है और रक्तदान करने से कई छोटी-मोटी बीमारियां दूर हो जाती हैं।

इसीलिए हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को इसके महत्व और इसके उद्देश्य के बारे में जानकारी हो सके। आइए जानते हैं विश्व रक्तदाता दिवस 14 जून को ही क्यों मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है।

History of World Blood Donor Day

(विश्व रक्तदाता दिवस का इतिहास)

विश्व रक्तदाता दिवस की शुरुआत सन् 2005 में 58वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में हुई। विश्व रक्तदाता दिवस हर साल 14 जून को मनाया जाता है। यह दिन कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने A B O ब्लड ग्रुप की खोज कर स्वास्थ्य विज्ञान में अपना महान योगदान दिया, जिसके कारण उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तब से हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है।

Theme of World Blood Donor Day 2024

(विश्व रक्तदाता दिवस 2024 का विषय)

लोगों में रक्त की महत्वता को बताने के लिए विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। हर साल यह दिन एक विषय पर आधारित होता है। इस साल विश्व रक्तदाता दिवस का विषय है – “रक्तदान के 20 वर्ष पूरे होने पर रक्तदाताओं का धन्यवाद!”

इस साल यह 20वां रक्तदाता दिवस मनाया जा रहा है। लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने के लिए और इस दान का महत्व समझाने के लिए विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है।

Purpose and Importance of Celebrating World Blood Donor Day

(विश्व रक्तदाता दिवस मनाने का उद्देश्य और महत्व)

इंसान होने के नाते हमारा फर्ज है कि हम मानव हित में अपना योगदान दें। विश्व रक्तदाता दिवस मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को रक्तदान कर जिंदगी बचाने के लिए प्रेरित करना है। केवल रक्त के अभाव में ही बहुत सी जानें नहीं जातीं, बल्कि बहुत सी बीमारियों के कारण जब शरीर में रक्त की कमी हो जाती है, तब भी इंसान जीवन से हाथ धो बैठता है। इसलिए लोगों को जागरूक कर रक्तदान का महत्व बताना ही रक्तदाता दिवस का उद्देश्य है।

रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी या बीमारी पैदा नहीं होती, बल्कि रक्तदान से नया रक्त 24 से 48 घंटे में बन जाता है। रक्तदान करना महत्वपूर्ण है क्योंकि जीवन किसी भी कीमत पर खरीदा या बनाया नहीं जा सकता। अगर हमारे द्वारा किए गए रक्तदान से किसी की जिंदगी बच जाए, इससे बढ़कर कोई महान कार्य नहीं।

इसलिए रक्तदान करना महत्वपूर्ण है और बहुत से लोग इस महान कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं और नियमित रूप से रक्तदान करते हैं। बहुत सी कल्याणकारी संस्थाएं भी हैं जो रक्तदान शिविर लगा कर लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करती हैं, ताकि जरूरतमंद या बीमारी से पीड़ित रक्त की जरूरत वाले मरीजों का इलाज हो सके।

Why Should We Donate Blood?

(हमें रक्तदान क्यों करना चाहिए?)

हर इंसान कोई भी कार्य करने से पहले उसके फायदे के बारे में सोचता है। ऐसे ही बहुत से लोग सोचते हैं कि हम रक्तदान क्यों करें, हमें इससे क्या फायदा होगा। रक्तदान करने से किसी की जान तो बचेगी ही, साथ में रक्तदान करने वाले इंसान को भी इसका फायदा होता है।

आइए जानते हैं रक्तदान करने के फायदे:

  • दिल की बीमारी के खतरे में कमी: रक्तदान करने से रक्तदाता को दिल की बीमारी होने की संभावना 33% कम हो जाती है और दिल का दौरा पड़ने की संभावना 88% कम हो जाती है।
  • रक्तचाप में कमी: रक्तदान करने से रक्तचाप में कमी आ जाती है।
  • नया रक्त निर्माण: रक्तदान करने से नया रक्त बनता है, जिससे रक्त से संबंधित छोटी-मोटी बीमारी खत्म हो जाती है।
  • नकारात्मक सोच में कमी: रक्तदान करने से इंसान की नकारात्मक सोच कम हो जाती है।
  • तनाव में कमी: रक्तदान करने से इंसान का तनाव कम हो जाता है।

अतः रक्तदान करने से हमें बहुत से शारीरिक और मानसिक फायदे होते हैं। इसलिए नियमित रक्तदान जरूर करें। आइए हम इस कार्य में हिस्सा लेकर किसी की जिंदगी बचाने में अपना योगदान दें। हमारे द्वारा किया हुआ एक यूनिट रक्त 3 से 4 लोगों की जिंदगी बचाने में काम आता है। तो आइए किसी की जिंदगी बचाएं और रक्तदान कर मानवता का फर्ज निभाएं।

World Day Against Child Labor 2024

बढ़ती जनसंख्या के कारण गरीबी में वृद्धि हो रही है, जिससे बाल मजदूरी बढ़ रही है। छोटे-छोटे बच्चे इसका शिकार बन रहे हैं। जिस उम्र में बच्चों को खिलौनों से खेलना चाहिए, उस उम्र में उन्हें मजदूरी करनी पड़ती है, जिसके कारण उनके विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

World Day Against Child Labor: When and Why is it Celebrated?

(World Day Against Child Labour कब और क्यों मनाया जाता है)

आज बाल मजदूरी एक गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है, इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है। बाल श्रम के गंभीर मुद्दों पर लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 12 जून को विश्व स्तर पर विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। हमारे देश के हजारों बच्चे अपने परिवार की परिस्थितियों को सुधारने के लिए कारखानों, फैक्ट्रियों, खेतों आदि में मजदूरी करने को मजबूर होते हैं। इसके कारण उनका मानसिक और शारीरिक विकास रुक जाता है। इसलिए बाल श्रम को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा बाल श्रम निषेध दिवस मनाने की शुरुआत की गई।

History and Objective of World Day Against Child Labor

(World Day Against Child Labour Day का इतिहास और इसका उद्देश्य)

World Day Against Child Labour Day की शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा सन् 2002 में की गई। तब से हर साल 12 जून को इस दिन को पूरे विश्व स्तर पर मनाया जाता है। बाल श्रम निषेध के विरोध में, संगठन और व्यक्तिगत तौर पर मिलकर, लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस दिन को मनाया जाता है। बाल मजदूरी में फंसने के कारण बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास रुक जाता है। वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के कारण बाल मजदूरी जैसी गंभीर समस्या का शिकार बन जाते हैं। बच्चों को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठन मिलकर, लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस दिन को मानते हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन बाल मजदूरी को रोकने के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों में जागरूकता फैलाता है।

Theme of World Day Against Child Labour Day 2024

(World Day Against Child Labour Day 2024 का विषय)

हर साल विश्व बाल श्रम निषेध दिवस एक विशेष विषय पर आधारित होता है। इस बार बाल श्रम निषेध दिवस का मुख्य विषय है: “अपनी प्रतिबद्धताओं पर कार्य करें: बाल श्रम समाप्त करें!” अर्थात हमें मिलकर बाल श्रम जैसी समस्या से बच्चों को मुक्त करना है और इसके लिए आगे आकर बढ़-चढ़कर अपना योगदान देना है।

Main Causes of Child Labour

(बाल श्रम के मुख्य कारण)

विश्व में बढ़ती गरीबी और शिक्षा की कमी के कारण बाल श्रम जन्म लेता है। इसके कारण छोटे-छोटे बच्चों को पारिवारिक परिस्थितियों को सुधारने के लिए छोटी उम्र में कारखानों, फैक्ट्री आदि में काम करना पड़ता है। जब तक देश में गरीबी और अशिक्षा रहेगी, तब तक बाल श्रम का अंत होना असंभव है। आईए मिलकर बाल श्रम जैसी समस्या को खत्म करने में अपना योगदान दें और देश से इस समस्या को हमेशा के लिए समाप्त करें ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास हो सके।

What Can We Contribute to Stop Child Labour

(बाल श्रम को रोकने में हम अपना क्या योगदान दे सकते हैं)

बाल श्रम एक ऐसी समस्या है, जिस पर समय रहते रोक लगाना बहुत जरूरी है। अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया तो यह एक गंभीर रूप धारण कर सकती है, जो देश के भविष्य के लिए खतरा है। सबसे पहले जरूरी है कि संगठन गरीबी उन्मूलन अभियान चलाकर देश से गरीबी को किसी हद तक कम करें। दूसरा सबसे जरूरी है आज के समय में शिक्षित होना। अगर इंसान शिक्षित होगा तो वह रोजगार का कोई तरीका खोजकर भुखमरी और गरीबी से निकल सकता है। तो आइए हम खुद भी और दूसरों को भी इस बारे में जागरूक करें और बाल श्रम को रोकने में मदद करें।

World Bicycle Day 2024: रोजाना कुछ समय की साइकिलिंग से मिलेंगे अनेकों फायदे, आज ही शुरू करें साइकिलिंग

आज के समय में हर इंसान चाहता है कि वह स्वस्थ रहे और स्वस्थ वातावरण में निवास करें। एक समय था जब लोग हर तरह का सफर पैदल या फिर साइकिल पर सवार होकर तय किया करते थे, जिससे वातावरण स्वच्छ रहता था और इंसान स्वस्थ रहता था। लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के लिए और साइकिल की अहमियत समझाने के लिए विश्व बाइसाइकिल दिवस हर साल 3 जून को मनाया जाता है।

विश्व बाइसाइकिल दिवस का इतिहास (History Of World Bicycle Day)

साइकिल वह साधन है जिसे हर इंसान गिरते-पड़ते चलाना सीख ही जाता है। एक समय था जब साइकिल का ही दौर था, लेकिन यह दौर 1960 से 1990 तक ही कायम रहा। यह वो समय था जब साइकिल परिवार का मुख्य साधन होती थी। समय के बदलते दौर के साथ साइकिल की जगह मोटरसाइकिल और कार ने ले ली है। जब से इंसान साइकिल से दूर हुआ, तभी से उसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसलिए लोगों को साइकिल की महत्वता बताने के लिए और इससे होने वाले स्वास्थ्य संबंधी फायदे बताने के लिए हर साल बाइसाइकिल दिवस मनाया जाने लगा।

आईए जानते हैं विश्व बाइसिकल दिवस मनाने का महत्व, यह कब मनाया जाता है और इससे होने वाले स्वास्थ्य संबंधी फायदे।

World Bicycle Day कब और क्यों मनाया जाता है

पूरे विश्व स्तर पर विश्व बाइसिकल दिवस हर साल 3 जून को मनाया जाता है। यह दिन बाइसाइकिल के महत्व को जागरूक करने, पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। बाइसाइकिल का उपयोग फिजिकल एक्टिविटी के रूप में, पर्यावरण के लिए साथी के रूप में और यात्रा के लिए किया जाता है। इस दिन कई देशों में बाइसिकल यात्राओं, जागरूकता कार्यक्रमों और बाइसिकल से होने वाले फायदों से संबंधित आयोजनों का आयोजन होता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को बाइसाइकिल से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी फायदे के महत्व को समझाना और बाइसाइकिल के उपयोग को बढ़ाना है।

विश्व बाइसाइकिल दिवस की शुरुआत कब और क्यों हुई

जब लगा की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, तब लोगों में बाइसाइकिल से होने वाले फायदे बताने के उद्देश्य से विश्व बाइसाइकिल दिवस मनाया जाने लगा। इस दिन को मनाने की शुरुआत सन् 2018 में हुई। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अप्रैल 2018 में विश्व बाइसिकल दिवस मनाने का फैसला लिया गया। तब से हर साल 3 जून को विश्व स्तर पर विश्व बाइसाइकिल दिवस (World Bicycle Day) मनाया जाता है।

ऐसे मनाया जाएगा वर्ल्ड साइकिल डे (World Bicycle Day Celebration)

देश, धर्म व लिंग के भेदभाव से कोसों दूर पूरी दुनिया में विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है और इस दिन लोग साइकिल चलाने का मजा लेते हैं। आज के समय में साइकिल केवल यातायात का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह मानव जीवन में एक जरूरी एक्सरसाइज इक्विपमेंट का प्रतीक बन चुका है। इस दिन दुनिया भर में कई प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसमें साइकिल ट्रिप्स का आयोजन करना प्रमुख माना जाता है।

साइकिल चलाने के फायदे (Benefits Of Cycling)

साइकिल चलाने से हमारे वातावरण व इंसान दोनों को ही फायदा होता है। एक तरफ जहां साइकिल चलाने से प्रदूषण में कमी आती है, वहीं दूसरी तरफ इंसान की फिजिकल और मेंटल हेल्थ (Physical and Mental Health) भी बेहतर होती है। रोज़ाना आधा घंटा साइकिल चलाने से बॉडी की फिटनेस बढ़ती है और एक्स्ट्रा फैट से छुटकारा मिल जाता है। साइकिल सबसे सस्ता और पुरातन यात्रा का वह साधन है जिसके हमें बहुत से फायदे हैं।

  • बाइसाइकिल से पेट्रोल की बचत होती है, जो पर्यावरण संरक्षण में बहुत लाभकारी है।
  • साइकिल चलाने से पाचन संबंधी समस्याओं से निजात मिलती है। इंसान का पाचन तंत्र सही रहता है।
  • इसके अलावा साइकिल चलाने से घुटनों के दर्द आदि जैसी समस्याओं का इंसान को सामना नहीं करना पड़ता।
  • साइकिल एक ऐसा साधन है जिससे इंसान के पूरे शरीर की एक्सरसाइज हो जाती है।

Conclusion

आज की व्यस्त भरी जीवन शैली में बाइसाइकिल से नाता जोड़ कर रखें। जब भी आपको समय मिले, आप एक्सरसाइज के रूप में बाइसाइकिल जरूर इस्तेमाल करें ताकि आपको भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना ना करना पड़े।

Global Day Of Parents 2024: बच्चों के जीवन में जो स्थान उनके माता-पिता होता है, उसे कोई दूसरा व्यक्ति चाहते हुए भी नहीं ले सकता।

अभिभावकों यानी माता-पिता के प्रेम, त्याग, समर्पण व करुणा को समर्पित है वैश्विक माता-पिता दिवस यानी Global Day Of Parents। प्रत्येक वर्ष 1 जून के दिन ग्लोबल डे ऑफ पैरेंट्स के रूप में मनाया जाता है।

Importance

ग्लोबल डे ऑफ पैरेंट्स के महत्वपूर्ण होने के कई कारण हैं। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण, यह दिन माता-पिता के महत्व और अपने बच्चों के विकास को प्रभावित करने में माता-पिता की भूमिका के बारे में जागरूकता फैलाने का अवसर प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यह दिन अपने बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता की भागीदारी और उनके विकास के लिए एक सुरक्षित और पोषण करने वाले माहौल के रखरखाव को बढ़ावा देता है। तीसरा, ग्लोबल डे ऑफ पेरेंट्स माता-पिता की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका का सम्मान और स्मरण करने और उनकी उपलब्धियों को स्वीकार करने का अवसर प्रदान करता है।

History

आर्थिक और सामाजिक परिषद तथा सामाजिक विकास आयोग ने 1983 में महासचिव को परिवार से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद वैश्विक माता-पिता दिवस की शुरुआत हुई। 1994 में अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष की स्थापना की गई और 1980 के दशक में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारिवारिक मुद्दों पर जोर दिए जाने के परिणामस्वरूप प्रत्येक वर्ष 15 मई के दिन को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने 1 जून, 2012 को वैश्विक अभिभावक दिवस के रूप में घोषित किया। इसका पहला स्मरणोत्सव 2013 में हुआ, जो माता-पिता की भूमिका की वैश्विक मान्यता में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

Objective of Global Day of Parents

  • इस दिन को मनाने का उद्देश्य बच्चों के जीवन में माता-पिता के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकारना है।
  • बच्चों के जीवन में माता-पिता की भूमिका के बारे में जागरूकता फैलाना है।
  • माता-पिता के सुख को बढ़ावा देना है।

Theme of Global Day of Parents 2024

संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल ग्लोबल डे ऑफ पेरेंट्स के लिए एक विशेष थीम चुनी जाती है। इस बार की थीम है- ‘The Promise of Playful Parenting’ जोकि बच्चों व माता-पिता के बीच स्वस्थ रिश्ते को मज़बूत करने पर आधारित है।

How to celebrate Global Day Of Parents

  • इस Global Day Of Parents पर सभी बच्चे अपने माता-पिता के लिए समय अवश्य निकालें व उनके साथ बैठकर स्वस्थ बातचीत करें।
  • बच्चे माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह करें।
  • माता-पिता के साथ काम में हाथ बटाएँ।
  • बच्चे अपने माता-पिता को आज के दिन उपहार दिलाए।

इस तरह ग्लोबल डे ऑफ पैरेंट्स पर माता-पिता के साथ रिश्तों को करें बेहतर

बच्चों के जीवन में माता-पिता एक अहम हिस्सा होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगते हैं। अपनी जिंदगी में लीन हो जाते हैं। ऐसे में आमतौर पर बच्चों और माता-पिता (Parents) के बीच दूरियां आने लगती हैं। एक समय वो भी आता है जब बच्चे समझ नहीं पाते कि कब पैरेंट्स के साथ रिश्ते में दिक्कतें आईं और कैसे इन दिक्कतों को दूर किया जाए। इस ग्लोबल डे ऑफ पैरेंट्स पर जानिए किस तरह बच्चे अपने माता-पिता के साथ रिलेशनशिप को सुधार सकते हैं।

माता-पिता की सुने

पैरेंट्स के पास अपने भी ढेरों किस्से और बातें होती हैं जो वे अपने बच्चों से कहना चाहते हैं, उन्हें बताना चाहते हैं। लेकिन बहुत से बच्चे आज के समय में अपनी व्यस्त जीवनशैली के चलते माता-पिता की बात को सुनना तो दूर उनसे कुछ पल बैठकर बात करना भी पसंद नहीं करते। ऐसे में बच्चों को कोशिश करनी चाहिए कि वे थोड़ा समय अपने माता-पिता के लिए भी निकालें और उनसे बैठकर स्वस्थ बातचीत करें और उनकी बात सुनें।

अपने अहम को पीछे रखें

बढ़ती उम्र के बच्चों को दुनिया की बात चाहे कैसी लगे लेकिन अपने पैरेंट्स की कही बातें बुरी लगना शुरू हो जाती हैं। कई बार बच्चे अपने माता-पिता पर चिल्ला भी देते हैं और यह भी कह देते हैं कि आपने हमारे लिए किया ही क्या है। इसीलिए अपने अहम या अंहकार को पीछे रखें व पैरेंट्स ने आपके लिए जीवन में जो कुछ किया है, उसे भुलाएं ना।

पैरेंट्स के नज़रिए को समझें

अगर आप अपने माता-पिता की बात से सहमत नहीं होते हैं, तो भी उनके नज़रिए को समझना बहुत जरूरी होता है। पैरेंट्स की सलाह सुनना, उनके विचारों को सुनना और उनके अनुभव से सीखना बहुत जरूरी है। क्योंकि आज के समय में माता-पिता की बात को नकार देना या उनके नज़रिए को ना समझना रिश्तों में दरार पैदा करता है।

अपनी इच्छाओं को कम रखें

कई बार बच्चे माता-पिता को आम इंसान की तरह नहीं सिर्फ अपने पैरेंट्स की तरह देखते हैं और उनसे बहुत सी चीजों की इच्छा रखते हैं। बच्चों को यह लगता है कि माता-पिता को हमेशा बच्चों को ही देते रहना चाहिए, चाहे वह समय हो, पैसे हों या फिर अपने हिस्से की खुशियां हो। बच्चों को समझना चाहिए कि माता-पिता की अपनी भी एक ज़िंदगी है।

माता-पिता के प्रति प्यार जताना है जरूरी

सभी बच्चे अपने माता-पिता से और माता-पिता बच्चों से प्यार करते हैं। लेकिन जैसे ही बच्चे बड़े होते है, अपने माता-पिता से प्यार जताने में झिझकने लगते हैं। माता-पिता को अपना कुछ समय देकर, उनकी फिक्र करके उन्हें अपना प्यार जताया जा सकता है।

Conclusion

बच्चे के लिए उसके माता-पिता उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं। जो अपने बच्चे का पालन-पोषण अच्छे से अच्छे तरीक़े से करते है, बच्चों की देखभाल करते है, कोई मुसीबत आने से पहले ही सुरक्षा कवच बनकर अपने बच्चे की रक्षा करते है। ग्लोबल डे ऑफ पेरेंटस हमें अपने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके बलिदानों को याद करने का अवसर प्रदान करता है

Ranjeet Murder Case Special Report: डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम को मिली बड़ी राहत, पूर्व मैनेजर रंजीत हत्याकांड में हाईकोर्ट ने किया बरी

Haryana News

आपकी जानकारी के लिए बता दें, आज मंगलवार का दिन बाबा राम रहीम व उनके अनुयायियों के लिए राहत भरा साबित हुआ। आज के दिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने सीबीआई कोर्ट (CBI Court) के फैसले को रद्द कर दिया है। इस मामले में डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम सहित 5 दोषियों को बरी कर दिया गया है। आपको बता दें, वर्ष 2002 में यह हत्याकांड मामला शुरू हुआ था और बाद में इस मामले को CBI को सौंपा दिया गया था।

जानिए आख़िर क्या था पूरा मामला?

यह घटना 10 जुलाई 2002 को हुई थी। डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति के सदस्य रह चुके कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर रणजीत के बेटे जगसीर सिंह ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। उसके बाद मामला सीबीआई (CBI) को सौंपा गया था और अक्तूबर 2021 में डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम सहित पांच आरोपियों को दोषी करार दिया गया था।

लगभग 22 साल पुराना मामला

इस हत्याकांड मामले में साल 2007 में कोर्ट के द्वारा आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे। शुरूआत में इस मामले में डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम का नाम शामिल नहीं था, लेकिन साल 2003 में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। फिर 2006 में राम रहीम के ड्राइवर खट्टा सिंह के बयान के आधार पर डेरा प्रमुख राम रहीम को आरोपियों में शामिल किया गया।

डेरा चीफ़ बाबा राम रहीम को CBI Court ने सुनाई थी उम्र कैद की सजा

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को इस हत्याकांड में पंचकूला में स्पेशल सीबीआई अदालत ने 2021 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राम रहीम के अलावा चार लोगों को भी कोर्ट ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी। उन्हें ये सजा 10 जुलाई 2002 को कुरुक्षेत्र के खानपुर कोलियां में हुई रंजीत सिंह की गोली मारकर हत्या के मामले में सुनाई गई थी। वहीं डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने सीबीआई कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके तहत आज मंगलवार (28 मई 2024) को हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस ललित बत्रा की खंडपीठ ने उन्हें बरी कर दिया।

डेरा चीफ बाबा राम रहीम के वकील ने फैसले का किया स्वागत

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई कोर्ट के निर्णय को रद्द कर दिया। बाबा राम रहीम के वकील जतिंदर खुराना ने मीडिया से कहा, “…माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने CBI अदालत के आदेश को बदल दिया है और इसमें शामिल Baba Ram Rahim समेत पांच लोगों को बरी कर दिया है। वकील ने कहा, ‘हम इस फैसले का स्वागत करते हैं…।'”

सच की हुई जीत, रंजीत मर्डर केस में गुरमीत राम रहीम के खिलाफ केस खारिज

रंजीत सिंह मर्डर केस में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम के खिलाफ पंचकुला की सीबीआई अदालत द्वारा चलाए गए केस को खारिज कर दिया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने 4 अन्य व्यक्तियों को भी बरी कर दिया है।